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बांग्लादेश PM तारिक रहमान दिल्ली आएंगे या नहीं? BRICS न्योते पर सस्पेंस, हसीना मुद्दा बना रोड़ा

भारत की राजधानी दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाली BRICS समिट से पहले भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत की ओर से BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता दिया गया है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं है कि वह दिल्ली आएंगे या नहीं। खास बात यह है कि भारत की ओर से आमंत्रण मिलने के बावजूद ढाका ने अभी तक अपनी अंतिम सहमति सार्वजनिक नहीं की है। 4 सितंबर को भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि तारिक रहमान की BRICS में भागीदारी को लेकर उसके पास कोई नई जानकारी नहीं है। यानी समिट शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी रहने के बावजूद तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है।

इस पूरे मामले के केंद्र में सिर्फ BRICS का निमंत्रण नहीं है। भारत और बांग्लादेश के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी लगातार बना हुआ है। बांग्लादेश की ओर से भारत से हसीना को वापस भेजने की मांग की जा रही है। वहीं, राजनयिक सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें सामने आई हैं कि तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर ढाका की स्थिति हसीना के मामले में भारत के रुख से जुड़ी हुई है। कुछ रिपोर्टों में इसे यात्रा के लिए शर्त के तौर पर पेश किया गया है, जबकि बांग्लादेश की आधिकारिक भाषा कई मौकों पर इससे कुछ अलग रही है और उसने भारत से “अनुकूल” या “उपयुक्त” माहौल बनाने की बात कही है। इसलिए इसे सीधे तौर पर अंतिम और औपचारिक शर्त कहना अभी जल्दबाजी होगी।

मामले की शुरुआत भारत के निमंत्रण से हुई। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। बांग्लादेश BRICS का सदस्य देश नहीं है, लेकिन भारत ने आउटरीच सेशन के लिए BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि BRICS का यह निमंत्रण तारिक रहमान को BIMSTEC के चेयर के तौर पर दिया गया है। यह उसी तरह का आउटरीच आमंत्रण है, जैसा BRICS में क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को दिया जाता है।

इसके अलावा भारत की ओर से तारिक रहमान को एक अलग द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण भी दिया गया था। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह निमंत्रण फरवरी 2026 में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद दिया गया था। यानी दिल्ली और ढाका के बीच इस समय वास्तव में दो अलग-अलग निमंत्रणों की स्थिति है—एक भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए और दूसरा BIMSTEC चेयर के रूप में BRICS आउटरीच सेशन में हिस्सा लेने के लिए।

यही वजह है कि तारिक रहमान की संभावित दिल्ली यात्रा को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने की सामान्य यात्रा नहीं माना जा रहा। अगर वह दिल्ली आते हैं तो BRICS कार्यक्रम के अलावा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना भी महत्वपूर्ण होगी। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले दो वर्षों में रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आया है और दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर शीर्ष स्तर पर बातचीत जरूरी मानी जा रही है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दा फिलहाल शेख हसीना हैं। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना सत्ता से बाहर हुईं और भारत आ गईं। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा। बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था आने के बाद ढाका की ओर से भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग लगातार उठती रही है। बांग्लादेश का कहना है कि हसीना के खिलाफ उसके यहां कानूनी मामले हैं और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए वापस लाया जाना चाहिए। भारत ने इस अनुरोध को स्वीकार करने या अस्वीकार करने की अंतिम घोषणा नहीं की है और वह मामले को देख रहा है।

अगस्त 2026 में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब शेख हसीना ने दिल्ली से एक सार्वजनिक मीडिया कार्यक्रम में अपनी बात रखी। इसके बाद ढाका ने भारत के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई और कहा कि भारतीय जमीन से ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए जो बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति या स्थिरता को प्रभावित करें। भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, वह एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित था और भारत सरकार का उसमें कोई हस्तक्षेप या समर्थन नहीं था।

इसी घटनाक्रम के बाद तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए। 10 अगस्त को भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत हुई। बांग्लादेशी पक्ष ने हसीना के प्रत्यर्पण सहित कुछ अन्य मामलों को उठाया। भारतीय राजदूत ने बैठक को सकारात्मक और रचनात्मक बताया तथा यह संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है।

बैठक के बाद भी तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा की तारीख तय नहीं हुई। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा कि सरकार को अभी फैसला करना है कि प्रधानमंत्री BRICS समिट में जाएंगे या नहीं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि BRICS का निमंत्रण प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि BIMSTEC के चेयर के तौर पर मिला है। उनके मुताबिक भारत की तरफ से प्रधानमंत्री को एक अलग द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण भी मिला हुआ है।

बांग्लादेश की तरफ से बाद में यह संकेत जरूर दिया गया कि यदि दोनों देशों के बीच “उपयुक्त माहौल” बनाया जाता है तो तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया जा सकता है। विदेश मामलों के सलाहकार हुमायुन कबीर ने भी कहा था कि आपसी सहमति और विश्वास के आधार पर ऐसा वातावरण बनना जरूरी है। इस बयान को हसीना के मुद्दे से जोड़कर देखा गया, क्योंकि उसी समय बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था।

कुछ रिपोर्टों ने इससे भी आगे जाकर दावा किया कि ढाका ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक भारत शेख हसीना को बांग्लादेश नहीं भेजता, तारिक रहमान भारत नहीं आएंगे। द ट्रिब्यून ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि 10 अगस्त की मुलाकात के दौरान यह संदेश भारतीय पक्ष तक पहुंचाया गया। हिंदुस्तान टाइम्स ने भी रिपोर्ट किया कि बांग्लादेश ने हसीना के प्रत्यर्पण को तारिक रहमान की भारत यात्रा के लिए अनुकूल माहौल से जोड़ा था। हालांकि, इन रिपोर्टों को आधिकारिक रूप से घोषित समझौते या लिखित शर्त के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।

यही अंतर इस पूरे मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। एक तरफ बांग्लादेशी अधिकारियों की ओर से “उपयुक्त माहौल”, “आपसी विश्वास” और हसीना के मुद्दे पर भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया जैसी बातें सामने आती हैं। दूसरी तरफ कुछ राजनयिक सूत्र इसे ज्यादा कठोर स्थिति के तौर पर बताते हैं। इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि शेख हसीना का मामला तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा के फैसले पर बड़ा असर डाल रहा है, लेकिन दोनों देशों ने सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई अंतिम लिखित शर्त घोषित नहीं की है जिसमें कहा गया हो कि हसीना को लौटाए बिना BRICS यात्रा असंभव है।

भारत के लिए भी यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर तारिक रहमान दिल्ली आते हैं और नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात होती है तो दोनों देशों के रिश्तों में संवाद की नई शुरुआत का संदेश जा सकता है। पिछले कुछ समय से भारत की कोशिश रही है कि बांग्लादेश के साथ संबंधों को व्यावहारिक और आगे की ओर ले जाने वाला बनाया जाए। भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने भी कहा था कि दोनों देशों के सामने मुद्दे हैं, लेकिन बातचीत के जरिए उनका समाधान खोजा जा सकता है।

भारत के लिए बांग्लादेश केवल पड़ोसी देश नहीं है। दोनों देशों के बीच लंबी सीमा है और व्यापार, कनेक्टिविटी, नदी जल बंटवारा, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी जैसे कई विषय सीधे जुड़े हुए हैं। बांग्लादेश के लिए भी भारत एक बड़ा पड़ोसी और महत्वपूर्ण व्यापारिक तथा भौगोलिक साझेदार है। इसलिए दोनों देशों के बीच लंबे समय तक राजनीतिक दूरी बनाए रखना दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

गंगा जल संधि का मुद्दा भी आने वाले समय में अहम होने वाला है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर मौजूदा समझौते की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। ऐसे में दोनों देशों को आने वाले महीनों में जल प्रबंधन और नदी से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करनी होगी। इसके अलावा तीस्ता नदी और सीमा से जुड़े सवाल भी द्विपक्षीय एजेंडे में बने हुए हैं। इसलिए तारिक रहमान और नरेंद्र मोदी की संभावित मुलाकात को केवल BRICS कार्यक्रम तक सीमित नहीं देखा जा रहा है।

दूसरी तरफ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति भी तारिक रहमान के फैसले को प्रभावित कर सकती है। दिल्ली यात्रा का राजनीतिक संदेश ढाका में भी महत्वपूर्ण होगा। भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश को वहां अलग-अलग राजनीतिक समूह अलग नजरिए से देख सकते हैं। यही कारण है कि तारिक रहमान की सरकार किसी भी कदम को बहुत सावधानी से आगे बढ़ाना चाहती है। बांग्लादेश की तरफ से पहले भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे कई निमंत्रणों और उनकी अंतरराष्ट्रीय व्यस्तताओं को ध्यान में रखकर तय किए जाएंगे।

BRICS की तरफ से भी बांग्लादेश का मामला दिलचस्प है। बांग्लादेश BRICS का सदस्य नहीं है, इसलिए तारिक रहमान की मौजूदगी किसी सदस्य देश के नेता के तौर पर नहीं होगी। उन्हें BIMSTEC के चेयर के रूप में आउटरीच सेशन में आमंत्रित किया गया है। इससे भारत को दक्षिण एशिया और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में बांग्लादेश के साथ संवाद का एक बहुपक्षीय मंच मिल सकता है।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तारिक रहमान 12-13 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे? 4 सितंबर तक भारत के विदेश मंत्रालय के पास उनकी भागीदारी को लेकर कोई नई पुष्टि नहीं थी। बांग्लादेश की ओर से भी अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसका मतलब यह है कि समिट बेहद करीब आने के बावजूद उनका कार्यक्रम अभी सस्पेंस में है।

दिल्ली में BRICS समिट की तैयारियां हालांकि तेज हो चुकी हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है, विदेशी प्रतिनिधियों के ठहरने वाले होटलों में सुरक्षा बढ़ाई गई है और राजधानी में ट्रैफिक तथा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। 12 और 13 सितंबर को समिट प्रस्तावित है और दिल्ली में इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारी चल रही है।

ऐसे में अगर अंतिम समय में तारिक रहमान दिल्ली आने का फैसला करते हैं तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत होगा। मोदी-तारिक मुलाकात में हसीना के प्रत्यर्पण, सीमा, व्यापार, नदी जल, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं। अगर तारिक रहमान नहीं आते हैं तो भी उनकी गैर-मौजूदगी को दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव के संदर्भ में देखा जाएगा।

सबसे अहम बात यह है कि अभी तक यह कहना सही नहीं होगा कि तारिक रहमान का दिल्ली आना पूरी तरह रद्द हो चुका है। इसी तरह यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह निश्चित रूप से BRICS समिट में शामिल होंगे। भारत की ओर से निमंत्रण मौजूद है, लेकिन बांग्लादेश की अंतिम सहमति अब तक सामने नहीं आई है।

पूरे घटनाक्रम से साफ है कि BRICS समिट अब भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिए सिर्फ एक बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करने का अवसर भी बन सकता है। लेकिन इसकी राह में शेख हसीना का प्रत्यर्पण सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। ढाका चाहता है कि भारत इस मामले में सकारात्मक कदम उठाए और भारतीय जमीन से ऐसी राजनीतिक गतिविधियां न हों जिन्हें बांग्लादेश अपनी स्थिरता के लिए खतरा मानता है। दिल्ली दूसरी तरफ अपने कानूनी और कूटनीतिक विकल्पों के बीच संतुलन बनाकर चल रहा है।

आने वाले कुछ दिन इसलिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अगर दोनों पक्ष किसी समझ या “उपयुक्त माहौल” तक पहुंचते हैं तो तारिक रहमान दिल्ली आ सकते हैं और मोदी के साथ सीधी बातचीत से रिश्तों में नई शुरुआत हो सकती है। लेकिन अगर हसीना के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच दूरी बनी रहती है, तो BRICS में बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर सस्पेंस आखिरी समय तक जारी रह सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यही कहा जा सकता है कि दिल्ली का न्योता मौजूद है, लेकिन तारिक रहमान की यात्रा की पुष्टि नहीं हुई है और शेख हसीना का मुद्दा इस फैसले पर सबसे बड़ा राजनीतिक असर डाल रहा है।

पुतिन सितंबर में आएंगे भारत? मोदी से जल्द मुलाकात, जयशंकर ने दिया BRICS Summit का न्योता

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