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BRICS Summit 2026: मोदी-जिनपिंग-पुतिन की फैमिली फोटो, टेक्नोलॉजी-मिनरल्स पर PM का बड़ा संदेश

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit का दूसरा दिन भारत की कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक मंच पर नजर आए, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, critical minerals और supply chains को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। BRICS के फैमिली फोटो सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नजर आए। तीनों नेताओं की तस्वीर ने सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक काफी ध्यान खींचा। फोटो में मोदी, जिनपिंग और पुतिन एक साथ खड़े दिखाई दिए और तीनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने का दृश्य भी सामने आया।

यह तस्वीर इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारत, चीन और रूस तीनों BRICS के प्रमुख सदस्य हैं, लेकिन इन तीनों देशों के बीच रिश्तों की अपनी अलग जटिलताएं हैं। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी है, जबकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे मौजूद हैं। इसके बावजूद BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर तीनों देशों का एक साथ आना यह दिखाता है कि वैश्विक राजनीति में अलग-अलग मतभेदों के बावजूद आर्थिक और विकास संबंधी सहयोग के लिए संवाद जारी रखना जरूरी माना जा रहा है। Reuters की तस्वीरों में भी मोदी, जिनपिंग और पुतिन को 12 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit के दौरान फैमिली फोटो में साथ देखा गया।

BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन 11 से 13 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया। भारत इस साल BRICS का अध्यक्ष है और सम्मेलन की प्राथमिकताओं में resilience, innovation, cooperation और sustainability को प्रमुख स्थान दिया गया। सम्मेलन में पुराने सदस्य देशों के साथ BRICS के विस्तारित स्वरूप के नेता भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता को “people-centric” और “humanity-first” दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि संगठन को आम लोगों की समस्याओं और विकास की जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।

फैमिली फोटो की बात करें तो यह केवल एक सामान्य फोटो सेशन नहीं था। BRICS जैसे मंचों पर नेताओं की तस्वीरें अक्सर कूटनीतिक संदेश भी देती हैं। इस बार मोदी का जिनपिंग और पुतिन के बीच खड़ा होना भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। Indian Express ने इसे summit के प्रमुख क्षणों में शामिल किया और बताया कि तीनों नेताओं का हाथ पकड़कर साथ खड़ा होना BRICS के भीतर सहयोग और एकता का प्रतीकात्मक दृश्य रहा।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई थी। शी जिनपिंग करीब सात साल के अंतराल के बाद दिल्ली पहुंचे थे और BRICS Summit में भाग लिया। उनकी भारत यात्रा ऐसे समय हुई जब भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बावजूद दोनों पक्ष बातचीत और स्थिरता की कोशिश कर रहे हैं। BRICS के मंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि यह बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने का अवसर भी बनी।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलग द्विपक्षीय मुलाकात भी हुई। 11 सितंबर को BRICS Summit से पहले दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में बातचीत की। Reuters के मुताबिक बातचीत में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, यूक्रेन और West Asia में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल रहे। भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी चर्चा की।

लेकिन BRICS Summit के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का सबसे बड़ा संदेश तकनीक और critical minerals को लेकर आया। मोदी ने चेतावनी दी कि अगर technology और critical minerals को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो इसका असर सिर्फ किसी एक देश पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया की shared progress पर पड़ सकता है। उन्होंने BRICS देशों से अधिक resilient supply chains तैयार करने और technology तक inclusive access सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

प्रधानमंत्री के इस बयान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में technology और minerals दोनों रणनीतिक ताकत बन चुके हैं। आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल फोन, semiconductors, renewable energy systems, batteries, advanced defence equipment और artificial intelligence infrastructure जैसी कई technologies के लिए अलग-अलग critical minerals और advanced components की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि किसी देश के पास किसी महत्वपूर्ण mineral या technology supply chain पर बहुत ज्यादा नियंत्रण है, तो उसका इस्तेमाल आर्थिक या geopolitical pressure के लिए किया जा सकता है।

Critical minerals में rare earth elements, lithium, cobalt, nickel, graphite और अन्य महत्वपूर्ण खनिज शामिल हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल clean energy, electronics, defence और advanced manufacturing में होता है। इसलिए इनकी supply को लेकर दुनिया के देशों के बीच competition बढ़ रहा है। BRICS Summit में मोदी ने इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए कहा कि critical resources को किसी देश के “selfish gain” या दूसरे देशों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री की इस सोच का उल्लेख भारत के BRICS संबंधी पहले के आधिकारिक वक्तव्यों में भी मिलता है, जहां critical minerals और technology की secure और reliable supply chains पर जोर दिया गया है।

इसका सीधा संबंध चीन से भी जोड़ा जा रहा है, क्योंकि चीन rare-earth supply chain में दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में से एक है। International Energy Agency के आंकड़ों का हवाला देते हुए Economic Times ने बताया कि 2024 में China ने mined magnet rare earths के global production में करीब 60% और refined output में करीब 91% हिस्सा रखा था। Sintered permanent magnets के production में भी चीन की हिस्सेदारी करीब 94% बताई गई।

ऐसे में मोदी का critical minerals को weaponise न करने का संदेश उस समय आया जब दुनिया supply-chain security को लेकर पहले से चिंतित है। किसी एक देश या क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भरता होने पर geopolitical tension, trade restrictions, sanctions या export controls की स्थिति में पूरी manufacturing chain प्रभावित हो सकती है। भारत का जोर इसलिए diversification, reliable supply और विभिन्न देशों के बीच cooperation पर रहा है।

प्रधानमंत्री ने केवल critical minerals की बात नहीं की, बल्कि technology तक inclusive access की जरूरत पर भी जोर दिया। आज artificial intelligence, semiconductors, cloud computing, robotics और advanced digital infrastructure आर्थिक विकास के प्रमुख drivers बन रहे हैं। यदि इन technologies तक पहुंच केवल कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित रहती है, तो developing economies के लिए digital और economic gap बढ़ सकता है।

मोदी ने BRICS देशों से technology को साझा विकास का माध्यम बनाने की अपील की। उनके भाषण में resilience यानी संकटों का सामना करने की क्षमता पर भी जोर रहा। पिछले कुछ वर्षों में pandemic, geopolitical conflicts, climate disasters और supply-chain disruptions ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र में संकट का असर दूसरे महाद्वीपों तक पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री ने इसी वजह से BRICS को केवल राजनीतिक मंच के बजाय practical solutions का platform बनाने की दिशा में जोर दिया।

BRICS Summit में supply chains को लेकर भी एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। भारत ने BRICS Logistics Supply Chain Cooperation Framework को आगे बढ़ाने की बात कही, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच logistics और supply chains को ज्यादा reliable और resilient बनाना है। इससे व्यापार के दौरान किसी एक route या supplier पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है।

इस framework का महत्व उस समय और बढ़ जाता है जब वैश्विक shipping routes कई geopolitical conflicts से प्रभावित हो रहे हैं। West Asia में तनाव, समुद्री मार्गों पर खतरे और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर international trade पर पड़ रहा है। भारत जैसे बड़े import-export economy के लिए reliable logistics network जरूरी है। इसलिए BRICS देशों के बीच supply-chain cooperation भविष्य में व्यापार लागत और disruptions को कम करने में भूमिका निभा सकता है।

BRICS Summit में technology और startups पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Startup Innovation Fund और Incubator Network जैसी पहलों का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य अलग-अलग सदस्य देशों के startups, entrepreneurs और incubators को आपस में जोड़ना है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो भारतीय startups को BRICS के दूसरे बाजारों और innovation ecosystems तक पहुंच मिल सकती है।

इसी तरह Digital Agriculture Network का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। इसमें AI, geospatial technology और digital public infrastructure जैसी तकनीकों का उपयोग कृषि क्षेत्र में करने की संभावना है। भारत के लिए यह पहल खास महत्व रखती है क्योंकि देश की बड़ी आबादी अभी भी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। मौसम, मिट्टी, फसल स्वास्थ्य, बाजार कीमत और irrigation जैसी जानकारी को digital systems से जोड़कर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के सहयोग को wider Global South तक पहुंचाने की बात भी कही। उनका तर्क रहा कि दुनिया की बड़ी चुनौतियों का समाधान कुछ चुनिंदा देशों के बीच नहीं बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से होना चाहिए। BRICS अब अपने मूल पांच देशों से काफी बड़ा समूह बन चुका है और इसमें नए सदस्य तथा partner countries शामिल हुए हैं। इससे संगठन की आर्थिक और राजनीतिक पहुंच बढ़ी है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक expanded BRICS अब दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले 11-member bloc के रूप में सामने आया है।

इस विस्तारित BRICS की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसमें शामिल देशों के हित हमेशा एक जैसे नहीं हैं। भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, रूस और पश्चिमी देशों के बीच गंभीर तनाव है, जबकि BRICS के कुछ सदस्य Middle East की अलग-अलग geopolitical परिस्थितियों से जुड़े हैं। इसके बावजूद summit में joint declaration पर सहमति बनना यह दिखाता है कि कुछ आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर साझा जमीन तैयार की जा सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी उठाई। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार और Global South को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। BRICS मंच से मोदी ने global governance को अधिक inclusive बनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार developing countries को केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं होना चाहिए, बल्कि नियम बनाने की प्रक्रिया में भी उनकी प्रभावी भागीदारी होनी चाहिए।

इस summit में आर्थिक सहयोग का एक और बड़ा मुद्दा local currencies और cross-border payment systems रहा। BRICS देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ज्यादा efficient बनाने के लिए payment systems और financial cooperation मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि BRICS ने किसी एक नई common currency को तुरंत लागू करने का फैसला कर लिया है। वास्तविक focus फिलहाल payment connectivity, local-currency settlements और financial infrastructure पर अधिक दिखाई देता है।

फैमिली फोटो में मोदी के बीच में होने को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राजनीतिक और कूटनीतिक व्याख्याएं भी सामने आ रही हैं। लेकिन केवल फोटो की positioning से किसी देश की विदेश नीति या किसी नेता के साथ संबंधों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। ऐसे फोटो आमतौर पर protocol, leaders की संख्या और event arrangement के अनुसार लिए जाते हैं। फिर भी तीनों नेताओं का एक साथ दिखाई देना राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक जरूर है और यही वजह है कि तस्वीर को व्यापक ध्यान मिला।

भारत के नजरिए से BRICS Summit का महत्व सिर्फ मोदी-जिनपिंग-पुतिन की तस्वीर तक सीमित नहीं है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान technology, supply chains, startups, agriculture, health, climate और Global South cooperation जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी। इससे भारत यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि BRICS को केवल Western powers के विकल्प के रूप में नहीं बल्कि practical development cooperation के मंच के रूप में देखा जाना चाहिए।

चीन की तरफ से भी BRICS को और मजबूत करने का प्रस्ताव सामने आया। Reuters के मुताबिक शी जिनपिंग ने AI, trade, finance और politics में “Greater BRICS” cooperation पर जोर दिया। चीन ने BRICS AI Open Source Zone और 2027 में Service Trade Forum जैसे initiatives का प्रस्ताव रखा। इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में technology BRICS cooperation का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रही है।

यही वह बिंदु है जहां मोदी का technology weaponisation वाला संदेश और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत एक तरफ AI और advanced technology में सहयोग चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ technology supply chains को strategic pressure के साधन में बदलने से बचने की बात कर रहा है। यानी भारत का approach technology cooperation और strategic autonomy के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

Critical minerals पर भी भारत का रुख इसी दिशा में है। भारत अपनी manufacturing और clean-energy ambitions के लिए lithium, rare earths और अन्य minerals की reliable supply चाहता है। Electric vehicles, batteries, renewable energy और semiconductor ecosystem को बढ़ाने के लिए mineral security जरूरी है। इसलिए भारत के लिए diversified supply chains केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं बल्कि domestic economic growth का भी हिस्सा हैं।

अगर critical minerals की supply में अचानक बाधा आती है तो EV batteries से लेकर defence equipment तक कई sectors प्रभावित हो सकते हैं। इसी तरह advanced semiconductor technology की supply बाधित होने पर electronics और high-tech manufacturing पर असर पड़ सकता है। इसलिए मोदी का संदेश केवल राजनीतिक भाषण नहीं बल्कि आने वाले दशक की industrial strategy से भी जुड़ा हुआ है।

BRICS Summit के दौरान India ने health cooperation पर भी जोर दिया। Global health emergencies के लिए early warning system बनाने की घोषणा हुई, ताकि infectious diseases से जुड़े खतरों की पहचान और response को बेहतर किया जा सके। AP के अनुसार मोदी ने summit में infectious diseases के लिए early warning system बनाने की पहल की घोषणा की।

इस तरह 2026 का BRICS Summit कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रहा। एक तरफ मोदी, जिनपिंग और पुतिन की फैमिली फोटो ने दुनिया का ध्यान खींचा, तो दूसरी तरफ भारत ने technology और critical minerals को weaponise करने के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया। भारत की कोशिश यह दिखाने की रही कि geopolitical competition के बीच भी development और economic cooperation को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का मूल विचार यही था कि technology, minerals और supply chains किसी एक देश के strategic हथियार नहीं बनने चाहिए। इनका उपयोग दुनिया के विकास को आगे बढ़ाने के लिए होना चाहिए। अगर critical resources और advanced technologies को राजनीतिक दबाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका नुकसान केवल target country को नहीं बल्कि पूरी global economy को हो सकता है।

BRICS के सामने अब असली चुनौती summit के घोषणापत्र और भाषणों को ground-level cooperation में बदलने की होगी। Supply-chain framework, startup fund, digital agriculture network, health early warning system और technology cooperation जैसी योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब इनके लिए स्पष्ट funding, institutions, timelines और measurable outcomes तैयार होंगे।

कुल मिलाकर, दिल्ली में हुए BRICS Summit ने भारत को एक साथ कई महत्वपूर्ण संदेश देने का अवसर दिया। फैमिली फोटो में प्रधानमंत्री मोदी का शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच नजर आना एक बड़ा diplomatic visual रहा, लेकिन summit की substantive story इससे कहीं आगे है। भारत ने technology और critical minerals के weaponisation के खिलाफ आवाज उठाई, resilient supply chains की जरूरत बताई, startups और AI cooperation को आगे बढ़ाने की कोशिश की और Global South को वैश्विक decision-making में अधिक भूमिका देने पर जोर दिया।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि BRICS देश इन घोषणाओं को किस तरह लागू करते हैं। अगर technology sharing, critical minerals की diversified supply और logistics cooperation वास्तव में आगे बढ़ता है, तो इसका असर भारत समेत कई developing economies पर पड़ सकता है। लेकिन इसके लिए सदस्य देशों के बीच भरोसा, पारदर्शिता और practical cooperation जरूरी होगा। दिल्ली में हुई तस्वीरें और भाषण इतिहास का हिस्सा बन गए हैं; आने वाले वर्षों में इन घोषणाओं का वास्तविक परिणाम ही BRICS की सफलता का असली पैमाना तय करेगा।

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http://BRICS Summit 2026 में नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन फैमिली फोटो में

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