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कप्तान श्रेयस बोले- ऐसी हार स्वीकार्य नहीं, गंभीर ने टीम का किया बचाव; सैमसन की वापसी पर चर्चा

भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले में ऐसी हार का सामना करना पड़ा, जिसने टीम की बल्लेबाजी, रणनीति और प्लेइंग इलेवन को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर इंग्लैंड ने भारत को 125 रन से हराया। रनों के अंतर के लिहाज से यह भारत की टी-20 इंटरनेशनल इतिहास की सबसे बड़ी हार रही। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 201 रन बनाए, लेकिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम सिर्फ 76 रन पर ऑलआउट हो गई।

मैच के बाद कप्तान Shreyas Iyer ने टीम के प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। उन्होंने इस प्रदर्शन को बेहद खराब बताया और कहा कि इतने बड़े अंतर से मिली हार स्वीकार्य नहीं है। श्रेयस ने माना कि भारतीय टीम को अपनी गलतियों को स्वीकार करके नए सिरे से योजना बनानी होगी। उनका मानना था कि ट्रेंट ब्रिज की पिच ऐसी नहीं थी जिस पर 200 से ज्यादा रन आसानी से बनने चाहिए थे, लेकिन भारतीय टीम गेंदबाजी और फिर बल्लेबाजी दोनों विभागों में परिस्थितियों का फायदा नहीं उठा सकी।

भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। इंग्लैंड की ओर से फिल सॉल्ट ने 44 गेंदों में 70 रन बनाए, जबकि सैम करन ने आखिरी ओवरों में नाबाद 41 रन की उपयोगी पारी खेली। इंग्लैंड ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 201 रन बनाए। जवाब में भारत की बल्लेबाजी शुरुआत से ही बिखर गई और पूरी टीम 11.4 ओवर में 76 रन पर आउट हो गई। जोश टंग ने 4 विकेट और Jofra Archer ने 3 विकेट लिए।

श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद कहा कि टीम की सबसे बड़ी गलती पावरप्ले में लगातार विकेट गंवाना रही। लक्ष्य बड़ा था और ऐसी स्थिति में भारत को मजबूत शुरुआत की जरूरत थी, लेकिन शुरुआती विकेट गिरने से टीम पर दबाव बढ़ता चला गया। कप्तान ने कहा कि खिलाड़ी मैदान पर परिस्थितियों के अनुसार अपनी योजना को बदल नहीं सके और यही मैच का निर्णायक मोड़ बन गया।

भारतीय टीम का बल्लेबाजी क्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सका। आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश में बल्लेबाज लगातार विकेट गंवाते रहे। भारतीय टीम की यह रणनीति पिछले कुछ समय से चर्चा में रही है कि टी-20 में बल्लेबाज शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाएं, लेकिन ट्रेंट ब्रिज में यह तरीका पूरी तरह विफल रहा।

कोच Gautam Gambhir ने हार के बाद टीम के आक्रामक क्रिकेट खेलने के तरीके का बचाव किया। उनका मानना था कि एक बड़ी हार के बाद पूरी रणनीति को गलत घोषित नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि टीम पिछले कुछ मैचों में परिस्थितियों को ठीक तरह से नहीं पढ़ पाई है और खिलाड़ियों को मैच की स्थिति के अनुसार बेहतर फैसले लेने होंगे।

गंभीर के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टीम की लगातार खराब लय से जुड़ा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने माना कि आयरलैंड दौरे के बाद से टीम परिस्थितियों और मैच की मांग को सही तरीके से समझने में सफल नहीं रही है। टी-20 क्रिकेट में केवल आक्रामक बल्लेबाजी काफी नहीं होती; यह भी समझना जरूरी होता है कि किस गेंदबाज के खिलाफ जोखिम लेना है और किस समय पारी को संभालना है।

हार के बाद Sanju Samson की प्लेइंग इलेवन में वापसी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। सैमसन को दूसरे टी-20 मुकाबले की प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया था और इसके बाद गंभीर तथा सैमसन के बीच लंबी बातचीत की तस्वीरें सामने आई थीं। उस बातचीत को लेकर अनुमान लगाया गया कि टीम मैनेजमेंट सैमसन को भविष्य की योजना और वापसी के रास्ते के बारे में समझा रहा था, हालांकि उस बातचीत की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

तीसरे टी-20 के बाद जब गंभीर से सैमसन को बाहर रखने के फैसले पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि चयन को लेकर जो स्पष्ट करना था, वह पहले ही किया जा चुका है। गंभीर का जोर इस बात पर था कि मौजूदा समस्या किसी एक खिलाड़ी को चुनने या बाहर रखने की नहीं, बल्कि पूरी टीम के प्रदर्शन की है।

यही कारण है कि सैमसन की वापसी को फिलहाल संभावना और टीम संयोजन की चर्चा के रूप में देखना चाहिए, पक्के चयन के रूप में नहीं। भारतीय बल्लेबाजी जिस तरह 76 रन पर सिमटी, उसके बाद अगले मैच के लिए बदलाव की मांग जरूर तेज हुई है, लेकिन अंतिम प्लेइंग इलेवन पिच, फिटनेस और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर निर्भर करेगी।

श्रेयस अय्यर ने हार के बाद खिलाड़ियों से व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने की बात भी कही। उनका कहना था कि हर खिलाड़ी को खुद बैठकर यह सोचना होगा कि वह टीम के लिए मैच कैसे जीत सकता है और किस तरह महत्वपूर्ण मौके पर योगदान दे सकता है। कप्तान ने कहा कि टीम को पिछले मुकाबले के बारे में बहुत ज्यादा सोचने के बजाय उससे सीख लेकर वापसी करनी होगी।

भारत की परेशानी केवल एक मैच की हार तक सीमित नहीं है। टीम हाल के मुकाबलों में लगातार दबाव में दिखाई दी है। आयरलैंड दौरे पर भी टीम को समस्याओं का सामना करना पड़ा था और अब इंग्लैंड में बल्लेबाजी तथा मैच की परिस्थितियों को समझने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण गंभीर ने भी कहा कि टीम को अपने मैच रीडिंग में सुधार करने की जरूरत है।

इंग्लैंड की जीत में केवल बल्लेबाजों की भूमिका नहीं थी। उसके तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को लगातार हार्ड लेंथ और गति से परेशान किया। जोफ्रा आर्चर और जोश टंग की गेंदबाजी के सामने भारत के शीर्ष क्रम को खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय बल्लेबाज तेजी से रन बनाने के प्रयास में विकेट गंवाते चले गए और कोई बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी।

भारत के लिए सबसे चिंताजनक बात यह रही कि लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी बल्लेबाज ने पारी को संभालने की जिम्मेदारी नहीं ली। टी-20 में 202 रन का लक्ष्य बड़ा जरूर था, लेकिन भारत के पास ऐसा बल्लेबाजी क्रम था जिससे मुकाबले की उम्मीद की जा सकती थी। शुरुआती झटकों के बाद भी कुछ ओवर टिककर पारी को आगे बढ़ाया जा सकता था, लेकिन लगातार विकेट गिरने से मुकाबला बहुत जल्दी एकतरफा हो गया।

श्रेयस ने पिच को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उनके मुताबिक विकेट को देखकर उन्हें नहीं लगा था कि यह 200 रन वाली पिच है। इसके बावजूद इंग्लैंड 201 रन तक पहुंचा। इसका मतलब भारत की गेंदबाजी रणनीति भी सवालों से बाहर नहीं है। इंग्लैंड ने बीच के ओवरों में विकेट गंवाए, लेकिन फिल सॉल्ट की पारी और सैम करन की अंतिम ओवरों की बल्लेबाजी ने मेजबान टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचा दिया।

इंग्लैंड के कप्तान Harry Brook ने जीत के बाद अपनी टीम की रणनीति और आपसी संवाद की तारीफ की। इंग्लैंड ने परिस्थितियों को भारत से बेहतर समझा और गेंदबाजों ने उसी योजना के अनुसार गेंदबाजी की।

भारत की हार के बाद पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच भी कप्तानी तथा टीम संयोजन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व भारतीय विकेटकीपर Dinesh Karthik ने इससे पहले लगातार हार के बाद श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर दबाव बढ़ने की बात कही थी। उन्होंने गेंदबाजी संयोजन और कुछ खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए थे।

तीसरे मैच में भारत ने अपनी प्लेइंग इलेवन में एक बदलाव किया था। रवि बिश्नोई की जगह प्रिंस यादव को मौका मिला, लेकिन टीम की मुख्य समस्या बल्लेबाजी रही। 202 रन का पीछा करते हुए 76 रन पर ऑलआउट होना बताता है कि केवल गेंदबाजी संयोजन बदलने से समस्या हल नहीं होगी।

टीम इंडिया के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी की नीति जारी रखेगी या परिस्थितियों के अनुसार उसमें बदलाव करेगी। आधुनिक टी-20 क्रिकेट में तेजी से रन बनाना जरूरी है, लेकिन हर गेंद पर जोखिम लेना ही आक्रामक क्रिकेट नहीं होता। बेहतर टीम वही होती है जो गेंदबाज, पिच और मैच की स्थिति के अनुसार अपने आक्रमण का समय चुन सके।

गंभीर के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। कोच के रूप में उनकी सोच आक्रामक क्रिकेट और खिलाड़ियों को स्पष्ट भूमिका देने पर आधारित रही है। लेकिन लगातार हार की स्थिति में प्लेइंग इलेवन, बल्लेबाजी क्रम और रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सैमसन की वापसी की चर्चा भी इसी संदर्भ में हो रही है।

सैमसन के समर्थकों का मानना है कि उनके अनुभव और आक्रामक बल्लेबाजी की क्षमता से टीम को फायदा मिल सकता है। दूसरी ओर टीम मैनेजमेंट को यह भी देखना होगा कि किस बल्लेबाज की जगह उन्हें मौका दिया जाए और बल्लेबाजी क्रम में उनकी भूमिका क्या हो। केवल एक खिलाड़ी की वापसी से पूरी बल्लेबाजी समस्या हल होने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं होगा।

श्रेयस के बयान से साफ है कि ड्रेसिंग रूम में हार को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने खिलाड़ियों को जिम्मेदारी लेने और अपनी भूमिका पर विचार करने की बात कही है। भारत के लिए अगला मुकाबला केवल सीरीज की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि यह टीम के मानसिक और रणनीतिक जवाब की परीक्षा भी होगा।

भारत के पास वापसी की क्षमता रखने वाले कई खिलाड़ी हैं, लेकिन अब उन्हें व्यक्तिगत प्रतिभा से आगे बढ़कर एक इकाई के रूप में प्रदर्शन करना होगा। गेंदबाजों को परिस्थितियों के अनुसार सही लेंथ तलाशनी होगी और बल्लेबाजों को इंग्लैंड के तेज आक्रमण के खिलाफ बेहतर योजना के साथ उतरना होगा।

ट्रेंट ब्रिज की हार ने भारतीय क्रिकेट को कई सवाल दिए हैं। क्या आक्रामक रणनीति में बदलाव होगा? क्या संजू सैमसन को मौका मिलेगा? क्या बल्लेबाजी क्रम बदलेगा? और क्या श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम दबाव से निकलकर वापसी कर पाएगी? इन सवालों का जवाब अगले मुकाबलों में मिलेगा।

फिलहाल इतना साफ है कि कप्तान और कोच दोनों ने प्रदर्शन की कमियों को स्वीकार किया है, लेकिन टीम की मूल सोच को पूरी तरह छोड़ने का संकेत नहीं दिया है। श्रेयस ने हार को अस्वीकार्य बताया है, जबकि गंभीर ने सामूहिक जिम्मेदारी और परिस्थितियों को बेहतर समझने पर जोर दिया है।

भारत के लिए यह हार एक बड़ी चेतावनी है। 125 रन की हार और 76 रन पर ऑलआउट होना केवल स्कोरकार्ड का खराब दिन नहीं माना जा सकता। टीम को बल्लेबाजी के फैसलों, गेंदबाजी की योजना और प्लेइंग इलेवन के संतुलन पर काम करना होगा।

आने वाले मुकाबले में टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सभी की नजर होगी। खास तौर पर संजू सैमसन को लेकर सवाल जारी रहेंगे। गंभीर ने अभी स्पष्ट रूप से उनकी वापसी की घोषणा नहीं की है, लेकिन मौजूदा बल्लेबाजी प्रदर्शन के बाद टीम संयोजन में बदलाव की संभावना पर चर्चा स्वाभाविक है।

भारत की यह हार जितनी बड़ी है, वापसी की चुनौती भी उतनी ही कठिन है। कप्तान श्रेयस अय्यर ने खिलाड़ियों से आत्ममंथन और जिम्मेदारी की बात कही है। अब यह देखना होगा कि यह संदेश मैदान पर प्रदर्शन में बदलता है या इंग्लैंड की टीम सीरीज पर अपनी पकड़ और मजबूत करती है।

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http://Shreyas Iyer India Captain, Gautam Gambhir Team India Coach

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