बॉलीवुड के ‘किंग खान’ शाहरुख खान की पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों, रोमांटिक किरदारों और बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं है। उनके करियर में ऐसे दौर भी आए जब फिल्म इंडस्ट्री पर मुंबई अंडरवर्ल्ड के प्रभाव और धमकियों की चर्चा होती थी। इसी दौर से जुड़ा एक पुराना किस्सा इन दिनों फिर चर्चा में है। फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने बताया था कि जब 1990 के दशक में फिल्मी सितारों पर अंडरवर्ल्ड का दबाव अपने चरम पर था, तब शाहरुख खान ने कथित तौर पर धमकियों के सामने झुकने से इनकार कर दिया था।
संजय गुप्ता ने शाहरुख खान की फिल्म Jawan देखने के बाद सितंबर 2023 में सोशल मीडिया पर यह किस्सा साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि 90 के दशक में जब अंडरवर्ल्ड फिल्म स्टार्स को परेशान करता था, तब शाहरुख उन लोगों में थे जिन्होंने दबाव के आगे झुकने से इनकार किया। इसी संदर्भ में उन्होंने शाहरुख के हवाले से मशहूर लाइन लिखी—“गोली मारनी है मार दो, पर तुम्हारे लिए काम नहीं करूंगा। मैं पठान हूं।”
यह किस्सा दोबारा इसलिए चर्चा में आया क्योंकि संजय गुप्ता ने शाहरुख की Jawan में उनके किरदार की बेबाकी को उनके वास्तविक जीवन के उस रवैये से जोड़ते हुए कहा था कि अभिनेता में आज भी वही आत्मविश्वास दिखाई देता है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल हो रही यह लाइन शाहरुख खान के किसी नए इंटरव्यू की नहीं, बल्कि संजय गुप्ता द्वारा वर्षों पहले सुनाए गए किस्से की रिपोर्टिंग है।
90 का दशक बॉलीवुड के लिए बदलाव और चुनौती का दौर था। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अंडरवर्ल्ड के हस्तक्षेप, फिल्म फाइनेंसिंग और सितारों को धमकियां मिलने की खबरें समय-समय पर सामने आती थीं। कई कलाकार और फिल्म निर्माता दबाव में रहते थे। ऐसे माहौल में किसी बड़े अभिनेता द्वारा खुले तौर पर दबाव स्वीकार न करने की कहानी अपने आप में काफी बड़ी बात थी।
शाहरुख खान उस समय इंडस्ट्री में तेजी से अपनी जगह बना रहे थे। 1992 में Deewana से बॉलीवुड में शुरुआत करने के बाद उन्होंने Baazigar, Darr, Karan Arjun, Dilwale Dulhania Le Jayenge और कई दूसरी फिल्मों के जरिए खुद को स्थापित किया। 90 के दशक के मध्य तक वह एक बड़े स्टार बन चुके थे। उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी और इसी दौर में उन्हें अंडरवर्ल्ड से कथित धमकियों का सामना करना पड़ा।
संजय गुप्ता के मुताबिक, शाहरुख ने ऐसी परिस्थितियों में पीछे हटने के बजाय अपनी शर्तों पर काम करने का फैसला किया। उनके अनुसार शाहरुख ने साफ कहा कि वह किसी गैंग या अंडरवर्ल्ड के कहने पर फिल्म नहीं करेंगे और न ही उनके लिए शो करेंगे। उनके बयान में शाहरुख की कथित प्रतिक्रिया को बेहद बेबाक अंदाज में बताया गया—अगर गोली मारनी है तो मार दो, लेकिन वह उनके लिए काम नहीं करेंगे।
यहां “मैं पठान हूं” वाली लाइन भी काफी चर्चित हुई। शाहरुख का जन्म दिल्ली में हुआ और उनका परिवार पठान पृष्ठभूमि से आता है। उस दौर में उन्होंने अपनी पहचान और आत्मविश्वास को जिस तरह इस्तेमाल किया, उसे संजय गुप्ता ने उनकी व्यक्तिगत दृढ़ता के प्रतीक के रूप में पेश किया।
हालांकि शाहरुख खान के अंडरवर्ल्ड से सामना करने की चर्चा सिर्फ संजय गुप्ता के बयान तक सीमित नहीं है। फिल्म पत्रकार और लेखिका अनुपमा चोपड़ा की किताब King of Bollywood: Shah Rukh Khan and the Seductive World of Indian Cinema में भी अभिनेता के अंडरवर्ल्ड से जुड़े अनुभवों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें अबू सलेम, छोटा राजन और छोटा शकील जैसे नामों से जुड़े संदर्भों का जिक्र मिलता है।
इसी दौर की एक दूसरी घटना शाहरुख खान और करण जौहर से भी जुड़ी है, जिसे करण जौहर ने अपनी आत्मकथा An Unsuitable Boy में बताया था। करण के मुताबिक उनकी फिल्म की रिलीज से पहले अंडरवर्ल्ड की ओर से धमकी भरा फोन आया था। फोन पर उनकी मां को धमकाया गया और कहा गया कि फिल्म रिलीज करने पर करण को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। घटना से परिवार डर गया था।
करण जौहर ने बताया था कि उस समय शाहरुख खान ने उनका साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने करण को अकेले डरने के बजाय स्थिति का सामना करने के लिए कहा। करण के मुताबिक शाहरुख ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ खड़े रहेंगे और जरूरत पड़ी तो गोली भी अपने ऊपर लेने को तैयार हैं। इस घटना को करण ने बाद में शाहरुख के साथ अपनी दोस्ती और रिश्ते की मजबूती का उदाहरण बताया।
इस घटना में भी “पठान” शब्द का इस्तेमाल शाहरुख के आत्मविश्वास से जुड़ा हुआ बताया गया। करण के मुताबिक शाहरुख ने उनकी मां को आश्वस्त करते हुए कहा था कि वह पठान हैं और कुछ नहीं होगा। यह किस्सा बताता है कि शाहरुख के लिए दोस्ती और अपने लोगों के साथ खड़े रहना कितना महत्वपूर्ण था।
शाहरुख खान के करियर के शुरुआती दौर को देखें तो उनकी छवि बाकी कई सितारों से अलग थी। वह फिल्म इंडस्ट्री के पारंपरिक स्टार परिवार से नहीं आए थे। दिल्ली से मुंबई पहुंचे इस अभिनेता ने टीवी से शुरुआत की और फिल्मों में अपने दम पर जगह बनाई। इसलिए उनके सामने आने वाली चुनौतियां भी अलग थीं। शुरुआती फिल्मों में नकारात्मक और ग्रे किरदार करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे रोमांटिक हीरो की पहचान बनाई और फिर एक बड़े सुपरस्टार बन गए।
इसीलिए संजय गुप्ता का पुराना बयान शाहरुख के व्यक्तित्व के एक दूसरे पहलू को सामने लाता है। पर्दे पर रोमांस के बादशाह के रूप में पहचाने जाने वाले शाहरुख वास्तविक जीवन में अपने फैसलों को लेकर काफी दृढ़ माने जाते हैं। संजय गुप्ता ने इसी विरोधाभास को Jawan से जोड़ते हुए कहा था कि फिल्म में दिखाई देने वाला उनका निडर अंदाज असल जिंदगी के उनके स्वभाव से भी मेल खाता है।
संजय गुप्ता खुद भी बॉलीवुड की क्राइम और एक्शन फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने Kaante, Shootout at Lokhandwala, Shootout at Wadala, Kaabil और Jazbaa जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। इसलिए जब उन्होंने 90 के दशक के अंडरवर्ल्ड और शाहरुख खान के रवैये का जिक्र किया तो इस बयान को बॉलीवुड के उस दौर के संदर्भ में काफी ध्यान मिला।
दिलचस्प बात यह है कि संजय गुप्ता ने यह किस्सा किसी नई घटना के तुरंत बाद नहीं बताया था। उन्होंने इसे Jawan देखने के बाद 2023 में साझा किया था। फिल्म में शाहरुख खान ने एक बेहद आक्रामक और सिस्टम से सवाल करने वाले किरदार को निभाया था। फिल्म के एक लंबे मोनोलॉग और उनके एक्शन अवतार की खूब चर्चा हुई थी। संजय गुप्ता को शायद इसी पर्दे वाले आत्मविश्वास में शाहरुख के पुराने व्यक्तित्व की झलक दिखाई दी।
संजय गुप्ता ने अपने पोस्ट में यह भी कहा था कि शाहरुख तब भी ऐसे ही थे और आज भी ऐसे ही हैं। उनके बयान का मतलब यह था कि अभिनेता के व्यक्तित्व में मुश्किल परिस्थितियों के सामने डटकर खड़े रहने की प्रवृत्ति लंबे समय से दिखाई देती है।
अंडरवर्ल्ड के साथ बॉलीवुड का संबंध 1990 के दशक में एक गंभीर विषय रहा है। उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अवैध फंडिंग, धमकियों और जबरन हस्तक्षेप को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आती थीं। कई मामलों में अभिनेताओं, निर्माताओं और निर्देशकों को फोन या अन्य माध्यमों से धमकाने की खबरें आती थीं। इसलिए किसी कलाकार द्वारा इस तरह की धमकी के बावजूद काम करने से इनकार करने की कहानी उस समय के माहौल को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि ऐसे पुराने किस्सों को रिपोर्ट करते समय यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि कौन-सी बात किस स्रोत से आई है। शाहरुख खान की ओर से इस विशेष “गोली मारनी है तो मार दो” लाइन का कोई हालिया स्वतंत्र इंटरव्यू उपलब्ध नहीं है। यह लाइन मुख्य रूप से संजय गुप्ता के बयान और उसके बाद की मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आई। इसलिए इसे शाहरुख का सत्यापित हालिया बयान बताना सही नहीं होगा।
इसके बावजूद यह कहानी शाहरुख खान की लोकप्रिय छवि का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। उनके प्रशंसक अक्सर उनके आत्मविश्वास, स्पष्ट बोलने के अंदाज और मुश्किल परिस्थितियों में अपने फैसले पर कायम रहने की बात करते हैं। बॉलीवुड में लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन उनकी स्टार पावर में लगातार वापसी देखने को मिली।
शाहरुख का अंडरवर्ल्ड से जुड़ा एक और पहलू यह है कि 1990 के दशक में उनके खिलाफ कथित खतरे के कारण उन्हें सुरक्षा भी दी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बाद के वर्षों में भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था को खतरे की धारणा के आधार पर बढ़ाया गया। इसका मतलब यह नहीं है कि हर वायरल किस्सा पूरी तरह स्वतंत्र रूप से सत्यापित है, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि उस समय फिल्मी सितारों की सुरक्षा एक वास्तविक चिंता थी।
शाहरुख खान के लिए यह दौर उनके करियर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था। एक तरफ उनकी फिल्में सफल हो रही थीं और वह तेजी से सुपरस्टार बन रहे थे, वहीं दूसरी तरफ निजी सुरक्षा और फिल्म इंडस्ट्री के बाहरी दबाव जैसी चुनौतियां भी मौजूद थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाया और 2000 के दशक में वह दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले भारतीय फिल्म सितारों में शामिल हो गए।
आज जब शाहरुख खान की फिल्मों की बात होती है तो Pathaan, Jawan और Dunki जैसी फिल्मों का जिक्र होता है। खासकर Pathaan में उनके किरदार का नाम भी “पठान” था। इसी वजह से जब पुराने बयान में “मैं पठान हूं” वाली लाइन सामने आती है तो सोशल मीडिया पर लोग इसे उनके फिल्मी किरदारों से भी जोड़ने लगते हैं। लेकिन दोनों चीजों को अलग रखना जरूरी है। 90 के दशक का यह कथित बयान उनके वास्तविक जीवन से जुड़ा बताया गया था, जबकि Pathaan एक काल्पनिक फिल्म थी।
Jawan की रिलीज के समय संजय गुप्ता ने इसी पुराने किस्से को फिर सामने रखा था। उन्होंने फिल्म में शाहरुख के साहसी किरदार की तारीफ करते हुए कहा कि अभिनेता ने अपने वास्तविक जीवन में भी कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है। यही वजह है कि पुराना बयान एक बार फिर वायरल हुआ और सोशल मीडिया पर शाहरुख के प्रशंसकों ने इसे खूब शेयर किया।
इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि इसमें बॉलीवुड के एक ऐसे दौर की झलक मिलती है जब किसी फिल्म की स्क्रिप्ट, कलाकार और बॉक्स ऑफिस से ज्यादा सवाल यह भी होता था कि फिल्म के पीछे पैसा कहां से आ रहा है और किन लोगों का प्रभाव है। आज फिल्म इंडस्ट्री में फाइनेंसिंग और प्रोडक्शन की व्यवस्था काफी बदल चुकी है, लेकिन 90 के दशक की वे कहानियां आज भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई हैं।
शाहरुख खान का नाम इस संदर्भ में इसलिए भी अलग नजर आता है क्योंकि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आए थे और उन्होंने अपने करियर को अपने दम पर बनाया। एक आउटसाइडर का सुपरस्टार बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी। ऐसे में धमकियों और दबाव के बीच अपनी शर्तों पर काम करने की उनकी कथित कहानी उनके प्रशंसकों के लिए और भी प्रेरणादायक बन जाती है।
हालांकि यह भी जरूरी है कि ऐसी कहानियों को सनसनीखेज बनाने के बजाय उनके संदर्भ के साथ समझा जाए। अंडरवर्ल्ड से जुड़े मामलों में कई तरह की अफवाहें और मीडिया रिपोर्ट्स वर्षों से चलती रही हैं। हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं होती। इसलिए सबसे भरोसेमंद तरीका यही है कि संजय गुप्ता ने क्या कहा, करण जौहर ने क्या याद किया और प्रकाशित स्रोतों में क्या दर्ज है—इन चीजों को अलग-अलग समझा जाए।
फिर भी संजय गुप्ता की कही वह लाइन आज तक लोगों को याद है—“गोली मारनी है मार दो, पर तुम्हारे लिए काम नहीं करूंगा। मैं पठान हूं।” यही लाइन शाहरुख खान की उस छवि का प्रतीक बन गई है जिसमें वह मुश्किल हालात में पीछे हटने के बजाय अपने फैसले पर कायम दिखाई देते हैं।
आज के दौर में जब शाहरुख खान फिर से लगातार बड़े पर्दे पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, उनका यह पुराना किस्सा उनके लंबे सफर की एक अलग तस्वीर सामने लाता है। वह सफर जिसमें दिल्ली से मुंबई आने वाला एक युवा अभिनेता धीरे-धीरे बॉलीवुड का सबसे बड़ा नाम बना और फिर कई पीढ़ियों के दर्शकों का पसंदीदा सितारा बन गया।
इसलिए शाहरुख खान और अंडरवर्ल्ड वाला यह किस्सा सिर्फ एक धमकी या एक कथित जवाब की कहानी नहीं है। यह उस समय के बॉलीवुड, स्टारडम के दबाव और एक अभिनेता की व्यक्तिगत दृढ़ता से जुड़ी कहानी है। संजय गुप्ता का दावा है कि शाहरुख ने धमकी के बावजूद किसी के दबाव में काम करने से इनकार किया। बाद में करण जौहर के संस्मरण में सामने आया किस्सा भी शाहरुख के दोस्त के रूप में उनके खड़े होने की तस्वीर दिखाता है। इन घटनाओं ने मिलकर उनकी एक ऐसी छवि बनाई जिसे आज भी उनके प्रशंसक “निडर शाहरुख” के रूप में याद करते हैं।
और शायद यही वजह है कि वर्षों बाद भी जब संजय गुप्ता उस पुराने दौर को याद करते हैं, तो शाहरुख खान का नाम सबसे पहले सामने आता है। पर्दे पर चाहे वह रोमांटिक हीरो हों, जवान हों या पठान, उनके प्रशंसकों के लिए असली आकर्षण उनकी वह आत्मविश्वास भरी शख्सियत भी है, जिसने उन्हें तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में लगातार प्रासंगिक बनाए रखा है।
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