राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना ने ‘वायु शक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान अपनी मारक क्षमता और समन्वित युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में 120 से अधिक विमानों ने हिस्सा लिया और लगभग 12 हजार किलोग्राम विस्फोटक सामग्री के जरिए निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाया गया। यह प्रदर्शन न केवल सैन्य तैयारी का संकेत था, बल्कि आधुनिक युद्ध रणनीति में भारत की बढ़ती क्षमता का भी प्रतीक रहा।
अभ्यास के दौरान सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000, तेजस और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों ने एक के बाद एक टारगेट पर प्रहार किया। इसके साथ ही अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भी सामरिक उड़ान और फायरिंग क्षमता का प्रदर्शन किया। परिवहन बेड़े में C-130J सुपर हरक्यूलिस और C-295 विमान शामिल रहे, जिन्होंने रात के समय असॉल्ट लैंडिंग और त्वरित टेकऑफ की क्षमता दिखाई।
भारतीय वायुसेना के अनुसार, यह अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में तैयारियों को परखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन में 20 से अधिक लक्ष्यों को नष्ट किया गया। इसमें हवा से जमीन पर सटीक बमबारी, मिसाइल प्रक्षेपण और समन्वित हवाई हमले शामिल थे।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वायु शक्ति अभ्यास भारत की सामरिक क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन है। यह संदेश देता है कि भारतीय वायुसेना सीमित समय में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने में सक्षम है। विशेष रूप से पश्चिमी सीमा के नजदीक आयोजित इस अभ्यास का रणनीतिक महत्व भी माना जा रहा है।
इस बार अभ्यास की खास बात यह रही कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने भी सक्रिय भागीदारी की। स्वदेशी तकनीक से विकसित इस विमान की क्षमता ने रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के कदम को और मजबूत किया। राफेल और सुखोई विमानों की संयुक्त उड़ान ने आधुनिक और पारंपरिक प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल को प्रदर्शित किया।
अभ्यास में शामिल विमानों ने विभिन्न ऊंचाइयों और गति पर मिशन पूरा किया। रात के समय की गई असॉल्ट लैंडिंग ने यह दिखाया कि भारतीय वायुसेना किसी भी मौसम और समय में कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री की उपस्थिति में हुए इस प्रदर्शन ने राजनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास पड़ोसी देशों को यह संकेत देते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क और सक्षम है।
भारतीय वायुसेना ने हाल के वर्षों में अपने बेड़े को आधुनिक बनाया है। नई पीढ़ी के राफेल विमान, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल होने से इसकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वायु शक्ति 2026 अभ्यास का उद्देश्य केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि समन्वित ऑपरेशन की दक्षता को परखना भी था। इसमें एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर मिशनों का संयोजन देखा गया।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। आधुनिक युद्ध में हवाई शक्ति निर्णायक भूमिका निभाती है और भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
कुल मिलाकर, वायु शक्ति प्रदर्शन 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय वायुसेना तकनीकी, सामरिक और संचालनात्मक स्तर पर पूरी तरह तैयार है। 120 विमानों की गर्जना और सटीक बमबारी ने यह संदेश दिया कि भारत की हवाई ताकत किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है।