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मध्य प्रदेश में विकास की कीमत: वर्ष 2026 में 15 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई

सड़क, रेलवे, मेट्रो, कोयला खनन और बिजली परियोजनाओं के नाम पर हरियाली पर आरी

मध्य प्रदेश, जिसे देश का “हरित हृदय” कहा जाता है, एक बार फिर बड़े पर्यावरणीय संकट के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2026 में राज्य भर में करीब 15 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है। यह कटाई सड़क, रेलवे, मेट्रो, कोयला खनन, बिजली परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के नाम पर की जा रही है।

सरकार इसे विकास की आवश्यकता बता रही है, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता इसे हरियाली की सुनियोजित हत्या करार दे रहे हैं।


कहां-कहां कटेंगे सबसे ज्यादा पेड़?

अख़बार में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, पेड़ कटाई का सबसे बड़ा भार कुछ चुनिंदा जिलों और परियोजनाओं पर पड़ेगा।

1. सिंगरौली, मंडला और डिंडौरी

2. कोल ब्लॉक परियोजनाएं


इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और हरियाली

राज्य सरकार की विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कारण भी बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं।

सड़क, रेलवे और मेट्रो परियोजनाएं

इन परियोजनाओं को विकास की रीढ़ बताया जा रहा है, लेकिन इनके पर्यावरणीय प्रभाव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


डैम, नहर और पावर प्लांट का असर

मंडला और डिंडौरी

बिजली और औद्योगिक परियोजनाएं


50 से 100 साल पुराने पेड़ों की बलि

विशेषज्ञों का कहना है कि कटने वाले पेड़ों में बड़ी संख्या ऐसे पेड़ों की है, जिनकी उम्र 50 से 100 साल तक है।


सरकार का पक्ष: विकास जरूरी

राज्य सरकार का कहना है कि:

सरकारी अधिकारियों का दावा है कि हर कटे पेड़ के बदले कई नए पौधे लगाए जाएंगे।


विशेषज्ञों की चेतावनी

पर्यावरण विशेषज्ञ इस दावे से सहमत नहीं हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार:

पर्यावरणविदों का कहना है कि यह स्थिति इकोलॉजिकल बैलेंस को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी।


जलवायु परिवर्तन और बढ़ता खतरा

पेड़ कटाई का सीधा असर:

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में अगर जंगलों का यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गर्मी और भयावह रूप ले सकती है।


स्थानीय लोगों पर असर

जंगलों पर निर्भर आदिवासी और ग्रामीण समुदाय इस कटाई से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

कई इलाकों में स्थानीय लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया है, लेकिन विकास परियोजनाओं के सामने उनकी आवाज कमजोर पड़ती दिख रही है।


क्या कोई विकल्प नहीं?

विशेषज्ञों का मानना है कि:

कुछ राज्यों में ग्रीन कॉरिडोर मॉडल अपनाकर पेड़ों की कटाई कम की गई है, जिसे मध्य प्रदेश में भी लागू किया जा सकता है।


पर्यावरण बनाम विकास की बहस

यह मुद्दा एक बार फिर विकास बनाम पर्यावरण की बहस को सामने ले आया है।

ये सवाल अब राज्य और समाज दोनों के सामने खड़े हैं।


मध्य प्रदेश में प्रस्तावित 15 लाख पेड़ों की कटाई केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। विकास के नाम पर अगर प्राकृतिक संसाधनों को इसी तरह नष्ट किया गया, तो इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे।

जरूरत इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाए, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ-साथ हरियाली और जीवन भी सुरक्षित रह सके।

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