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तीन बातों में समझिए: क्या है कैंसर और यह शरीर में कैसे बनता और फैलता है

कैंसर शब्द सुनते ही डर और अनिश्चितता मन में घर कर लेती है, लेकिन सच यह है कि अगर कैंसर को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो उससे लड़ना और समय रहते पहचान करना कहीं आसान हो जाता है। कैंसर कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर धीरे-धीरे होने वाले बदलावों का नतीजा होता है। डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे कोशिकाओं (Cells) से जुड़ी बीमारी मानते हैं।

इस खबर में कैंसर को तीन आसान लेकिन जरूरी पहलुओं में समझाया जा रहा है—बिना भारी मेडिकल भाषा के—ताकि आम आदमी भी यह जान सके कि कैंसर आखिर होता क्या है, कैसे बनता है और शरीर में कैसे फैलता है।


शरीर की कोशिकाओं में गड़बड़ी से होती है कैंसर की शुरुआत

हमारा शरीर अरबों कोशिकाओं से बना होता है। हर कोशिका का एक तय काम होता है—वह कब बनेगी, कब बढ़ेगी और कब खत्म होगी। यह पूरा सिस्टम शरीर के डीएनए द्वारा नियंत्रित होता है। जब यह सिस्टम ठीक चलता रहता है, तब तक शरीर स्वस्थ रहता है।

लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोशिकाओं के डीएनए में खराबी (Mutation) आ जाती है। यह खराबी कई कारणों से हो सकती है—जैसे तंबाकू का सेवन, प्रदूषण, गलत खान-पान, रेडिएशन, लंबे समय तक तनाव या कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण।

जब डीएनए खराब होता है, तो कोशिकाएं अपने नियम तोड़ने लगती हैं। वे जरूरत से ज्यादा बनने लगती हैं और शरीर के संकेतों को मानना बंद कर देती हैं। यहीं से कैंसर की नींव पड़ती है। शुरुआत में यह बदलाव इतना छोटा होता है कि शरीर को कोई लक्षण नजर नहीं आता।


अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं कोशिकाएं, बनता है ट्यूमर

जैसे-जैसे खराब कोशिकाएं बढ़ती जाती हैं, वे एक जगह इकट्ठा होने लगती हैं। इस जमाव को ट्यूमर कहा जाता है। हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता—कुछ ट्यूमर बेनाइन (हानिरहित) होते हैं—लेकिन जब कोशिकाएं लगातार बढ़ती रहें और आसपास के स्वस्थ टिशू को नुकसान पहुंचाने लगें, तब वह मैलिग्नेंट कैंसर बन जाता है।

इस अवस्था में कैंसर कोशिकाएं:

यही वह स्टेज होती है जब कई लोगों को वजन कम होना, लगातार थकान, दर्द, गांठ या असामान्य लक्षण महसूस होने लगते हैं। अगर इस चरण में कैंसर की पहचान हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।


खून और लिम्फ के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है कैंसर

कैंसर की सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि वह एक जगह रुकता नहीं है। जब कैंसर कोशिकाएं बहुत मजबूत हो जाती हैं, तो वे खून या लिम्फ सिस्टम के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने लगती हैं।

इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस (Metastasis) कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कैंसर फेफड़ों में शुरू हुआ है, तो वह समय के साथ हड्डियों, लिवर या दिमाग तक फैल सकता है।

इस स्टेज पर इलाज ज्यादा जटिल हो जाता है, क्योंकि अब बीमारी सिर्फ एक अंग तक सीमित नहीं रहती। यही कारण है कि डॉक्टर बार-बार अर्ली डिटेक्शन पर जोर देते हैं।


क्यों जरूरी है कैंसर को समय रहते समझना?

कैंसर को लेकर सबसे बड़ी समस्या डर और गलतफहमी है। कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या जांच कराने से डरते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि आज मेडिकल साइंस इतनी आगे बढ़ चुकी है कि शुरुआती चरण में पकड़े गए कैंसर का इलाज काफी हद तक संभव है

समझ जरूरी इसलिए भी है क्योंकि:


विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों का मानना है कि कैंसर को पूरी तरह रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शरीर में लंबे समय तक रहने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कैंसर कोई एक दिन में होने वाली बीमारी नहीं है। यह कोशिकाओं में धीरे-धीरे होने वाले बदलावों, उनकी अनियंत्रित बढ़त और फिर शरीर में फैलने की प्रक्रिया का नतीजा है। अगर इन तीनों चरणों को सही समय पर समझ लिया जाए, तो कैंसर के खिलाफ लड़ाई ज्यादा मजबूत और प्रभावी बन सकती है।

जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है—और कैंसर के मामले में यह बात और भी ज्यादा सच साबित होती है।

http://what-is-cancer-how-it-spreads-hindi

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