NCERT Class 9 New Book 2026: फ्रांसीसी-रूसी क्रांति हटाई, रानी अब्बक्का और 7वीं सदी का भारत जुड़ा

कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई का स्वरूप अब पहले से काफी अलग दिखाई देगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने कक्षा 9 की Social Science की संशोधित किताब ‘Understanding Society: India and Beyond’ का नया Part 2 जारी किया है। इस नई किताब में इतिहास को पहले की तरह केवल अलग-अलग घटनाओं और यूरोप की प्रमुख राजनीतिक क्रांतियों के क्रम में रखने के बजाय भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय प्रतिरोध, सभ्यताओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सामाजिक-आर्थिक विषयों के साथ जोड़कर पेश किया गया है। नई किताब 29 सितंबर 2026 को जारी हुई और इसमें कई पुराने अध्यायों की जगह नए विषय शामिल किए गए हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि पुरानी कक्षा 9 की इतिहास की किताब में प्रमुखता से पढ़ाए जाने वाले फ्रांसीसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति तथा नाजीवाद और हिटलर के उदय जैसे विषय अब कक्षा 9 की किताब में उसी रूप में मौजूद नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्व इतिहास के इन हिस्सों को कक्षा 10 के स्तर पर ले जाया गया है। इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि इन विषयों को पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था से खत्म कर दिया गया है, ऐसा नहीं है; कक्षा 9 की किताब की संरचना में इनका स्थान बदल गया है।

नई किताब का एक बड़ा हिस्सा भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास और यहां हुए सामाजिक तथा राजनीतिक बदलावों पर केंद्रित है। खास तौर पर मध्यकालीन भारत को समझाने के लिए ‘Resistance and Resilience’ यानी प्रतिरोध और दृढ़ता की थीम को प्रमुख स्थान दिया गया है। इस अध्याय में 1000 से 1700 ईस्वी के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए संघर्षों और सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध की घटनाओं को शामिल किया गया है। इसी क्रम में रानी नायकी देवी और रानी अब्बक्का चौटा जैसी महिला शासकों का भी उल्लेख किया गया है।

नई किताब में 7वीं सदी से भारत पर विशेष जोर

नई किताब में भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास को एक अलग दृष्टिकोण से समझाने की कोशिश की गई है। पुस्तक के अनुसार 7वीं सदी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में अलग-अलग बाहरी शक्तियों के आक्रमण और राजनीतिक विस्तार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही स्थानीय राजाओं, समुदायों और अलग-अलग क्षेत्रों की ओर से किए गए प्रतिरोध को भी जगह दी गई है। इसमें अरब, तुर्क, मुगल और यूरोपीय शक्तियों के संदर्भ में भारत के विभिन्न हिस्सों की राजनीतिक परिस्थितियों का वर्णन किया गया है।

इस नए दृष्टिकोण में केवल दिल्ली या किसी एक केंद्रीय सत्ता का इतिहास बताने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों के शासकों और स्थानीय प्रतिरोध को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि विद्यार्थी भारत के इतिहास को केवल बड़े साम्राज्यों के माध्यम से नहीं बल्कि क्षेत्रीय राज्यों, स्थानीय शक्तियों और उनके संघर्षों के माध्यम से भी देखेंगे।

नई किताब में 1178 में चालुक्य शासक रानी नायकी देवी और मुहम्मद गोरी के बीच हुए संघर्ष का उल्लेख भी किया गया है। पुस्तक के अनुसार नायकी देवी ने कासरहाड़ा, माउंट आबू के पास, मुहम्मद गोरी की सेना का सामना किया था। यह प्रसंग नई किताब में मध्यकालीन भारत में प्रतिरोध की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में शामिल है।

यहां यह भी समझना जरूरी है कि पाठ्यपुस्तक किसी घटना को जिस तरीके से प्रस्तुत करती है, वह उस घटना की शैक्षणिक व्याख्या का हिस्सा है। इतिहास में कई घटनाओं के अलग-अलग स्रोत और व्याख्याएं मिलती हैं। इसलिए विद्यार्थियों के लिए केवल घटना याद करना ही नहीं, बल्कि उसके समय, स्रोत और संदर्भ को समझना भी महत्वपूर्ण है।

रानी अब्बक्का चौटा की कहानी भी किताब में

नई किताब में रानी अब्बक्का चौटा का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। अब्बक्का चौटा उल्लाल की शासक थीं और उन्हें पुर्तगाली शक्तियों के खिलाफ प्रतिरोध से जोड़ा जाता है। नई NCERT किताब में उनका उल्लेख उन क्षेत्रीय महिला शासकों के संदर्भ में किया गया है जिनकी भूमिका पारंपरिक इतिहास की किताबों में अपेक्षाकृत कम दिखाई देती थी।

रानी अब्बक्का को शामिल करने से दक्षिण भारत के इतिहास को भी कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में अधिक जगह मिलती है। इतिहास की पढ़ाई में अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित राजवंशों और बड़े साम्राज्यों पर ज्यादा ध्यान रहता है, जबकि क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका कम विस्तार से सामने आती है। नई किताब में इस तरह के उदाहरण जोड़कर अलग-अलग क्षेत्रों के ऐतिहासिक अनुभवों को एक साथ रखने की कोशिश दिखाई देती है।

इसी अध्याय में भारतीय इतिहास के कई दूसरे प्रतिरोधों और राजनीतिक घटनाओं को भी जोड़ा गया है। किताब में सिख गुरुओं और खालसा की स्थापना से जुड़े प्रसंग भी शामिल हैं। इसके अलावा मुगल सत्ता के खिलाफ जाटों के प्रतिरोध और विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के संघर्षों का उल्लेख किया गया है।

फ्रांसीसी और रूसी क्रांति का क्या हुआ?

पुरानी कक्षा 9 Social Science व्यवस्था में इतिहास के लिए ‘India and the Contemporary World-I’ जैसी किताब इस्तेमाल होती थी। इसमें फ्रांसीसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति, नाजीवाद और हिटलर का उदय जैसे विषय शामिल थे। नई एकीकृत Social Science संरचना में इन विषयों को कक्षा 9 के पुराने ढांचे से हटाया गया है।

इस बदलाव को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर ध्यान में रखना होगा। समाचारों की सुर्खियों में अक्सर कहा जा रहा है कि ‘फ्रांसीसी क्रांति और रूसी क्रांति किताब से गायब हो गईं’, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार विश्व इतिहास से जुड़े इन विषयों को कक्षा 10 में स्थानांतरित किया गया है। यानी मामला केवल किसी ऐतिहासिक घटना को पूरी तरह पाठ्यक्रम से निकाल देने का नहीं बल्कि कक्षा और अध्याय संरचना बदलने का भी है।

नई व्यवस्था में कक्षा 9 का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप और भारतीय सभ्यता के लंबे ऐतिहासिक विकास पर अधिक ध्यान देता है। वहीं विश्व इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण आधुनिक विषयों को आगे की कक्षा में पढ़ाने की योजना बनाई गई है। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग कक्षाओं में इतिहास पढ़ने का क्रम बदलता हुआ दिखाई देगा।

नाजीवाद और हिटलर का अध्याय भी कक्षा 9 में नहीं

नई किताब से जिस पुराने हिस्से को लेकर चर्चा है, उसमें ‘Nazism and the Rise of Hitler’ भी शामिल है। पहले यह कक्षा 9 के इतिहास पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण भाग था। इसमें प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की परिस्थितियों, वाइमर गणराज्य, हिटलर के उदय और नाजी शासन के प्रभाव जैसे विषय पढ़ाए जाते थे। संशोधित कक्षा 9 की किताब में यह अध्याय पुराने रूप में नहीं है।

इसी तरह ‘Forest Society and Colonialism’ और ‘Pastoralists in the Modern World’ जैसे कुछ अन्य पुराने विषय भी नई कक्षा 9 की संरचना में उसी तरह नहीं रखे गए हैं। नई किताब का ढांचा अधिक एकीकृत है, जिसमें इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र से जुड़े विषयों को एक ही Social Science पुस्तक के भीतर जोड़ा गया है।

अब अलग-अलग किताबों की जगह एकीकृत Social Science

नई कक्षा 9 की किताब का सबसे बड़ा बदलाव केवल अध्यायों की सूची में नहीं बल्कि पूरी पुस्तक की संरचना में है। पहले Social Science के अलग-अलग हिस्सों के लिए इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र की अलग किताबें थीं। संशोधित व्यवस्था में इन्हें ‘Understanding Society: India and Beyond’ के रूप में एकीकृत किया गया है।

नई किताब के Part 2 में इतिहास के साथ-साथ शासन, सार्वजनिक नीति और आर्थिक जीवन से संबंधित विषयों को भी जोड़ा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें taxation, insurance और entrepreneurship जैसे आधुनिक जीवन से जुड़े विषयों पर भी ध्यान दिया गया है। इसका उद्देश्य सामाजिक विज्ञान को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और भविष्य की समझ से जोड़ना बताया गया है।

इस तरह किताब का उद्देश्य केवल पुराने घटनाक्रम को याद करवाना नहीं है। पाठ्यपुस्तक के foreword में NCERT प्रमुख दिनेश सकलानी ने सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई से analytical और discursive abilities, critical inquiry और intercultural understanding विकसित करने पर जोर दिया है।

प्राचीन सभ्यताओं और शुरुआती मानव इतिहास को भी जगह

नई संरचना में भारतीय इतिहास के साथ-साथ मानव सभ्यता के शुरुआती विकास को भी महत्व दिया गया है। नए अध्याय ‘Early Humans and Beginning of Human Civilisation’ में मानव समाज के शिकार और संग्रह से कृषि की ओर बढ़ने जैसे विकास को समझाया गया है। इसमें मेसोपोटामिया, हड़प्पा, मिस्र और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं का भी संदर्भ दिया गया है।

इसका मतलब है कि नई किताब इतिहास को केवल राजाओं और युद्धों की कहानी के रूप में नहीं देखती। मानव समाज किस तरह विकसित हुआ, कृषि और स्थायी बस्तियों का विकास कैसे हुआ और शुरुआती सभ्यताओं ने सामाजिक संगठन तथा तकनीक में क्या योगदान दिया, ऐसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

यह बदलाव विद्यार्थियों को इतिहास की शुरुआत बहुत पीछे तक ले जाता है। इसके बाद पुस्तक भारतीय सभ्यता और भारतीय उपमहाद्वीप के राजनीतिक-सामाजिक विकास की ओर बढ़ती है।

शिवाजी और दूसरे क्षेत्रीय शासकों से जुड़े प्रसंग

नई किताब में कुछ ऐसे प्रसंग भी शामिल किए गए हैं जो इतिहास और परंपरा के बीच संबंध को सामने रखते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पुस्तक में छत्रपति शिवाजी, बस्तर के शासक अन्नमरजा और विजयनगर के राजकुमार कुमार कम्पणा से जुड़ी उन परंपराओं का उल्लेख है जिनमें उन्हें देवी से तलवार प्राप्त होने की मान्यता का वर्णन मिलता है।

ऐसे प्रसंगों में ‘विश्वास’ और ‘ऐतिहासिक तथ्य’ के बीच अंतर समझना विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। किसी पाठ्यपुस्तक में किसी परंपरा का उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं कि उस परंपरा में मौजूद हर तत्व को आधुनिक इतिहासलेखन में प्रमाणित तथ्य माना जाता है। नई किताब इन प्रसंगों को परंपराओं और ऐतिहासिक आख्यानों के संदर्भ में रखती है।

‘India and the World’ को भी आगे किया गया

नई पाठ्यपुस्तक की संरचना में ‘India and the World’ से जुड़े हिस्से को कक्षा 9 से आगे, कक्षा 10 की ओर स्थानांतरित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसका उद्देश्य कक्षा 9 के स्तर पर सामग्री को पुनर्गठित करना और संबंधित विषयों को आगे की कक्षा में एक साथ पढ़ाना बताया गया है।

इसी कारण नई किताब को देखने पर छात्रों और अभिभावकों को कई पुराने अध्याय अचानक गायब नजर आ सकते हैं। लेकिन हर गायब दिखने वाला विषय पूरी तरह समाप्त हो गया हो, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। कुछ विषयों को दूसरी कक्षा में स्थानांतरित किया गया है और कुछ की जगह नए अध्याय आए हैं।

बदलाव को लेकर चर्चा क्यों तेज है?

NCERT की किताबों में इतिहास के विषय बदलना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनता है क्योंकि पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों की ऐतिहासिक समझ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई किताब में भारतीय इतिहास और क्षेत्रीय प्रतिरोध पर ज्यादा जोर दिए जाने के कारण इसकी तुलना पुराने यूरोप-केंद्रित अध्यायों से की जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स ने इसे भारतीय इतिहास और क्षेत्रीय विरासत को अधिक जगह देने वाला बदलाव बताया है।

दूसरी तरफ, फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति और नाजीवाद जैसे विषयों के कक्षा 9 से हटने को लेकर यह सवाल भी उठता है कि आधुनिक विश्व इतिहास विद्यार्थियों को किस चरण में पढ़ाया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन विषयों का स्थान कक्षा 10 के पाठ्यक्रम में किया गया है, इसलिए पूरी तस्वीर दोनों कक्षाओं की नई किताबों को साथ देखकर अधिक स्पष्ट होगी।

यह बदलाव NEP 2020 और National Curriculum Framework for School Education 2023 के अनुरूप पाठ्यक्रम पुनर्गठन के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया गया है। NCERT की नई किताबों में विषयों को अधिक competency-based और interdisciplinary बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

NCERT 9वीं की सोशल साइंस, गणित की किताबें जारी: Maths Part 2 उपलब्ध, Social Science 30 सितंबर से

http://NCERT कक्षा 9 की नई Social Science किताब 2026 में हुए बदलाव

 

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