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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का इस्तीफा, बोले- बीमारी के कारण कई बार हो जाता हूं बेहोश

बांग्लादेश में एक और बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की मुख्य वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। शहाबुद्दीन ने कहा कि वे हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाल की मेडिकल जांच में उन्हें Autonomic Neuropathy नाम की बीमारी का भी पता चला है, जिसके कारण वे कभी-कभी थोड़े समय के लिए बेहोश हो जाते हैं।

राष्ट्रपति का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति पहले से ही बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। शहाबुद्दीन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाते रहे हैं। हाल में स्थानीय मीडिया में दावा किया गया था कि मई में इलाज के लिए लंदन जाने के दौरान उनकी शेख हसीना से फोन पर बातचीत हुई थी। हालांकि शहाबुद्दीन ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया था और इसे निराधार बताया था।

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी BSS के मुताबिक शहाबुद्दीन ने अपना इस्तीफा संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। इसे स्थानीय समयानुसार शाम 5:01 बजे स्वीकार किया गया। राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत पद छोड़ने का फैसला किया। वे 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति बने थे और उनका पांच साल का कार्यकाल 2028 तक चलना था।

अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य की स्थिति को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे हैं और उनकी बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है। अब Autonomic Neuropathy की समस्या सामने आने के बाद उनकी स्थिति और मुश्किल हो गई है।

Autonomic Neuropathy ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की अनैच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली नसें प्रभावित हो सकती हैं। इससे ब्लड प्रेशर, हृदय गति और दूसरी शारीरिक प्रक्रियाओं में समस्या हो सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति की बीमारी की गंभीरता और उसके प्रभाव का आकलन केवल उसके डॉक्टर ही कर सकते हैं।

शहाबुद्दीन ने अपने पत्र में कहा कि इन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक तरह से निभाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत है और इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

यह इस्तीफा केवल स्वास्थ्य कारणों की वजह से चर्चा में नहीं है। इसके पीछे बांग्लादेश में पिछले दो वर्षों में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों की लंबी कहानी भी जुड़ी है।

शहाबुद्दीन को 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के समर्थन से राष्ट्रपति चुना गया था। उस समय संसद में अवामी लीग की मजबूत स्थिति थी और शहाबुद्दीन को हसीना के विश्वसनीय राजनीतिक सहयोगियों में गिना जाता था।

लेकिन 2024 में बांग्लादेश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। छात्र-नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई और वे देश छोड़कर भारत चली गईं। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। फरवरी 2026 के चुनाव के बाद बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था सामने आई।

इस पूरे बदलाव के दौरान शहाबुद्दीन राष्ट्रपति पद पर बने रहे। हालांकि हसीना के साथ उनके पुराने राजनीतिक संबंधों के कारण उनके खिलाफ भी विरोध की आवाजें उठती रहीं।

अब इस्तीफे से ठीक पहले एक और विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया था। बांग्लादेशी मीडिया में रिपोर्ट आई कि शहाबुद्दीन ने मई 2026 में लंदन यात्रा के दौरान शेख हसीना से फोन पर बात की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति 9 मई को इलाज के लिए लंदन गए थे और 18 मई को वापस लौटे। कुछ सूत्रों ने दावा किया कि इसी दौरान हसीना से उनकी बातचीत हुई और बाद में खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी मिली।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है—इस कथित फोन कॉल की स्वतंत्र रूप से सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। शहाबुद्दीन ने खुद इसे साफ तौर पर नकार दिया था।

जब पत्रकारों ने उनसे इस कथित बातचीत के बारे में पूछा तो उन्होंने आरोपों को “baseless” यानी निराधार बताया। इसलिए इसे स्थापित तथ्य की बजाय मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया दावा ही माना जाना चाहिए।

यही कारण है कि यह कहना सही नहीं होगा कि “शेख हसीना से बातचीत लीक हुई”। ज्यादा सटीक बात यह है कि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई थी और इसकी जानकारी अधिकारियों तक पहुंची। राष्ट्रपति ने इस दावे का खंडन किया।

द डेली स्टार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सत्तारूढ़ BNP के शीर्ष नेतृत्व की ओर से शहाबुद्दीन को पद छोड़ने का संदेश दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि यह पहल कथित फोन कॉल की खबरों के बाद हुई। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार फोन कॉल अकेला कारण नहीं था और राजनीतिक स्थिति इससे अधिक जटिल थी।

इससे राष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य के साथ राजनीतिक दबाव की अटकलें भी तेज हो गईं। लेकिन आधिकारिक इस्तीफा पत्र में शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य को ही कारण बताया है। इसलिए किसी राजनीतिक दबाव को इस्तीफे का सिद्ध कारण नहीं माना जा सकता।

इस्तीफे से सिर्फ एक दिन पहले तक स्थिति साफ नहीं थी। 23 जुलाई को जब पत्रकारों ने राष्ट्रपति से संभावित इस्तीफे के बारे में पूछा था तो उन्होंने सवाल को असहज करने वाला बताया था। वहीं गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि सरकार को राष्ट्रपति के इस्तीफे के किसी फैसले की जानकारी नहीं है।

इसके अगले ही दिन शहाबुद्दीन ने औपचारिक रूप से पद छोड़ दिया।

राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि अब बांग्लादेश का राष्ट्राध्यक्ष कौन होगा। देश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक नए राष्ट्रपति के चुने जाने और पदभार ग्रहण करने तक संसद के स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारियां निभाएंगे। इसी व्यवस्था के तहत स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली है।

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक है। सरकार की वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास रहती हैं। हालांकि राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष और सशस्त्र बलों के संवैधानिक कमांडर-इन-चीफ होते हैं, इसलिए राजनीतिक संकट या सत्ता परिवर्तन के दौरान इस पद का महत्व बढ़ जाता है।

शहाबुद्दीन के कार्यकाल में ऐसा ही हुआ। वे अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति बने थे, लेकिन लगभग डेढ़ साल बाद ही देश ने अपने हालिया इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक बदलावों में से एक देखा।

2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की 15 साल लंबी सत्ता समाप्त हुई। हसीना के देश छोड़ने के बाद भी राष्ट्रपति पद पर उनके पुराने सहयोगी शहाबुद्दीन बने रहे। इस कारण कई राजनीतिक और छात्र समूहों ने उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाए थे।

हसीना की अवामी लीग भी इस समय बांग्लादेश में बेहद कठिन राजनीतिक परिस्थिति में है। Reuters के मुताबिक पार्टी पर प्रतिबंध है और उसके कई नेता या तो जेल में हैं या सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से दूर हैं। ऐसे में शहाबुद्दीन का राष्ट्रपति पद छोड़ना हसीना के पुराने राजनीतिक नेटवर्क के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फरवरी 2026 के चुनावों ने बांग्लादेश की राजनीतिक तस्वीर और बदल दी। AP के मुताबिक चुनाव में तारिक रहमान की सरकार को बड़ी जीत मिली। इससे पहले मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार करीब 18 महीने तक सत्ता में रही थी।

नई सरकार बनने के बाद शहाबुद्दीन का पद पर बने रहना लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहा। वे एक ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें पिछली सरकार के दौरान चुना गया था, जबकि संसद और सरकार की राजनीतिक संरचना पूरी तरह बदल चुकी थी।

इसके बावजूद नए राष्ट्रपति के चुनाव तक संवैधानिक निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से स्पीकर को अंतरिम रूप से राष्ट्रपति की जिम्मेदारी मिलना संविधान में पहले से तय व्यवस्था का हिस्सा है।

अब बांग्लादेश की संसद को नया राष्ट्रपति चुनना होगा। नया राष्ट्रपति कौन होगा और उसके नाम पर सत्तारूढ़ गठबंधन किस तरह सहमति बनाता है, यह आने वाले दिनों में देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा हो सकता है।

शहाबुद्दीन की बीमारी भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू है। 76 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि उन्हें हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी संबंधी परेशानियां हैं। उनकी बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है। इसके बाद Autonomic Neuropathy का पता लगना और कुछ मौकों पर बेहोश हो जाना उनके मुताबिक पद छोड़ने की प्रमुख वजह बना।

राजनीतिक पदों पर बैठे नेताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी अक्सर सार्वजनिक चर्चा का विषय बनती है, लेकिन इस मामले में खुद राष्ट्रपति ने अपने इस्तीफा पत्र में बीमारियों का उल्लेख किया है। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उनकी आधिकारिक घोषणा का हिस्सा है।

इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषण में यह सवाल बना रहेगा कि यदि कथित हसीना फोन कॉल को लेकर विवाद नहीं होता तो क्या वे इसी समय इस्तीफा देते। इसका निश्चित उत्तर उपलब्ध नहीं है।

स्थानीय मीडिया के सूत्र राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करते हैं, जबकि राष्ट्रपति का आधिकारिक पत्र स्वास्थ्य समस्याओं को कारण बताता है। जिम्मेदार रिपोर्टिंग में दोनों बातों को अलग-अलग रखना जरूरी है।

शेख हसीना से कथित बातचीत का मुद्दा भी इसी सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने बातचीत होने से साफ इनकार किया था। इसलिए किसी कथित कॉल का ऑडियो या प्रमाण सामने आने तक इसे प्रमाणित बातचीत नहीं कहा जा सकता।

बांग्लादेश की राजनीति में आने वाले महीने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एक ओर नई सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे पर आगे बढ़ रही है, दूसरी ओर 2024 के आंदोलन के बाद पैदा हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलाव अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं।

शहाबुद्दीन के जाने से देश को नया राष्ट्रपति चुनना होगा। यह चुनाव केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं रहेगा, बल्कि इससे यह भी संकेत मिलेगा कि नई राजनीतिक व्यवस्था अपने प्रमुख संवैधानिक पदों पर किस तरह के नेताओं को आगे लाना चाहती है।

भारत के लिए भी बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की लंबी सीमा है और व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, नदी जल तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई मुद्दों पर सहयोग होता है। शेख हसीना के भारत में रहने के कारण दोनों देशों के रिश्तों में राजनीतिक संवेदनशीलता का एक अतिरिक्त पहलू भी जुड़ गया है।

फिलहाल सबसे स्पष्ट तथ्य यही है कि मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया और स्वास्थ्य समस्याओं को इसका आधिकारिक कारण बताया। उनकी जगह संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

वहीं शेख हसीना से कथित बातचीत का विवाद उनके इस्तीफे से पहले राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा जरूर बना, लेकिन शहाबुद्दीन ने इसे पूरी तरह खारिज किया था। इसलिए आने वाले समय में यदि इस संबंध में कोई आधिकारिक जांच, दस्तावेज या प्रमाण सामने आता है, तभी इस दावे की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

इस इस्तीफे के साथ शहाबुद्दीन का पांच साल का कार्यकाल करीब दो वर्ष पहले ही समाप्त हो गया। 2023 में शेख हसीना की सरकार के दौर में राष्ट्रपति बने शहाबुद्दीन ने 2024 की सत्ता उथल-पुथल, अंतरिम सरकार और 2026 में नई निर्वाचित सरकार—तीनों राजनीतिक चरण देखे। अब बांग्लादेश की राजनीति में नया सवाल यही है कि देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा और नई सरकार इस संवैधानिक बदलाव को किस तरह आगे बढ़ाती है।

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http://Mohammed Shahabuddin, Bangladesh President,

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