नागपुर में स्थित एक डेटोनेटर पैकिंग कंपनी में हुए भीषण धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस यूनिट में सुबह कामकाज के दौरान एक के बाद एक तीन विस्फोट हुए, जिनकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। धमाकों के बाद लगी आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 18 मजदूरों के जिंदा जलने की खबर सामने आई है, जबकि दो दर्जन से अधिक कर्मचारी झुलसने और घायल होने के कारण अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहला धमाका सुबह लगभग 6:40 बजे हुआ। उस समय शिफ्ट बदलने का समय था और करीब 40 से ज्यादा कर्मचारी यूनिट के अंदर मौजूद थे। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास की इमारतों के शीशे तक चटक गए। कुछ ही मिनटों में दूसरा और तीसरा धमाका हुआ, जिससे आग और भड़क उठी। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे।
नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित यह फैक्ट्री डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री की पैकिंग का काम करती थी। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस एरिया में विस्फोट हुआ, वहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ रखा था। सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
धमाकों की आवाज करीब 12 किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात कही जा रही है। आसपास के गांवों में लोगों ने तेज कंपन महसूस किया और कुछ घरों की दीवारों में दरारें आने की सूचना भी मिली। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
घायलों को नागपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर मजदूर 60 से 80 प्रतिशत तक झुलसे हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन ने मृतकों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, क्योंकि कई शव बुरी तरह जल चुके हैं।
फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई परिवारों के लिए यह हादसा जीवनभर का दर्द बन गया है। मजदूरों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि कंपनी में सुरक्षा उपकरणों की कमी थी और आपातकालीन निकास मार्ग भी पर्याप्त नहीं थे।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोट की असली वजह क्या थी। शुरुआती अनुमान है कि रासायनिक प्रतिक्रिया या स्टोरेज में लापरवाही के कारण आग लगी, जिसने बाद में विस्फोट का रूप ले लिया। हालांकि आधिकारिक पुष्टि रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोटक सामग्री से जुड़े कारखानों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन जरूरी है। नियमित ऑडिट, अग्नि सुरक्षा अभ्यास और कर्मचारियों का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए। यदि इन मानकों में जरा भी ढील दी जाती है, तो परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में फैक्ट्री विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई जानें गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कागजी जांच और औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ानी होगी।
स्थानीय प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और फॉरेंसिक टीम नमूने जुटा रही है। आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।
नागपुर की यह घटना पूरे देश के लिए चेतावनी है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ सुरक्षा मानकों को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मजदूरों की जान की कीमत पर कोई भी लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।
फिलहाल शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है। लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जो यह बताएंगे कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई।