2036 Olympics: भारत समेत 7 देश रेस में, अहमदाबाद पर दांव; 2029 में फैसला

भारत के लिए दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन की मेजबानी का सपना अब एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। 2036 ओलिंपिक और पैरालिंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत समेत 7 देशों की रुचि की पुष्टि इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी यानी IOC ने कर दी है। भारत की प्रस्तावित बोली का केंद्र अहमदाबाद है।

IOC के अनुसार फिलहाल भारत, जर्मनी, हंगरी, कतर, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये 2036 ओलिंपिक की मेजबानी में रुचि रखने वाले देशों की सूची में हैं। ये सभी IOC के साथ Continuous Dialogue में हैं। नवंबर में इन देशों को अपने Games projects IOC की Future Host Commission के सामने पेश करने का अवसर मिलेगा।

हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मुकाबला केवल इन्हीं 7 देशों के बीच सीमित हो गया है। IOC के अनुसार अन्य National Olympic Committees भी 2036 के अलावा भविष्य के ओलिंपिक के लिए बातचीत कर रहे हैं और 31 अक्टूबर 2026 तक नई रुचि दर्ज की जा सकती है। इसके बाद मार्च 2027 में IOC Executive Board संभावित उम्मीदवारों की shortlist तैयार करेगा।

भारत के लिए अगला बड़ा सवाल यही है—क्या अहमदाबाद की बोली IOC की शुरुआती shortlist में जगह बना पाएगी?

भारत की बोली का केंद्र अहमदाबाद क्यों है?

भारत ने 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के लिए अहमदाबाद को अपनी बोली का प्रमुख केंद्र बनाया है।

भारतीय ओलिंपिक संघ यानी IOA ने 1 अक्टूबर 2024 को IOC को Letter of Intent दिया था। इसके बाद भारत IOC की Future Host Commission के साथ Continuous Dialogue प्रक्रिया में आया। भारत सरकार ने संसद में भी इसकी पुष्टि की है।

अहमदाबाद को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहर और उसके आसपास पहले से कई बड़े खेल आयोजन और खेल सुविधाएं मौजूद हैं। शहर में Narendra Modi Stadium दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में से एक है।

भारत की योजना सिर्फ एक स्टेडियम में ओलिंपिक आयोजित करने की नहीं होगी। Olympic Games में दर्जनों खेलों के लिए अलग-अलग venues, athletes village, transportation, accommodation, security, broadcasting infrastructure और training facilities की जरूरत होती है।

इसलिए अहमदाबाद का नाम सामने आने के बावजूद असली मूल्यांकन पूरे proposed Games project का होगा।

2036 का ओलिंपिक भारत के लिए ऐतिहासिक क्यों होगा?

भारत ने अभी तक Summer Olympics की मेजबानी नहीं की है।

अगर भारत को 2036 Games की hosting मिलती है तो यह देश के लिए पहली Summer Olympics hosting होगी।

भारत पहले कई बड़े international sporting events आयोजित कर चुका है, लेकिन Olympics का scale उनसे काफी बड़ा है।

ओलिंपिक में दुनिया के लगभग हर हिस्से से खिलाड़ी आते हैं। हजारों athletes और officials कई सप्ताह तक host city और आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं।

इससे transport, hotels, airports, sports venues, healthcare, security और digital infrastructure पर बहुत बड़ा दबाव आता है।

यही वजह है कि IOC किसी देश के सिर्फ उत्साह या बड़े stadium देखकर hosting rights नहीं देता।

उसे यह देखना होता है कि पूरा Games operation समय पर, सुरक्षित और financially sustainable तरीके से किया जा सकता है या नहीं।

भारत की बोली अभी किस चरण में है?

भारत फिलहाल Continuous Dialogue चरण में है।

यह final bidding stage नहीं है।

IOC ने 2026 में host-selection process में बदलाव किया है। अब Continuous Dialogue के बाद एक नया Strategic Dialogue चरण होगा। इसके जरिए संभावित hosts की योजनाओं का ज्यादा विस्तार से मूल्यांकन किया जाएगा।

इसके बाद 2028 के दौरान Targeted Dialogue की दिशा में आगे बढ़ने वाले उम्मीदवारों का चयन होगा और अंततः 2029 में IOC सदस्य final host का चुनाव करेंगे।

भारत सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में बताया था कि भारत की बोली Continuous Dialogue में है और IOC द्वारा feasibility assessment किया जा रहा है। उसी जवाब में host election mid-2029 में होने की उम्मीद बताई गई थी।

यानी अभी भारत के सामने कई चरण बाकी हैं।

मार्च 2027 सबसे पहला बड़ा टेस्ट

भारत के लिए अगली बड़ी तारीख मार्च 2027 होगी।

IOC Executive Board संभावित bids की शुरुआती shortlist तैयार करेगा।

इस shortlist तक पहुंचने के लिए भारत को अपनी technical, financial और operational क्षमता साबित करनी होगी।

यही वह चरण होगा जहां यह ज्यादा स्पष्ट हो सकता है कि भारत की बोली वास्तव में 2036 की दौड़ में कितनी मजबूत है।

अगर भारत shortlist में आता है तो उसके बाद मूल्यांकन और ज्यादा गंभीर हो जाएगा।

IOC venues, funding, infrastructure, athlete experience, public support, political backing, legal guarantees और long-term legacy जैसे मुद्दों को देखेगा।

2029 में होगा अंतिम फैसला

अगर भारत अंतिम चरणों तक पहुंचता है तो उसे 2028 के Targeted Dialogue के दौरान अपनी विस्तृत योजना पेश करनी होगी।

इसके बाद IOC की Future Host Commission अपनी recommendation तैयार करेगी।

अंतिम चुनाव 2029 के मध्य में IOC Session में होने की उम्मीद है। IOC सदस्य मतदान के जरिए 2036 Games के host का चुनाव करेंगे।

इसका मतलब है कि अभी 2036 Olympics की मेजबानी मिलने में लगभग तीन साल का समय है।

इस दौरान भारत को अपनी बोली को लगातार मजबूत करना होगा।

रेस में भारत के साथ कौन-कौन से देश हैं?

1. भारत

भारत पहली बार Summer Olympics की मेजबानी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

अहमदाबाद इसकी proposed bid का केंद्र है।

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल population base, बड़ा sports audience, growing infrastructure और बड़े international events आयोजित करने का अनुभव हो सकता है।

लेकिन IOC के सामने भारत को governance, anti-doping और पिछले Olympic performance जैसे मुद्दों पर भी अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी।

भारत सरकार ने 2025 में संसद में बताया था कि IOC के Continuous Dialogue के दौरान governance, anti-doping measures और भारत के पिछले Olympic प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। सरकार ने sports governance reforms और athletes को बेहतर support देने की बात कही थी।

2. कतर

कतर की बोली भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Doha ने पहले ही बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की है। सबसे बड़ा उदाहरण 2022 FIFA World Cup है।

अगर कतर को Olympics मिलता है तो यह पहली बार होगा जब किसी Muslim-majority country में Summer Olympics आयोजित होंगे।

कतर ने Doha को अपने संभावित host city के रूप में आगे रखा है।

3. जर्मनी

जर्मनी की तरफ से Munich को 2036, 2040 या 2044 Summer Olympics के लिए candidate city चुना गया है।

Munich पहले 1972 Summer Olympics की मेजबानी कर चुका है।

इसका मतलब जर्मनी के पास Olympic आयोजन का ऐतिहासिक अनुभव और मौजूदा infrastructure का एक बड़ा आधार हो सकता है।

हालांकि जर्मनी में पिछले Olympic bids को public opposition का सामना भी करना पड़ा है, इसलिए public support एक महत्वपूर्ण factor रहेगा।

4. हंगरी

Hungary भी Olympic hosting की दौड़ में है।

Budapest लंबे समय से Olympics की मेजबानी में रुचि दिखाता रहा है।

देश ने पहले भी Summer Olympics की hosting की कोशिश की थी लेकिन सफल नहीं हुआ।

इस बार उसकी bid को भी IOC के technical और public-support criteria पर खरा उतरना होगा।

5. तुर्किये

Turkiye भी 2036 Olympics की मेजबानी चाहता है।

Istanbul पहले भी Olympic bids में शामिल रहा है लेकिन उसे hosting rights नहीं मिले।

अब एक बार फिर देश Olympic Games हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

Turkiye के पास बड़े stadiums, hotels और international sporting events का अनुभव है, लेकिन final evaluation में financial guarantees और overall Games plan महत्वपूर्ण होंगे।

6. दक्षिण अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका की bid का एक अलग महत्व है।

अगर दक्षिण अफ्रीका Olympics जीतता है तो यह अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली Summer Olympics होगी।

देश के पास 2010 FIFA World Cup जैसे बड़े global sporting event की मेजबानी का अनुभव है।

उसकी संभावित योजना में Cape Town, Johannesburg और Durban जैसे शहरों की भूमिका हो सकती है।

यह bid सिर्फ sports competition नहीं बल्कि Africa के लिए symbolic opportunity भी बन सकती है।

7. दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया भी मौजूदा सात interested parties में शामिल है।

देश पहले Summer और Winter दोनों Olympics की मेजबानी कर चुका है।

Seoul ने 1988 Summer Olympics की मेजबानी की थी, जबकि PyeongChang ने 2018 Winter Olympics आयोजित किए थे।

इसलिए South Korea के पास Olympic आयोजन का बड़ा अनुभव है।

भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या हो सकती है?

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका scale है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में है और यहां खेलों का विशाल दर्शक वर्ग है।

Cricket के अलावा athletics, shooting, wrestling, boxing, badminton, hockey और कई अन्य sports में भारत की भागीदारी बढ़ी है।

अगर भारत Olympics आयोजित करता है तो सरकार इसे sports infrastructure के विस्तार के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

नए stadiums, training centres, athlete villages, transport links और urban infrastructure को Games की जरूरत के अनुसार विकसित किया जा सकता है।

इसके बाद यही infrastructure आम जनता और भारतीय athletes के काम आ सकता है।

IOC भी host selection में long-term legacy को महत्व देता है। यानी Games खत्म होने के बाद शहर और देश को क्या फायदा मिलेगा, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

लेकिन भारत के सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं

भारत की bid के सामने सिर्फ दूसरे देशों की competition नहीं है।

उसे अपने देश के अंदर भी कई सवालों का जवाब देना होगा।

सबसे बड़ा सवाल होगा—क्या भारत इतनी बड़ी sporting event को समय पर और तय budget के भीतर आयोजित कर सकता है?

Olympics का खर्च बहुत बड़ा हो सकता है।

Venues बनाने, existing infrastructure upgrade करने, transport systems विकसित करने, security व्यवस्था करने और athletes के लिए accommodation तैयार करने में भारी निवेश की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा construction delays, cost overruns और post-Games stadium utilization जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।

इसलिए भारत को IOC के सामने सिर्फ बड़े stadium नहीं, बल्कि एक credible financial और operational plan पेश करना होगा।

Governance और anti-doping पर भी देना होगा जवाब

भारत सरकार ने खुद संसद में बताया था कि IOC के Continuous Dialogue के दौरान sports governance और anti-doping से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि Olympics में anti-doping standards बेहद कड़े होते हैं।

Host country को international anti-doping rules और testing standards पर भरोसा पैदा करना होता है।

इसी तरह sports federations की governance और transparency भी IOC के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

भारत को इन क्षेत्रों में सुधार दिखाने होंगे।

Athlete experience अब IOC के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा

IOC की अध्यक्ष Kirsty Coventry ने 2036 host selection process के संदर्भ में जोर दिया है कि जहां भी Games आयोजित हों, athletes को हर planning decision के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

इसका मतलब है कि सिर्फ spectators और tourists के लिए शानदार आयोजन काफी नहीं होगा।

Athletes village से लेकर competition venues तक transportation कितना आसान होगा?

Training facilities कैसी होंगी?

Competition schedule के दौरान खिलाड़ियों को आराम और recovery के लिए क्या सुविधाएं मिलेंगी?

Medical और anti-doping facilities कितनी मजबूत होंगी?

इन सभी सवालों के जवाब भारत की bid में देने होंगे।

अहमदाबाद को क्या फायदा हो सकता है?

अगर भारत की bid सफल होती है तो अहमदाबाद और गुजरात को बड़ा infrastructure boost मिल सकता है।

शहर में transport network, hotels, sports facilities और urban infrastructure के विकास को गति मिल सकती है।

International tourism भी बढ़ सकता है।

लेकिन अहमदाबाद के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि Olympics केवल एक शहर का आयोजन नहीं है।

कई sports के venues एक ही शहर में बनाए रखना महंगा और operationally कठिन हो सकता है।

इसलिए भारत की final bid में अहमदाबाद के साथ दूसरे शहरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

अभी IOC ने भारत के लिए हर खेल का अंतिम venue plan तय नहीं किया है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी venue list को official final plan मानना सही नहीं होगा।

क्या भारत को 2036 Olympics मिलना तय है?

नहीं।

भारत इस समय race में है, लेकिन hosting rights जीतना अभी बाकी है।

IOC ने सिर्फ यह पुष्टि की है कि भारत interested parties में शामिल है।

इसके बाद shortlist, strategic dialogue, targeted dialogue और final election जैसे चरण आएंगे।

इसलिए “भारत 2036 Olympics आयोजित करेगा” कहना अभी गलत होगा।

सही बात है:

“भारत 2036 Olympics की मेजबानी की दौड़ में है और अहमदाबाद प्रस्तावित केंद्र है।”

2028 और 2032 Olympics कहां होंगे?

2036 की मेजबानी को समझने के लिए अगले दो Olympics को भी देखना जरूरी है।

Los Angeles 2028 Summer Olympics की मेजबानी करेगा।

इसके बाद Brisbane 2032 Summer Olympics की मेजबानी करेगा।

2036 के लिए अभी host तय नहीं हुआ है।

इसलिए भारत को Olympics hosting मिलने पर यह लगभग एक दशक के अंतराल के बाद Asia में Summer Games की वापसी भी होगी, क्योंकि Tokyo 2020 के बाद 2028 और 2032 Games क्रमशः अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में होंगे।

हालांकि IOC का निर्णय केवल continental rotation पर आधारित नहीं होता। Technical capability, athlete experience, funding, public support और long-term legacy जैसे factors ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

अगर भारत जीता तो क्या होगा?

अगर भारत 2029 में hosting rights जीतता है तो उसके बाद करीब सात साल की तैयारी का समय होगा।

2036 Games तक venues और infrastructure तैयार करना होगा।

Athlete village बनाया जाएगा।

Transport और security व्यवस्था की final planning होगी।

International broadcasters और sponsors के साथ agreements होंगे।

भारत में Olympic qualification events और test competitions भी आयोजित हो सकते हैं।

साथ ही हजारों volunteers की जरूरत होगी।

इससे tourism, construction, hospitality, transport और sports-related sectors में economic activity बढ़ सकती है।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है—public money के इस्तेमाल, environmental impact और Games के बाद infrastructure के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी होगा।

क्या 2036 Olympics भारत के खेलों को बदल सकता है?

अगर आयोजन अच्छी planning के साथ होता है तो इसका असर केवल 16 दिनों के Games तक सीमित नहीं रहेगा।

भारत में grassroots sports को मजबूत किया जा सकता है।

ज्यादा बच्चों को athletics, swimming, gymnastics, wrestling, boxing, shooting और दूसरे sports में training मिल सकती है।

Sports science और high-performance centres बढ़ सकते हैं।

Coaches, physiotherapists, nutritionists और sports psychologists के लिए भी opportunities बढ़ सकती हैं।

भारत सरकार ने पहले भी कहा है कि Olympics जैसे बड़े sporting events sports participation, grassroots talent और youth engagement को बढ़ावा दे सकते हैं।

इसलिए भारत के लिए यह सिर्फ hosting का मामला नहीं बल्कि sports ecosystem को बदलने का अवसर भी हो सकता है।

अब भारत के लिए अगले पड़ाव क्या हैं?

2036 Olympics की race में भारत के लिए timeline को आसान भाषा में ऐसे समझिए:

अक्टूबर 2026:
वर्तमान में 7 interested countries की पुष्टि हो चुकी है। नए इच्छुक देशों के लिए 31 अक्टूबर तक मौका है।

नवंबर 2026:
Interested countries अपने Games projects Future Host Commission के सामने पेश करेंगे।

मार्च 2027:
IOC Executive Board शुरुआती shortlist तैयार करेगा।

2027-2028:
Shortlisted candidates की feasibility, venues, funding, guarantees, athlete experience और operational plans पर आगे मूल्यांकन होगा।

दिसंबर 2028 के आसपास:
Targeted Dialogue का चरण शुरू होने की योजना है।

मध्य 2029:
IOC Session में 2036 Olympics के host का अंतिम चुनाव होने की उम्मीद है।

भारत के 2036 Olympics hosting dream ने अब एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है।

IOC ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि भारत उन 7 देशों में शामिल है जो 2036 Summer Olympics की मेजबानी में रुचि रखते हैं।

भारत के अलावा जर्मनी, हंगरी, कतर, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये इस समय Continuous Dialogue में हैं।

भारत की proposed bid का केंद्र अहमदाबाद है।

लेकिन अभी बहुत लंबा रास्ता बाकी है।

अक्टूबर 2026 के बाद नवंबर में presentations होंगी। मार्च 2027 में shortlist बनेगी। 2027 और 2028 में technical और financial assessment होगा। फिर targeted dialogue के बाद 2029 में IOC सदस्य अंतिम फैसला करेंगे।

 


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