बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता हमेशा सतर्क रहते हैं। हल्का बुखार, कमजोरी या खेलने में सुस्ती दिखे तो चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन कई बार कुछ ऐसे संकेत भी होते हैं, जिन्हें सामान्य बीमारी समझकर टाल दिया जाता है, जबकि वही गंभीर रोग की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चों में कुछ खास लक्षण लगातार दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कैंसर जैसी बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं।
दुनियाभर में हर साल बड़ी संख्या में बच्चों में कैंसर के मामले सामने आते हैं। अच्छी बात यह है कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता जागरूक रहें और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
क्यों जरूरी है शुरुआती पहचान
पेडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट बताते हैं कि बच्चों में कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य संक्रमण या कमजोरी जैसे लगते हैं। इसी वजह से परिवार देर से अस्पताल पहुंचता है। लेकिन अगर 2-3 हफ्तों से ज्यादा कोई समस्या बनी हुई है, या दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो जांच कराना जरूरी हो जाता है।
अब जानते हैं वे 6 बड़े लक्षण, जिन पर खास ध्यान देना चाहिए।
1) बिना कारण वजन घटना, थकान और बार-बार बुखार
अगर बच्चा ठीक से खा रहा है फिर भी वजन कम हो रहा है, चेहरा पीला पड़ रहा है, हमेशा थका-थका दिखता है या बार-बार बुखार आ रहा है, तो यह खून से जुड़े कैंसर जैसे ल्यूकेमिया का संकेत हो सकता है।
ऐसे बच्चों में खेलकूद की इच्छा भी कम हो जाती है और वे जल्दी थक जाते हैं।
2) सुबह के समय सिरदर्द, उल्टी या चलने में लड़खड़ाहट
लगातार सुबह उठते ही तेज सिरदर्द, बिना कारण उल्टी या शरीर का संतुलन बिगड़ना दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है। अगर ये लक्षण बार-बार दिखें, तो न्यूरोलॉजिकल जांच जरूरी है।
3) हड्डियों, जोड़ों या पैरों में लगातार दर्द
बच्चे अक्सर खेलते समय चोट खाते हैं, इसलिए दर्द होना सामान्य लगता है। लेकिन अगर दर्द बिना चोट के हो, रात में बढ़ जाए या सूजन के साथ रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह बोन कैंसर या अन्य गंभीर रोग का संकेत हो सकता है।
4) पेट, गर्दन, छाती या बगल में गांठ
शरीर के किसी हिस्से में गांठ दिखना या महसूस होना चेतावनी हो सकती है। अगर गांठ धीरे-धीरे बढ़ रही है या दर्द नहीं कर रही, तब भी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार लिम्फ नोड्स की सूजन लंबे समय तक बनी रहती है।
5) बिना चोट के नीले निशान या खून आना
अगर बच्चे के शरीर पर बार-बार नीले निशान पड़ रहे हैं, मसूड़ों से खून आ रहा है या मामूली चोट में भी ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, तो यह प्लेटलेट्स की कमी का संकेत हो सकता है। तुरंत ब्लड टेस्ट कराना चाहिए।
6) आंखों में असामान्य चमक या सफेद रिफ्लेक्शन
फोटो लेते समय आंखों में अजीब सफेद चमक दिखना या पुतली का रंग बदलना भी गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
हर लक्षण का मतलब कैंसर नहीं, पर जांच जरूरी
डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर ही नहीं होता। कई बार सामान्य संक्रमण या अन्य बीमारियां भी वजह बनती हैं। लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहे, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
माता-पिता क्या करें?
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बच्चे के व्यवहार में बदलाव नोट करें।
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खाने-पीने और वजन पर नजर रखें।
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बार-बार बुखार या दर्द को हल्के में न लें।
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जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ से दूसरी राय भी लें।
इलाज में कितनी उम्मीद?
मेडिकल साइंस में काफी प्रगति हुई है। समय पर पहचान होने पर कई तरह के बचपन के कैंसर का इलाज संभव है। कीमोथेरेपी, सर्जरी और नई दवाओं से रिकवरी रेट बेहतर हुआ है।
लाइफस्टाइल की भूमिका
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों में अधिकतर कैंसर का सीधा संबंध लाइफस्टाइल से नहीं होता, लेकिन स्वच्छ वातावरण, संतुलित आहार और नियमित हेल्थ चेकअप से जोखिम कम किया जा सकता है।
नियमित हेल्थ चेकअप क्यों?
साल में एक बार सामान्य जांच कराने से कई बीमारियों का पता समय पर चल सकता है। अगर परिवार में किसी को पहले कैंसर रहा हो, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
बच्चे अपनी परेशानी हमेशा शब्दों में नहीं बता पाते। ऐसे में माता-पिता की सतर्क नजर ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अगर ऊपर बताए गए लक्षण लगातार दिख रहे हैं, तो इंतजार करने की बजाय डॉक्टर से मिलना बेहतर है। जल्दी पहचान, सही इलाज और परिवार का साथ—इनसे जंग जीती जा सकती है।
