कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) स्पर्धा में शुरुआत बेहद रोमांचक रही। मुकाबले के पहले राउंड के बाद भारतीय स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा अपेक्षित शुरुआत नहीं कर सके और उनका पहला थ्रो 76.28 मीटर रहा। इस प्रदर्शन के साथ वे शुरुआती दौर में आठवें स्थान पर रहे। वहीं पाकिस्तान के अनुभवी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम ने पहले प्रयास में 78.63 मीटर का थ्रो किया और शुरुआती चरण में पांचवें स्थान पर अपनी जगह बनाई।
हालांकि जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में पहले प्रयास के बाद अंतिम परिणाम तय नहीं होता। खिलाड़ियों को कई प्रयास मिलते हैं और अक्सर प्रतियोगिता के बाद के राउंड में स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। इसलिए शुरुआती रैंकिंग केवल मुकाबले की शुरुआत का संकेत होती है, अंतिम नतीजा नहीं।
नीरज चोपड़ा विश्व एथलेटिक्स के सबसे सफल जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों में शामिल हैं। ओलंपिक स्वर्ण पदक, विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन करने के कारण उनसे हर प्रतियोगिता में ऊंची उम्मीदें रहती हैं। ऐसे में पहले प्रयास में अपेक्षाकृत कम दूरी तक भाला पहुंचने के बाद भी भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद थी कि वे अगले प्रयासों में वापसी करेंगे।
दूसरी ओर अरशद नदीम भी पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं। पाकिस्तान के इस स्टार खिलाड़ी ने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में 90 मीटर के करीब या उससे अधिक दूरी तक भाला फेंककर अपनी क्षमता साबित की है। नीरज और अरशद की प्रतिद्वंद्विता आधुनिक एथलेटिक्स की सबसे चर्चित प्रतिस्पर्धाओं में से एक मानी जाती है।
जैवलिन थ्रो में प्रत्येक खिलाड़ी को निर्धारित संख्या में प्रयास मिलते हैं। शुरुआती तीन प्रयासों के बाद शीर्ष खिलाड़ियों को अतिरिक्त प्रयास दिए जाते हैं और अंत में सबसे लंबी दूरी तय करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। इसलिए पहले थ्रो के बाद पीछे होना हार का संकेत नहीं माना जाता।
नीरज चोपड़ा की सबसे बड़ी ताकत यह रही है कि वे प्रतियोगिता के दौरान लगातार सुधार करते हैं। कई मौकों पर उन्होंने शुरुआती प्रयासों के बाद बेहतर लय हासिल की और अंतिम दौर में शानदार थ्रो कर पदक जीता। इसी कारण उनके प्रशंसक हमेशा अंतिम प्रयास तक उम्मीद बनाए रखते हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इस स्पर्धा में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद देश में जैवलिन थ्रो की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है और बड़ी संख्या में युवा इस खेल की ओर आकर्षित हुए हैं।
अरशद नदीम की बात करें तो उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए हैं। उनकी तकनीक, ताकत और बड़े मुकाबलों में शांत रहने की क्षमता उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल करती है। जब भी नीरज और अरशद एक ही प्रतियोगिता में उतरते हैं, खेल प्रेमियों की नजरें इस मुकाबले पर टिक जाती हैं।
जैवलिन थ्रो केवल ताकत का खेल नहीं है। इसमें दौड़ने की गति, शरीर का संतुलन, तकनीकी कौशल, सही कोण और रिलीज टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ सेंटीमीटर का अंतर भी खिलाड़ियों की रैंकिंग बदल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती प्रयास में खिलाड़ी अक्सर अपनी लय बनाने की कोशिश करते हैं। यदि पहला थ्रो उम्मीद के अनुसार नहीं जाता, तो अगले प्रयासों में तकनीक और गति में सुधार कर दूरी बढ़ाई जा सकती है। यही कारण है कि इस स्पर्धा में आखिरी प्रयास तक मुकाबला खुला रहता है।
नीरज चोपड़ा ने अपने करियर में कई बार दबाव की परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया है। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने से लेकर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और डायमंड लीग तक उन्होंने बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा साबित की है। उनकी सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई है।
भारत में अब एथलेटिक्स को पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्व मिलने लगा है। बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, आधुनिक कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार भागीदारी के कारण भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बहु-खेल आयोजनों में जैवलिन थ्रो का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ी एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। हर खिलाड़ी का लक्ष्य व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने देश के लिए पदक जीतना होता है।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रतियोगिता में शुरुआती प्रदर्शन के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। कई बार पहले स्थान पर रहने वाला खिलाड़ी बाद में पीछे रह जाता है, जबकि शुरुआती दौर में पीछे रहने वाला खिलाड़ी अंतिम प्रयास में बाजी मार लेता है।
भारतीय खेल प्रेमियों के लिए नीरज चोपड़ा केवल एक खिलाड़ी नहीं बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। उनकी मेहनत, अनुशासन और निरंतर सुधार की सोच ने लाखों युवाओं को खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है। वहीं अरशद नदीम ने भी पाकिस्तान में एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नीरज और अरशद की प्रतिस्पर्धा खेल भावना का भी बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है। दोनों खिलाड़ी मैदान पर एक-दूसरे के मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन प्रतियोगिता के बाद अक्सर एक-दूसरे के प्रदर्शन की सराहना करते दिखाई देते हैं। यही खेल की वास्तविक भावना को दर्शाता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स की जैवलिन स्पर्धा में शुरुआती दौर के बाद मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है। पहले प्रयास में नीरज चोपड़ा का 76.28 मीटर का थ्रो और अरशद नदीम का 78.63 मीटर का प्रयास शुरुआती स्थिति को दर्शाता है, लेकिन प्रतियोगिता के बाकी राउंड ही तय करेंगे कि पदक किसके नाम होगा। खेल प्रेमियों की नजरें अब अगले प्रयासों पर टिकी हैं, जहां दोनों स्टार खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।
क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड? इंटरनल रिपोर्ट में भारत के कमजोर प्रदर्शन की आशंका
http://Neeraj Chopra competing in Commonwealth Games javelin throw event