संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 24 सितंबर 2026 को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भाषण उस समय चर्चा में आ गया, जब उनके पोडियम पर पहुंचते ही बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि सभागार से बाहर निकलने लगे। उपलब्ध रिपोर्टों में इस विरोध में करीब 75 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है। कई प्रतिनिधियों के बाहर जाने के दौरान सभागार में हूटिंग और विरोध की आवाजें भी सुनाई दीं। नेतन्याहू कुछ समय तक पोडियम पर शांत खड़े रहे और इसके बाद उन्होंने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को निशाना बनाते हुए उन्हें “moral cowards” कहा।
यह घटनाक्रम न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुआ। नेतन्याहू का संबोधन ऐसे समय में हुआ है जब गाजा में युद्ध, इजराइल की सैन्य कार्रवाई, ईरान के साथ संघर्ष और फिलिस्तीनी राज्य के सवाल को लेकर संयुक्त राष्ट्र में सदस्य देशों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं। उनके भाषण से पहले भी कई देशों के नेताओं ने क्षेत्र की स्थिति पर अलग-अलग रुख सामने रखा था।
नेतन्याहू जैसे ही मंच पर पहुंचे, कई प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी सीटें छोड़नी शुरू कर दीं। रिपोर्टों के मुताबिक फिलिस्तीनी मिशन ने पहले ही विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से सामूहिक वॉकआउट में शामिल होने का आग्रह किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में राजनयिक सभागार से बाहर निकलते दिखाई दिए।
वॉकआउट के दौरान सभागार का एक बड़ा हिस्सा खाली दिखाई देने लगा। कुछ प्रतिनिधि बाहर निकलते रहे, जबकि कुछ लोग अपनी सीटों पर मौजूद रहे। इजराइली प्रतिनिधिमंडल और समर्थकों की ओर से नेतन्याहू के समर्थन में तालियां और नारे सुनाई दिए। संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष को भी सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
नेतन्याहू ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच करीब तीन मिनट तक इंतजार किया। उपलब्ध कुछ रिपोर्टों के मुताबिक वह पोडियम पर खड़े होकर प्रतिनिधियों को बाहर जाते देखते रहे। इसके बाद उन्होंने भाषण की शुरुआत एक तीखी टिप्पणी के साथ की और कहा कि अगर कोई और “moral coward” अभी भी हॉल में है तो वह भी बाहर जा सकता है।
उनकी इस टिप्पणी के बाद सभागार में मौजूद उनके समर्थकों ने तालियां बजाईं। इजराइली प्रतिनिधिमंडल की ओर से “Am Yisrael Chai” यानी “इजराइल की जनता जिंदा है” जैसे नारे भी सुनाई दिए। वहीं कई देशों के प्रतिनिधियों की खाली सीटें पूरे भाषण के दौरान इस घटनाक्रम का सबसे प्रमुख दृश्य बनी रहीं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि “75 देशों ने बायकॉट किया” वाली संख्या कुछ रिपोर्टों में दी गई है, लेकिन सभी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने एक जैसी संख्या नहीं बताई है। Reuters और कई अन्य समाचार संस्थानों ने इसे मुख्य रूप से “dozens of delegates” यानी दर्जनों प्रतिनिधियों का वॉकआउट बताया है। एक रिपोर्ट में इजराइली सरकार की ओर से अनुपस्थित या बाहर जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों की संख्या 77 बताई गई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया कि हर अनुपस्थिति को स्वतः जानबूझकर किया गया बायकॉट नहीं माना जा सकता।
इसलिए इस घटना को समझते समय 75 का आंकड़ा रिपोर्टेड संख्या के तौर पर देखना जरूरी है, न कि संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक “बायकॉट सूची” के रूप में।
वॉकआउट की वजह क्या थी?
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक यह वॉकआउट फिलिस्तीनी मुद्दे और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के विरोध से जुड़ा था। फिलिस्तीनी मिशन ने अन्य UN member states की missions से नेतन्याहू के भाषण के दौरान सामूहिक रूप से हॉल छोड़ने की अपील की थी। कई देशों के प्रतिनिधि इस विरोध में शामिल हुए।
इजराइल और उसके समर्थक इस स्थिति को अलग नजरिए से देखते हैं। नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया और कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने आलोचकों पर इजराइल के खिलाफ गलत जानकारी और दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
वहीं दूसरी तरफ, कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र में गाजा की मानवीय स्थिति और फिलिस्तीन के अधिकारों को लेकर इजराइल की नीतियों की आलोचना की है। इस कारण नेतन्याहू के भाषण के दौरान विरोध होना उस व्यापक कूटनीतिक मतभेद की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
नेतन्याहू ने क्या कहा?
वॉकआउट के तुरंत बाद नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को “moral cowards” कहा। उन्होंने उनसे कहा कि अगर वे उनके भाषण को सुनना नहीं चाहते तो वे बाहर जा सकते हैं। यह टिप्पणी उनके संबोधन की शुरुआत का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई।
इसके बाद उन्होंने अपने भाषण में इजराइल की सुरक्षा, ईरान, गाजा और फिलिस्तीन से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया।
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना उनके प्रधानमंत्री के रूप में लिए गए कठिन फैसलों में से था, लेकिन उनके लिए यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से जरूरी था। उन्होंने दावा किया कि अगर इजराइल ने कार्रवाई नहीं की होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल केवल अपनी रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि उन देशों की भी रक्षा कर रहा है जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान हॉल से बाहर चले गए। यह उनके भाषण का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश था।
ईरान को लेकर भी बड़ा बयान
नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं के खिलाफ इजराइली सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया और इसे इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश किया।
भाषण के दौरान उन्होंने एक Starlink satellite internet terminal भी दिखाया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इसे ईरानी लोगों के लिए स्वतंत्र इंटरनेट और सेंसरशिप से बचने के संदर्भ में पेश किया। उन्होंने कहा कि वह यह उपकरण ईरानी अधिकारियों के लिए छोड़कर जा रहे हैं ताकि वे बिना सेंसरशिप के दुनिया से जुड़ सकें। बाद में ईरानी राजनयिकों ने इसे स्वीकार करने से इनकार किया।
ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस दौरान हॉल में मौजूद नहीं था। उसकी निर्धारित सीट पर पूर्व IRGC Quds Force कमांडर कासिम सुलेमानी की तस्वीर रखे जाने की रिपोर्ट भी सामने आई। यह तस्वीर 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए सुलेमानी की थी।
गाजा पर क्या बोले नेतन्याहू?
गाजा युद्ध से जुड़े आरोप भी नेतन्याहू के भाषण का प्रमुख हिस्सा रहे। उन्होंने इजराइल पर लगाए जा रहे genocide के आरोपों को खारिज किया और इन्हें गलत बताया। इजराइली सरकार लगातार कहती रही है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य हमास की सैन्य क्षमता है और वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रही है।
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी अधिकारियों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गाजा में नागरिकों की मौत, मानवीय संकट और सैन्य कार्रवाई के प्रभाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों और इजराइली सरकार के जवाब के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद बना हुआ है।
इस पृष्ठभूमि में नेतन्याहू के भाषण का वॉकआउट केवल एक कार्यक्रम का विरोध नहीं था, बल्कि गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय मतभेदों का एक सार्वजनिक दृश्य भी बन गया।
किन देशों के प्रतिनिधि बाहर गए?
उपलब्ध रिपोर्टों में कई देशों के प्रतिनिधियों के वॉकआउट या अनुपस्थिति का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों में अरब और मुस्लिम देशों के कई प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में मिस्र, जॉर्डन, तुर्की, सऊदी अरब, कतर, ईरान सहित अन्य देशों की सीटों के खाली होने का उल्लेख है।
हालांकि सभी देशों की स्थिति एक जैसी नहीं थी। उदाहरण के लिए Times of Israel की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधिमंडल हॉल में मौजूद रहा। इसलिए “सभी मुस्लिम देशों ने बायकॉट किया” कहना सही नहीं होगा।
यही कारण है कि घटना की रिपोर्टिंग करते समय “कई देशों के प्रतिनिधियों का वॉकआउट” कहना ज्यादा व्यापक और सावधान वर्णन है।
यूरोपीय देशों का रुख
इस UNGA सत्र के दौरान यूरोप के कई देशों ने भी इजराइल और गाजा की स्थिति पर आलोचनात्मक बयान दिए हैं। CBS News के मुताबिक फ्रांस और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में इजराइल की नीतियों और क्षेत्रीय स्थिति पर अपनी चिंताएं रखीं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि संयुक्त राष्ट्र में इजराइल को लेकर बहस केवल अरब और मुस्लिम देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिमी देशों के बीच भी इजराइल की सैन्य कार्रवाई, गाजा की स्थिति और फिलिस्तीनी राज्य के भविष्य को लेकर अलग-अलग नीतिगत दृष्टिकोण मौजूद हैं।
हालांकि सभी देशों की सरकारों का रुख एक जैसा नहीं है। कुछ देश इजराइल के सुरक्षा अधिकार पर जोर देते हैं, जबकि कुछ देश फिलिस्तीनी राज्य और गाजा में युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता को प्रमुखता देते हैं।
हॉल में क्या हुआ?
नेतन्याहू के पोडियम पर पहुंचने के बाद प्रतिनिधियों के बाहर निकलने से संयुक्त राष्ट्र महासभा का माहौल काफी असामान्य हो गया। कई लोग अपनी सीटों से उठकर बाहर चले गए। कुछ प्रतिनिधियों ने विरोध के रूप में हॉल छोड़ा, जबकि कुछ प्रतिनिधि बैठे रहे।
इजराइली प्रतिनिधिमंडल ने नेतन्याहू का समर्थन किया। समर्थकों ने तालियां बजाईं और नारे लगाए। दूसरी ओर, बाहर निकलने वाले प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती गई।
UN General Assembly के presiding officer ने कई बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। यह पूरा घटनाक्रम कैमरों में रिकॉर्ड हुआ और बाद में दुनिया भर के मीडिया में इसका वीडियो और तस्वीरें सामने आईं।
तीन मिनट तक चुप क्यों रहे नेतन्याहू?
वॉकआउट के दौरान नेतन्याहू कुछ समय तक बोलने के बजाय पोडियम पर खड़े रहे। कई रिपोर्टों में यह समय लगभग तीन मिनट बताया गया है। वह प्रतिनिधियों को बाहर जाते हुए देखते रहे और सभागार में विरोध की आवाजें सुनाई देती रहीं।
इसके बाद उन्होंने अपनी पहली टिप्पणी की और बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों पर तंज किया। उनके शब्दों का आशय था कि अगर कोई और उनके भाषण का विरोध करता है तो वह भी हॉल छोड़ सकता है।
यह क्षण सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तेजी से वायरल हुआ। खाली होती सीटों और पोडियम पर खड़े नेतन्याहू की तस्वीरें इस घटना की पहचान बन गईं।
UN में बढ़ती कूटनीतिक दूरी
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इजराइल को लेकर संयुक्त राष्ट्र में कई देशों के साथ उसका कूटनीतिक मतभेद बढ़ा हुआ है। गाजा युद्ध और वेस्ट बैंक में इजराइली नीतियों को लेकर लगातार बहस हो रही है। कुछ पश्चिमी देशों ने फिलिस्तीनी राज्य के सवाल पर भी अपनी नीतियों में बदलाव किया है।
इजराइल इन कदमों को कई बार एकतरफा दबाव के रूप में देखता है और अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामने रखता है। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी पक्ष और उसके समर्थक देशों का कहना है कि गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी है।
UNGA में हुआ वॉकआउट इसी व्यापक विवाद का एक सार्वजनिक उदाहरण बन गया।
नेतन्याहू और न्यूयॉर्क के मेयर का विवाद
नेतन्याहू के भाषण में न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani का मुद्दा भी आया। नेतन्याहू ने ममदानी की उन टिप्पणियों की आलोचना की जिनमें उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। नेतन्याहू ने ममदानी पर इजराइल विरोधी और हमास समर्थक होने जैसे आरोप लगाए, जिन्हें ममदानी ने स्वीकार नहीं किया है।
ममदानी ने पहले कहा था कि अगर उनके पास कानूनी अधिकार होता तो वह नेतन्याहू को गिरफ्तार करते। बाद में इस सवाल पर यह भी स्पष्ट हुआ कि न्यूयॉर्क के मेयर के पास विदेशी प्रधानमंत्री को गिरफ्तार करने की ऐसी स्वतंत्र कानूनी शक्ति नहीं है। यह विवाद नेतन्याहू की न्यूयॉर्क यात्रा से पहले ही चर्चा में था।
UN भाषण के दौरान नेतन्याहू ने इस विवाद को फिर से उठाया और कहा कि उन्हें चुप कराने की कोशिश सफल नहीं होगी।
इजराइल ने वॉकआउट को कैसे देखा?
इजराइल की ओर से नेतन्याहू ने वॉकआउट को अपने देश की आलोचना के रूप में देखा, लेकिन उन्होंने इसे अपने भाषण को रोकने की वजह नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा और अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ रहा है।
उनके भाषण का मुख्य संदेश यही था कि इजराइल अपनी सैन्य कार्रवाइयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में देखता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, हमास के हमले और इजराइल की सुरक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने फैसलों का बचाव किया।
दूसरी ओर, वॉकआउट में शामिल देशों ने इस तरीके से विरोध दर्ज कराया कि वे नेतन्याहू के भाषण को सुनने के लिए सभागार में मौजूद नहीं रहेंगे। इस विरोध का नेतृत्व फिलिस्तीनी मिशन की पहल से जुड़ा बताया गया है।
क्या यह UN का आधिकारिक बायकॉट था?
यहां शब्दों को लेकर सावधानी जरूरी है। मीडिया रिपोर्टों में “boycott” और “walkout” दोनों शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से ऐसा कोई औपचारिक निर्णय नहीं बताया गया है जिसमें 75 देशों ने नेतन्याहू के भाषण का आधिकारिक बहिष्कार घोषित किया हो।
वास्तविक घटना यह थी कि बड़ी संख्या में प्रतिनिधि नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत में हॉल से बाहर चले गए। इसलिए खबर में “75 देशों ने बायकॉट किया” को रिपोर्टेड description के रूप में समझना चाहिए। Reuters सहित विश्वसनीय रिपोर्टों ने घटना को “dozens of delegates walked out” के रूप में रिपोर्ट किया।
इस घटना का महत्व क्या है?
UN General Assembly दुनिया का सबसे बड़ा बहुपक्षीय राजनीतिक मंच है। यहां किसी देश के नेता के भाषण के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों का सामूहिक रूप से बाहर निकलना एक बड़ा कूटनीतिक दृश्य माना जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर मतभेद हैं। एक तरफ इजराइल अपनी सुरक्षा और ईरान तथा हमास से जुड़े खतरों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई देश गाजा में नागरिकों की स्थिति और फिलिस्तीनी अधिकारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसलिए नेतन्याहू का भाषण केवल इजराइल का सामान्य UN संबोधन नहीं रहा। इसकी शुरुआत ही एक बड़े कूटनीतिक विरोध के साथ हुई।
UN के बाहर भी प्रदर्शन
नेतन्याहू के भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन हुए। फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों ने इजराइल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनों में पुलिस की कार्रवाई और हिरासत की घटनाओं की रिपोर्ट भी सामने आई।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि विरोध केवल UN General Assembly के अंदर तक सीमित नहीं था। न्यूयॉर्क में नेतन्याहू की मौजूदगी को लेकर अलग-अलग समूहों ने समर्थन और विरोध दोनों में प्रदर्शन किए।
भाषण में नेतन्याहू का मुख्य संदेश
करीब 40 मिनट के संबोधन में नेतन्याहू ने कई मुद्दे उठाए। उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता, गाजा युद्ध, हमास, फिलिस्तीन, न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी और इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर बात की।
उन्होंने इजराइली सैनिकों की भूमिका का बचाव किया और कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए लड़ रहा है। उन्होंने आलोचकों पर इजराइल की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, उनके भाषण की शुरुआत में हुआ वॉकआउट पूरी घटना का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
आगे क्या असर पड़ सकता है?
इस घटना के तत्काल राजनीतिक परिणामों को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि यह स्पष्ट है कि इजराइल और कई UN member states के बीच गाजा और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद गहरे हैं।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी राज्य, गाजा में मानवीय सहायता, युद्धविराम, ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी रह सकती है। नेतन्याहू का भाषण इन बहसों में इजराइल के पक्ष को सामने रखने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा।
24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में बेंजामिन नेतन्याहू का संबोधन शुरू होते ही बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए। कुछ रिपोर्टों में इस संख्या को 75 देशों तक बताया गया है, जबकि Reuters और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे दर्जनों प्रतिनिधिमंडलों का वॉकआउट बताया।
नेतन्याहू करीब तीन मिनट तक पोडियम पर खड़े रहे और इसके बाद उन्होंने बाहर जाने वालों को “moral cowards” कहा। उन्होंने इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है।
भाषण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, गाजा युद्ध, हमास और इजराइल की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल उन देशों की सुरक्षा में भी योगदान दे रहा है जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान बाहर चले गए।
इस घटना ने संयुक्त राष्ट्र में इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर मौजूद गहरे अंतरराष्ट्रीय मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया। एक तरफ नेतन्याहू ने अपने देश की सैन्य और सुरक्षा नीति का बचाव किया, वहीं दूसरी तरफ कई देशों के प्रतिनिधियों ने उनके भाषण के दौरान हॉल से बाहर निकलकर विरोध दर्ज कराया।
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