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जेल लौटने से पहले राम रहीम की रूबरू नाइट में भारी भीड़, मंच पर किया डांस; पुलिस की मौजूदगी पर सवाल

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की हालिया फरलो के दौरान हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा परिसर में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 13 सितंबर 2026 की रात डेरा परिसर के क्रिकेट स्टेडियम में ‘रूबरू नाइट’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रिपोर्टों के अनुसार करीब एक लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। कार्यक्रम में राम रहीम मंच पर आया, गाने गाए और डांस भी किया। इससे पहले उसी दिन सुबह उसके सत्संग कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की बात सामने आई थी। यह पूरी गतिविधि उस समय हुई जब राम रहीम 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर था। रिपोर्टों के मुताबिक वह 25 अगस्त को जेल से बाहर आया था और 16 सितंबर को फरलो खत्म होने के बाद वापस रोहतक की सुनारिया जेल लौट गया।

राम रहीम को लेकर यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। अगस्त 2017 में विशेष CBI अदालत ने उसे दोनों मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी, जो लगातार चलने वाली थी। अदालत ने दोनों मामलों में जुर्माना भी लगाया था।

13 सितंबर की रात सिरसा के डेरा सच्चा सौदा परिसर में आयोजित ‘रूबरू नाइट’ को लेकर सामने आई रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम रात करीब 9 बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम डेरा परिसर के पीछे बने क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया गया था। प्रवेश के लिए पास की व्यवस्था बताई गई थी और स्टेडियम में पहुंचने वाले लोगों की कई स्तर पर जांच किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इसके बाद राम रहीम मंच पर पहुंचा और उसके समर्थकों ने तालियों तथा नारों के साथ उसका स्वागत किया।

रिपोर्टों में कार्यक्रम में करीब एक लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। यह संख्या स्वतंत्र सरकारी भीड़-गणना के रूप में सामने नहीं आई है, इसलिए इसे अनुमान या रिपोर्ट में किए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की बात कई रिपोर्टों में सामने आई है। डेरा परिसर और आसपास के इलाकों में भीड़ को देखते हुए कार्यक्रम की चर्चा सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में हुई।

कार्यक्रम के दौरान राम रहीम ने मंच से गाने गाए और डांस किया। रिपोर्ट के अनुसार म्यूजिक शुरू होने के बाद उसने दर्शकों के सामने प्रस्तुति दी। मंच पर उसकी मौजूदगी के दौरान समर्थकों की तरफ से लगातार नारे लगाए गए और स्टेडियम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया।

रूबरू नाइट से पहले उसी दिन सुबह डेरा परिसर में सत्संग कार्यक्रम आयोजित हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार सुबह से ही डेरा मुख्यालय में बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की जानकारी मिली। लोगों के बीच राम रहीम के दर्शन को लेकर चर्चा थी और कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पास व्यवस्था की बात सामने आई। इस दौरान डेरा परिसर में अलग-अलग राज्यों से अनुयायियों के पहुंचने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई।

राम रहीम की फरलो के दौरान डेरा परिसर में अनुयायियों की आवाजाही बढ़ गई थी। रिपोर्ट के अनुसार 12 और 13 सितंबर को डेरा मुख्यालय में विशेष गतिविधियां हुईं। कई लोग हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों से भी पहुंचे। डेरा परिसर में उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई।

इस पूरी घटना में पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि कार्यक्रम स्थल पर सिरसा पुलिस की स्पष्ट मौजूदगी नजर नहीं आई। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम की जानकारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए यह कहना कि कार्यक्रम में बिल्कुल पुलिस मौजूद नहीं थी, एक पुष्ट आधिकारिक तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता। इसी वजह से इस खबर में पुलिस की “गैरमौजूदगी” को रिपोर्टों में उठे सवाल के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि राम रहीम को अदालत द्वारा बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और वह इसी मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। 28 अगस्त 2017 को विशेष CBI अदालत ने उसे दो मामलों में 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत के अनुसार दोनों सजाएं लगातार चलनी थीं, जिससे कुल सजा 20 साल हुई।

2017 में राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद उसके समर्थकों द्वारा हिंसा की घटनाएं भी हुई थीं। उस समय हरियाणा और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उस हिंसा में कम से कम 38 लोगों की मौत हुई थी। इसी वजह से राम रहीम की जेल से अस्थायी रिहाई के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए कानून-व्यवस्था एक महत्वपूर्ण विषय बना रहता है।

राम रहीम की हालिया फरलो भी इसी पृष्ठभूमि में चर्चा में रही। उपलब्ध आधिकारिक और समाचार रिपोर्टों के अनुसार उसे 21 दिन की फरलो मिली थी। वह 25 अगस्त 2026 को सुनारिया जेल से बाहर आया और सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहा। 16 सितंबर को फरलो समाप्त होने के बाद वह वापस सुनारिया जेल लौट गया। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक यह उसकी 17वीं फरलो थी।

16 सितंबर को फरलो खत्म होने के बाद राम रहीम को सिरसा से रोहतक की सुनारिया जेल ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक वह दोपहर बाद डेरा मुख्यालय से रवाना हुआ और पुलिस सुरक्षा के बीच जेल पहुंचा। द ट्रिब्यून ने बताया कि उसके काफिले के साथ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

फरलो के दौरान आयोजित रूबरू नाइट को लेकर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने बड़े कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था किस तरह की थी। कार्यक्रम में भारी भीड़ की रिपोर्ट सामने आने के कारण भीड़ प्रबंधन, यातायात, प्रवेश और आपातकालीन सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि कार्यक्रम के लिए कुल कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे या प्रशासन की ओर से कितनी विस्तृत सुरक्षा योजना बनाई गई थी।

कार्यक्रम में प्रवेश से पहले कई स्तर की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका मतलब है कि आयोजन स्थल पर निजी या डेरा स्तर की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। लेकिन निजी सुरक्षा और सरकारी पुलिस व्यवस्था की भूमिका अलग-अलग होती है। किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन में कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक और आपात स्थिति की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस की भी होती है। इसलिए पुलिस की कथित कम मौजूदगी का सवाल इसी संदर्भ में उठाया जा रहा है।

रूबरू नाइट में राम रहीम की मंच पर मौजूदगी और डांस का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ी। समर्थकों के बीच इस तरह के कार्यक्रम लंबे समय से डेरा की गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं। हालांकि राम रहीम के जेल में रहने और फरलो पर बाहर आने के कारण उनके हर सार्वजनिक कार्यक्रम पर सामान्य से ज्यादा ध्यान जाता है।

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों में बताई जाती है। इसलिए राम रहीम की अस्थायी रिहाई के दौरान सिरसा में लोगों की आवाजाही बढ़ना प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण विषय रहा। PTI ने भी बताया है कि डेरा के अनुयायी इन राज्यों के कई जिलों में मौजूद हैं।

राम रहीम की जेल से बाहर रहने के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मनोरंजन आधारित कार्यक्रम आयोजित होने की जानकारी भी सामने आई। रूबरू नाइट इसी तरह का कार्यक्रम था, जिसमें मंच पर संगीत और नृत्य का आयोजन हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक राम रहीम ने खुद भी मंच पर प्रस्तुति दी।

इस पूरे मामले को समझते समय फरलो और पैरोल के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है। दोनों जेल से अस्थायी रूप से बाहर रहने की कानूनी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन इनके नियम और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। राम रहीम को इस बार 21 दिन की फरलो मिली थी और अवधि समाप्त होने के बाद उसे जेल वापस जाना पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उसने निर्धारित अवधि पूरी की और 16 सितंबर को सुनारिया जेल लौट गया।

राम रहीम की अस्थायी रिहाई को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी होती रही है। समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत मिली अस्थायी रिहाई बताते हैं, जबकि आलोचक ऐसे कार्यक्रमों और बड़े जमावड़े को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इन अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बीच तथ्य यह है कि 2026 में भी राम रहीम को निर्धारित अवधि के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली और अवधि समाप्त होने पर वह वापस जेल गया।

इस मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राम रहीम को 2017 में दो महिला अनुयायियों के बलात्कार के मामले में दोषी ठहराकर 20 साल की सजा दी गई थी। बाद के वर्षों में उसे अन्य आपराधिक मामलों में भी अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ा। 2021 में एक विशेष CBI अदालत ने पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए और मार्च 2026 में उसे पत्रकार हत्या मामले में बरी किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई। इसलिए अलग-अलग मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

रूबरू नाइट की घटना पर लौटें तो 13 सितंबर की रात का कार्यक्रम फरलो अवधि के दौरान हुआ था। इसके दो दिन बाद 16 सितंबर को फरलो समाप्त हुई और राम रहीम जेल लौट गया। इस तरह कार्यक्रम उसके जेल लौटने से कुछ दिन पहले आयोजित हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों में कार्यक्रम की तारीख 13 सितंबर बताई गई है, जबकि उसकी जेल वापसी 16 सितंबर को हुई।

इस घटना की सबसे ज्यादा चर्चा तीन कारणों से हुई। पहला, कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा। दूसरा, राम रहीम का मंच पर गाना और डांस करना। तीसरा, इतने बड़े आयोजन के दौरान पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी को लेकर उठे सवाल। हालांकि भीड़ का आंकड़ा और पुलिस की वास्तविक तैनाती जैसे विषयों पर आधिकारिक आंकड़े सामने आने तक रिपोर्टों में दिए गए दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी भीड़ होने पर सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है। खासकर तब जब कार्यक्रम किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़ा हो जिसके समर्थकों की बड़ी संख्या हो और जिसके मामले में अतीत में कानून-व्यवस्था की गंभीर घटनाएं हो चुकी हों। 2017 के बाद राम रहीम से जुड़े किसी भी बड़े आयोजन को इसी सुरक्षा संदर्भ में देखा जाता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि रूबरू नाइट 13 सितंबर को आयोजित हुई थी और राम रहीम उस समय फरलो पर था। 16 सितंबर को फरलो समाप्त होने के बाद वह सुनारिया जेल लौट चुका है। इसलिए “जेल लौटने से पहले” वाली घटना अब एक बीती हुई घटना है, जबकि इसके वीडियो और रिपोर्ट 23 सितंबर को दोबारा चर्चा में आए हैं।

कुल मिलाकर, सिरसा में 13 सितंबर को आयोजित ‘रूबरू नाइट’ ने राम रहीम की फरलो के दौरान हुई गतिविधियों को फिर चर्चा में ला दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक क्रिकेट स्टेडियम में बड़ी संख्या में अनुयायी जुटे और करीब एक लाख लोगों की भीड़ होने का दावा किया गया। राम रहीम ने मंच पर गाने और डांस की प्रस्तुति दी। उसी दिन सुबह सत्संग भी हुआ था। कार्यक्रम की सुरक्षा और पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे, लेकिन पुलिस की पूरी तरह अनुपस्थिति को अभी पुष्ट आधिकारिक तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

राम रहीम अब 21 दिन की फरलो पूरी करने के बाद रोहतक की सुनारिया जेल लौट चुका है। वह दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। 2017 की दोषसिद्धि और सजा का यह तथ्य इस पूरी खबर की कानूनी पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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