दुनिया भर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण हाउसिंग संकट एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई देशों में लोगों के लिए किफायती घर उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए अब नई तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। हाल ही में रोबोटिक तकनीक के जरिए घर बनाने की एक ऐसी प्रणाली सामने आई है जो कम समय में घर का ढांचा तैयार कर सकती है और निर्माण लागत को भी कम कर देती है।
ब्रिटेन की एक टेक कंपनी ने इस दिशा में एक अनोखा समाधान विकसित किया है। कंपनी ने रोबोटिक आर्म आधारित सिस्टम तैयार किया है जो लकड़ी के घरों का ढांचा बहुत कम समय में तैयार कर सकता है। यह तकनीक पारंपरिक निर्माण पद्धति की तुलना में अधिक तेज और सटीक मानी जा रही है।
आमतौर पर किसी लकड़ी के घर का ढांचा तैयार करने में कई सप्ताह लग जाते हैं। लेकिन इस रोबोटिक सिस्टम की मदद से यही काम एक दिन में किया जा सकता है। यह रोबोट लकड़ी के पैनलों को मापने, काटने और उन्हें सही जगह पर जोड़ने का काम करता है।
रोबोटिक आर्म एक तरह से स्वचालित माइक्रो फैक्ट्री की तरह काम करता है। इसमें अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और सेंसर लगे होते हैं जो हर हिस्से को बेहद सटीक तरीके से तैयार करते हैं।
निर्माण क्षेत्र में इस तकनीक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पारंपरिक निर्माण कार्य में अक्सर समय ज्यादा लगता है और लागत भी अधिक आती है।
इस नई प्रणाली की मदद से निर्माण लागत लगभग 30 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।
इसके अलावा बड़ी फैक्ट्रियों से तैयार पैनल मंगवाने की तुलना में यह तकनीक करीब 15 प्रतिशत सस्ती भी पड़ सकती है।
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें लकड़ी की बर्बादी भी कम होती है।
रोबोटिक सिस्टम लकड़ी को इस तरह काटता है कि हर टुकड़े का सही उपयोग हो सके।
इससे न केवल लागत कम होती है बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलता है।
आज दुनिया में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लकड़ी के घरों को कंक्रीट की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।
ऐसे में रोबोटिक तकनीक के साथ लकड़ी के घरों का निर्माण भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस प्रणाली में इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर पूरे घर का डिजिटल मॉडल तैयार करता है।
इसके बाद रोबोट उसी मॉडल के अनुसार पैनल काटकर जोड़ता है।
इस प्रक्रिया में मानवीय गलती की संभावना भी कम हो जाती है।
सटीक तरीके से बने पैनल घर को अधिक मजबूत और ऊर्जा दक्ष बनाते हैं।
जब घर के पैनल सही तरीके से जुड़ते हैं तो अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकलती और ठंड भी कम प्रवेश करती है।
इससे घर में ऊर्जा की बचत होती है और बिजली का खर्च कम होता है।
आज दुनिया के कई देशों में निर्माण क्षेत्र में ऑटोमेशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि अब निर्माण उद्योग में भी इसका प्रयोग हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रोबोटिक निर्माण तकनीक का उपयोग और अधिक बढ़ेगा।
इससे निर्माण प्रक्रिया तेज होगी और लागत भी कम होगी।
हाउसिंग संकट से जूझ रहे देशों के लिए यह तकनीक एक बड़ा समाधान बन सकती है।
कई शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण घरों की मांग बहुत ज्यादा है।
ऐसे में पारंपरिक निर्माण तरीके उस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पाते।
रोबोटिक निर्माण तकनीक इस समस्या को काफी हद तक हल कर सकती है।
अगर बड़े पैमाने पर इस तकनीक का उपयोग शुरू हो जाता है तो कम समय में हजारों घर बनाए जा सकते हैं।
इसके अलावा यह तकनीक श्रम की कमी की समस्या को भी दूर कर सकती है।
कई देशों में निर्माण क्षेत्र में कुशल मजदूरों की कमी देखी जा रही है।
ऐसे में रोबोटिक सिस्टम इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि रोबोट पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले सकते।
निर्माण कार्य में मानव श्रम और तकनीक दोनों की जरूरत होती है।
रोबोटिक तकनीक मुख्य रूप से भारी और जटिल कामों को आसान बनाने के लिए उपयोगी है।
मानव श्रमिकों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
इस तकनीक के आने से निर्माण उद्योग में काम करने वाले लोगों को नई तकनीकी कौशल सीखने की जरूरत भी होगी।
भविष्य में निर्माण क्षेत्र में रोबोट ऑपरेटर, डिजाइन विशेषज्ञ और सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसी नई नौकरियां भी बढ़ सकती हैं।
दुनिया में बढ़ते हाउसिंग संकट को देखते हुए कई देश इस तरह की तकनीकों में निवेश कर रहे हैं।
सरकारें और निजी कंपनियां दोनों ही किफायती और तेज निर्माण समाधान तलाश रही हैं।
रोबोटिक निर्माण प्रणाली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो आने वाले समय में घर बनाना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो सकता है।
इस तरह रोबोटिक तकनीक न केवल निर्माण उद्योग में बदलाव ला रही है बल्कि भविष्य के शहरों के निर्माण की दिशा भी तय कर रही है।
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