भारत में क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने बेंगलुरु में क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म CoinDCX और Delta Exchange से जुड़े तीन ठिकानों पर 4 और 5 नवंबर 2026 को तलाशी ली। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA के कथित उल्लंघन और हजारों करोड़ रुपये के अनधिकृत सीमा-पार लेनदेन की जांच के तहत की गई।
ED का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म से जुड़े कारोबार में भारतीय ग्राहकों के रुपये को USDT जैसी स्टेबलकॉइन में बदलकर विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों तक पहुंचाया जा रहा था। एजेंसी के मुताबिक, इन विदेशी प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग तथा विदेशी कंपनियों के शेयरों से जुड़े टोकनाइज्ड प्रोडक्ट्स के सौदे किए जा रहे थे।
जांच में CoinDCX चलाने वाली कंपनी Neblio Technologies Private Limited और Delta Exchange India का संचालन करने वाली Excelium Technologies Private Limited का नाम सामने आया है। ED का कहना है कि इन कंपनियों के उत्पादों और लेनदेन की व्यवस्था में FEMA के अलावा कुछ अन्य वित्तीय कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ED ने अभी आरोपों की जांच शुरू की है। तलाशी या जांच अपने आप में किसी कंपनी या उसके संचालकों को दोषी साबित नहीं करती। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
बेंगलुरु में तीन ठिकानों पर हुई ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 4 और 5 नवंबर को तीन परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई FEMA, 1999 की धारा 37 के तहत की गई। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि भारतीय क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी एक्सचेंजों पर किस तरह के लेनदेन किए जा रहे थे और उनमें भारतीय विदेशी मुद्रा नियमों का पालन हुआ या नहीं।
ED ने बताया कि उसे Neblio Technologies Private Limited और Excelium Technologies Private Limited से जुड़े कारोबार में बड़े पैमाने पर कथित FEMA उल्लंघन की जानकारी मिली थी। इसके बाद शुरुआती पूछताछ और खुफिया जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
Neblio Technologies भारत में CoinDCX प्लेटफॉर्म का संचालन करती है। वहीं Excelium Technologies Private Limited Delta Exchange India से जुड़ी कंपनी है। एजेंसी इन कंपनियों के क्रिप्टो ट्रेडिंग उत्पादों, विदेशी खातों और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की प्रक्रिया की जांच कर रही है।
तलाशी के दौरान एजेंसी ने कारोबार के दस्तावेजों, तकनीकी व्यवस्था और विदेशी प्लेटफॉर्म से जुड़े लेनदेन की जानकारी की पड़ताल की। जांच का एक अहम हिस्सा यह समझना है कि ग्राहकों के भारतीय रुपये से शुरू होने वाले सौदे विदेशी एक्सचेंजों तक कैसे पहुंच रहे थे।
ED के अनुसार, इस तरह के सीमा-पार लेनदेन की मात्रा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक सभी सौदों का एक निश्चित कुल आंकड़ा या जांच की पूरी अवधि सार्वजनिक नहीं की है।
CoinDCX पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
ED के अनुसार, CoinDCX पर आरोप है कि भारतीय ग्राहक प्लेटफॉर्म पर रुपये जमा करके क्रिप्टोकरेंसी खरीदने या दूसरे ट्रेडिंग ऑर्डर देने की प्रक्रिया शुरू करते थे। इसके बाद कुछ लेनदेन में रुपये को USDT में बदला जाता था और विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सौदे किए जाते थे।
एजेंसी का कहना है कि इन गतिविधियों के लिए Binance, KuCoin, Gate.io और Bybit जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में एक कोस्टा रिका आधारित कंपनी के नाम पर विदेशी एक्सचेंजों में खाते होने की बात भी सामने आई। ED ने इस कंपनी को कथित तौर पर केवल कागजी इकाई यानी पेपर एंटिटी बताया है।
एजेंसी का आरोप है कि इन खातों के जरिए भारतीय ग्राहकों के ऑर्डर विदेशी एक्सचेंजों पर निष्पादित किए जाते थे। कुछ लेनदेन सीधे CoinDCX के एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस यानी API के जरिए किए जाने की बात भी कही गई है।
API एक तकनीकी माध्यम होता है, जिसकी मदद से दो अलग-अलग सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म आपस में जानकारी साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे के सिस्टम पर निर्देश भेज सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक ट्रेडिंग ऐप ग्राहक का ऑर्डर लेकर किसी दूसरे एक्सचेंज के सिस्टम तक पहुंचा सकता है।
ED का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए भारतीय ग्राहकों के सौदे विदेशी एक्सचेंजों पर किए जा रहे थे और इनका कुल कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचा। यह जांच का विषय है कि इन लेनदेन के लिए FEMA के तहत आवश्यक अनुमति और निर्धारित भुगतान व्यवस्था का पालन किया गया था या नहीं।
USDT के जरिए विदेशों में पैसा भेजने का आरोप क्या है?
इस मामले में USDT का नाम बार-बार सामने आ रहा है। USDT एक स्टेबलकॉइन है, जिसकी कीमत सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर के बराबर रखने का प्रयास किया जाता है। दूसरे शब्दों में, एक USDT का मूल्य लगभग एक अमेरिकी डॉलर के आसपास बनाए रखने के लिए इसे डिजाइन किया गया है।
क्रिप्टो बाजार में इसका इस्तेमाल ट्रेडिंग और डिजिटल संपत्ति के लेनदेन में किया जाता है। इसकी मदद से कारोबारी एक क्रिप्टो एक्सचेंज से दूसरे एक्सचेंज तक डिजिटल मूल्य भेज सकते हैं।
ED का आरोप है कि भारतीय ग्राहकों के रुपये को पहले USDT में बदला जाता था। इसके बाद इस डिजिटल मुद्रा को विदेशी एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। एजेंसी की जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या इस तरह के लेनदेन निर्धारित विदेशी मुद्रा भुगतान प्रणाली को दरकिनार करके किए गए।
सामान्य बैंकिंग व्यवस्था में भारत से विदेश में भुगतान भेजने के लिए निर्धारित कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। इनमें भुगतान का उद्देश्य, लेनदेन का रिकॉर्ड और लागू नियमों के अनुसार अधिकृत माध्यम का इस्तेमाल शामिल हो सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए सीमा-पार लेनदेन में भी संबंधित कानूनों और नियमों का पालन जरूरी है। केवल डिजिटल मुद्रा का इस्तेमाल करने से कोई लेनदेन अपने आप गैरकानूनी नहीं हो जाता। जांच का सवाल यह है कि संबंधित कंपनियों ने किस उद्देश्य से, किस माध्यम से और किस कानूनी अनुमति के तहत विदेशी लेनदेन किए।
ED का कहना है कि CoinDCX के विदेशी एक्सचेंजों पर कारोबार और लेनदेन शुल्क के भुगतान में USDT का इस्तेमाल हुआ। एजेंसी ने विदेशी प्लेटफॉर्म को सैकड़ों करोड़ रुपये के बराबर शुल्क दिए जाने का भी आरोप लगाया है।
फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग भी जांच के दायरे में
ED की जांच केवल सामान्य क्रिप्टो खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। इसमें फ्यूचर और ऑप्शन यानी F&O ट्रेडिंग भी शामिल है।
फ्यूचर ट्रेडिंग में किसी डिजिटल संपत्ति की कीमत के आधार पर भविष्य की तारीख के लिए सौदा किया जाता है। वहीं ऑप्शन में खरीदार को तय शर्तों के तहत किसी संपत्ति को खरीदने या बेचने का अधिकार मिलता है, लेकिन हर स्थिति में ऐसा करना अनिवार्य नहीं होता।
क्रिप्टो बाजार में F&O कारोबार काफी जोखिम भरा हो सकता है। कीमतों में तेजी से बदलाव के कारण निवेशक को बड़ा मुनाफा या नुकसान हो सकता है। कई बार लीवरेज के इस्तेमाल से नुकसान शुरुआती निवेश से भी ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है।
ED का आरोप है कि CoinDCX पर ग्राहक जब किसी क्रिप्टो टोकन में फ्यूचर या ऑप्शन पोजिशन खोलते थे, तो उनके ऑर्डर के अनुरूप विदेशी एक्सचेंजों पर भी लगभग उसी अनुपात में दूसरी पोजिशन खोली जाती थी। इसे एजेंसी ने एक-से-एक यानी 1:1 पोजिशन के तौर पर बताया है।
जांच के मुताबिक, ग्राहक भारतीय प्लेटफॉर्म पर अपनी पोजिशन बंद करते थे तो विदेशी एक्सचेंजों पर संबंधित सौदे भी बंद किए जाते थे और उनका निपटान विदेश में होता था।
एजेंसी यह पता लगा रही है कि इस व्यवस्था में विदेशी एक्सचेंजों पर कारोबार करने के लिए किस तरह के खाते इस्तेमाल हुए और संबंधित भुगतान किस रास्ते से किए गए।
Apple, Google और Tesla के टोकनाइज्ड शेयर भी जांच में
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशी कंपनियों के शेयरों से जुड़े टोकनाइज्ड प्रोडक्ट्स हैं। ED के मुताबिक, CoinDCX पर Apple, Google और Tesla जैसी विदेशी कंपनियों के शेयरों से जुड़े टोकनाइज्ड प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग की सुविधा दी जा रही थी।
टोकनाइज्ड स्टॉक को समझना जरूरी है। सामान्य शेयर खरीदने पर निवेशक किसी कंपनी के शेयर का मालिक बनता है और उसे संबंधित बाजार के नियमों के तहत अधिकार मिलते हैं। लेकिन टोकनाइज्ड स्टॉक में किसी शेयर या उसकी कीमत से जुड़ा डिजिटल टोकन उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे यह जरूरी नहीं हो जाता कि ग्राहक के पास वास्तव में उस कंपनी का असली शेयर मौजूद है।
ED का आरोप है कि इन उत्पादों के नाम पर ग्राहकों को विदेशी कंपनियों के शेयरों की कीमत से जुड़े डेरिवेटिव सौदे उपलब्ध कराए जा रहे थे। एजेंसी के अनुसार, ये सौदे Hyperliquid नाम के विदेशी विकेंद्रीकृत क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे थे।
विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म यानी ऐसा डिजिटल ट्रेडिंग सिस्टम जिसमें कारोबार पारंपरिक केंद्रीय एक्सचेंज की तरह एक ही संस्था के नियंत्रण में नहीं चलता। ऐसे प्लेटफॉर्म पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट और ब्लॉकचेन तकनीक की भूमिका हो सकती है।
ED का कहना है कि ग्राहकों के रुपये को USDT में बदलकर इन विदेशी उत्पादों में पोजिशन ली जाती थी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इन उत्पादों की वास्तविक प्रकृति क्या थी और क्या इन्हें भारतीय ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए जरूरी नियामकीय अनुमति मौजूद थी।
Delta Exchange पर क्या आरोप हैं?
Delta Exchange India भी ED की जांच के दायरे में है। यह प्लेटफॉर्म क्रिप्टोकरेंसी में स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर और ऑप्शन कारोबार तथा विदेशी कंपनियों के शेयरों से जुड़े टोकनाइज्ड उत्पाद उपलब्ध कराता है।
एजेंसी के अनुसार, Delta Exchange के बड़ी संख्या में F&O और टोकनाइज्ड स्टॉक से जुड़े सौदे CoinDCX के जरिए विदेशी एक्सचेंजों तक पहुंचाए जा रहे थे। यानी ग्राहक Delta Exchange पर ऑर्डर देते थे, लेकिन संबंधित विदेशी ट्रेडिंग गतिविधि को CoinDCX के माध्यम से पूरा किया जाता था।
ED का दावा है कि इस तरह के सीमा-पार लेनदेन का कुल आकार कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि Delta Exchange India ने अपनी विदेश स्थित सहयोगी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इन ट्रांसफर का उद्देश्य और कानूनी आधार भी जांच के दायरे में है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विदेश में किसी सहयोगी कंपनी को पैसा भेजना अपने आप में गैरकानूनी नहीं होता। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कारोबार, सेवाओं, तकनीक और अन्य वैध व्यावसायिक जरूरतों के लिए विदेश में भुगतान कर सकती हैं। लेकिन ऐसे लेनदेन में संबंधित कानूनों, अनुमतियों और रिपोर्टिंग नियमों का पालन होना चाहिए।
ED इसी बात की जांच कर रही है कि Delta Exchange से जुड़े विदेशी ट्रांसफर किस उद्देश्य से किए गए और क्या वे FEMA के नियमों के अनुरूप थे।
FEMA कानून क्या है और इसका उल्लंघन होने पर क्या हो सकता है?
FEMA का पूरा नाम Foreign Exchange Management Act है। हिंदी में इसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम कहा जाता है। भारत में विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन और सीमा-पार भुगतान के लिए यह एक महत्वपूर्ण कानून है। इसे वर्ष 1999 में लागू किया गया था।
इस कानून का उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा के लेनदेन को व्यवस्थित करना और अंतरराष्ट्रीय भुगतान तथा विदेशी संपत्ति से जुड़े नियम तय करना है। इसके तहत भारत से विदेश में पैसा भेजने, विदेशी मुद्रा प्राप्त करने, विदेशी संपत्ति रखने और सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों के लिए अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई भारतीय कंपनी विदेश में सेवा खरीदती है तो उसे भुगतान का सही रिकॉर्ड रखना और लागू नियमों का पालन करना होता है। इसी तरह विदेश में निवेश या किसी विदेशी वित्तीय उत्पाद में कारोबार करने के लिए भी संबंधित नियमों को देखना जरूरी होता है।
यदि कोई व्यक्ति या कंपनी FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो कानून के तहत जांच और दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। कुछ मामलों में उल्लंघन की राशि के आधार पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर या लगातार उल्लंघन में अतिरिक्त कानूनी प्रक्रिया भी हो सकती है।
हालांकि, इस मामले में अभी ED की जांच जारी है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि CoinDCX या Delta Exchange को FEMA उल्लंघन का दोषी ठहरा दिया गया है। एजेंसी को आरोपों के समर्थन में सबूत जुटाने होंगे और संबंधित कंपनियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
FEMA के अलावा SEBI और RBI के नियमों की भी जांच
ED ने कहा है कि दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ वित्तीय उत्पाद पहली नजर में कई भारतीय कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप नहीं दिखते। इनमें Securities Contracts (Regulation) Act, 1956, SEBI Act, 1992 और RBI Act, 1934 का उल्लेख किया गया है।
SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड देश के प्रतिभूति बाजार का नियामक है। शेयर बाजार, प्रतिभूतियों और उनसे जुड़े कई वित्तीय उत्पादों के संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक देश की बैंकिंग और मौद्रिक व्यवस्था का प्रमुख नियामक है। विदेशी मुद्रा और भुगतान प्रणाली से जुड़े कई नियमों में भी RBI की भूमिका होती है।
ED यह जांच रही है कि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध F&O और टोकनाइज्ड शेयर जैसे उत्पाद किस श्रेणी में आते हैं और क्या उन्हें भारत में ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए जरूरी नियामकीय मंजूरी ली गई थी।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना चाहिए। ED की ओर से किसी उत्पाद पर सवाल उठाए जाने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित नियामक ने पहले ही उसे गैरकानूनी घोषित कर दिया है। एजेंसी ने इन कानूनों के तहत संभावित उल्लंघनों की जांच की बात कही है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और संबंधित प्राधिकरणों की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या ग्राहकों का पैसा फंस सकता है?
ED की छापेमारी की खबर के बाद CoinDCX और Delta Exchange के यूजर्स के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या उनके खाते में जमा पैसा सुरक्षित है और क्या वे सामान्य रूप से ट्रेडिंग या निकासी कर पाएंगे।
इस मामले में अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र कंपनियों के कथित विदेशी लेनदेन, ट्रेडिंग व्यवस्था और नियामकीय अनुपालन हैं। छापेमारी की खबर अपने आप यह साबित नहीं करती कि सभी ग्राहकों का पैसा जब्त कर लिया गया है या सभी खातों पर रोक लगा दी गई है।
एक रिपोर्ट में दोनों कंपनियों की ओर से सहयोग करने और प्लेटफॉर्म पर जमा, निकासी तथा ट्रेडिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की बात कही गई है। हालांकि, ग्राहकों को किसी भी सेवा की मौजूदा स्थिति की पुष्टि संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर ही करनी चाहिए।
यूजर्स को घबराकर जल्दबाजी में कोई वित्तीय फैसला नहीं लेना चाहिए। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति के फोन, मैसेज या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करके अपनी लॉगिन जानकारी, OTP या वॉलेट की निजी चाबी साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि किसी यूजर को अपने खाते में कोई असामान्य गतिविधि दिखती है, तो उसे प्लेटफॉर्म के आधिकारिक सहायता केंद्र से संपर्क करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को क्रिप्टो रिकवरी या पैसा वापस दिलाने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान नहीं करना चाहिए।
क्या विदेशी एक्सचेंज भी जांच के घेरे में हैं?
ED की ओर से जारी जानकारी में Binance, KuCoin, Gate.io और Bybit जैसे विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों का नाम उन प्लेटफॉर्म के तौर पर आया है, जहां कथित तौर पर संबंधित ट्रेड किए गए।
लेकिन किसी विदेशी एक्सचेंज का नाम जांच में आने का अर्थ यह नहीं है कि उस पर भी इस मामले में अपराध करने का आरोप लगा दिया गया है। उपलब्ध जानकारी में ED की कार्रवाई मुख्य रूप से CoinDCX और Delta Exchange से जुड़ी बेंगलुरु की तीन जगहों पर तलाशी के रूप में सामने आई है।
जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि भारतीय ग्राहकों के ऑर्डर विदेशी एक्सचेंजों तक कैसे पहुंचे, किन खातों के माध्यम से ट्रेड किए गए और भुगतान किस तरीके से हुआ। इसके लिए विदेशी प्लेटफॉर्म पर मौजूद खातों, लेनदेन के रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के बीच तकनीकी संबंधों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि जांच में विदेशी संस्थाओं या खातों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आती है, तो एजेंसी आगे की कानूनी प्रक्रिया अपना सकती है। फिलहाल किसी विदेशी एक्सचेंज को इस मामले में दोषी बताना सही नहीं होगा।
क्रिप्टो निवेशकों के लिए इस कार्रवाई का क्या मतलब है?
इस कार्रवाई से भारत में क्रिप्टो कारोबार के नियामकीय ढांचे पर एक बार फिर चर्चा तेज हो सकती है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले लोगों को यह समझना जरूरी है कि डिजिटल संपत्ति और उससे जुड़े हर वित्तीय उत्पाद के नियम एक जैसे नहीं होते।
स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट, ऑप्शन और टोकनाइज्ड स्टॉक अलग-अलग प्रकार के उत्पाद हैं। इनमें जोखिम, कानूनी स्थिति और निवेशक के अधिकार भी अलग हो सकते हैं।
किसी प्लेटफॉर्म पर कोई उत्पाद उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे हर नियामकीय अनुमति मिल चुकी है। निवेश करने से पहले ग्राहक को यह समझना चाहिए कि वह वास्तविक क्रिप्टो टोकन खरीद रहा है, किसी कीमत पर आधारित डेरिवेटिव में ट्रेड कर रहा है या किसी विदेशी शेयर से जुड़ा टोकनाइज्ड उत्पाद ले रहा है।
निवेशकों को प्लेटफॉर्म की शर्तें, निकासी नियम, शुल्क और जोखिम संबंधी जानकारी पढ़नी चाहिए। खास तौर पर लीवरेज वाले F&O कारोबार में नुकसान तेजी से बढ़ सकता है। केवल सोशल मीडिया पर प्रचार या किसी इन्फ्लुएंसर की सलाह के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
इस मामले से यह संदेश भी मिलता है कि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का तकनीकी ढांचा और उसके विदेशी कारोबार की व्यवस्था कानूनी नियमों के अनुरूप होना जरूरी है। डिजिटल कारोबार में पारदर्शिता, सही रिकॉर्ड और नियामकीय अनुपालन निवेशकों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आगे ED की जांच में क्या हो सकता है?
अब ED की जांच में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। सबसे पहले यह पता लगाया जा सकता है कि भारतीय ग्राहकों से मिले रुपये को USDT में बदलने और विदेशी एक्सचेंजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया किस तरह काम करती थी।
इसके बाद कोस्टा रिका आधारित इकाई के स्वामित्व, उसके वास्तविक कारोबार और विदेशी एक्सचेंजों पर खोले गए खातों की भूमिका की जांच हो सकती है। एजेंसी यह भी देख सकती है कि इन खातों को कौन संचालित करता था और उनके जरिए कितने समय तक कारोबार किया गया।
Delta Exchange से विदेश स्थित सहयोगी कंपनियों को भेजी गई रकम के उद्देश्य और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा विदेशी एक्सचेंजों को दिए गए ट्रांजैक्शन शुल्क और ग्राहकों के सौदों के निपटान का रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
ED के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म के वित्तीय उत्पादों की कानूनी स्थिति पर भी जांच जारी है। जरूरत पड़ने पर संबंधित नियामकीय संस्थाओं के साथ जानकारी साझा की जा सकती है या आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इस मामले को जांच के अधीन आरोपों के रूप में ही देखना चाहिए।