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खामेनेई की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, बदले के नारे; ट्रम्प बोले- ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी

ईरान की राजधानी तेहरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा है। काले कपड़ों में पहुंचे शोकाकुल लोगों ने मातम मनाया, छाती पीटी और बदले के नारे लगाए। तेहरान के विशाल ग्रैंड मोसल्ला परिसर और उसके आसपास लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। खामेनेई की अंतिम विदाई का यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि ईरान की राजनीति, सत्ता, युद्ध और अमेरिका के साथ तनाव से जुड़ा एक बड़ा वैश्विक घटनाक्रम बन गया है।

खामेनेई के लिए आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाला है। अलग-अलग रिपोर्टों में अनुमानित भीड़ की संख्या अलग-अलग बताई गई है, इसलिए किसी एक निश्चित आंकड़े को अंतिम मानना अभी मुश्किल है। हालांकि तस्वीरों और वीडियो में बड़ी संख्या में लोगों को समारोह में शामिल होते देखा गया है। कई रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम ईरान के साथ इराक के शिया धार्मिक शहरों तक भी विस्तारित है।

शनिवार को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में शोक समारोह के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष काले कपड़ों में पहुंचे। शिया परंपरा में काला रंग शोक से जुड़ा है। कई लोग रोते हुए दिखाई दिए, जबकि कुछ लोग खामेनेई की तस्वीरें और ईरान के झंडे लेकर पहुंचे थे।

भीड़ के बीच अमेरिका विरोधी और बदले से जुड़े नारे भी सुनाई दिए। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक लोगों ने “Revenge” यानी बदला और “Death to America” जैसे नारे लगाए। इस दौरान माहौल धार्मिक शोक के साथ राजनीतिक गुस्से से भी भरा दिखाई दिया।

खामेनेई की मौत के कई महीने बाद उनके सार्वजनिक अंतिम संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका-इजराइल के ईरान पर बड़े हमले के दौरान खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। उनकी मौत ने ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व में बड़ा बदलाव पैदा किया और पूरे क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया।

खामेनेई दशकों तक ईरान की सत्ता के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे। वह 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर बने थे। इस तरह करीब 36 वर्षों तक उन्होंने ईरान की राजनीति, सुरक्षा नीति, विदेश नीति और सैन्य रणनीति पर निर्णायक प्रभाव बनाए रखा।

उनके कार्यकाल में ईरान और अमेरिका के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने रहे। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, इजराइल के साथ दुश्मनी और मध्य पूर्व में ईरान समर्थित संगठनों की भूमिका जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बने रहे।

अब उनकी अंतिम विदाई भी अमेरिका और ईरान के बीच राजनीतिक संदेशों का मंच बन गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े अपने भाषण में ईरान को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए ईरान को एक सप्ताह की छुट्टी दी है। ट्रम्प के इस बयान को युद्ध और तनाव के बीच अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रम्प ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर भी आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया। दूसरी तरफ तेहरान की सड़कों और शोक सभाओं में मौजूद लोगों के बीच अमेरिका के खिलाफ गुस्सा दिखाई दिया।

यही कारण है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक नेता की विदाई नहीं रह गया है। एक तरफ ईरान अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई को विदाई दे रहा है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी जारी है।

तेहरान में अंतिम संस्कार की तैयारियां बड़े स्तर पर की गई हैं। विशाल भीड़ को नियंत्रित करने, ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। सार्वजनिक समारोहों में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में लाखों लोगों के जुटने की बात कही गई है, जबकि ईरानी आयोजनों से जुड़े अनुमानों में इससे कहीं अधिक लोगों की संभावना जताई गई। ऐसे बड़े आयोजनों में स्वतंत्र रूप से सटीक भीड़ का आकलन करना कठिन होता है।

खामेनेई का ताबूत ईरानी झंडे से ढका हुआ दिखाई दिया। उनके साथ हमले में मारे गए परिवार के कुछ सदस्यों के ताबूत भी सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम से जुड़े समारोहों में रखे गए। इस दौरान ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारी भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए तैयार कार्यक्रम केवल तेहरान तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार उनके पार्थिव अवशेषों से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम ईरान और पड़ोसी इराक के महत्वपूर्ण शिया धार्मिक शहरों तक ले जाए जाने की योजना का हिस्सा हैं।

नजफ और कर्बला शिया मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। इसलिए खामेनेई की अंतिम यात्रा को इन शहरों से जोड़ना धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान में शोक का यह समय ऐसे दौर में आया है जब देश लंबे युद्ध, आर्थिक दबाव और राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहा है। युद्ध के कारण बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ा है।

अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है। ईरान लंबे समय से इजराइल को अपना प्रमुख दुश्मन मानता रहा है, जबकि अमेरिका के साथ उसके संबंध 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।

खामेनेई की राजनीति में अमेरिका विरोध केंद्रीय विषयों में से एक था। उन्होंने कई दशकों तक ईरान की स्वतंत्र रणनीतिक नीति, पश्चिमी प्रतिबंधों के विरोध और क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क को समर्थन दिया।

उनके समर्थक उन्हें पश्चिमी दबाव के सामने ईरान को मजबूत रखने वाले नेता के रूप में देखते हैं। दूसरी तरफ उनके आलोचक उनके शासन को राजनीतिक दमन, अभिव्यक्ति पर नियंत्रण और विरोध प्रदर्शनों पर कठोर कार्रवाई से जोड़ते रहे हैं।

यही कारण है कि खामेनेई की विरासत को लेकर ईरान के अंदर और बाहर अलग-अलग विचार मौजूद हैं।

अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ को ईरानी व्यवस्था अपने लिए राष्ट्रीय एकता और समर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश कर सकती है। वहीं आलोचक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या सभी लोगों की भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक है। एक हालिया रिपोर्ट में कर्मचारियों और व्यवसायों पर समारोह में शामिल होने के संभावित दबाव के आरोपों की चर्चा की गई है, हालांकि ऐसे दावों का स्वतंत्र सत्यापन अलग मुद्दा है।

फिलहाल तेहरान की तस्वीरों में शोक और गुस्सा दोनों दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग खामेनेई की तस्वीरें लेकर रोते दिखे, तो कुछ समूह बदले के नारे लगाते दिखाई दिए।

ऐसे नारे मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बनाते हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। युद्ध के बाद किसी स्थायी राजनीतिक समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

ट्रम्प का “एक हफ्ते की छुट्टी” वाला बयान भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। यह टिप्पणी उस समय आई है जब ईरान में विशाल अंतिम संस्कार कार्यक्रम चल रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ट्रम्प अपने भाषणों में अक्सर आक्रामक और व्यक्तिगत शैली का इस्तेमाल करते रहे हैं। ईरान को लेकर उनका ताजा बयान भी उसी राजनीतिक संचार शैली का हिस्सा दिखाई देता है।

लेकिन तेहरान के नजरिए से यह बयान संवेदनशील समय में आया है। देश अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे व्यक्ति की विदाई कर रहा है और जनता के एक हिस्से में युद्ध को लेकर गुस्सा मौजूद है।

खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल ईरान की आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर है। किसी भी देश में लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे नेता के जाने के बाद राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।

ईरान में सुप्रीम लीडर का पद राष्ट्रपति से अधिक शक्तिशाली माना जाता है। रक्षा नीति, सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और प्रमुख रणनीतिक मामलों पर सुप्रीम लीडर का प्रभाव रहता है।

इसलिए खामेनेई की विदाई केवल भावनात्मक घटना नहीं है। यह ईरान के सत्ता परिवर्तन, विदेश नीति और भविष्य की सुरक्षा रणनीति से जुड़ा मामला भी है।

खामेनेई के बाद ईरान अमेरिका और इजराइल के प्रति किस तरह की नीति अपनाता है, यह पूरे मध्य पूर्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। अगर नया नेतृत्व ज्यादा आक्रामक रास्ता चुनता है तो तनाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ बातचीत और समझौते का रास्ता खुलता है तो क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावना बन सकती है।

हालांकि अंतिम संस्कार में बदले के नारों ने यह संकेत जरूर दिया है कि ईरान के अंदर युद्ध की यादें अभी बहुत ताजा हैं।

अंतिम संस्कार कार्यक्रम की एक और खास बात इसका लंबा स्वरूप है। आम तौर पर किसी बड़े राजनीतिक नेता की अंतिम यात्रा एक या दो दिन में पूरी हो सकती है, लेकिन खामेनेई के लिए कई दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसका उद्देश्य अलग-अलग शहरों के लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर देना और खामेनेई की धार्मिक-राजनीतिक विरासत को बड़े राष्ट्रीय आयोजन के रूप में प्रस्तुत करना माना जा रहा है।

ईरान की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश की राजनीतिक व्यवस्था में शिया धार्मिक नेतृत्व की केंद्रीय भूमिका स्थापित हुई।

खामेनेई इसी व्यवस्था के सबसे लंबे समय तक प्रभावशाली नेता रहे। उनके कार्यकाल में ईरान ने एक तरफ पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना किया, दूसरी तरफ अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेला।

सीरिया, इराक, लेबनान और यमन जैसे देशों में ईरान के प्रभाव को लेकर भी लगातार बहस होती रही। ईरान ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को “Axis of Resistance” यानी प्रतिरोध की धुरी के रूप में पेश किया।

खामेनेई के समर्थकों के लिए यही नीति उनकी सबसे बड़ी विरासत में शामिल है। विरोधियों का मानना है कि इस रणनीति की आर्थिक और मानवीय कीमत ईरान के आम लोगों को भी चुकानी पड़ी।

अब जब उनकी अंतिम विदाई हो रही है, इन सभी सवालों पर चर्चा दोबारा तेज हो गई है।

दुनिया की नजर इस बात पर भी है कि अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम या बातचीत की स्थिति किस दिशा में जाती है। ट्रम्प ने अपने बयान में अमेरिकी कार्रवाई को सफलता के रूप में पेश किया है, लेकिन ईरानी जनता के बीच दिखाई दे रहा गुस्सा बताता है कि राजनीतिक समाधान आसान नहीं होगा।

ईरान की सड़कों पर दिखाई देने वाले दृश्य बेहद भावनात्मक हैं। काले कपड़ों में लोग, खामेनेई की तस्वीरें, ईरानी झंडे, धार्मिक नारे और बदले की मांग—ये सभी मौजूदा ईरानी समाज के एक हिस्से की भावना को दिखाते हैं।

इसके साथ ही ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद और सरकार विरोधी विचार भी मौजूद हैं। इसलिए अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ को पूरे देश के हर नागरिक की एक जैसी राजनीतिक सोच के प्रमाण के रूप में देखना भी सावधानी मांगता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खामेनेई की अंतिम विदाई ने एक बार फिर ईरान-अमेरिका तनाव को दुनिया की सुर्खियों में ला दिया है।

तेहरान में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच “बदला” और अमेरिका विरोधी नारे सुनाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की राहत दी है।

आने वाले दिन यह तय कर सकते हैं कि यह विराम वास्तव में कूटनीतिक बातचीत की ओर बढ़ता है या फिर दोनों देशों के बीच नई बयानबाजी और सैन्य तनाव का दौर शुरू होता है।

खामेनेई की विदाई के बाद ईरान की नई राजनीतिक रणनीति, अमेरिका की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय शक्तियों का रुख पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होगा। खास तौर पर तेल बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर किसी भी नए तनाव का व्यापक असर पड़ सकता है।

फिलहाल ईरान शोक में है। तेहरान में काले कपड़ों में विशाल भीड़ अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई को विदाई दे रही है। लेकिन शोक के साथ सुनाई दे रहे बदले के नारे बताते हैं कि यह कहानी केवल एक अंतिम संस्कार की नहीं है।

यह कहानी युद्ध, सत्ता, धर्म, राजनीति और उस भविष्य की है जिसकी दिशा अभी तय नहीं हुई है।

खामेनेई का युग समाप्त हो चुका है, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत, अमेरिका के साथ दशकों पुरानी दुश्मनी और ईरान के सामने मौजूद चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं। अब दुनिया की नजर इस पर होगी कि अंतिम विदाई के बाद ईरान किस दिशा में आगे बढ़ता है और ट्रम्प प्रशासन उसके प्रति अगला कदम क्या उठाता है।

 

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