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कार डिप्लोमेसी: मोदी-पुतिन फिर कार में बैठे, 12 दिनों में दूसरी बार; 11 नेताओं के साथ दिखे PM मोदी

11 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद एक बार फिर दोनों नेताओं की एक ही कार में बैठकर सफर करने वाली तस्वीरें और वीडियो चर्चा में आ गए। यह सिर्फ एक छोटी कार यात्रा नहीं थी, बल्कि भारत-रूस संबंधों में व्यक्तिगत गर्मजोशी और भरोसे के प्रतीक के तौर पर देखी जा रही है। खास बात यह है कि करीब 12 दिनों के भीतर दोनों नेता दूसरी बार एक साथ कार में नजर आए हैं। इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO से जुड़े कार्यक्रम के दौरान मोदी और पुतिन ने रूस की Aurus Senat कार में साथ सफर किया था। उस समय भी दोनों की कार राइड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

11 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। बातचीत में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। बैठक के बाद दोनों नेता INNOPROM औद्योगिक प्रदर्शनी में जाने के लिए एक ही कार में रवाना हुए। यानी इस बार भी कार यात्रा किसी सामान्य निजी कार्यक्रम के बजाय एक आधिकारिक कार्यक्रम से जुड़ी थी।

यही वजह है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे एक बार फिर “कार डिप्लोमेसी” या “कारप्लोमेसी” कहा जा रहा है। हालांकि कार में साथ बैठना अपने आप में कोई औपचारिक राजनयिक समझौता नहीं होता, लेकिन ऐसे अनौपचारिक क्षण नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों, सहज संवाद और राजनीतिक संदेश को जरूर मजबूत कर सकते हैं। खासकर तब, जब दुनिया की राजनीति में भारत और रूस दोनों कई जटिल परिस्थितियों से गुजर रहे हों।

मोदी-पुतिन की यह दूसरी कार राइड ऐसे समय हुई है जब रूस के राष्ट्रपति BRICS Summit के लिए भारत पहुंचे हैं। पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे और 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। BRICS का विस्तार होने के बाद संगठन का वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक महत्व भी बढ़ा है।

भारत और रूस के बीच रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच दशकों पुराना सहयोग है, जबकि हाल के वर्षों में ऊर्जा और विशेष रूप से रूसी कच्चे तेल की खरीद ने भारत-रूस आर्थिक संबंधों को नई दिशा दी है। Reuters के अनुसार 2026 में मध्य-पूर्व की आपूर्ति बाधित होने के बीच रूस भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख स्रोतों में बना हुआ है और कुछ समय में रूसी crude की हिस्सेदारी भारत के आयात में 51 प्रतिशत तक पहुंची। दोनों देश 2024-25 में करीब 70 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी रखते हैं।

मोदी-पुतिन की कार डिप्लोमेसी का नया अध्याय हालांकि 2026 में अचानक शुरू नहीं हुआ। दोनों नेताओं की अनौपचारिक मुलाकातों और निजी बातचीत का सिलसिला पहले भी देखने को मिला है। 2025 में चीन के तियानजिन में SCO Summit के दौरान दोनों नेता एक ही Aurus कार में बैठे थे। उस यात्रा को खास इसलिए माना गया क्योंकि कार के अंदर दोनों ने लंबा समय साथ बिताया था और औपचारिक बैठक से बाहर सीधे बातचीत का मौका मिला था। बाद में दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी मोदी और पुतिन एक ही कार में नई दिल्ली में सफर करते नजर आए थे।

इसके बाद 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में फिर वही तस्वीर सामने आई। मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय मुलाकात के बाद World Nomad Games के उद्घाटन समारोह की ओर जाने के लिए एक ही कार में सफर किया। मोदी ने इस यात्रा की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की थी। रिपोर्टों के अनुसार यह रूसी राष्ट्रपति की आधिकारिक Aurus Senat कार थी। इस घटना ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी कि दोनों नेताओं के बीच औपचारिक कूटनीति के साथ-साथ व्यक्तिगत संवाद का स्तर भी काफी मजबूत है।

अब सवाल यह है कि आखिर कार में साथ सफर करना कूटनीति में इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? सामान्य तौर पर किसी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की यात्रा बेहद सख्त प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था के तहत होती है। हर नेता के लिए अलग सुरक्षा वाहन, अलग काफिला और तय कार्यक्रम होता है। ऐसे में जब दो शीर्ष नेता औपचारिक कार्यक्रम के बीच एक ही कार में बैठते हैं तो यह दृश्य आम तौर पर सहजता और व्यक्तिगत संपर्क का संदेश देता है।

यह जरूरी नहीं कि कार के अंदर होने वाली हर बातचीत का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड जारी किया जाए। बल्कि इसी अनौपचारिकता को “कार डिप्लोमेसी” की खासियत माना जाता है। नेता कुछ मुद्दों पर बिना कैमरों और बड़े सम्मेलन कक्ष के माहौल में बातचीत कर सकते हैं। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि कार में बैठने से कोई बड़ी नीति या समझौता अपने आप तय हो जाता है। असली फैसले आधिकारिक वार्ताओं, मंत्रालयों और कूटनीतिक चैनलों के जरिए ही होते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मामले में ऐसी कार यात्राएं पिछले कई वर्षों में अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ दिखाई दी हैं। 2014 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मोदी की कार यात्रा को अक्सर इस सिलसिले की शुरुआती चर्चित घटनाओं में गिना जाता है। अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों नेता अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक कार “The Beast” में साथ नजर आए थे। यह छोटा लेकिन प्रतीकात्मक सफर भारत-अमेरिका संबंधों में व्यक्तिगत संपर्क की चर्चा का हिस्सा बना।

इसके बाद जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ मोदी की नजदीकी भी कई सार्वजनिक मौकों पर दिखाई दी। 2017 में गुजरात में दोनों नेताओं ने एक वाहन के जरिए रोड शो में हिस्सा लिया था। अहमदाबाद में दोनों नेताओं के बीच जिस तरह की सहजता दिखाई दी, उसे भारत-जापान संबंधों की गर्मजोशी के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया। हालांकि इसे हर बार उसी अर्थ में “एकांत कार डिप्लोमेसी” कहना सही नहीं होगा, क्योंकि यह एक सार्वजनिक रोड शो था। फिर भी मोदी की कार-आधारित कूटनीतिक छवियों की चर्चित सूची में आबे का नाम अक्सर शामिल किया जाता है।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ तो यह सिलसिला कई बार दोहराया जा चुका है। 2025 में तियानजिन, दिसंबर 2025 में नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026 को बिश्केक और अब 11 सितंबर 2026 को दिल्ली—इन घटनाओं ने मोदी-पुतिन की कार डिप्लोमेसी को दूसरे नेताओं की तुलना में ज्यादा लगातार बना दिया है। यही वजह है कि दोनों की नई कार राइड को सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि दोनों देशों के रिश्तों की व्यक्तिगत गर्मजोशी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ भी मोदी की एक कार यात्रा चर्चा में रही है। अक्टूबर 2025 में मुंबई में Global Fintech Fest के लिए जाते समय दोनों एक ही कार में नजर आए थे। उस समय मोदी ने भारत-ब्रिटेन दोस्ती को “on the move” बताते हुए तस्वीर साझा की थी। यहां भी कार यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के प्रतीक के रूप में देखा गया।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ जनवरी 2026 में गुजरात यात्रा के दौरान मोदी ने एक ही कार में सफर किया। मर्ज की भारत यात्रा के दौरान दोनों ने साबरमती आश्रम समेत कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और कार यात्रा की तस्वीरें सामने आईं। मोदी ने इसे भारत-जर्मनी दोस्ती और साझा मूल्यों के संदर्भ में पेश किया था।

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ भी फरवरी 2026 में मोदी ने एक ही कार में सफर किया। कुआलालंपुर पहुंचने के बाद अनवर इब्राहिम ने मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया और दोनों एक ही कार से भारतीय समुदाय के कार्यक्रम की ओर रवाना हुए। मोदी ने उस मौके को भारत-मलेशिया के people-to-people connect से जोड़ा था।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भी फरवरी 2026 में मुंबई में दोनों नेताओं की एक ही कार में तस्वीर सामने आई। दोनों India-France Innovation Forum में जाने के लिए साथ यात्रा करते दिखे। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और तकनीक जैसे क्षेत्रों में गहरे संबंध हैं, इसलिए ऐसे अनौपचारिक दृश्य को दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों की गर्मजोशी के साथ जोड़ा गया।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भी मोदी की कार यात्रा 2026 में चर्चा में रही। मोदी के Knesset संबोधन के बाद दोनों एक टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी की ओर एक ही कार में गए। मोदी ने इस मौके की तस्वीर साझा करते हुए तकनीकी प्रगति से जुड़े कार्यक्रम का उल्लेख किया था। रिपोर्टों ने इसे भारत-इजराइल संबंधों में व्यक्तिगत संपर्क और गर्मजोशी के संकेत के रूप में देखा।

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी मोदी की कार डिप्लोमेसी चर्चा में आई। जनवरी 2026 में UAE राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने पर मोदी खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे और दोनों को एक ही कार में रवाना होते देखा गया। मोदी ने उस समय सोशल मीडिया पर उन्हें “my brother” कहकर स्वागत किया था। भारत-UAE रिश्तों में ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए ऐसे व्यक्तिगत स्वागत के दृश्य को भी कूटनीतिक गर्मजोशी से जोड़ा गया।

जॉर्डन के क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला II के साथ दिसंबर 2025 में हुई कार यात्रा भी इसी सूची में आती है। जॉर्डन यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंस खुद मोदी को Jordan Museum तक लेकर गए थे। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है—क्राउन प्रिंस राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री नहीं हैं, इसलिए “11 world leaders” की गिनती में उन्हें शामिल करना परिभाषा पर निर्भर करता है। लेकिन मीडिया रिपोर्टों में उन्हें मोदी की कार डिप्लोमेसी के उदाहरणों में शामिल किया गया है।

इसी तरह इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने भी दिसंबर 2025 में मोदी का एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया और उन्हें कार से होटल तक लेकर गए। यह भी मोदी की अनौपचारिक कूटनीति के चर्चित उदाहरणों में शामिल हुआ। यानी हर घटना में कार की स्थिति एक जैसी नहीं थी—कहीं मोदी किसी दूसरे नेता के साथ बैठे, कहीं विदेशी नेता ने खुद मोदी को ड्राइव किया, और कहीं दोनों ने एक ही वाहन से कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इसलिए “2014 से मोदी 11 वर्ल्ड लीडर्स के साथ कार में बैठ चुके हैं” को बिल्कुल गणितीय और आधिकारिक सूची की तरह नहीं लेना चाहिए। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में सूची थोड़ी अलग मिलती है। कुछ रिपोर्टों में बराक ओबामा, शिंजो आबे, व्लादिमीर पुतिन, कीर स्टारमर, फ्रेडरिक मर्ज, इमैनुएल मैक्रों, बेंजामिन नेतन्याहू, अनवर इब्राहिम, मोहम्मद बिन जायद, अबी अहमद और जॉर्डन के क्राउन प्रिंस जैसे नाम मिलते हैं। कुछ रिपोर्टें उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव जैसे अन्य नेताओं के साथ यात्रा के उदाहरण भी देती हैं। इसलिए “11” को मीडिया द्वारा इस्तेमाल की गई प्रमुख सूची के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा, न कि भारत सरकार की कोई आधिकारिक रैंकिंग।

मोदी की इस शैली का एक और पहलू है—प्रोटोकॉल और पर्सनल कनेक्ट के बीच संतुलन। दुनिया के बड़े नेताओं के दौरे में सुरक्षा और प्रोटोकॉल बेहद सख्त होते हैं। खासकर पुतिन, शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति जैसे नेताओं की भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर होती है। BRICS Summit के लिए दिल्ली में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और विदेशी सुरक्षा दल भी पहले से पहुंच चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीन और रूस के सुरक्षा दल अपने उपकरणों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं और दोनों देशों के नेता अपने कुछ बख्तरबंद काफिला वाहनों को विमान से भी ला सकते हैं।

ऐसे माहौल में मोदी और पुतिन का एक ही वाहन में जाना इसलिए भी आकर्षक दृश्य बन जाता है क्योंकि यह भारी सुरक्षा और औपचारिकता के बीच एक सहज मानवीय तस्वीर देता है। हालांकि सुरक्षा के वास्तविक इंतजाम पर्दे के पीछे बने रहते हैं और केवल कार की तस्वीर से उनकी पूरी जानकारी नहीं मिलती।

मोदी-पुतिन की 11 सितंबर की मुलाकात का महत्व केवल कार यात्रा तक सीमित नहीं है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखे हुए है, जबकि पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। भारत की विदेश नीति में रूस, अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और चीन सभी के साथ अलग-अलग रणनीतिक समीकरण हैं। ऐसे में पुतिन के साथ व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखना भारत के लिए व्यापक रणनीतिक संतुलन का हिस्सा भी है।

PM मोदी और पुतिन की आज की बैठक में वैश्विक संघर्षों पर भी चर्चा हुई। Reuters के अनुसार मोदी ने West Asia और Black Sea क्षेत्र में संघर्षों से व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया और संवाद तथा कूटनीति के जरिए समाधान की बात दोहराई। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया।

इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि एक कार यात्रा कभी-कभी कई आधिकारिक भाषणों से ज्यादा चर्चा पैदा कर देती है। कार में साथ बैठना कोई treaty नहीं है, न ही इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दोनों देशों ने कोई गुप्त समझौता कर लिया। लेकिन तस्वीरें जनता और दुनिया के सामने एक संदेश जरूर रखती हैं—दो नेता एक-दूसरे के साथ सहज हैं, बातचीत के लिए तैयार हैं और रिश्ते को व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्व देते हैं।

मोदी-पुतिन की 31 अगस्त और 11 सितंबर की लगातार कार यात्राएं इसी वजह से खास हैं। दो सप्ताह से भी कम समय में दोनों नेताओं की यह दूसरी साझा कार यात्रा बताती है कि दोनों के बीच अनौपचारिक संपर्क की गुंजाइश बनी हुई है। पहली यात्रा SCO से जुड़े कार्यक्रम में थी और दूसरी BRICS Summit से पहले दिल्ली में हुई। दोनों मौकों पर कार यात्रा आधिकारिक कार्यक्रम से जुड़ी थी, लेकिन उसकी तस्वीर ने कूटनीतिक चर्चा को अलग ही रंग दे दिया।

आने वाले दिनों में BRICS Summit के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य नेताओं के साथ बैठकें भी होंगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कार डिप्लोमेसी का यह पैटर्न आगे भी जारी रहता है। फिलहाल 11 सितंबर की मोदी-पुतिन कार राइड ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि आधुनिक कूटनीति केवल सम्मेलन कक्ष, हाथ मिलाने और संयुक्त बयान तक सीमित नहीं है। कभी-कभी एक छोटी सी कार यात्रा भी देशों के रिश्तों की गर्माहट, व्यक्तिगत विश्वास और राजनीतिक संदेश को दुनिया के सामने रखने का माध्यम बन जाती है।

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http://प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही कार में सवार

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