ऑस्ट्रेलिया ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए अपनी 16 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा अनुभवी बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन को लेकर है, जिन्हें खराब फॉर्म के बावजूद टेस्ट टीम में बरकरार रखा गया है। हाल ही में उन्हें साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज की टीम से बाहर किया गया था, इसलिए माना जा रहा था कि टेस्ट टीम से भी उनकी छुट्टी हो सकती है। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं ने इस बार लाबुशेन पर भरोसा बनाए रखने का फैसला किया है।
टीम में युवा ऑलराउंडर कूपर कोनोली, बाएं हाथ के स्पिनर मैथ्यू कुहनेमन और अनुभवी ऑलराउंडर माइकल नेसर को शामिल किया गया है। वहीं बांग्लादेश के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में शामिल रहे ज्यादातर खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है। टीम की कप्तानी पैट कमिंस करेंगे। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच पहला टेस्ट 9 अक्टूबर से डरबन में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा टेस्ट गेकेबरहा और तीसरा टेस्ट केपटाउन में होगा।
लाबुशेन को मिली बड़ी राहत, खराब फॉर्म के बावजूद टीम में जगह
मार्नस लाबुशेन पिछले कुछ समय से अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। एक समय टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाने वाले लाबुशेन अब लगातार रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बांग्लादेश के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में भी उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। उन्होंने तीन पारियों में केवल 1, 31 और 4 रन बनाए। यानी पूरी सीरीज में उनके बल्ले से सिर्फ 36 रन निकले।
उनकी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि टेस्ट क्रिकेट में उनके शतक का इंतजार तीन साल से ज्यादा समय से चल रहा है। उनका पिछला टेस्ट शतक 2023 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में आया था, जब उन्होंने नाबाद 111 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। उसके बाद से लाबुशेन के प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखने को मिली है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक उस शतक के बाद से उन्होंने 43 टेस्ट पारियों में करीब 24.69 की औसत से रन बनाए हैं।
इसी खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम से बाहर कर दिया गया। चयनकर्ताओं ने वनडे टीम में भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा था कि क्या टेस्ट टीम में भी लाबुशेन की जगह खत्म हो गई है। लेकिन चयनकर्ताओं ने फिलहाल ऐसा नहीं किया है।
मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने लाबुशेन को लेकर साफ संकेत दिया कि उन्हें अब भी भरोसा है कि यह बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के लिए सकारात्मक योगदान दे सकता है। चयनकर्ताओं के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी थी कि लाबुशेन को हटाने के बाद नंबर-3 की जगह कौन संभालेगा। इसी वजह से टीम में उन्हें बनाए रखने का फैसला किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया ने लाबुशेन को क्यों नहीं हटाया?
लाबुशेन को टीम में बनाए रखने के पीछे केवल उनका पिछला रिकॉर्ड ही कारण नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट बल्लेबाजी में नंबर-3 की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और लाबुशेन लंबे समय से इसी स्थान पर खेलते आए हैं। 2019 की एशेज सीरीज के बाद से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के नंबर-3 बल्लेबाज के तौर पर अपनी जगह मजबूत की थी।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार लाबुशेन ने नंबर-3 पर 95 पारियों में बल्लेबाजी की है और उनके अलावा कैमरन ग्रीन ही ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने इस स्थान पर एक से ज्यादा टेस्ट पारियां खेली हैं। इसलिए अचानक उन्हें हटाने का मतलब टीम के पूरे टॉप ऑर्डर को दोबारा व्यवस्थित करना हो सकता है।
इसके अलावा लाबुशेन का जन्म साउथ अफ्रीका में हुआ है। भले ही टेस्ट स्तर पर वहां उनका रिकॉर्ड बहुत बड़ा न हो, लेकिन उनके करियर में साउथ अफ्रीका से जुड़ाव जरूर रहा है। वनडे क्रिकेट में उनके दोनों अंतरराष्ट्रीय शतक भी साउथ अफ्रीका में ही आए हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई टीम को उम्मीद होगी कि परिचित परिस्थितियों में लाबुशेन अपनी पुरानी लय हासिल कर सकते हैं।
हालांकि टीम में उनका चयन यह गारंटी नहीं देता कि वह हर टेस्ट में नंबर-3 पर ही बल्लेबाजी करेंगे। चयनकर्ताओं के पास अब कई विकल्प मौजूद हैं और परिस्थितियों के हिसाब से बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया जा सकता है।
कूपर कोनोली को फिर मिला टेस्ट टीम में मौका
ऑस्ट्रेलिया की टीम में सबसे दिलचस्प नाम 23 वर्षीय कूपर कोनोली का है। बाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑलराउंडर को लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के खिलाड़ियों में देखा जा रहा है। साउथ अफ्रीका दौरे के लिए उनका चयन इस बात का संकेत है कि चयनकर्ता अब धीरे-धीरे नई पीढ़ी को टेस्ट क्रिकेट में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
कोनोली इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं। उन्होंने श्रीलंका दौरे पर 2025 की शुरुआत में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। उस मुकाबले में उन्होंने नंबर-8 पर बल्लेबाजी की थी और स्पिन गेंदबाजी में भी टीम की मदद की थी। हालांकि हाल के महीनों में उनकी बल्लेबाजी ने उन्हें दोबारा सुर्खियों में ला दिया है।
बांग्लादेश के खिलाफ जून में खेले गए एक वनडे मुकाबले में कोनोली ने 149 रन की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद से उन्हें ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के बल्लेबाजी विकल्पों में देखा जाने लगा है। अब साउथ अफ्रीका दौरे पर उनके पास खुद को टेस्ट स्तर पर साबित करने का एक बड़ा मौका होगा।
उनका चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा बल्लेबाजी इकाई में कई अनुभवी खिलाड़ी हैं, लेकिन अगले कुछ वर्षों के लिए टीम को युवा विकल्पों की जरूरत होगी। कोनोली उस बदलाव की शुरुआत का हिस्सा बन सकते हैं।
हालांकि उनकी गेंदबाजी को लेकर भी एक दिलचस्प स्थिति है। पीठ की समस्या के कारण वह मार्च के बाद से गेंदबाजी में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं। चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने संकेत दिया है कि उन्हें धीरे-धीरे गेंदबाजी में वापस लाने की जरूरत होगी। आने वाली वनडे सीरीज उनके लिए इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
मैथ्यू कुहनेमन को टॉड मर्फी पर तरजीह
ऑस्ट्रेलिया ने स्पिन विभाग में भी महत्वपूर्ण फैसला किया है। नाथन लायन के बैकअप के तौर पर मैथ्यू कुहनेमन को टीम में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि टॉड मर्फी इस बार टेस्ट स्क्वॉड में जगह नहीं बना सके।
कुहनेमन बाएं हाथ के स्पिनर हैं और उनकी गेंदबाजी साउथ अफ्रीका की परिस्थितियों में ऑस्ट्रेलिया के लिए अलग विकल्प दे सकती है। आमतौर पर साउथ अफ्रीका को तेज गेंदबाजों के लिए मददगार परिस्थितियों वाला देश माना जाता है, लेकिन चयनकर्ताओं का मानना है कि दौरे के कुछ हिस्सों में पिचें उम्मीद से ज्यादा स्पिन ले सकती हैं।
विशेष रूप से गेकेबरहा का सेंट जॉर्ज पार्क मैदान ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए दिलचस्प हो सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कोविड के बाद से इस मैदान पर स्पिन गेंदबाजों ने तेज गेंदबाजों की तुलना में ज्यादा विकेट लिए हैं। इसलिए कुहनेमन और नाथन लायन को एक साथ खिलाने का विकल्प ऑस्ट्रेलिया के पास मौजूद रहेगा।
कुहनेमन के चयन से ऑस्ट्रेलिया को बाएं हाथ के स्पिन का विकल्प मिलता है, जबकि लायन टीम के अनुभवी ऑफ स्पिनर हैं। अगर पिच स्पिन के लिए अनुकूल होती है तो दोनों को एक साथ मैदान में उतारना ऑस्ट्रेलिया के लिए उपयोगी रणनीति हो सकती है।
माइकल नेसर की भी वापसी
ऑस्ट्रेलिया ने तेज गेंदबाजी विभाग में माइकल नेसर को भी शामिल किया है। नेसर हाल में चोट के कारण बांग्लादेश सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाए थे, लेकिन अब वह फिट होकर टीम में लौट आए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के पास पहले से ही पैट कमिंस, जोश हेजलवुड और मिशेल स्टार्क जैसे दुनिया के प्रमुख तेज गेंदबाज मौजूद हैं। इसके अलावा स्कॉट बोलैंड भी टीम में हैं। ऐसे में नेसर टीम को अतिरिक्त तेज गेंदबाजी विकल्प और ऑलराउंड क्षमता देते हैं।
नेसर का साउथ अफ्रीका से खास कनेक्शन भी है। उनका जन्म साउथ अफ्रीका में हुआ था। इसलिए उनके लिए यह दौरा व्यक्तिगत रूप से भी खास हो सकता है। अगर उन्हें टेस्ट खेलने का मौका मिलता है तो अपने जन्मस्थान पर ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट खेलना उनके करियर का यादगार पल बन सकता है।
पूरी 16 सदस्यीय ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम
साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया की 16 सदस्यीय टीम इस प्रकार है:
पैट कमिंस (कप्तान), स्कॉट बोलैंड, एलेक्स कैरी, कूपर कोनोली, कैमरन ग्रीन, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, जोश इंग्लिस, मैथ्यू कुहनेमन, मार्नस लाबुशेन, नाथन लायन, माइकल नेसर, मैथ्यू रेनशॉ, स्टीव स्मिथ, मिशेल स्टार्क और ब्यू वेबस्टर।
इस टीम को देखने पर साफ है कि ऑस्ट्रेलिया ने अनुभव और युवा विकल्पों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। टीम में कमिंस, स्टार्क, हेजलवुड, लायन और स्मिथ जैसे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्थापित खिलाड़ी हैं। दूसरी ओर कोनोली और कुहनेमन जैसे खिलाड़ियों को भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मैथ्यू रेनशॉ को भी बरकरार रखा गया
मैथ्यू रेनशॉ को भी टीम में बनाए रखा गया है। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में जेक वेदराल्ड की जगह टीम में प्रवेश किया था। हालांकि उनके पास खुद को पूरी तरह स्थापित करने का बड़ा मौका अभी बाकी है।
ऑस्ट्रेलिया की ओपनिंग व्यवस्था में भी परिस्थितियां दिलचस्प हैं। ट्रेविस हेड को जरूरत पड़ने पर अलग-अलग बल्लेबाजी स्थानों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं रेनशॉ को ओपनिंग विकल्प के रूप में रखा गया है।
इसका मतलब है कि चयनकर्ताओं के पास एक तय प्लेइंग-11 के बजाय परिस्थितियों और खिलाड़ियों की फॉर्म के हिसाब से संयोजन बदलने की गुंजाइश है।
क्या लाबुशेन की जगह खतरे में है?
लाबुशेन टीम में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी जगह पूरी तरह सुरक्षित है। उनकी खराब फॉर्म को देखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने नंबर-3 की स्थिति पर बड़ा सवाल रहेगा।
अगर लाबुशेन को प्लेइंग-11 में नहीं रखा जाता है तो ऑस्ट्रेलिया को अपने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना पड़ेगा। स्टीव स्मिथ को ऊपर भेजने का विकल्प हो सकता है, जबकि ट्रेविस हेड और कैमरन ग्रीन जैसे खिलाड़ी भी अलग-अलग क्रम पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। कूपर कोनोली भी इस स्थिति में एक विकल्प बन सकते हैं।
लेकिन अभी चयनकर्ताओं ने साफ संकेत दिया है कि वे लाबुशेन को तुरंत बाहर करने के बजाय उन्हें वापसी का मौका देना चाहते हैं। इसलिए पहला टेस्ट शुरू होने तक प्लेइंग-11 को लेकर चर्चा जारी रह सकती है।
साउथ अफ्रीका में होगी असली परीक्षा
ऑस्ट्रेलिया के लिए यह टेस्ट सीरीज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम लंबे अंतराल के बाद साउथ अफ्रीका का दौरा कर रही है। आखिरी बार दोनों टीमों के बीच ऑस्ट्रेलिया का साउथ अफ्रीका दौरा 2018 में हुआ था, जब केपटाउन टेस्ट में बॉल-टैंपरिंग विवाद ने क्रिकेट जगत को हिला दिया था।
उस दौरे की घटनाओं के बाद दोनों देशों की क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का एक अलग ही इतिहास बन गया। इस बार ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा टेस्ट स्क्वॉड में उस 2018 दौरे से जुड़े केवल कुछ खिलाड़ी ही बचे हैं। पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, स्टीव स्मिथ और मिशेल स्टार्क उन प्रमुख नामों में हैं जो उस दौरे से किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। मैथ्यू रेनशॉ भी उस समय के दौरे की टीम से जुड़े थे।
इसलिए यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए केवल एक सामान्य टेस्ट सीरीज नहीं माना जा रहा। टीम के सामने साउथ अफ्रीका की मजबूत तेज गेंदबाजी का सामना करने की चुनौती होगी।
कब और कहां होंगे तीनों टेस्ट?
ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के बीच तीन टेस्ट मैच खेले जाएंगे।
पहला टेस्ट 9 से 13 अक्टूबर 2026 तक डरबन के किंग्समीड स्टेडियम में होगा। इसके बाद दूसरा टेस्ट 18 से 22 अक्टूबर तक गेकेबरहा के सेंट जॉर्ज पार्क में खेला जाएगा। तीसरा और अंतिम टेस्ट 27 से 31 अक्टूबर तक केपटाउन के न्यूlands मैदान में होगा।
टेस्ट सीरीज से पहले दोनों देशों के बीच छह वनडे मुकाबले भी प्रस्तावित हैं। ऑस्ट्रेलिया पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन वनडे खेलेगा और उसके बाद साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन वनडे मुकाबले होंगे। इसके बाद टेस्ट टीम तीन मैचों की सीरीज के लिए तैयार होगी।
इस व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए चयनकर्ता खिलाड़ियों के वर्कलोड पर भी नजर रखेंगे। जॉर्ज बेली ने कहा है कि तीन टेस्ट मैचों की यह सीरीज काफी कम अंतराल में खेली जाएगी और इसलिए टीम में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विकल्प रखना जरूरी है।
साउथ अफ्रीका की पिचों पर स्पिन बनाम तेज गेंदबाजी
ऑस्ट्रेलिया की टीम को साउथ अफ्रीका में तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों का सामना करने की उम्मीद है। कमिंस, स्टार्क, हेजलवुड और बोलैंड जैसे गेंदबाजों की मौजूदगी ऑस्ट्रेलिया को काफी मजबूत बनाती है।
लेकिन चयनकर्ताओं ने स्पिन विभाग को नजरअंदाज नहीं किया है। नाथन लायन के साथ मैथ्यू कुहनेमन को रखना बताता है कि ऑस्ट्रेलिया अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी कर रहा है।
अगर पिचों पर उछाल और गति अधिक हुई तो ऑस्ट्रेलिया अपने चार तेज गेंदबाजों के साथ उतर सकता है। वहीं अगर किसी मैदान की सतह धीमी या सूखी हुई तो लायन और कुहनेमन की जोड़ी विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बना सकती है।
इसी वजह से 16 सदस्यीय टीम में कुहनेमन का चयन सिर्फ बैकअप के रूप में नहीं देखा जा रहा। वह सीरीज के किसी एक मुकाबले में प्लेइंग-11 का हिस्सा भी बन सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के लिए लाबुशेन की फॉर्म क्यों अहम है?
अगर लाबुशेन अपनी पुरानी फॉर्म में लौटते हैं तो ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी को काफी मजबूती मिल सकती है। वह पहले ही टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ी पारियां खेल चुके हैं और लंबे समय तक टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे हैं।
लेकिन अगर उनका खराब दौर साउथ अफ्रीका में भी जारी रहता है तो चयनकर्ताओं पर दबाव और बढ़ सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि टीम में कोनोली जैसे युवा खिलाड़ी मौजूद हैं, जो भविष्य में नंबर-3 या मिडिल ऑर्डर की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
लाबुशेन के लिए इसलिए यह सीरीज सिर्फ एक और विदेशी दौरा नहीं होगी। यह उनके टेस्ट करियर के अगले चरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें मौका दिया है, अब इस भरोसे को रन बनाकर सही साबित करने की जिम्मेदारी बल्लेबाज की होगी।
ऑस्ट्रेलिया ने अनुभव के साथ भविष्य पर भी दांव लगाया
इस 16 सदस्यीय टीम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें ऑस्ट्रेलिया ने एक साथ दो लक्ष्य साधने की कोशिश की है। एक तरफ टीम ने अपने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा कायम रखा है, वहीं दूसरी तरफ कूपर कोनोली और मैथ्यू कुहनेमन जैसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दिया है।
स्टीव स्मिथ, पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और नाथन लायन जैसे खिलाड़ियों के अनुभव से टीम को स्थिरता मिलेगी। वहीं कोनोली जैसे युवा खिलाड़ी भविष्य की ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम के लिए तैयार किए जा सकते हैं।
लाबुशेन को बरकरार रखने का फैसला फिलहाल चयनकर्ताओं के भरोसे की कहानी है। उनकी हालिया फॉर्म निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन साउथ अफ्रीका में उन्हें वापसी का एक बड़ा मौका मिलने जा रहा है। अगर वह इस सीरीज में बड़ी पारियां खेलने में सफल रहे तो उनके खिलाफ उठ रहे सवाल काफी हद तक शांत हो सकते हैं।
कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलिया की 16 सदस्यीय टीम में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन तीन नए/वापसी करने वाले चेहरों—कूपर कोनोली, मैथ्यू कुहनेमन और माइकल नेसर—ने टीम को नई दिशा जरूर दी है। अब सबसे ज्यादा नजरें मार्नस लाबुशेन पर रहेंगी कि वह इस भरोसे का जवाब बल्ले से कैसे देते हैं।
साउथ अफ्रीका में होने वाली तीन टेस्ट मैचों की यह सीरीज ऑस्ट्रेलिया के लिए विदेशी परिस्थितियों की बड़ी परीक्षा होगी। एक तरफ उसके पास दुनिया के अनुभवी तेज गेंदबाज हैं, दूसरी तरफ स्टीव स्मिथ और ट्रेविस हेड जैसे मैच बदलने वाले बल्लेबाज हैं। अगर लाबुशेन भी अपनी पुरानी लय हासिल कर लेते हैं और कोनोली जैसे युवा खिलाड़ी टीम में प्रभाव छोड़ते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया साउथ अफ्रीका में बेहद मजबूत नजर आ सकता है।
अब क्रिकेट फैंस की नजर 9 अक्टूबर से डरबन में शुरू होने वाले पहले टेस्ट पर होगी, जहां यह साफ होना शुरू होगा कि लाबुशेन चयनकर्ताओं के भरोसे पर खरे उतरते हैं या ऑस्ट्रेलिया को अपने टॉप ऑर्डर में बड़ा बदलाव करना पड़ता है।
हैरी ब्रूक बने दुनिया के नंबर-1 टेस्ट बल्लेबाज, शुभमन गिल आठवें स्थान पर; बुमराह नंबर-1 गेंदबाज
http://मार्नस लाबुशेन ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम में साउथ अफ्रीका सीरीज के लिए चयनित