करवा चौथ और दिवाली के त्योहारों के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग, ज्वेलरी, साड़ी, कॉस्मेटिक्स और गिफ्ट खरीदने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों, WhatsApp मैसेज, नकली शॉपिंग वेबसाइट और भारी डिस्काउंट के जरिए लोगों को निशाना बना सकते हैं। कुछ मामलों में ‘करवा चौथ स्पेशल गिफ्ट’, ‘फ्री साड़ी’, ‘कपल गिफ्ट ऑफर’ या ‘90% तक छूट’ जैसे आकर्षक संदेशों से लोगों को फंसाने की कोशिश की जाती है।
सबसे बड़ा खतरा तब होता है, जब ग्राहक ऑफर की जल्दी में वेबसाइट की जांच किए बिना पेमेंट कर देते हैं या अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। इससे पैसे का नुकसान होने के साथ निजी जानकारी भी जोखिम में पड़ सकती है। इसलिए त्योहारों की खरीदारी करते समय सावधानी जरूरी है।
इस साइबर लिटरेसी रिपोर्ट में जानिए ऑनलाइन गिफ्ट और डिस्काउंट के नाम पर होने वाली ठगी के आम तरीके और उनसे बचने के 11 जरूरी टिप्स।
1. ‘करवा चौथ स्पेशल गिफ्ट’ वाले अनजान लिंक पर क्लिक न करें
त्योहारों के समय WhatsApp, SMS, ईमेल और सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश आ सकते हैं जिनमें दावा किया जाता है कि आपके लिए मुफ्त गिफ्ट, महंगी साड़ी, ज्वेलरी या शॉपिंग वाउचर उपलब्ध है। कई बार संदेश में लिखा होता है कि ऑफर सिर्फ कुछ मिनटों के लिए है या गिफ्ट पाने के लिए तुरंत लिंक खोलना होगा।
ऐसे संदेशों का उद्देश्य आपको बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक करवाना हो सकता है। लिंक किसी नकली वेबसाइट पर ले जा सकता है, जहां आपसे नाम, मोबाइल नंबर, पता, बैंक विवरण या भुगतान की जानकारी मांगी जा सकती है।
क्या करें: किसी अनजान व्यक्ति या नंबर से आए गिफ्ट लिंक को न खोलें। अगर ऑफर किसी जानी-पहचानी कंपनी का बताया जा रहा है, तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप खुद खोलकर जांच करें। संदेश में दिए लिंक से सीधे भुगतान करने से बचें।
2. वेबसाइट का नाम और URL अच्छी तरह जांचें
साइबर ठग कई बार असली ब्रांड जैसी दिखने वाली वेबसाइट बनाते हैं। वे कंपनी का लोगो, प्रोडक्ट की तस्वीरें और रंग तक कॉपी कर लेते हैं। अंतर अक्सर वेबसाइट के पते यानी URL में होता है।
उदाहरण के लिए, किसी लोकप्रिय ब्रांड के नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव करके नकली वेबसाइट बनाई जा सकती है। मोबाइल स्क्रीन पर पूरा पता दिखाई न देने के कारण ऐसी गलती आसानी से नजरअंदाज हो सकती है।
क्या करें: वेबसाइट का पूरा पता जांचें और शक होने पर खरीदारी रोक दें। ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वहां से शॉपिंग पेज खोलें। केवल वेबसाइट पर ताले के निशान या HTTPS देखकर भरोसा न करें, क्योंकि नकली वेबसाइट भी HTTPS का इस्तेमाल कर सकती हैं।
3. जरूरत से ज्यादा सस्ता ऑफर देखकर सावधान हो जाएं
अगर किसी वेबसाइट पर महंगी ज्वेलरी, स्मार्टवॉच, ब्रांडेड कपड़े या महंगा गिफ्ट सामान्य कीमत से बहुत कम में मिल रहा है, तो उसकी जांच जरूर करें। उदाहरण के लिए, किसी प्रोडक्ट पर 80 से 90 प्रतिशत छूट का दावा किया जा रहा हो और साथ में तुरंत पेमेंट करने का दबाव भी बनाया जाए, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
हर बड़ा डिस्काउंट धोखाधड़ी नहीं होता, लेकिन अनजान वेबसाइट पर असामान्य रूप से कम कीमत के साथ सीमित समय की चेतावनी दिखाई दे तो सावधानी बरतना जरूरी है।
क्या करें: उसी प्रोडक्ट की कीमत दो-तीन भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर जांचें। विक्रेता की रेटिंग, पुराने रिव्यू, रिटर्न पॉलिसी और संपर्क जानकारी देखें। सिर्फ कम कीमत देखकर खरीदारी न करें।
4. WhatsApp पर भेजी गई APK फाइल डाउनलोड न करें
त्योहारों में ठग ‘Karwa Chauth Gift.apk’, ‘Festival Sale.apk’ या ‘Free Saree App.apk’ जैसे नाम से फाइल भेज सकते हैं। संदेश में दावा हो सकता है कि इसे खोलने पर मुफ्त गिफ्ट मिलेगा या खास छूट मिलेगी।
APK एंड्रॉयड ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल का फॉर्मेट है। अनजान स्रोत से मिली APK इंस्टॉल करने पर फोन में जोखिम पैदा हो सकता है। ऐसी ऐप्स निजी जानकारी तक पहुंच मांग सकती हैं या दूसरे तरह के साइबर हमलों का हिस्सा हो सकती हैं।
क्या करें: WhatsApp या SMS से आई अनजान APK फाइल इंस्टॉल न करें। ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करें और डेवलपर का नाम तथा मांगी गई परमिशन जांचें। किसी ऐप को बिना कारण SMS, कॉन्टैक्ट या दूसरी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच न दें।
अगर गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो गई है, तो उससे बैंकिंग या पेमेंट ऐप का इस्तेमाल रोकें, दूसरे सुरक्षित डिवाइस से जरूरी पासवर्ड बदलें और जरूरत पड़ने पर बैंक तथा साइबर सुरक्षा सहायता से संपर्क करें।
5. OTP, UPI PIN और CVV किसी को न बताएं

ऑनलाइन ठगी में लोगों से OTP, कार्ड का CVV, कार्ड PIN या UPI PIN हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। ठग खुद को बैंक कर्मचारी, शॉपिंग कंपनी का प्रतिनिधि या कस्टमर केयर एजेंट बताकर कह सकते हैं कि गिफ्ट की पुष्टि, ऑर्डर कैंसिल करने या रिफंड पाने के लिए यह जानकारी जरूरी है।
यह एक गंभीर चेतावनी है। पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्य तौर पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। UPI PIN डालकर आप भुगतान अधिकृत करते हैं, इसलिए स्क्रीन पर दिख रहे नाम, राशि और अनुरोध को ध्यान से जांचें।
क्या करें: OTP, UPI PIN, कार्ड PIN और CVV किसी से साझा न करें। फोन पर आए व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें। अगर कोई रिफंड दिलाने के नाम पर PIN मांगता है, तो बातचीत रोक दें और कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से संपर्क करें।
6. पैसे पाने के लिए QR कोड स्कैन करने से बचें
कई बार ठग दावा करते हैं कि गिफ्ट या रिफंड पाने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। इसके बाद वे ग्राहक को UPI PIN डालने के लिए कहते हैं। ग्राहक को लगता है कि पैसे खाते में आएंगे, लेकिन वास्तव में वह भुगतान की मंजूरी दे सकता है।
QR कोड अपने आप में हर बार धोखाधड़ी नहीं होता। दुकानों पर भुगतान करने के लिए इसका सामान्य इस्तेमाल किया जाता है। समस्या तब होती है, जब किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर आप पैसे पाने के नाम पर भुगतान अनुरोध मंजूर कर देते हैं।
क्या करें: QR कोड स्कैन करने के बाद स्क्रीन पर दिखने वाले व्यक्ति या व्यापारी का नाम और भुगतान की राशि जांचें। किसी भी अनुरोध को मंजूर करने से पहले समझें कि पैसा आपके खाते से जा रहा है या उसमें आ रहा है। संदिग्ध व्यक्ति के भेजे QR कोड से लेन-देन न करें।
7. सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर सीधे पेमेंट न करें
Facebook, Instagram और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर त्योहारों से जुड़े विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। इनमें साड़ी, कॉस्मेटिक्स, गहने या गिफ्ट बॉक्स बहुत कम कीमत पर देने का दावा किया जा सकता है। लेकिन विज्ञापन दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि विक्रेता की विश्वसनीयता की पूरी पुष्टि हो चुकी है।
कुछ फर्जी पेज असली ब्रांड की तस्वीरें और लोगो इस्तेमाल करते हैं। ग्राहक को आकर्षित करने के लिए नकली रिव्यू या सीमित स्टॉक का संदेश भी दिखाया जा सकता है। पेमेंट लेने के बाद विक्रेता संपर्क बंद कर सकता है या सामान भेज ही नहीं सकता।
क्या करें: विक्रेता का नाम, वेबसाइट, पता, संपर्क विवरण और रिटर्न पॉलिसी जांचें। अनजान सोशल मीडिया पेज को सीधे पैसे भेजने से बचें। भुगतान संभव हो तो भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के सुरक्षित पेमेंट सिस्टम से करें और ऑर्डर की रसीद संभालकर रखें।
8. नकली कस्टमर केयर नंबर से सावधान रहें
ऑनलाइन शॉपिंग के बाद ऑर्डर न पहुंचने, रिफंड में देरी या गलत प्रोडक्ट आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर ठग नकली कस्टमर केयर नंबरों के जरिए लोगों को निशाना बना सकते हैं।
अगर आप इंटरनेट पर जल्दबाजी में हेल्पलाइन नंबर खोजते हैं, तो संभव है कि आपको किसी अनधिकृत नंबर पर कॉल लग जाए। ठग खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बैंक विवरण मांग सकते हैं या रिफंड के नाम पर कोई ऐप डाउनलोड करने को कह सकते हैं।
क्या करें: कस्टमर केयर नंबर केवल संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से लें। किसी अनजान व्यक्ति को OTP या UPI PIN न बताएं। रिफंड के लिए स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें और फोन पर बताए गए संदिग्ध निर्देशों का पालन न करें।
9. पेमेंट से पहले रिटर्न, रिफंड और डिलीवरी की शर्तें पढ़ें
करवा चौथ के लिए गिफ्ट खरीदते समय ग्राहक अक्सर चाहते हैं कि सामान त्योहार से पहले पहुंच जाए। ठग इस जल्दबाजी का फायदा उठा सकते हैं। कुछ वेबसाइटें आकर्षक डिलीवरी का वादा कर सकती हैं, लेकिन पेमेंट के बाद ग्राहक को ऑर्डर की सही जानकारी नहीं मिलती।
कई बार सामान देर से पहुंचता है, गलत प्रोडक्ट आता है या रिफंड पाने में परेशानी होती है। हर डिलीवरी समस्या धोखाधड़ी नहीं होती, लेकिन खरीदारी से पहले नियमों की जांच करने से नुकसान का जोखिम घट सकता है।
क्या करें: अनुमानित डिलीवरी तारीख, रिटर्न और रिफंड की शर्तें तथा ग्राहक सहायता का तरीका देखें। ऑर्डर कन्फर्मेशन, पेमेंट रसीद और ट्रैकिंग नंबर सुरक्षित रखें। अगर प्रोडक्ट समय पर नहीं आ सकता, तो दूसरी भरोसेमंद दुकान से खरीदने पर विचार करें।
10. बैंक खाते और ट्रांजैक्शन पर नजर रखें
ऑनलाइन खरीदारी के बाद अपने बैंक खाते, कार्ड और UPI ऐप में हुए लेन-देन की जांच करते रहें। अगर कोई अनजान भुगतान दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें। कभी-कभी छोटी रकम का अनधिकृत ट्रांजैक्शन भी बड़े जोखिम का संकेत हो सकता है।
पेमेंट का SMS, ऐप नोटिफिकेशन या बैंक स्टेटमेंट संभालकर रखना उपयोगी है। इससे किसी समस्या की स्थिति में लेन-देन की जानकारी जल्दी मिल सकती है।
क्या करें: बैंक और पेमेंट ऐप में ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें। संदिग्ध भुगतान दिखने पर तुरंत बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर कार्ड ब्लॉक कराएं या UPI सुविधा सुरक्षित करें। शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन ID, समय और राशि की जानकारी दें।
11. ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें
अगर गलती से किसी फर्जी वेबसाइट पर पेमेंट हो गया है या खाते से अनधिकृत पैसा निकल गया है, तो शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी न करें। जल्दी कार्रवाई करने से संबंधित लेन-देन पर रोक लगाने की संभावना बेहतर हो सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
भारत में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध है। ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है।
क्या करें:
- तुरंत अपने बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता से संपर्क करें और अनधिकृत ट्रांजैक्शन की जानकारी दें।
- वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के लिए 1930 पर कॉल करें।
- आधिकारिक पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- पेमेंट रसीद, ट्रांजैक्शन ID, फोन नंबर, संदेश, वेबसाइट लिंक और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- अगर पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा हुई है, तो सुरक्षित डिवाइस से पासवर्ड बदलें और बैंक से जरूरी सुरक्षा कदम उठाएं।
- ठग से पैसे वापस पाने के नाम पर संपर्क करने वाले किसी दूसरे व्यक्ति को भी पैसे न दें।
शिकायत जितनी जल्दी की जाए, उतना बेहतर है। किसी भी व्यक्ति के ऐसे वादे पर भरोसा न करें कि वह शुल्क लेकर निश्चित रूप से पैसा वापस दिला देगा।
त्योहारों में ठगी के आम तरीके कौन-से हैं?
करवा चौथ और दिवाली के दौरान साइबर ठगी कई रूपों में सामने आ सकती है। कुछ संदेशों में मुफ्त गिफ्ट का दावा किया जाता है, कुछ में भारी छूट दिखाई जाती है और कुछ में नकली डिलीवरी या रिफंड के नाम पर संपर्क किया जाता है।
आम तौर पर ऐसे संकेतों पर ध्यान दें:
- अनजान नंबर से आया अचानक गिफ्ट या वाउचर संदेश।
- बहुत कम कीमत पर महंगे सामान की बिक्री।
- तुरंत पेमेंट करने का दबाव या उलटी गिनती वाला ऑफर।
- वेबसाइट पर कंपनी का पता, संपर्क जानकारी या रिटर्न पॉलिसी न होना।
- WhatsApp से भेजी गई APK फाइल या अनजान ऐप इंस्टॉल करने का आग्रह।
- रिफंड पाने के लिए UPI PIN, OTP या कार्ड का CVV मांगना।
- पैसे पाने के नाम पर QR कोड स्कैन करने या भुगतान मंजूर करने को कहना।
- ग्राहक सहायता के नाम पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने का दबाव।
इनमें से कोई संकेत दिखने पर खरीदारी रोककर पहले जांच करना बेहतर है। याद रखें, असली कंपनियों के नाम और लोगो की नकल करना ठगों के लिए संभव है।
परिवार के सदस्यों को भी साइबर लिटरेसी सिखाएं
साइबर सुरक्षा सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार में सभी लोगों को सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के बुनियादी नियम पता होने चाहिए। खासकर त्योहारों में जब गिफ्ट खरीदने, ऑफर खोजने और पेमेंट करने की जल्दी होती है, तब छोटी-सी गलती नुकसान का कारण बन सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों को समझाएं कि हर आकर्षक विज्ञापन असली नहीं होता। बैंक का OTP, UPI PIN या कार्ड PIN किसी को नहीं बताना चाहिए। अनजान फाइलों और ऐप्स को इंस्टॉल करने से बचना चाहिए।
अगर परिवार का कोई सदस्य संदिग्ध संदेश प्राप्त करता है, तो उसे तुरंत क्लिक करने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से सलाह लेने के लिए कहें। फोन पर दबाव बनाकर तुरंत भुगतान करवाने की कोशिश भी खतरे का संकेत हो सकती है।
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