Site icon abworldnews

देश में 30% सस्ते बन सकते हैं छोटे परमाणु रिएक्टर

बड़े पैमाने पर उत्पादन से घटेगी लागत, ऊर्जा क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से नए विकल्पों की तलाश कर रहा है। बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार, डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग ने बिजली की मांग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि देश में छोटे-छोटे परमाणु रिएक्टर, यानी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), लगभग 30% तक सस्ते बन सकते हैं

ऊर्जा विशेषज्ञों और परमाणु क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत बड़े पैमाने पर SMR का उत्पादन करता है, तो न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।


क्या हैं छोटे परमाणु रिएक्टर (SMR)?

SMR यानी Small Modular Reactor पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में छोटे आकार के होते हैं।


इनकी खासियत यह है कि:

यही कारण है कि दुनिया भर में SMR को भविष्य की परमाणु ऊर्जा तकनीक माना जा रहा है।


30% लागत घटने का दावा क्यों अहम?

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अगर SMR का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाता है, तो इसकी लागत लगभग 30% तक कम हो सकती है
फिलहाल:

यह अंतर भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ला सकता है।


भारत का 2047 तक का लक्ष्य

सरकार ने साफ तौर पर घोषणा की है कि:

सरकार की ‘भारत SMR’ पहल के तहत:


कौन-कौन सी कंपनियां दिखा रही हैं दिलचस्पी?

रिपोर्ट के मुताबिक कई बड़ी भारतीय कंपनियां SMR सेक्टर में रुचि दिखा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

इन कंपनियों का मानना है कि भविष्य में स्थिर, स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा के लिए परमाणु विकल्प जरूरी होगा।


SMR क्यों बन सकते हैं गेम चेंजर?

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि SMR कई मायनों में भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

1. कम कार्बन उत्सर्जन

SMR से बिजली उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है।

2. डेटा सेंटर और उद्योगों के लिए आदर्श

डेटा सेंटर, औद्योगिक पार्क और बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब को लगातार बिजली की जरूरत होती है। SMR वहां सीधे लगाए जा सकते हैं।

3. ग्रिड पर कम दबाव

SMR स्थानीय स्तर पर बिजली उपलब्ध कराते हैं, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव कम होता है।


सुरक्षा को लेकर क्या हैं चिंताएं?

परमाणु ऊर्जा का नाम आते ही सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन जाता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि:

इसके बावजूद भारत में परमाणु सुरक्षा नियामकों की भूमिका बेहद अहम होगी।


भारत बनाम दुनिया: कहां खड़ा है देश?

अमेरिका, रूस, चीन और यूरोप के कई देश पहले ही SMR तकनीक पर काम कर रहे हैं।
भारत के पास फायदा यह है कि:

अगर भारत समय पर कदम उठाता है, तो वह SMR निर्माण का वैश्विक हब बन सकता है।


रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

SMR परियोजनाओं से:

यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है।


पर्यावरण और ऊर्जा संतुलन

भारत ने 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने में:

SMR इस संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।


चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन चुनौतियां भी मौजूद हैं:

इन सभी मुद्दों पर सरकार और उद्योग को मिलकर काम करना होगा।


विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि:

“SMR भारत के लिए केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि तकनीकी नेतृत्व का अवसर भी हैं। लेकिन इसके लिए दीर्घकालिक नीति और पारदर्शिता जरूरी है।”


आगे का रास्ता क्या?

आने वाले वर्षों में:

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो भारत 2047 तक अपने परमाणु ऊर्जा लक्ष्य के काफी करीब पहुंच सकता है।


https://abworldnews.in/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Image-2026-01-11-at-07.51.21h.jpeg

देश में 30% तक सस्ते बन सकने वाले छोटे परमाणु रिएक्टर भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
बड़े पैमाने पर उत्पादन, स्वदेशी तकनीक और निजी भागीदारी के दम पर भारत न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकता है, बल्कि वैश्विक परमाणु बाजार में भी मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और उद्योग इस अवसर को कितनी तेजी और समझदारी से अपनाते हैं।

http://small-modular-reactor-india.jpg


Exit mobile version