प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने हालिया इज़रायल दौरे के दौरान आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और इज़रायल मिलकर दुनिया से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। उनका यह बयान उस समय आया जब उन्होंने इज़रायल की संसद Knesset को संबोधित किया। यह क्षण इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इज़रायली संसद में आधिकारिक संबोधन दिया। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, सुरक्षा सहयोग और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी लगभग आठ वर्षों बाद आधिकारिक यात्रा पर इज़रायल पहुंचे। तेल अवीव हवाई अड्डे पर उनका स्वागत इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने स्वयं किया। दोनों नेताओं के बीच दिखाई दी आत्मीयता और गर्मजोशी ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारत और इज़रायल के संबंध केवल औपचारिक नहीं बल्कि गहरे रणनीतिक स्तर तक विकसित हो चुके हैं। स्वागत समारोह के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे थे और मीडिया के सामने हाथ मिलाते हुए दोनों नेताओं ने वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट रहने का संदेश दिया।
संसद में अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने “शलोम” शब्द से की, जिसका अर्थ शांति है। उन्होंने कहा कि भारत और इज़रायल दोनों ने आतंकवाद की पीड़ा को नजदीक से महसूस किया है। उन्होंने मुंबई के 26/11 हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है और इसे किसी भी विचारधारा के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और इसे समर्थन देने वाली ताकतों को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि भारत और इज़रायल के बीच सुरक्षा सहयोग पहले से मजबूत है और इसे और विस्तार दिया जाएगा। खुफिया जानकारी साझा करने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, सीमा सुरक्षा तकनीक और ड्रोन निगरानी प्रणाली जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध और आतंकवाद के नए रूपों से निपटने के लिए तकनीकी साझेदारी अत्यंत आवश्यक है। इज़रायल की उन्नत रक्षा तकनीक और भारत की रणनीतिक क्षमता मिलकर आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर सकती है।
इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय वार्ताओं में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और कृषि, जल प्रबंधन, स्टार्टअप तथा नवाचार के क्षेत्रों में साझेदारी गहरी हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इज़रायल की कृषि तकनीक और जल संरक्षण मॉडल भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हुए हैं। कई भारतीय राज्यों में इज़रायली तकनीक के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को इस यात्रा के दौरान इज़रायल की ओर से विशेष सम्मान भी प्रदान किया गया। उन्हें “Scroll of Honor” से नवाजा गया, जिसे भारत-इज़रायल मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है। सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत की 140 करोड़ जनता को समर्पित है और यह दोनों देशों के साझा मूल्यों का प्रमाण है। समारोह के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की सराहना करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रणनीति अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर कड़ी निगरानी आवश्यक है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इस दिशा में सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक आतंकवाद के मूल कारणों और उसे बढ़ावा देने वाली संरचनाओं को समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक विश्व में स्थायी शांति संभव नहीं है। उनका यह संदेश केवल इज़रायल के लिए नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए था।
भारत और इज़रायल के संबंधों का इतिहास देखें तो 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। रक्षा क्षेत्र में इज़रायल भारत का प्रमुख साझेदार रहा है। मिसाइल सिस्टम, निगरानी उपकरण और ड्रोन तकनीक में सहयोग ने दोनों देशों को रणनीतिक रूप से करीब लाया है। हाल के वर्षों में उच्च स्तरीय यात्राओं और संयुक्त सैन्य अभ्यासों ने इस संबंध को और मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि भारत संतुलित विदेश नीति में विश्वास रखता है और क्षेत्रीय शांति के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने मध्य पूर्व में स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दोहराया कि भारत का उद्देश्य किसी भी संघर्ष को बढ़ावा देना नहीं बल्कि शांति और विकास को प्रोत्साहित करना है। उनके इस बयान को वैश्विक मंच पर जिम्मेदार नेतृत्व के रूप में देखा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में जब आतंकवाद, साइबर खतरे और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में भारत और इज़रायल का सहयोग एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार कर सकता है। दोनों देशों के बीच उभरती साझेदारी एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकती है।
समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इज़रायल मिलकर आतंकवाद को दुनिया से उखाड़ फेंकेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे। उनका यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। इस दौरे ने यह साबित कर दिया कि भारत और इज़रायल केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए साझा दृष्टिकोण रखते हैं।
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