देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET Exam को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब जांच में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘गेस पेपर’ के नाम पर 10 से ज्यादा राज्यों में ऐसे प्रश्न बेचे गए जिनमें से 120 से अधिक सवाल असली परीक्षा से हूबहू मिलते पाए गए। दावा किया जा रहा है कि परीक्षा का पेपर एग्जाम से करीब तीन सप्ताह पहले ही पेपर लीक माफियाओं तक पहुंच चुका था।
इस खुलासे के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा और बढ़ गया है। छात्रों का कहना है कि अगर सवाल पहले से कुछ लोगों तक पहुंच गए थे तो यह मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।
जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि कुछ कोचिंग नेटवर्क, एजेंट और कथित शिक्षा माफिया मिलकर “स्पेशल गेस पेपर” बेच रहे थे। इन पेपर्स को हाई सक्सेस रेट का दावा करके लाखों रुपये में बेचा गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इन गेस पेपर्स में शामिल कई सवाल असली परीक्षा में लगभग उसी भाषा और पैटर्न में दिखाई दिए। इसके बाद जांच एजेंसियों को शक हुआ कि मामला सिर्फ अनुमान लगाने तक सीमित नहीं बल्कि संगठित पेपर लीक से जुड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था। उत्तर भारत से लेकर पश्चिम और दक्षिण भारत तक कथित एजेंट छात्रों और अभिभावकों से संपर्क कर रहे थे। कुछ जगहों पर यह दावा किया गया कि “100 प्रतिशत कॉमन प्रश्न” उपलब्ध कराए जाएंगे।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले होटल और निजी स्थानों पर बुलाया गया था, जहां उन्हें कथित रूप से महत्वपूर्ण प्रश्न उपलब्ध कराए गए। हालांकि एजेंसियां अभी इन दावों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
Central Bureau of Investigation और दूसरी जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच भी शुरू हो चुकी है।
देशभर में NEET परीक्षा में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए यह परीक्षा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। छात्र कई वर्षों तक कठिन तैयारी करते हैं और परिवार भी भारी आर्थिक खर्च उठाते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने छात्रों को मानसिक रूप से झकझोर दिया है।
कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि जिन्होंने मेहनत की, उन्हें नुकसान हुआ जबकि पैसे देकर पेपर खरीदने वालों को फायदा मिल सकता है। कुछ छात्रों ने दोबारा परीक्षा कराने की मांग भी उठाई है।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और पेपर लीक अब “सिस्टम” बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 120 से ज्यादा सवाल सच में परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे तो यह शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ जांच नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार की जरूरत है। डिजिटल सुरक्षा, प्रश्नपत्र ट्रांसपोर्ट और एन्क्रिप्शन सिस्टम को और मजबूत बनाने की मांग उठ रही है।
इस मामले ने कोचिंग इंडस्ट्री पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सभी कोचिंग संस्थानों को इस विवाद से जोड़ना सही नहीं माना जा रहा, लेकिन जांच एजेंसियां उन संस्थानों की भूमिका पर नजर रख रही हैं जिनके नाम सामने आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर #NEETPaperLeak और #JusticeForStudents जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। हजारों छात्र और अभिभावक निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव पहले से ही छात्रों पर बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों में तनाव, गुस्सा और निराशा बढ़ा सकती हैं।
कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर कथित प्रश्नों की पीडीएफ घूम रही थी। हालांकि उस समय कई लोगों ने उन्हें “फर्जी गेस पेपर” मानकर नजरअंदाज कर दिया था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किन स्तरों पर सुरक्षा में चूक हुई। माना जा रहा है कि यह सिर्फ छोटे स्तर का गिरोह नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को होता है जो ईमानदारी से मेहनत करते हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं। कुछ जगहों पर अभिभावकों ने भी विरोध जताया और परीक्षा रद्द करने या दोबारा कराने की मांग की।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी पारदर्शिता से की जाएगी। हालांकि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उनके भविष्य को लेकर जल्द स्पष्ट फैसला लिया जाए।
अब पूरे देश की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह भारत की सबसे बड़ी परीक्षा घोटालों में से एक माना जा सकता है।
फिलहाल NEET विवाद ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और कोचिंग माफिया को लेकर पूरे देश में बड़ी बहस छेड़ दी है। लाखों छात्र अब सिर्फ यही उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें निष्पक्ष न्याय मिले और उनकी मेहनत बेकार न जाए।