आज के समय में जहां पर्यावरण संकट और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने स्तर पर बदलाव लाने की मिसाल पेश कर रहे हैं। राजस्थान के जोधपुर से सामने आई एक प्रेरणादायक कहानी इसी बात को साबित करती है। यहां 79 साल के एक बुजुर्ग ने अपनी मेहनत और लगन से सूखी पहाड़ियों को हरा-भरा बना दिया है।
जोधपुर के रिटायर्ड प्रिंसिपल प्रह्लादपुरी गोस्वामी पिछले कई दशकों से हरियाली के मिशन में जुटे हुए हैं। उन्होंने अब तक करीब ढाई लाख पौधे लगा दिए हैं, जो आज एक घने हरित क्षेत्र में बदल चुके हैं। उनकी इस पहल ने न केवल पर्यावरण को फायदा पहुंचाया है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी बनी है।
उनका यह मिशन कोई नया नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत उन्होंने साल 1985 में की थी। उस समय उन्होंने एक छोटे स्तर पर पेड़ लगाना शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक बड़े अभियान में बदल गया। आज उनके प्रयासों से करीब 30 हेक्टेयर जमीन पर हरियाली फैल चुकी है।
इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। राजस्थान जैसे सूखे क्षेत्र में पौधों को जीवित रखना आसान नहीं होता। पानी की कमी, गर्म मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा बाधा बनती रहीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने मिशन पर काम करते रहे।
उनकी कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन की कठिनाइयों के बावजूद यह काम जारी रखा। बताया जाता है कि अपने बेटे को खोने के बाद भी उन्होंने अपने इस मिशन को नहीं छोड़ा। इसके बजाय उन्होंने अपने दुख को ताकत में बदल दिया और प्रकृति की सेवा में और ज्यादा जुट गए।
प्रह्लादपुरी गोस्वामी के अनुसार, उनकी सफलता के पीछे तीन मुख्य सिद्धांत हैं। पहला है अटल संकल्प—उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। दूसरा है दुख से टूटना नहीं—उन्होंने जीवन की कठिनाइयों को अपने रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। तीसरा है प्रकृति के प्रति प्रेम—उनका मानना है कि अगर हम प्रकृति से प्रेम करें, तो वह हमें कई गुना वापस देती है।
उनका काम सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उनकी देखभाल भी उतनी ही मेहनत से करते हैं। कई बार वे खुद पानी की बाल्टियां लेकर पौधों को सींचते हैं। यही कारण है कि उनके लगाए गए पौधे सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता में भी बेहतर हैं।
आज उनकी मेहनत का परिणाम साफ दिखाई देता है। जहां पहले सूखी और बंजर पहाड़ियां थीं, वहां अब हरे-भरे पेड़ नजर आते हैं। यह क्षेत्र अब न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र बन गया है।
उनकी इस पहल ने आसपास के लोगों को भी प्रेरित किया है। कई युवा अब उनके साथ जुड़कर पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण के काम में हिस्सा ले रहे हैं। यह एक व्यक्ति के प्रयास का सामूहिक आंदोलन में बदलने का बेहतरीन उदाहरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं। सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी चुनौती का सामना कर रही है, तब प्रह्लादपुरी गोस्वामी जैसे लोग उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि उम्र कभी भी किसी अच्छे काम में बाधा नहीं बनती।
अगर हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ पेड़ लगाने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण तैयार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक संदेश है—अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी बदलाव संभव है। प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण से हम अपने आसपास की दुनिया को बेहतर बना सकते हैं।
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