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होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ट्रम्प ने चीन से भी संपर्क किया

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुए संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने के लिए चीन समेत कई देशों से बातचीत की जा रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सीधे प्रभावित कर सकता है।

पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। ईरान ने कई बार चेतावनी दी है कि यदि उस पर दबाव बढ़ाया गया तो वह इस समुद्री मार्ग को बंद करने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि उसका उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है और वह केवल अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाता है।

ट्रम्प के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई देशों के साथ बातचीत जारी है। चीन का नाम विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और मध्य-पूर्व से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की रुकावट आती है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि कई बड़े देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और चीन जैसे एशियाई देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है तो ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

हाल के दिनों में फारस की खाड़ी में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने क्षेत्र में अपने नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी बढ़ाई है ताकि तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दूसरी ओर ईरान भी अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करता दिखाई दे रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल और गहरा हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को संभालने के लिए कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। यदि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाता है तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहेगी बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी।

तेल बाजार पहले ही इस स्थिति को लेकर संवेदनशील बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। निवेशक और व्यापारिक कंपनियां इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि इसके पीछे आर्थिक और रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। मध्य-पूर्व लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा राजनीति का केंद्र रहा है और यहां की घटनाओं का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

चीन की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन न केवल तेल का बड़ा आयातक है बल्कि वह क्षेत्रीय स्थिरता में भी रुचि रखता है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। इसलिए चीन भी इस मुद्दे पर सक्रिय कूटनीति कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका, ईरान और अन्य देश इस संकट को किस तरह संभालते हैं। यदि तनाव कम करने के प्रयास सफल होते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की धुरी है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

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