स्पेन में बुजुर्ग किराएदार की eviction से संकट: हाउसिंग प्रस्ताव गिरा, 29 नवंबर को चुनाव

स्पेन में महंगे किराए और घरों की बढ़ती कीमतों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है। एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसके लंबे समय से रहे किराए के घर से निकाले जाने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की सरकार ने किराएदारों को राहत देने और कमजोर लोगों को बेदखली से बचाने के लिए आपातकालीन आवासीय उपाय संसद में पेश किए, लेकिन विपक्ष और कुछ महत्वपूर्ण सहयोगी दलों का समर्थन नहीं मिलने के कारण ये प्रस्ताव गिर गए।

इसके बाद सरकार पर दबाव और बढ़ गया। 2 अक्टूबर को स्पेन की संसद ने सरकार के दो महत्वपूर्ण हाउसिंग डिक्री-लॉ को खारिज कर दिया। पहले प्रस्ताव के पक्ष में 172 और विरोध में 178 वोट पड़े। दूसरे प्रस्ताव को भी पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

और अब सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुका है।

5 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने घोषणा की कि स्पेन में आम चुनाव 29 नवंबर 2026 को होंगे। यानी 2027 में होने वाले निर्धारित चुनाव से करीब आठ महीने पहले देश की जनता फिर से मतदान करेगी। सांचेज ने कहा कि व्यापक राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए जनता के पास वापस जाना जरूरी है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में सिर्फ एक बुजुर्ग महिला का मामला नहीं है। इसके पीछे स्पेन का बढ़ता housing crisis, महंगा किराया, सीमित affordable housing, किराएदारों के अधिकार और सरकार की कमजोर संसदीय स्थिति जैसे कई बड़े मुद्दे हैं।

आखिर 87 साल की बुजुर्ग महिला के साथ क्या हुआ?

इस मामले में जिस महिला का नाम सामने आया है, वह Maricarmen Abascal हैं। वह मैड्रिड के Retiro इलाके में एक ही घर में करीब 71 साल तक रही थीं।

उनका परिवार इस घर में 1956 से रह रहा था। मूल किरायेदारी उनके पिता के नाम थी और बाद में परिवार के भीतर किरायेदारी Maricarmen तक पहुंची।

लेकिन समय के साथ मकान का मालिकाना हक बदल गया। 2018 में यह संपत्ति एक investment company के हाथ में चली गई। इसके बाद किराए और पुराने tenancy arrangement को लेकर विवाद शुरू हुआ।

मामला अदालतों तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चलती रही।

आखिरकार सितंबर 2026 में अदालत के फैसलों के बाद उनका eviction किया गया।

23 सितंबर को पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में 87 वर्षीय Maricarmen को उनके घर से बाहर निकाला गया। उस समय उनकी तबीयत खराब थी और उन्हें स्ट्रेचर पर बाहर लाया गया। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तथा न्यूज मीडिया में तेजी से फैल गए।

यही तस्वीर बाद में स्पेन में housing crisis के खिलाफ बड़े आंदोलन का प्रतीक बन गई।

किराया कितना बढ़ गया था?

यह इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रिपोर्टों के मुताबिक Maricarmen का पुराना किराया करीब €500 प्रति माह था। बाद में मकान के नए मालिक ने किराए को बढ़ाकर €2,650 प्रति माह करने की मांग की।

बाद में यह मांग घटाकर लगभग €1,650 प्रति माह की गई।

लेकिन Maricarmen की मासिक pension करीब €1,350 थी। यानी मांगा गया किराया उनकी पूरी pension से भी ज्यादा था।

यही वजह थी कि उनका मामला सिर्फ landlord और tenant के बीच सामान्य विवाद नहीं रहा।

किराए में भारी अंतर ने सवाल खड़ा किया कि क्या लंबे समय से एक ही घर में रहने वाले बुजुर्ग और कमजोर किराएदारों के लिए पर्याप्त कानूनी सुरक्षा मौजूद है।

क्या Maricarmen अब फिर अपने घर लौटेंगी?

दिलचस्प बात यह है कि eviction के कुछ दिनों बाद स्थिति बदल गई।

सामाजिक और राजनीतिक दबाव के बीच मकान की मालिक कंपनी और Maricarmen के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ। समझौते के मुताबिक वह दोबारा उसी घर में किराएदार के रूप में लौट सकती हैं।

नए agreement में किराया उनकी आय के 30% से ज्यादा नहीं रखने की बात कही गई। रिपोर्टों के मुताबिक यह करीब €500 प्रति माह के आसपास बैठता है और समझौता आठ साल के लिए है।

इस घटनाक्रम ने आंदोलन को और मजबूत किया, क्योंकि लोगों ने सवाल उठाया कि अगर बातचीत से समाधान संभव था तो पहले eviction क्यों हुआ।

मामला सड़क से संसद तक कैसे पहुंचा?

Maricarmen की eviction के बाद मैड्रिड में बड़े प्रदर्शन हुए।

सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि स्पेन के कई शहरों में किराएदार संगठनों और housing activists ने प्रदर्शन किए। उनकी प्रमुख मांग थी कि vulnerable tenants को अचानक बेदखली से बचाया जाए और सरकार किराए को लेकर ठोस कदम उठाए।

मैड्रिड की Puerta del Sol में प्रदर्शन और protest camps लगाए गए। बाद में देशभर में दर्जनों मार्च आयोजित किए गए।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि घर सिर्फ निवेश की वस्तु नहीं बल्कि लोगों की बुनियादी जरूरत है।

सरकार पर भी दबाव बढ़ता गया।

प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने housing crisis को देश की प्रमुख समस्याओं में शामिल किया और उनकी सरकार ने आपातकालीन उपाय तैयार किए।

सरकार ने संसद में क्या प्रस्ताव रखा था?

29 सितंबर 2026 को स्पेन की सरकार ने housing crisis से निपटने के लिए दो Royal Decree-laws को मंजूरी दी।

सरकारी प्रस्तावों में कई तरह के कदम शामिल थे।

पहले decree में vulnerable लोगों की eviction रोकने के लिए protection बढ़ाने, affordable housing की supply बढ़ाने, housing speculation पर नियंत्रण और public housing को मजबूत करने जैसी बातें थीं।

सरकार ने social protection के मौजूदा shield को 31 दिसंबर 2030 तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा था।

दूसरे decree में मुख्य रूप से मुख्य निवास वाले किराए के contracts को ज्यादा स्थिर बनाने की कोशिश की गई थी।

सरकार automatic renewal जैसे प्रावधानों के जरिए किराएदारों को बार-बार contract खत्म होने या अचानक घर छोड़ने की चिंता से बचाना चाहती थी।

सरकार का तर्क था कि housing को ऐसी चीज नहीं बनाया जाना चाहिए जिसमें किराएदार हमेशा असुरक्षित महसूस करे।

प्रस्ताव में किराए पर क्या राहत थी?

सरकार की योजना केवल eviction रोकने तक सीमित नहीं थी।

प्रस्तावों में vulnerable families के लिए protection, affordable housing supply बढ़ाने और rental market को ज्यादा stable बनाने के उपाय शामिल थे।

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पैकेज में किराए में अस्थायी बढ़ोतरी पर नियंत्रण और tourist rentals से जुड़े नियमों में बदलाव जैसे प्रावधान भी शामिल थे।

सरकार चाहती थी कि housing costs का बोझ कम हो और किराएदारों को ज्यादा स्थिरता मिले।

लेकिन विरोधी दलों का तर्क अलग था।

उनका कहना था कि केवल किराया नियंत्रित करने और landlords पर अतिरिक्त restrictions लगाने से housing supply की समस्या हल नहीं होगी। कुछ विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि इससे private landlords बाजार से बाहर हो सकते हैं और लंबे समय में rental supply कम हो सकती है।

यही मतभेद संसद में निर्णायक साबित हुआ।

संसद में सरकार की हार कैसे हुई?

2 अक्टूबर को स्पेन की संसद में दोनों housing decrees पर मतदान हुआ।

पहले decree को 172 वोट मिले, जबकि 178 सांसदों ने इसका विरोध किया।

इस तरह यह प्रस्ताव गिर गया।

दूसरे housing decree को भी संसद ने मंजूरी नहीं दी।

सरकार के लिए समस्या यह थी कि प्रधानमंत्री सांचेज की coalition के पास संसद में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं है।

उन्हें अलग-अलग क्षेत्रीय और छोटे दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इस बार Junts का समर्थन न मिलना महत्वपूर्ण साबित हुआ। साथ ही conservative People’s Party यानी PP और far-right Vox ने भी प्रस्तावों का विरोध किया।

नतीजा यह हुआ कि जिस housing package को सरकार ने सामाजिक संकट का जवाब बताया था, वही उसके लिए बड़ा राजनीतिक झटका बन गया।

Junts ने सरकार का साथ क्यों नहीं दिया?

प्रधानमंत्री सांचेज की सरकार कई बार Catalan party Junts के समर्थन पर निर्भर रही है।

लेकिन housing measures को लेकर Junts ने सरकार से अलग रुख अपनाया।

पार्टी का तर्क था कि प्रस्ताव housing shortage की मूल समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं करते और कुछ उपाय rental market को और मुश्किल बना सकते हैं।

आखिरकार Junts ने दोनों decrees के खिलाफ जाने का फैसला किया।

इससे सांचेज सरकार के लिए संसदीय गणित बिगड़ गया।

महंगे किराए की समस्या कितनी बड़ी है?

स्पेन का housing crisis केवल Maricarmen का मामला नहीं है।

पिछले वर्षों में बड़े शहरों में घरों की कीमत और किराए तेजी से बढ़े हैं।

Euronews के अनुसार Idealista के आंकड़ों में Spain का औसत rental price करीब €8.20 प्रति वर्ग मीटर 2016 में था, जो 2026 में लगभग €15.10 प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गया। यानी एक दशक में औसत किराया लगभग दोगुना हुआ।

मैड्रिड और Barcelona जैसे शहरों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां jobs और population growth के कारण housing demand बहुत अधिक है।

युवाओं के लिए घर खरीदना मुश्किल है और किराएदारों के लिए भी monthly rent बढ़ता जा रहा है।

इसीलिए housing अब स्पेन की सबसे बड़ी राजनीतिक समस्याओं में से एक बन चुका है।

सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, दूसरे किराएदार भी संकट में

Maricarmen का मामला बहुत भावनात्मक था क्योंकि वह 87 साल की थीं और सात दशक से ज्यादा समय से उसी घर में रह रही थीं।

लेकिन Spain में housing crisis का असर अलग-अलग उम्र के लोगों पर पड़ रहा है।

Reuters ने Mallorca में 65 वर्षीय Pilar Lopez का मामला भी रिपोर्ट किया। वह एक apartment में 12 साल रहने के बाद eviction के बाद कुछ समय car में रहने को मजबूर हुई थीं।

ऐसे मामलों ने यह सवाल उठाया है कि अगर किसी व्यक्ति की income तेजी से बढ़ते किराए के साथ नहीं बढ़ती, तो वह शहर में कैसे रह सकता है?

यही वजह है कि tenant groups सिर्फ एक individual case का समाधान नहीं चाहते।

वे housing policy में structural changes की मांग कर रहे हैं।

Spain में घरों की कमी भी बड़ी समस्या है

किराए पर नियंत्रण को लेकर बहस का दूसरा पक्ष housing supply है।

विपक्षी दल और property sector से जुड़े कुछ लोग कहते हैं कि अगर affordable और private homes की supply पर्याप्त नहीं बढ़ाई गई तो सिर्फ rent controls से समस्या हल नहीं होगी।

Reuters की एक रिपोर्ट में Bank of Spain के अनुमान का हवाला देते हुए कहा गया कि देश को 2028 तक 10 लाख से ज्यादा घरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

इसका मतलब है कि Spain की housing problem में demand और supply दोनों शामिल हैं।

एक तरफ घरों की जरूरत बढ़ रही है।

दूसरी तरफ नए affordable homes पर्याप्त गति से नहीं बन रहे।

और तीसरी तरफ कई शहरों में tourist rentals और investment demand भी housing market को प्रभावित कर रहे हैं।

सांचेज सरकार के लिए यह संकट इतना बड़ा क्यों है?

Pedro Sánchez की सरकार minority coalition पर निर्भर है।

ऐसी सरकार को हर बड़े legislation के लिए अलग-अलग parliamentary parties से support जुटाना पड़ता है।

अगर सहयोगी दल समर्थन वापस लेते हैं या विपक्ष के साथ चले जाते हैं, तो सरकार के bills गिर सकते हैं।

Housing issue पर यही हुआ।

इससे यह सवाल उठा कि क्या सांचेज सरकार संसद में प्रभावी तरीके से शासन कर सकती है।

सांचेज ने 2 अक्टूबर की parliamentary debate में सांसदों से housing measures का समर्थन करने की अपील की थी। उन्होंने housing को आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

लेकिन वोट के बाद सरकार को बड़ा झटका लगा।

क्या चुनाव की घोषणा इसी वजह से हुई?

Housing vote के बाद early election की अटकलें तेज हो गई थीं।

और अब यह अटकल सच हो चुकी है।

5 अक्टूबर 2026 को Pedro Sánchez ने आम चुनाव की घोषणा कर दी।

उन्होंने कहा कि संसद में काम आगे बढ़ाने और लंबित reforms को लागू करने के लिए सरकार को व्यापक राजनीतिक समर्थन की जरूरत है।

इसलिए उन्होंने General Courts को भंग करने और 29 नवंबर 2026 को general election कराने का फैसला किया।

यानी चुनाव 2027 में तय समय से लगभग आठ महीने पहले हो रहा है।

क्या सांचेज ने चुनाव सीधे Maricarmen के मामले के कारण बुलाया?

ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं होगा।

Housing crisis और संसद में housing legislation की हार इस राजनीतिक घटनाक्रम का एक बड़ा trigger जरूर है, लेकिन सांचेज के सामने कई अन्य राजनीतिक चुनौतियां भी हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में संसद में लगातार गतिरोध और reforms के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत को भी चुनाव के कारणों में रखा।

इसलिए इसे केवल “एक बुजुर्ग महिला की eviction के कारण चुनाव” कहना oversimplification होगा।

सही तस्वीर यह है कि Maricarmen की eviction ने housing crisis को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया, housing package संसद में गिरा और इससे पहले से कमजोर minority government पर दबाव और बढ़ा। इसके बाद सांचेज ने early election का रास्ता चुना।

चुनाव 29 नवंबर को होगा

प्रधानमंत्री की आधिकारिक घोषणा के अनुसार Spain में general election रविवार, 29 नवंबर 2026 को होगा।

यह चुनाव तय समय से लगभग आठ महीने पहले होगा।

अब housing crisis चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा बनने की संभावना है।

किराएदार संगठन चाहते हैं कि राजनीतिक दल affordable housing और tenant protection पर स्पष्ट योजना दें।

वहीं विपक्षी दल housing supply बढ़ाने, construction को तेज करने और market restrictions को कम करने जैसे मुद्दे उठा सकते हैं।

इसका अर्थ है कि नवंबर का चुनाव केवल सरकार बदलने का चुनाव नहीं होगा।

यह Spain की housing policy की दिशा पर भी जनमत संग्रह जैसा प्रभाव डाल सकता है।

विपक्ष का क्या कहना है?

People’s Party यानी PP और Vox ने housing decrees का विरोध किया था।

विपक्ष का आरोप है कि Sánchez सरकार ने housing crisis को हल करने के लिए ऐसे उपाय चुने जो पर्याप्त homes create नहीं करते।

उनका जोर अधिक construction, investment और housing supply बढ़ाने पर है।

अब चुनाव में यही मुद्दा और बड़ा हो सकता है।

Reuters के अनुसार विपक्षी PP चुनाव से पहले opinion polls में बढ़त की स्थिति में है, हालांकि चुनाव परिणाम अभी पूरी तरह अनिश्चित हैं।

सांचेज दूसरी तरफ housing, social justice और progressive policies को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

Maricarmen का मामला अब एक प्रतीक बन चुका है

जिस घटना से यह विवाद शुरू हुआ था, वह अब सिर्फ एक individual eviction case नहीं रह गई है।

87 वर्षीय Maricarmen की तस्वीर—उन्हें स्ट्रेचर पर उनके पुराने घर से बाहर ले जाते हुए—Spain में housing insecurity की प्रतीक बन गई।

उनके मामले में बाद में landlord और उनके प्रतिनिधियों के बीच agreement भी हुआ, जिससे उन्हें वापस उसी घर में लौटने का रास्ता मिला।

लेकिन activists का कहना है कि एक व्यक्ति को घर वापस मिल जाना पूरी housing crisis का समाधान नहीं है।

इसीलिए protests जारी रहे और सरकार से व्यापक reforms की मांग की गई।

आगे क्या होगा?

अब Spain में 29 नवंबर के चुनाव की तैयारी शुरू होगी।

राजनीतिक दलों के सामने तीन बड़े सवाल होंगे।

पहला—क्या किराएदारों को ज्यादा कानूनी सुरक्षा दी जाए?

दूसरा—क्या rent increases पर ज्यादा नियंत्रण होना चाहिए?

तीसरा—क्या housing supply बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर नए घर बनाए जाएं?

इन तीनों सवालों का संतुलित समाधान आसान नहीं है।

अगर rent controls बहुत कठोर किए जाते हैं तो critics supply और private investment पर असर की बात करते हैं।

अगर market को पूरी तरह खुला छोड़ दिया जाए तो tenant groups का कहना है कि कमजोर income वाले लोग महंगे शहरों से बाहर हो सकते हैं।

इसलिए अगली सरकार के सामने challenge सिर्फ कानून बनाना नहीं बल्कि housing supply, affordability और tenant protection के बीच संतुलन बनाना होगा।



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