चीन की रियल एस्टेट इंडस्ट्री से जुड़ी दुनिया की सबसे चर्चित कंपनियों में शामिल China Evergrande Group के संकट ने अब एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। चीन की एक अदालत ने Evergrande की मुख्य घरेलू रियल एस्टेट इकाई Hengda Real Estate Group के खिलाफ दायर दिवालिया परिसमापन याचिका को स्वीकार कर लिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन हुई का यान (Hui Ka Yan), जिन्हें Xu Jiayin के नाम से भी जाना जाता है, को एक दिन पहले वित्तीय अपराधों के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
Evergrande कभी चीन की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे ज्यादा कर्ज वाली रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल थी। कंपनी ने तेजी से विस्तार करने के लिए भारी कर्ज लिया, हजारों आवासीय प्रोजेक्ट शुरू किए और चीन के रियल एस्टेट बूम का बड़ा फायदा उठाया। लेकिन कर्ज का बोझ बढ़ता गया और 2021 में कंपनी ने अपने अधिकांश दायित्वों पर डिफॉल्ट कर दिया। इसके बाद जो संकट शुरू हुआ, उसने केवल Evergrande को ही नहीं बल्कि चीन के पूरे प्रॉपर्टी सेक्टर को प्रभावित किया। Reuters के अनुसार कंपनी की देनदारियां करीब 300 अरब डॉलर तक पहुंच गई थीं। भारतीय मुद्रा में यह रकम विनिमय दर के हिसाब से लगभग ₹28 लाख करोड़ के आसपास बैठती है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ताजा अदालत का फैसला पूरे China Evergrande Group के बारे में सामान्य अर्थों में “दिवालिया घोषित” किए जाने का फैसला नहीं है। Guangzhou Intermediate People’s Court ने Evergrande की mainland property development unit Hengda Real Estate Group के खिलाफ bankruptcy liquidation application स्वीकार की है। याचिका Guangzhou Rural Commercial Bank की Huaxia शाखा ने दाखिल की थी। बैंक का कहना था कि Hengda अपने देय कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है और उसकी संपत्तियां कुल देनदारियों को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
यह कदम Evergrande की लंबी चल रही insolvency और liquidation प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अदालत ने आवेदन की समीक्षा के बाद पाया कि वह चीन के Enterprise Bankruptcy Law के तहत स्वीकार किए जाने की शर्तें पूरी करता है। इसके बाद bankruptcy liquidation case स्वीकार कर लिया गया। इसका मतलब यह है कि अब संबंधित संपत्तियों और देनदारियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत व्यवस्थित करने, संपत्ति बेचने और उपलब्ध रकम से creditors के दावों को निपटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
Evergrande की कहानी चीन के तेज आर्थिक विकास और उसके बाद आए रियल एस्टेट संकट को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी की शुरुआत 1996 में हुई थी और इसके संस्थापक Hui Ka Yan ने इसे छोटे स्तर के कारोबार से एक विशाल property empire में बदल दिया। कंपनी ने चीन के तेजी से urbanize होते शहरों में बड़े पैमाने पर housing projects विकसित किए। वर्षों तक बढ़ती property prices, आसान financing और लगातार नए घरों की मांग ने Evergrande के कारोबार को तेजी से बढ़ाया।
कंपनी का मॉडल काफी हद तक कर्ज और तेजी से बिक्री पर आधारित था। जमीन खरीदने, निर्माण शुरू करने और नए प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए कंपनी को लगातार capital की जरूरत होती थी। जब तक property market तेजी से बढ़ता रहा, यह मॉडल चलता रहा। लेकिन जैसे-जैसे चीन में regulators ने developers के अत्यधिक borrowing पर लगाम लगानी शुरू की, Evergrande के लिए नया कर्ज जुटाना मुश्किल होता गया।
2020 के आसपास चीन ने property developers के excessive leverage को कम करने के लिए कड़े regulatory measures शुरू किए। इन कदमों का उद्देश्य कंपनियों के भारी कर्ज और financial risks को नियंत्रित करना था। लेकिन Evergrande जैसी कंपनियां पहले ही बहुत बड़े debt burden के साथ काम कर रही थीं। नए financing channels सीमित होने के बाद कंपनी के लिए पुराने कर्ज और नए construction commitments संभालना मुश्किल होता गया।
2021 में Evergrande के default ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। उस समय कंपनी को दुनिया की सबसे ज्यादा कर्ज वाली property developer के रूप में देखा जा रहा था। इसका संकट केवल shareholders या lenders तक सीमित नहीं था। हजारों homebuyers ने ऐसे apartments के लिए पैसे दिए थे जिनका construction पूरा होना बाकी था। Suppliers, contractors, employees, banks और bondholders भी कंपनी के financial crisis से प्रभावित हुए।
यही वजह है कि Evergrande का collapse चीन के housing market के लिए बड़ा झटका बन गया। जब buyers का confidence कमजोर हुआ और property sales गिरने लगीं, तो दूसरे developers पर भी दबाव बढ़ा। चीन में housing sector का अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान होने के कारण इसका असर construction, steel, cement, household consumption और local government finances तक पहुंचा।
अब इसी कहानी के बीच Hui Ka Yan की उम्रकैद की सजा सामने आई है। Shenzhen Intermediate People’s Court ने 20 अगस्त 2026 को उन्हें कई financial और corporate crimes में दोषी ठहराया। Reuters के अनुसार Hui ने अप्रैल में आठ आरोपों में दोष स्वीकार किया था, जिनमें funds का गलत इस्तेमाल, fundraising fraud और illegally taking public deposits जैसे आरोप शामिल थे।
अदालत ने Hui की सभी व्यक्तिगत संपत्तियां जब्त करने का भी आदेश दिया है। इसके अलावा उन्हें जीवनभर राजनीतिक अधिकारों से वंचित करने की बात भी सामने आई है। Evergrande Group और उसकी property arm पर भी कुल मिलाकर 15.82 अरब yuan यानी करीब 2.35 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है।
यह फैसला Hui Ka Yan की कहानी में बेहद बड़ा उलटफेर है। कुछ साल पहले तक वह चीन के सबसे प्रभावशाली और अमीर business tycoons में गिने जाते थे। 2017 में उनकी अनुमानित संपत्ति करीब 45.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी और वह एशिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल थे। Evergrande की growth के साथ उनका नाम चीन के real estate boom का प्रतीक बन गया था।
लेकिन कंपनी के पतन के साथ उनकी व्यक्तिगत संपत्ति और प्रतिष्ठा दोनों बुरी तरह प्रभावित हुईं। Evergrande का share price गिरा, कंपनी default में गई और बाद में Hong Kong stock exchange से delist भी कर दी गई। अब company liquidation और founder की life imprisonment ने इस लंबे corporate downfall को एक नए चरण में पहुंचा दिया है।
अदालत के मुताबिक Evergrande Group, Evergrande Real Estate और Hui ने 2016 से 2021 के बीच बड़े पैमाने पर financial fraud किया। आरोपों में assets को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और liabilities को छिपाना शामिल था। चीन की अदालत ने Hui को funds के गलत इस्तेमाल और अन्य financial crimes के लिए भी दोषी ठहराया।
Evergrande पर लगे आरोपों में securities fraud और corporate bribery जैसे मामले भी शामिल रहे। कंपनी की financial reporting को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठे थे। अदालत की कार्यवाही ने यह भी सामने रखा कि company की वास्तविक financial स्थिति को लंबे समय तक छिपाने की कोशिश की गई थी। इससे investors और creditors के लिए कंपनी की स्थिति का सही आकलन करना मुश्किल हुआ।
Evergrande के auditors को लेकर भी विवाद हुआ। PwC, जो कंपनी के audit से जुड़ी थी, पर चीन और Hong Kong के regulators ने कार्रवाई और जुर्माने लगाए। Evergrande के liquidators ने PwC के खिलाफ अरबों डॉलर का claim भी किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल है कि Evergrande के creditors को उनका पैसा कितना वापस मिलेगा?
यह आसान नहीं होगा। कंपनी की संपत्तियों का बड़ा हिस्सा चीन के property projects, unfinished developments और अन्य investments में बंधा हुआ है। कई assets को बेचने में समय लग सकता है और उनकी market value उस समय की तुलना में काफी कम हो सकती है जब उन्हें खरीदा गया था।
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक Evergrande के creditors पहले से जानते हैं कि liquidation में उन्हें अपने दावों का केवल एक छोटा हिस्सा वापस मिलने की संभावना है। Liquidators Hui की दुनिया भर में मौजूद संपत्तियों को भी recover करने की कोशिश कर रहे हैं।
यानी अदालत का bankruptcy process स्वीकार करना यह नहीं बताता कि creditors को तुरंत उनका पैसा मिल जाएगा। Liquidation प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। पहले assets की पहचान, valuation और ownership की जांच होगी। इसके बाद creditors के claims verify किए जाएंगे और उपलब्ध assets को बेचकर रकम जुटाई जाएगी।
यहां homebuyers का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। Evergrande के collapse के दौरान चीन के कई हिस्सों में ऐसे housing projects सामने आए जिनका construction अधूरा रह गया था। खरीदारों ने पहले ही payment कर दी थी, लेकिन apartments समय पर तैयार नहीं हुए। इससे property market में public confidence को भारी नुकसान हुआ।
चीन सरकार ने कई जगह “unfinished homes” को पूरा कराने और housing delivery को प्राथमिकता देने की कोशिश की है। लेकिन Evergrande जैसे विशाल developer की समस्या का समाधान आसान नहीं है क्योंकि कंपनी पर creditors के दावे, construction obligations और financial liabilities एक साथ मौजूद हैं।
इस संकट का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। Property sector में slowdown ने consumer confidence को प्रभावित किया और लोगों की सबसे बड़ी संपत्ति—घर—की कीमतों पर दबाव बढ़ा। AP के अनुसार 2021 के बाद चीन में home prices में 20% से ज्यादा गिरावट आई है, हालांकि अलग-अलग शहरों और property categories में स्थिति अलग रही है।
Evergrande का collapse यह सवाल भी उठाता है कि किसी देश की economy में real estate sector कितना बड़ा systemic risk बन सकता है। जब एक बड़ी company भारी कर्ज लेकर लगातार expansion करती है, तो उसके collapse का असर केवल company owners पर नहीं पड़ता। Banks, investors, suppliers, workers और consumers सभी प्रभावित हो सकते हैं।
भारत के लिए भी यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि China दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी economy है और उसकी economic slowdown का असर global commodity demand और trade पर पड़ सकता है। China construction sector में steel, cement और अन्य commodities की बड़ी मांग रहती है। Property investment में कमजोरी से इन sectors की demand प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा China की financial stability global markets के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर property sector में संकट बढ़ता है तो Chinese banks, shadow banking institutions और investors पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि Chinese authorities ने पिछले वर्षों में crisis को नियंत्रित करने के लिए कई policy measures लिए हैं।
Evergrande का मामला अब केवल एक कंपनी की कहानी नहीं रह गया है। यह चीन के उस growth model की कहानी बन गया है जिसमें property development, borrowing और लगातार rising demand ने वर्षों तक आर्थिक growth को support किया। जब property market की गति धीमी हुई और borrowing constraints बढ़े, तो model की कमजोरियां सामने आने लगीं।
Hui Ka Yan की कहानी इसी transformation का सबसे बड़ा उदाहरण है। वह एक ऐसे businessman से, जिसने चीन के real estate boom में अरबों डॉलर की कंपनी बनाई, अब life imprisonment की सजा पाने वाले corporate figure बन चुके हैं। उनके personal assets confiscate किए जा चुके हैं और उनकी कंपनी liquidation process में जा चुकी है।
यह मामला चीन सरकार के लिए भी एक बड़ा संदेश है। Beijing पिछले कुछ वर्षों में financial risk, excessive debt और corporate misconduct पर ज्यादा सख्त रुख अपनाता दिखा है। Evergrande के founder को मिली उम्रकैद की सजा यह संकेत देती है कि बड़े private entrepreneurs भी financial misconduct के आरोपों से बच नहीं सकते।
हालांकि केवल सजा देने से property crisis खत्म नहीं होगा। असली चुनौती यह है कि creditors, homebuyers और investors के हितों को कैसे संतुलित किया जाए और housing market में confidence कैसे वापस लाया जाए।
Evergrande की liquidation process में अलग-अलग jurisdictions भी बड़ी चुनौती हैं। कंपनी के assets केवल mainland China तक सीमित नहीं हैं। Hong Kong और दूसरे देशों में भी assets और legal claims मौजूद हैं। अलग-अलग legal systems के कारण asset recovery और creditor settlements में लंबा समय लग सकता है।
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है कि Evergrande के पास मौजूद assets की वास्तविक value क्या है। Property market में गिरावट के कारण कई properties की कीमतें पुराने valuation से नीचे आ सकती हैं। ऐसे में company की balance sheet पर दिखने वाली assets की value और liquidation में मिलने वाली वास्तविक रकम में बड़ा अंतर हो सकता है।
इसी कारण creditors को अपने कुल दावे की तुलना में कम रकम मिलने की आशंका है।
Evergrande की कहानी से investors के लिए भी एक बड़ा सबक निकलता है। किसी भी कंपनी का size और brand name उसकी financial strength की गारंटी नहीं होता। अगर business लगातार भारी borrowing पर निर्भर है और cash flow कमजोर हो जाता है तो बड़ी से बड़ी कंपनी भी संकट में आ सकती है।
Real estate sector में यह जोखिम और ज्यादा होता है क्योंकि projects को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं और financing लगातार उपलब्ध रहना जरूरी होता है।
कंपनी के तेज expansion के दौरान Evergrande ने property के अलावा electric vehicles, healthcare, tourism और sports जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया था। लेकिन core real estate business में financial pressure बढ़ने के बाद इन ventures को भी संकट का सामना करना पड़ा।
आज स्थिति यह है कि Evergrande का नाम चीन के सबसे बड़े corporate collapses में लिया जाता है। एक समय जिस company की sales सैकड़ों अरब yuan तक पहुंच गई थीं, वही company अब liquidation और asset recovery की प्रक्रिया से गुजर रही है। Reuters के अनुसार 2020 में Evergrande की annual sales करीब 700 अरब yuan तक पहुंची थीं।
अब अदालत का ताजा फैसला इस लंबे संकट को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कानूनी कदम है। Guangzhou court द्वारा Hengda Real Estate की bankruptcy liquidation application स्वीकार किए जाने से creditors और liquidators को mainland China में assets और liabilities को कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटाने का रास्ता मिलेगा।
लेकिन liquidation का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के सारे assets तुरंत बेच दिए जाएंगे या सभी creditors को पैसा वापस मिल जाएगा। यह प्रक्रिया कई साल तक चल सकती है और इसमें legal disputes, asset valuation और ownership claims जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
सबसे ज्यादा नजर अब इस बात पर रहेगी कि liquidators कितनी संपत्ति recover कर पाते हैं और creditors को कितनी रकम वापस मिलती है। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अधूरे housing projects का क्या होता है और उन घरों को खरीदने वाले लोगों के हितों की रक्षा किस तरह की जाती है।
Hui Ka Yan को मिली उम्रकैद इस कहानी का दूसरा बड़ा अध्याय है। चीन की अदालत ने उनके खिलाफ गंभीर financial crimes को साबित माना और सभी personal assets confiscate करने का आदेश दिया। Evergrande और उसकी property arm पर भी भारी जुर्माना लगाया गया है।
कुल मिलाकर, Evergrande का संकट चीन के रियल एस्टेट सेक्टर के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। करीब 300 अरब डॉलर की देनदारियों के बोझ ने कंपनी को 2021 के default से लेकर liquidation तक पहुंचा दिया। अब उसकी mainland property unit के खिलाफ bankruptcy liquidation case अदालत ने स्वीकार कर लिया है और founder Hui Ka Yan को life imprisonment की सजा मिल चुकी है।
यह कहानी यह भी बताती है कि तेज growth, बड़े कर्ज और बढ़ती property prices का combination लंबे समय तक तभी चल सकता है जब cash flow और financing मजबूत रहें। जैसे ही financing बंद होती है और property demand कमजोर होती है, debt-driven business model का संकट तेजी से सामने आ सकता है।
Evergrande के मामले में अब कंपनी के पुराने दौर की वापसी की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है। आने वाला समय liquidation, asset recovery, creditors के claims और unfinished housing projects को पूरा करने पर केंद्रित रहेगा।
और सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि करीब ₹28 लाख करोड़ के कर्ज के इस पहाड़ से आखिर कितना पैसा वापस निकाला जा सकेगा और कितने homebuyers तथा creditors को वास्तविक राहत मिल पाएगी।
इस मामले में चीन की सरकार, अदालतों, liquidators और creditors की अगली कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि Evergrande की liquidation केवल एक कंपनी की संपत्ति बेचने की प्रक्रिया नहीं है—यह चीन के लंबे real estate crisis के एक बड़े अध्याय का समापन भी है।