भारतीय निशानेबाजों ने चीन के हांगझोऊ में चल रहे ISSF World Cup 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही इवेंट में दो मेडल अपने नाम किए हैं। सोमवार, 27 जुलाई को महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत की ईशा सिंह ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। चीन की झांग युएयुए ने सिल्वर मेडल जीता। इस तरह 25 मीटर पिस्टल के पोडियम पर भारत की दो निशानेबाज नजर आईं।
ईशा सिंह ने फाइनल में शुरुआत से ही बढ़त बनाई और अंत तक इसे कायम रखा। उन्होंने कुल 40 हिट के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। चीन की झांग युएयुए 37 हिट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि मनु भाकर ने 28 हिट के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
ईशा की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने फाइनल की पहली ही सीरीज में पांच में पांच हिट लगाकर परफेक्ट शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, ईशा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बढ़ाया और अंतिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते उनकी बढ़त इतनी मजबूत हो चुकी थी कि गोल्ड मेडल लगभग तय हो गया था।
फाइनल के अंत में ईशा के स्कोरबोर्ड पर 40 हिट थे।
चीन की झांग 37 हिट तक पहुंचीं।
इस तरह ईशा ने तीन हिट के अंतर से गोल्ड अपने नाम किया।
भारतीय शूटिंग के लिए यह एक यादगार दिन रहा क्योंकि मनु भाकर भी इसी फाइनल में मेडल जीतने में सफल रहीं। मनु ने 28 हिट के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। ब्रॉन्ज के लिए मुकाबला आसान नहीं था। उत्तर कोरिया की पाक ह्योन ग्योंग ने मनु को कड़ी चुनौती दी और एक समय दोनों के बीच शूट-ऑफ की स्थिति बनी।
मनु ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए शूट-ऑफ में बाजी मारी और भारत के लिए दूसरा मेडल सुनिश्चित कर दिया।
उत्तर कोरिया की पाक चौथे स्थान पर रहीं। चीन की शियाओ जियारुइशुआन पांचवें, अमेरिका की एडा क्लाउडिया कोरखिन छठे और दक्षिण कोरिया की ओलिंपिक चैंपियन ओह येजिन सातवें स्थान पर रहीं। चीनी ताइपे की तिएन चिया-चेन आठवें स्थान पर रहीं।
महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में भारत का एक साथ गोल्ड और ब्रॉन्ज जीतना देश की शूटिंग में बढ़ती ताकत को दिखाता है।
ईशा सिंह और मनु भाकर दोनों भारतीय पिस्टल शूटिंग के बड़े नाम हैं, लेकिन दोनों के करियर अलग-अलग चरणों में हैं।
मनु भाकर पहले ही ओलिंपिक जैसे सबसे बड़े मंच पर खुद को साबित कर चुकी हैं। दूसरी तरफ 20 वर्षीय ईशा सिंह लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं।
हांगझोऊ में ईशा का प्रदर्शन खास तौर पर प्रभावशाली रहा।
ISSF की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने फाइनल की शुरुआत पांच हिट से की। इसके बाद उनका स्कोर क्रमशः 9, 13, 17, 19, 23, 27, 31, 36 और आखिर में 40 तक पहुंचा।
इस दौरान किसी भी चरण में वह पहले स्थान से नीचे नहीं गईं।
शूटिंग जैसे खेल में यह consistency बेहद महत्वपूर्ण होती है।
25 मीटर पिस्टल फाइनल में केवल तकनीक पर्याप्त नहीं होती। निशानेबाज को लगातार बदलते scoreboard, elimination pressure और आसपास मौजूद दर्शकों के बीच अपना concentration बनाए रखना पड़ता है।
एक खराब series खिलाड़ी को medal position से बाहर कर सकती है।
ईशा ने हांगझोऊ में इसी मानसिक चुनौती को शानदार तरीके से संभाला।
उनकी शुरुआत आक्रामक रही, लेकिन शुरुआती बढ़त बनाने के बाद भी उन्होंने अपनी rhythm नहीं खोई।
चीन की झांग युएयुए घरेलू दर्शकों के सामने लगातार उनके करीब पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। झांग ने धीमी शुरुआत के बाद मुकाबले के मध्य चरण में वापसी की और दूसरे स्थान तक पहुंचीं।
इसके बावजूद ईशा ने अपनी बढ़त बरकरार रखी।
अंतिम चरण में ईशा के पास इतना मजबूत अंतर था कि झांग की वापसी गोल्ड छीनने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
40 हिट के साथ ईशा विजेता बनीं और झांग 37 पर रुक गईं।
ईशा के लिए यह 2026 का पहला बड़ा 25 मीटर पिस्टल गोल्ड नहीं है।
इससे लगभग दो महीने पहले मई में ISSF World Cup Munich 2026 में भी ईशा ने इसी स्पर्धा में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था।
म्यूनिख में उनका प्रदर्शन तो और भी ऐतिहासिक था।
वहां ईशा ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल के फाइनल में 43 हिट लगाए थे और नया सीनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
इसलिए हांगझोऊ की जीत को एक isolated performance नहीं कहा जा सकता।
ईशा लगातार दुनिया की शीर्ष 25 मीटर पिस्टल निशानेबाजों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
मई में म्यूनिख में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड और अब जुलाई में हांगझोऊ में 40 हिट के साथ गोल्ड—इन दो नतीजों ने 2026 को उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में शामिल कर दिया है।
म्यूनिख वर्ल्ड कप में ईशा ने केवल 25 मीटर पिस्टल में गोल्ड नहीं जीता था।
उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया था। उस मुकाबले में भारत की सुरुचि इंदर सिंह ने गोल्ड जीता था और ईशा दूसरे स्थान पर रही थीं।
यानी ईशा केवल एक पिस्टल discipline में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हैं।
उनकी 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल दोनों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भारतीय टीम के लिए बड़ी ताकत बनती जा रही है।
अब हांगझोऊ में आया गोल्ड उनकी international consistency का एक और उदाहरण है।
दूसरी तरफ मनु भाकर के लिए ब्रॉन्ज मेडल भी काफी महत्वपूर्ण है।
मनु भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए नया नाम नहीं हैं। Paris Olympics 2024 में उन्होंने दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा था। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम में पदक हासिल किए थे।
इसके बाद से हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में उनसे पदक की उम्मीद रहती है।
हांगझोऊ में मनु गोल्ड की दौड़ में आखिर तक नहीं रह सकीं, लेकिन उन्होंने ब्रॉन्ज की लड़ाई में अपना अनुभव दिखाया।
जब उत्तर कोरिया की पाक ह्योन ग्योंग ने उन्हें बराबरी पर ला दिया, तब मुकाबला shoot-off में पहुंचा।
ऐसे समय में खिलाड़ी के सामने तकनीक से ज्यादा मानसिक दबाव होता है।
एक छोटी गलती का मतलब पोडियम से बाहर होना हो सकता है।
मनु ने इस चुनौती को संभाला और ब्रॉन्ज अपने नाम किया। ISSF के अनुसार उन्होंने फाइनल में कुल 28 हिट दर्ज किए।
इसका मतलब भारत ने एक ही फाइनल में पहला और तीसरा स्थान हासिल किया।
ऐसे double-podium finishes किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इससे केवल medal tally नहीं बढ़ती, बल्कि यह भी पता चलता है कि किसी particular event में देश के पास एक से ज्यादा world-class athletes मौजूद हैं।
महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में भारत के लिए यही तस्वीर दिखाई दे रही है।
ईशा सिंह, मनु भाकर और रिदम सांगवान जैसे नाम पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इन खिलाड़ियों के बीच domestic competition भी काफी मजबूत है।
किसी World Cup या Championship में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए पहले देश के भीतर selection trials में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है।
यानी international medal जीतने से पहले भारतीय shooters को domestic level पर भी कड़ी competition का सामना करना पड़ता है।
इससे overall standard बढ़ने में मदद मिलती है।
ईशा सिंह की कहानी भी काफी कम उम्र में शुरू हुई थी।
हैदराबाद की रहने वाली ईशा ने किशोरावस्था से ही shooting में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। Junior level पर सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने senior international competitions में जगह बनाई।
Asian Games में भी वह भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं और ISSF competitions में कई podium finishes उनके नाम हैं।
अब 2026 में उनका प्रदर्शन उन्हें दुनिया की प्रमुख pistol shooters में मजबूती से स्थापित कर रहा है।
20 साल की उम्र में लगातार दो World Cup 25m Pistol gold जीतना बड़ी उपलब्धि है।
लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है उनका बड़े finals में composure।
Shooting में अक्सर qualification और final दो अलग तरह की चुनौतियां होती हैं।
Qualification में लंबे समय तक consistency बनाए रखनी पड़ती है, जबकि final में scoring format और elimination pressure मुकाबले को ज्यादा तेज और मानसिक रूप से कठिन बना देता है।
कई shooters qualification में शानदार प्रदर्शन करते हैं लेकिन final के pressure में अपना rhythm खो देते हैं।
ईशा ने हांगझोऊ में शुरुआत से lead लेकर अंत तक उसे बनाए रखा।
यह championship temperament का संकेत है।
हालांकि किसी खिलाड़ी की भविष्य की सफलता की गारंटी केवल एक या दो tournaments से नहीं दी जा सकती। Shooting में form बहुत तेजी से बदल सकती है और international competition बेहद मजबूत है।
हांगझोऊ के final में ही इसका उदाहरण दिखाई दिया।
इसमें भारत के अलावा चीन, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, अमेरिका और चीनी ताइपे की top shooters मौजूद थीं।
दक्षिण कोरिया की ओह येजिन, जिन्होंने Paris Olympics में महिलाओं की 10m air pistol का गोल्ड जीता था, इस 25m pistol final में सातवें स्थान पर रहीं।
यानी Olympic champion होना भी हर event में medal की गारंटी नहीं है।
इसीलिए ईशा और मनु का एक साथ podium पर पहुंचना और महत्वपूर्ण बन जाता है।
भारतीय shooting में पिछले कुछ वर्षों में young shooters की नई generation तेजी से सामने आई है।
ईशा सिंह, सुरुचि इंदर सिंह, सम्राट राणा और कई दूसरे युवा खिलाड़ी senior international circuit में medal जीत रहे हैं।
म्यूनिख World Cup 2026 इसका बड़ा उदाहरण था।
वहां सुरुचि ने महिलाओं की 10m air pistol में gold जीता और ईशा silver पर रहीं। ईशा ने 25m pistol में world record के साथ gold जीता। वहीं Manu Bhaker और Samrat Rana ने 10m air pistol mixed team में silver हासिल किया था।
इसका मतलब भारतीय pistol shooting में एक ही खिलाड़ी पर निर्भरता कम होती दिखाई दे रही है।
Paris Olympics से पहले मनु भाकर भारतीय pistol shooting का सबसे चर्चित चेहरा थीं और ओलिंपिक में उनके दो medals ने उनकी स्थिति और मजबूत कर दी।
लेकिन अब उनके साथ ईशा, सुरुचि और दूसरे युवा shooters भी बड़े international finals में लगातार पहुंच रहे हैं।
यह competition भारतीय टीम के लिए सकारात्मक हो सकता है।
अगर selection के लिए कई world-class shooters मौजूद हों तो international tournaments में भारत के medal chances बढ़ते हैं।
हांगझोऊ का परिणाम इसी depth को दिखाता है।
Gold—Esha Singh.
Bronze—Manu Bhaker.
एक ही event में भारत के दो निशानेबाज podium पर।
इससे पहले फरवरी 2026 में नई दिल्ली में Asian Rifle/Pistol Championship के 25m pistol event में भी Manu और Esha दोनों podium पर पहुंची थीं। उस समय Manu ने silver और Esha ने bronze जीता था।
अब World Cup में positions बदल गईं।
ईशा gold तक पहुंचीं और Manu bronze पर रहीं।
इससे दोनों के बीच healthy competition भी दिखाई देता है।
International shooting में ऐसी internal rivalry टीम को मजबूत बना सकती है, क्योंकि दोनों athletes को लगातार अपने scores और consistency बेहतर करनी पड़ती है।
ईशा की हांगझोऊ जीत का एक और महत्वपूर्ण पहलू Munich के बाद उनकी वापसी है।
Munich में 43-hit world record बनाना किसी भी shooter के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। ऐसी performance के बाद अगली competition में expectations अचानक बढ़ जाती हैं।
हर कोई देखता है कि खिलाड़ी उस रिकॉर्ड के बाद अपना स्तर बनाए रख सकता है या नहीं।
हांगझोऊ में ईशा ने इसका जवाब gold medal से दिया।
उन्होंने यहां Munich का 43-hit world record नहीं दोहराया, लेकिन 40 hits के साथ बाकी field को पीछे छोड़ दिया।
इससे पता चलता है कि medal जीतने के लिए हर बार world record जरूरी नहीं।
कई बार competition को पढ़ना, pressure संभालना और बाकी shooters से बेहतर consistency दिखाना ही पर्याप्त होता है।
ईशा ने यही किया।
पहली series में पांच hits लगाकर उन्होंने बाकी खिलाड़ियों को शुरुआत से pressure में डाल दिया।
जब आपके सामने scoreboard पर कोई shooter लगातार lead कर रहा हो तो बाकी competitors के लिए हर series ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।
एक miss से अंतर बढ़ सकता है।
ईशा ने इस psychological advantage का फायदा उठाया और मुकाबले के अंत तक control अपने हाथ में रखा।
मनु की strategy अलग रही।
वह शुरुआत से gold position में नहीं थीं, लेकिन elimination stages में बनी रहीं।
Bronze medal के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षण North Korean shooter Pak के खिलाफ आया।
दोनों के बीच मुकाबला shoot-off तक गया।
Manu ने अपना Olympic experience दिखाते हुए medal बचा लिया।
इससे उनके international career में एक और World Cup medal जुड़ गया।
मनु का career पहले से World Championships, Asian Games, World Cups और Olympics की उपलब्धियों से भरा है। ISSF की आधिकारिक रिपोर्ट ने भी उनके Hangzhou bronze को उनके लंबे international résumé में एक और महत्वपूर्ण podium बताया।
भारत के लिए यह परिणाम आने वाले बड़े tournaments की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
Shooting में Olympic cycle के दौरान World Cups केवल medals जीतने का मंच नहीं होते। ये coaches और athletes को यह समझने में मदद करते हैं कि दुनिया के बाकी shooters किस स्तर पर हैं।
किस event में qualification score कितना competitive है?
Final में किस तरह की pressure situations बन रही हैं?
किस shooter की form ऊपर जा रही है?
किस technical area पर काम करने की जरूरत है?
इन सभी सवालों के जवाब World Cup circuit से मिलते हैं।
भारत के लिए 25m pistol में दो athletes का podium पर होना coaching team को सकारात्मक संकेत देता है।
इसके बावजूद आगे सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।
Esha के लिए चुनौती होगी इस consistency को World Championships और भविष्य के Olympic qualification cycle तक बनाए रखना।
Manu के लिए चुनौती होगी 25m pistol में bronze को gold में बदलने की दिशा में काम करना और साथ ही 10m air pistol में भी अपना स्तर बनाए रखना।
दोनों athletes multiple pistol events में प्रतिस्पर्धा करती हैं।
इसका मतलब training workload और competition schedule को भी carefully manage करना पड़ता है।
10m air pistol और 25m pistol की technical demands अलग हैं।
एक तरफ precision और trigger control है, दूसरी तरफ 25m event में rapid-fire component अलग तरह की rhythm मांगता है।
इन दोनों disciplines में world-class level तक पहुंचना आसान नहीं।
ईशा और मनु दोनों इस versatility को दिखा रही हैं।
इस जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी दोनों भारतीय shooters को बधाई दी। उन्होंने Esha के gold और Manu के bronze को भारतीय shooting के लिए गर्व का क्षण बताया।
लेकिन खिलाड़ियों के लिए celebration के बाद अगला target जल्दी सामने आ जाता है।
ISSF World Cup Hangzhou 20 से 29 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें rifle, pistol और shotgun के दुनिया के प्रमुख shooters हिस्सा ले रहे हैं।
इसलिए भारत की नजर बाकी events और medal opportunities पर भी रहेगी।
Shooting में भारत लंबे समय से international level पर मजबूत रहा है, लेकिन Paris Olympics 2024 ने इस खेल को देश में एक बार फिर मुख्यधारा की चर्चा में ला दिया।
मनु भाकर के दो Olympic medals ने करोड़ों भारतीय दर्शकों का ध्यान shooting की तरफ खींचा।
अब नई generation के shooters उस momentum को आगे बढ़ा रहे हैं।
ईशा सिंह का 2026 season इसका बड़ा उदाहरण है।
पहले Munich में 25m pistol gold और world record।
फिर उसी World Cup में 10m air pistol silver।
और अब Hangzhou में फिर 25m pistol gold।
अगर किसी युवा shooter को international consistency साबित करनी हो तो इससे बेहतर sequence बहुत कम देखने को मिलता है।
इसमें सबसे बड़ी बात उनकी उम्र है।
ईशा अभी केवल 20 साल की हैं।
उनके सामने लंबा international career हो सकता है, लेकिन इस उम्र में ही world record और multiple World Cup gold medals उनके नाम जुड़ चुके हैं।
फिर भी भारतीय fans के लिए expectations को संतुलित रखना महत्वपूर्ण होगा।
Shooting बहुत छोटे margins का खेल है।
एक shot medal का रंग बदल सकता है।
कई बार qualification में एक point से final छूट सकता है।
और final में एक खराब series athlete को first position से elimination तक पहुंचा सकती है।
इसलिए किसी shooter की एक खराब competition को उसके पूरे career का संकेत नहीं माना जा सकता।
यही बात Manu Bhaker के career में भी दिखाई देती है।
Tokyo Olympics में मुश्किल अनुभव के बाद उन्होंने Paris में वापसी करते हुए दो medals जीते।
अब Hangzhou World Cup में फिर podium finish उनके career की consistency को आगे बढ़ाती है।
दूसरी ओर ईशा अपनी नई पहचान बना रही हैं।
किसी समय भारतीय women’s pistol shooting की चर्चा Manu Bhaker के आसपास केंद्रित रहती थी।
अब उसी final में एक और भारतीय shooter उन्हें पीछे छोड़कर gold जीत रही है।
यह भारतीय shooting के लिए शायद सबसे सकारात्मक संकेत है।
क्योंकि किसी देश की sporting strength तब बढ़ती है जब उसके पास एक superstar के बजाय कई medal contenders हों।
Hangzhou में 27 जुलाई 2026 का दिन इसी वजह से याद रखा जा सकता है।
Women’s 25m Pistol final में आठ shooters उतरीं।
उनमें Olympic champion भी थीं।
World-class Chinese shooters भी थीं।
लेकिन gold भारत की 20 वर्षीय Esha Singh ने जीता।
और bronze भारत की double Olympic medallist Manu Bhaker ने।
Esha ने 40 hits लगाए।
China की Zhang Yueyue 37 hits के साथ silver पर रहीं।
Manu Bhaker 28 hits के साथ bronze लेकर podium पर पहुंचीं।
एक ही podium पर भारत के दो तिरंगे से जुड़े नाम दिखाई दिए।
और शायद इस परिणाम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारतीय women’s pistol shooting की ताकत अब केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है।
Esha Singh और Manu Bhaker ने Hangzhou में भारत को double podium दिया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि 2026 के बाकी international competitions में भारतीय shooters इस momentum को कितना आगे ले जाते हैं।
फिलहाल Hangzhou से भारत के लिए खबर शानदार है—Esha Singh Gold, Manu Bhaker Bronze और Women’s 25m Pistol में भारत का दबदबा।