सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को गिरावट देखने को मिली। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,037 प्रति 10 ग्राम घटकर ₹1,54,798 पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत ₹1,711 प्रति किलोग्राम गिरकर ₹2,35,488 हो गई। दोनों कीमती धातुओं में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील दोहराई है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक केवल प्रधानमंत्री की अपील को कीमतों में गिरावट की पूरी वजह मानना सही नहीं होगा। वैश्विक बाजार, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की धारणा भी सोने-चांदी के भाव को प्रभावित कर रही हैं।
भारत में सोने की कीमतें लंबे समय से रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बनी हुई हैं। शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के लिए सोने की मांग भारतीय बाजार में काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील का बाजार और उपभोक्ताओं की खरीदारी पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने 1 सितंबर को सोशल मीडिया पर स्वदेशी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की अपील के दौरान कहा कि जब तक जरूरी न हो, तब तक सोना खरीदने से बचना चाहिए। इससे पहले भी उन्होंने लोगों से सोने की गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपील की थी।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,037 कम होकर ₹1,54,798 प्रति 10 ग्राम हो गया। सोमवार यानी 31 अगस्त को यह करीब ₹1,55,835 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इस तरह एक कारोबारी सत्र में सोने के भाव में करीब एक हजार रुपये की गिरावट दर्ज हुई।
चांदी की बात करें तो इसमें भी गिरावट आई। IBJA के मुताबिक चांदी का भाव ₹1,711 घटकर ₹2,35,488 प्रति किलोग्राम हो गया। इससे पहले 31 अगस्त को चांदी करीब ₹2,37,199 प्रति किलोग्राम पर थी। यानी सोने के साथ-साथ चांदी में भी एक ही दिन में नरमी देखने को मिली।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि प्रधानमंत्री की अपील और सोने की कीमत में गिरावट के बीच सीधा कारण-परिणाम तय करना आसान नहीं है। सोना एक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी है और इसकी कीमत कई कारकों से प्रभावित होती है। डॉलर की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, वैश्विक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, निवेशकों की मांग और भारत में आयात से जुड़े फैसले—इन सभी का असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। इसलिए मौजूदा गिरावट को केवल एक बयान से जोड़ना बाजार की पूरी तस्वीर को सरल बनाना होगा।
फिर भी प्रधानमंत्री की अपील का बाजार पर असर दिखाई दिया है। खासकर ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक Titan, Kalyan Jewellers और अन्य ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। Kalyan Jewellers का शेयर करीब 4.66% नीचे बंद हुआ, जबकि Titan में भी गिरावट दर्ज की गई। बाजार ने इसे सोने की मांग और ज्वेलरी बिक्री के संभावित असर के रूप में देखा।
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे आर्थिक तर्क भी है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का एक बड़ा हिस्सा सोने के आयात के जरिए पूरा करता है। जब देश में सोने की मांग बढ़ती है तो आयात बढ़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। ऐसे समय में सरकार की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने की अपील का उद्देश्य लोगों को खर्च और आयात के प्रभाव के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करना हो सकता है। मई में भी प्रधानमंत्री ने इसी तरह विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और सोने की खरीदारी टालने की अपील की थी।
मई में की गई अपील के बाद भी सोने और चांदी के दाम में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया था। Moneycontrol के मुताबिक 10 मई को प्रधानमंत्री की अपील के समय 24 कैरेट सोना करीब ₹1,53,140 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2,62,350 प्रति किलोग्राम थी। जून के अंत तक दोनों धातुओं में काफी गिरावट आई थी। हालांकि उस अवधि में वैश्विक बाजार और अन्य आर्थिक कारण भी सक्रिय थे। इसलिए उस गिरावट का पूरा श्रेय किसी एक कारण को देना उचित नहीं होगा।
अब सितंबर की शुरुआत में सोना एक बार फिर ₹1.55 लाख के आसपास आ गया है। लेकिन यह अभी भी ऐतिहासिक रूप से बहुत ऊंचा स्तर है। इस साल सोने ने जनवरी में करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उसके बाद इसमें करीब ₹21,000 तक की गिरावट आई है। इसी तरह चांदी ने जनवरी में करीब ₹3.86 लाख प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर देखा था और तब से इसमें लगभग ₹1.53 लाख तक की गिरावट हो चुकी है।
इसका मतलब यह है कि आज की गिरावट को अलग से देखने के बजाय पूरे साल के उतार-चढ़ाव को देखना जरूरी है। सोना जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से नीचे है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अभी भी काफी महंगा है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोना करीब ₹1,33,195 प्रति 10 ग्राम था। इसके मुकाबले वर्तमान कीमत लगभग ₹1.55 लाख है।
चांदी में भी यही स्थिति है। दिसंबर 2025 के अंत में चांदी करीब ₹2,30,420 प्रति किलोग्राम थी। जनवरी में यह तेजी से बढ़कर ₹3.86 लाख के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची, जिसके बाद इसमें भारी गिरावट आई। अब यह करीब ₹2.35 लाख पर है। यानी चांदी रिकॉर्ड से काफी नीचे आ चुकी है, लेकिन अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले थोड़ी महंगी है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोना लगातार सस्ता होता रहेगा? इसका निश्चित जवाब अभी देना मुश्किल है। सोने की कीमत वैश्विक परिस्थितियों पर बहुत निर्भर करती है। अगर दुनिया में आर्थिक या भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की तरफ लौट सकते हैं। इससे कीमत फिर बढ़ सकती है। दूसरी ओर अगर डॉलर मजबूत होता है, ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीद बदलती है या सोने की मांग कमजोर पड़ती है तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
कच्चे तेल की कीमत भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत तेल का बड़ा आयातक है। यदि कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की मांग और रुपये की स्थिति पर असर पड़ सकता है। ऐसे वातावरण में सोने की कीमत पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी कमोडिटी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।
सोने की कीमतों में शहर के हिसाब से भी अंतर हो सकता है। IBJA का रेट एक संदर्भ दर है, जबकि स्थानीय बाजार में टैक्स, परिवहन, सुरक्षा खर्च, मांग-सप्लाई, ज्वेलर का मार्जिन और पुराने स्टॉक की लागत के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहक को केवल इंटरनेट पर दिखाई गई कीमत देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। अपने शहर के विश्वसनीय ज्वेलर से उसी दिन का अंतिम भाव पूछना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का खुदरा भाव करीब ₹1,57,080 प्रति 10 ग्राम था। मुंबई, कोलकाता और रायपुर में यह करीब ₹1,56,930, जबकि भोपाल, पटना और अहमदाबाद में करीब ₹1,56,980 बताया गया। इससे साफ है कि IBJA की बेंचमार्क दर और स्थानीय खुदरा कीमत में अंतर हो सकता है।
अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल कीमत गिरने के कारण तुरंत खरीदारी करने के बजाय अपनी जरूरत देखना जरूरी है। शादी या किसी अन्य पारिवारिक कार्यक्रम के लिए खरीदारी जरूरी है तो बजट पहले तय करें। निवेश के लिए खरीद रहे हैं तो पूरी राशि एक साथ लगाने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को समझना बेहतर है।
ज्वेलरी खरीदते समय शुद्धता की जांच भी उतनी ही जरूरी है। ग्राहक को BIS Hallmark जरूर देखना चाहिए। सोने का वजन, शुद्धता और उस दिन का बाजार भाव अलग-अलग जांचना चाहिए। मेकिंग चार्ज भी ज्वेलर से स्पष्ट रूप से पूछना चाहिए, क्योंकि यह दुकान और डिजाइन के हिसाब से अलग हो सकता है। खरीदारी से पहले बिल में सोने की शुद्धता, वजन, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क का विवरण देखना चाहिए।
22 कैरेट सोने का भाव भी आज नीचे आया है। IBJA के अनुसार 22 कैरेट सोना करीब ₹1,41,795 प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोना करीब ₹1,16,099 और 14 कैरेट सोना करीब ₹90,557 प्रति 10 ग्राम बताया गया। अलग-अलग कैरेट का इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार की ज्वेलरी में होता है, इसलिए खरीदारी करते समय केवल 24 कैरेट का भाव देखना पर्याप्त नहीं है।
24 कैरेट सोना सबसे ज्यादा शुद्धता वाला होता है, जबकि ज्वेलरी में अक्सर 22 कैरेट या अन्य मिश्रधातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए अगर कोई ग्राहक ज्वेलरी खरीद रहा है तो उसे सोने की purity के साथ-साथ कुल वजन और मेकिंग चार्ज भी समझना चाहिए। केवल प्रति 10 ग्राम बाजार भाव देखकर अंतिम कीमत का अनुमान लगाना गलत हो सकता है।
आज की गिरावट का एक और असर घरेलू निवेशकों पर पड़ सकता है। जिन लोगों ने हाल के ऊंचे स्तर पर सोना खरीदा था, उनके लिए मौजूदा कीमत कम दिखाई दे सकती है। लेकिन लंबी अवधि में सोने का मूल्य कई वैश्विक आर्थिक कारकों से तय होता है। इसलिए एक-दो दिन की गिरावट देखकर घबराना या तेजी देखकर जल्दबाजी करना निवेश का उचित तरीका नहीं माना जाता।
भारत में सोने का महत्व केवल निवेश तक सीमित नहीं है। यह पारिवारिक बचत, शादी और धार्मिक अवसरों से भी जुड़ा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सोने को लंबे समय से संपत्ति के रूप में देखा जाता है। इसलिए सरकार की ओर से गैर-जरूरी खरीदारी रोकने की अपील का असर केवल कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि घरेलू बचत और ज्वेलरी बाजार पर भी पड़ सकता है।
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट इसी भावना को दर्शाती है। अगर लोगों की गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम होती है तो ज्वेलरी कारोबार की मांग पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि शादी और त्योहारों जैसी वास्तविक जरूरत वाली खरीदारी पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसलिए कंपनियों के कारोबार पर वास्तविक असर आने वाले महीनों में मांग के आंकड़ों से ज्यादा स्पष्ट होगा।
बाजार में यह भी चर्चा है कि सरकार की स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की नीति के तहत लोगों को घरेलू उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देने के साथ गैर-जरूरी आयात कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने विदेशी छुट्टियों और विदेश में शादियों पर खर्च से बचने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपील भी की है। इसी संदर्भ में सोने की गैर-जरूरी खरीदारी से बचने की बात सामने आई है।
हालांकि, आम खरीदार के लिए इसका मतलब यह नहीं है कि सोना खरीदना पूरी तरह गलत है। प्रधानमंत्री की अपील में भी मुख्य जोर गैर-जरूरी खरीदारी से बचने पर है। अगर किसी परिवार में शादी है या किसी खास अवसर के लिए पहले से सोना खरीदने की जरूरत है तो वह अलग परिस्थिति है। उपभोक्ता को अपनी आर्थिक स्थिति, जरूरत और बाजार भाव को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
निवेश के नजरिए से भी सोने को एक diversified portfolio का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन किसी भी एक asset में पूरी बचत लगाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। सोने की कीमतें ऊपर-नीचे होती रहती हैं। आज ₹1,037 की गिरावट हुई है, कल वैश्विक परिस्थितियों के कारण कीमत बढ़ भी सकती है। इसलिए केवल आज की कीमत को देखकर भविष्य की दिशा का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
सोने की कीमत में गिरावट से उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है जो खरीदारी करना चाहते हैं। लेकिन अगर कीमत और नीचे जाती है तो आज खरीदने वाले ग्राहक को बाद में कम भाव भी मिल सकता है। इसलिए “आज सबसे सस्ता भाव है” जैसी बात बिना ठोस आधार के नहीं कही जा सकती।
सोने और चांदी के भाव में आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की दिशा महत्वपूर्ण रहेगी। अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर इंडेक्स, तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कारक बाजार की दिशा बदल सकते हैं। घरेलू स्तर पर आयात शुल्क, रुपये की चाल और त्योहारी मांग भी महत्वपूर्ण होगी।
त्योहारी सीजन नजदीक आने पर भारत में सोने की मांग बढ़ सकती है। अगर घरेलू मांग मजबूत रहती है तो कीमतों पर नीचे की ओर दबाव सीमित हो सकता है। दूसरी तरफ अगर लोग प्रधानमंत्री की अपील के बाद गैर-जरूरी खरीदारी टालते हैं तो ज्वेलरी बाजार की मांग पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है।
यहां निवेशकों को एक और अंतर समझना चाहिए—सोने की कीमत और सोने के आभूषण की कीमत एक जैसी नहीं होती। बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत अलग है और ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागत जुड़ सकती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति ₹1.55 लाख के भाव को देखकर सोचता है कि उसे 10 ग्राम ज्वेलरी ठीक इसी कीमत में मिल जाएगी, तो ऐसा जरूरी नहीं है।
इसी तरह चांदी की कीमत ₹2.35 लाख प्रति किलो होने का अर्थ यह नहीं है कि बाजार में हर प्रकार की चांदी की वस्तु इसी अनुपात में मिलेगी। सिक्के, आभूषण, बर्तन और अन्य उत्पादों में अलग-अलग मेकिंग और प्रीमियम हो सकता है।
आज की गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोना और चांदी दोनों पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव से गुजर चुके हैं। जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद दोनों में बड़ी गिरावट आई और फिर कई बार तेज रिकवरी भी हुई। इससे पता चलता है कि कीमती धातुओं का बाजार फिलहाल काफी volatile है।
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