सोशल मीडिया की दुनिया में बिना एक शब्द बोले पहचान बनाने वाले इटली के मशहूर डिजिटल क्रिएटर खाबी लैम अब एक नए युग में कदम रखने जा रहे हैं। टिकटॉक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी सादगी, मूक हास्य और सीधे-सपाट अंदाज से करोड़ों दिल जीतने वाले खाबी लैम अब दुनिया के सबसे महंगे इन्फ्लुएंसर बन चुके हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी डिजिटल पहचान और वर्चुअल पर्सनैलिटी से जुड़े अधिकार करीब 9 हजार करोड़ रुपये में बेच दिए हैं। यह डील न सिर्फ सोशल मीडिया इंडस्ट्री में अब तक की सबसे बड़ी डील मानी जा रही है, बल्कि यह बताती है कि आने वाले समय में कंटेंट क्रिएशन और ब्रांडिंग किस दिशा में बढ़ने वाली है।
खाबी लैम ने जिस तरह से बिना बोले रिएक्शन वीडियो बनाकर दुनियाभर में पहचान बनाई, वह अपने आप में एक मिसाल है। उनकी पहचान किसी भाषा, संस्कृति या देश तक सीमित नहीं रही। साधारण से चेहरे और सामान्य हाव-भाव के जरिए उन्होंने जटिल लाइफ हैक्स का मजाक उड़ाया और लोगों को हंसने के साथ सोचने पर मजबूर किया। यही सार्वभौमिक अपील आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई है।
कोरोना महामारी के दौर में जब दुनिया भर में लाखों लोग बेरोजगारी और अनिश्चितता से जूझ रहे थे, उसी दौरान खाबी लैम की किस्मत ने करवट ली। फैक्ट्री में काम करने वाले खाबी की नौकरी चली गई, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय सोशल मीडिया को अपना मंच बना लिया। घर में बैठे-बैठे बनाए गए छोटे-छोटे वीडियो देखते ही देखते वायरल होने लगे। बिना बोले दी जाने वाली प्रतिक्रिया लोगों को इतनी पसंद आई कि खाबी देखते ही देखते सोशल मीडिया के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए।
आज खाबी लैम के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करीब 36 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। टिकटॉक पर वे दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले क्रिएटर बन चुके हैं। उनकी लोकप्रियता सिर्फ व्यूज और लाइक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े-बड़े ब्रांड्स ने भी उन्हें अपने कैंपेन का चेहरा बनाया। फैशन, टेक्नोलॉजी, गेमिंग और क्रिप्टो जैसी इंडस्ट्री से जुड़े ब्रांड्स उनके साथ काम करने के लिए कतार में खड़े रहे।
अब खाबी लैम ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने सोशल मीडिया की परिभाषा ही बदल दी है। एक अंतरराष्ट्रीय AI और डिजिटल कंटेंट कंपनी के साथ उन्होंने ऐतिहासिक समझौता किया है, जिसके तहत उनके डिजिटल पर्सनैलिटी राइट्स, फेस-आइडेंटिटी, बॉडी लैंग्वेज, वॉयस पैटर्न और बिहेवियर मॉडल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए डिजिटल अवतार में बदला जाएगा। इस डील की कुल कीमत करीब 8,900 से 9,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस समझौते के बाद दर्शक खाबी लैम से सीधे उनके AI अवतार के जरिए जुड़ सकेंगे। इसका मतलब यह है कि खाबी का वर्चुअल वर्जन लाइव स्ट्रीमिंग कर सकेगा, अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट बना सकेगा और दुनियाभर के दर्शकों से रियल-टाइम में बातचीत भी कर पाएगा। खास बात यह है कि यह AI अवतार खाबी की तरह ही प्रतिक्रिया देगा, उसी अंदाज में इशारे करेगा और उसी तरह के एक्सप्रेशन दिखाएगा, जिसने उन्हें स्टार बनाया।
डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह डील सोशल मीडिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अब तक ब्रांड्स इंसानों के समय और मौजूदगी पर निर्भर थे, लेकिन AI अवतार के जरिए एक इन्फ्लुएंसर 24 घंटे, बिना थके, बिना सीमाओं के दुनिया के किसी भी कोने में कंटेंट दे सकेगा। इससे ब्रांड वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है।
इस डील से खाबी लैम को जहां आर्थिक रूप से जबरदस्त फायदा होगा, वहीं उन्हें कंटेंट बनाने के पारंपरिक दबाव से भी राहत मिलेगी। वे चाहें तो कैमरे से दूर रहकर भी अपने फैंस से जुड़े रह सकते हैं। डिजिटल अवतार उनके लिए काम करेगा, जबकि वे नई क्रिएटिव योजनाओं, सामाजिक कार्यों और बिजनेस प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे सकेंगे।
बताया जा रहा है कि इस समझौते के तहत AI अवतार का इस्तेमाल विज्ञापन, ब्रांड प्रमोशन, वर्चुअल इवेंट्स, गेमिंग, मेटावर्स और यहां तक कि फिल्मों और वेब सीरीज में भी किया जा सकेगा। कंपनी का दावा है कि खाबी का AI अवतार दर्शकों की भावनाओं को समझने में सक्षम होगा और उनके सवालों का जवाब उसी अंदाज में देगा, जैसा असली खाबी देते हैं।
हालांकि इस डील को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोग इसे टेक्नोलॉजी की बड़ी छलांग मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे “मानवीय जुड़ाव” खत्म हो सकता है। आलोचकों का मानना है कि AI अवतार असली भावनाओं की जगह नहीं ले सकता और इससे कंटेंट की आत्मा खो सकती है।
वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह बदलाव अपरिहार्य है। जैसे पहले रेडियो से टीवी, टीवी से इंटरनेट और फिर सोशल मीडिया आया, उसी तरह अब AI-ड्रिवन डिजिटल पर्सनैलिटी अगला कदम है। खाबी लैम की डील इस बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।
खुद खाबी लैम ने इस डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे तकनीक को दुश्मन नहीं, बल्कि अवसर मानते हैं। उनके अनुसार AI उनके काम को आसान बनाएगा और उन्हें दुनिया के और करीब लाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मूल मूल्य, सादगी और ईमानदारी बनी रहेगी, चाहे माध्यम कोई भी हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में कई बड़े इन्फ्लुएंसर, कलाकार और खिलाड़ी भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं। डिजिटल अवतार और AI पर्सनैलिटी राइट्स एक नई इंडस्ट्री का रूप ले सकते हैं, जहां असली पहचान से ज्यादा उसकी डिजिटल कॉपी की कीमत होगी।
भारत जैसे देशों में, जहां युवा आबादी और सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इस ट्रेंड का असर जल्दी देखने को मिल सकता है। ब्रांड्स पहले ही वर्चुअल इन्फ्लुएंसर और AI मॉडल्स पर प्रयोग कर रहे हैं। खाबी लैम की यह डील इस ट्रेंड को वैश्विक मान्यता देती है।
कुल मिलाकर, खाबी लैम का यह कदम सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि डिजिटल दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ रही है। बिना बोले दुनिया जीतने वाले खाबी अब बिना मौजूद रहे भी दर्शकों से जुड़े रहेंगे। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या दर्शक असली और आभासी के फर्क को उतनी ही सहजता से स्वीकार कर पाएंगे?