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50 लाख+ होम लोन लेने वालों के पास सिर्फ 10% घर, लेकिन लोन में 38% हिस्सेदारी

भारत के हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर से जुड़ा एक अहम और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा का होम लोन लेने वाले खरीदारों के पास कुल घरों का सिर्फ करीब 10% हिस्सा है, लेकिन कुल होम लोन राशि में उनकी हिस्सेदारी 38% तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा न केवल रियल एस्टेट बाजार की बदलती तस्वीर दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि शहरी भारत में घर खरीदने की लागत किस तेजी से बढ़ी है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

ताजा विश्लेषण के मुताबिक, भारत में होम लोन लेने वालों में संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा वर्ग 10–50 लाख रुपये तक के लोन का है। यही वर्ग कुल लोन खातों का बड़ा हिस्सा रखता है। इसके उलट, 50 लाख+ लोन लेने वाले ग्राहक संख्या में कम हैं, लेकिन लोन की रकम का बड़ा भाग इन्हीं पर केंद्रित है

इसका सीधा अर्थ है कि—

ऐसा क्यों हो रहा है?

इसके पीछे कई वजहें हैं:

1. घरों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
बीते कुछ वर्षों में बड़े शहरों और टियर-1, टियर-2 शहरों में रियल एस्टेट कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 2-3 बीएचके फ्लैट की कीमतें कई जगह 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में खरीदारों को मजबूरी में 50 लाख से ऊपर का लोन लेना पड़ रहा है।

2. शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव
शहरों में नौकरी, बेहतर शिक्षा, हेल्थकेयर और लाइफस्टाइल की वजह से लोग मेट्रो और बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं। इससे मांग बढ़ी है और कीमतें भी।

3. होम लोन की आसान उपलब्धता
कम ब्याज दरों के दौर में बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने बड़े टिकट साइज के लोन को बढ़ावा दिया। अच्छी सैलरी प्रोफाइल वालों को 70–80% तक फंडिंग आसानी से मिल जाती है।

किस पर ज्यादा असर?

मिडिल क्लास और अपर-मिडिल क्लास पर इसका सबसे ज्यादा असर दिख रहा है।

इससे EMI का बोझ बढ़ रहा है और लोन चुकाने की अवधि भी 20–30 साल तक खिंच रही है।

राज्यों के हिसाब से तस्वीर

राज्य-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और स्पष्ट हो जाती है:

छोटे राज्यों और ग्रामीण इलाकों में अभी भी 10–30 लाख का लोन प्रमुख है।

बैंकों के लिए क्या मायने?

बैंकों के लिए यह स्थिति दोहरी है:

फायदे

चुनौतियां

क्या यह जोखिम भरा संकेत है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल यह स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय में कुछ खतरे हो सकते हैं:

अगर सैलरी ग्रोथ घर की कीमतों के साथ कदम नहीं मिला पाई, तो भविष्य में तनाव बढ़ सकता है।

पहली बार घर खरीदने वालों की मुश्किल

पहली बार घर खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी समस्या है डाउन पेमेंट

इसी वजह से कई युवा अब घर खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं या छोटे शहरों का रुख कर रहे हैं।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में राहत?

टियर-2 और टियर-3 शहरों में हालात कुछ बेहतर हैं।

इसी वजह से इन शहरों में रियल एस्टेट की मांग लगातार बढ़ रही है।

सरकार और रेगुलेटर की भूमिका

सरकार और रेगुलेटरी संस्थाएं इस ट्रेंड पर नजर रखे हुए हैं।

इन कदमों से मिडिल क्लास पर दबाव कम करने की कोशिश हो रही है।

आगे क्या?

आने वाले समय में कुछ बड़े बदलाव दिख सकते हैं:

अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं और आय में सुधार होता है, तो 50 लाख+ होम लोन का चलन बना रह सकता है।

50 लाख से ज्यादा होम लोन लेने वालों की संख्या कम है, लेकिन उनका असर पूरे हाउसिंग फाइनेंस सिस्टम पर बड़ा है। यह ट्रेंड शहरी भारत में बढ़ती संपत्ति कीमतों और बदलती जीवनशैली को दर्शाता है। चुनौती यह है कि घर खरीदना सिर्फ एक सपने तक सीमित न रह जाए, बल्कि मिडिल क्लास के लिए भी व्यवहारिक बना रहे।

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