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Venezuela Indian Sailor Death: भारत में पोस्टमॉर्टम के दौरान कई अंग नहीं मिले, परिवार ने मांगी निष्पक्ष जांच

वेनेजुएला में एक भारतीय नाविक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 55 दिन पहले एक जहाज पर हुई इस मौत के बाद जब नाविक का पार्थिव शरीर भारत लाया गया और दोबारा पोस्टमॉर्टम किया गया, तो रिपोर्ट में कई प्रमुख आंतरिक अंग मौजूद नहीं होने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद परिवार और नाविक संगठनों ने निष्पक्ष तथा विस्तृत जांच की मांग की है।

मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी भारतीय नाविक के रूप में हुई है, जो एक व्यापारी जहाज पर कार्यरत थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत वेनेजुएला में जहाज पर हुई थी। इसके बाद उनका शव भारत भेजा गया, लेकिन परिवार का आरोप है कि उन्हें मौत के कारण और वहां हुई मेडिकल प्रक्रिया की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

परिवार के अनुरोध पर भारत में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया। रिपोर्ट के आधार पर सामने आया कि शरीर में कई प्रमुख आंतरिक अंग मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शरीर पर लंबी सिलाई के निशान थे, जिससे संकेत मिलता है कि पहले भी विस्तृत पोस्टमॉर्टम या मेडिकल प्रक्रिया की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार मस्तिष्क, हृदय, दोनों फेफड़े, यकृत (लीवर) सहित कई अन्य आंतरिक अंग उपलब्ध नहीं थे। इसी कारण भारतीय डॉक्टर मृत्यु का सटीक कारण निर्धारित नहीं कर सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आवश्यक अंगों के अभाव में फोरेंसिक विश्लेषण सीमित हो गया।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान शरीर पर गर्दन से नीचे तक और सिर के हिस्से में कई टांके पाए गए। इन निष्कर्षों के बाद परिवार ने सवाल उठाया कि यदि वेनेजुएला में पोस्टमॉर्टम किया गया था, तो उसकी पूरी रिपोर्ट और दस्तावेज उन्हें क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।

भारतीय नाविक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए नई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी नाविक की विदेश में संदिग्ध मौत होने पर पारदर्शी जांच, सभी मेडिकल दस्तावेज और परिवार को समय पर जानकारी मिलना बेहद आवश्यक है।

नाविक संगठनों ने भारत सरकार और संबंधित दूतावास से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि वेनेजुएला में हुई पूरी मेडिकल प्रक्रिया, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मौत की परिस्थितियों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वेनेजुएला में पोस्टमॉर्टम के दौरान किन परिस्थितियों में अंग निकाले गए और क्या वहां की कानूनी प्रक्रिया के तहत ऐसा किया गया था। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार कुछ देशों में विशेष परिस्थितियों में पोस्टमॉर्टम के दौरान आंतरिक अंगों की जांच की जाती है। हालांकि ऐसी स्थिति में पूरी मेडिकल रिपोर्ट, रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण होता है। यदि दस्तावेज उपलब्ध न हों, तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के जानकारों का कहना है कि विदेश में कार्यरत नाविकों की मृत्यु होने पर जहाज संचालक, स्थानीय प्रशासन, बीमा कंपनियों और संबंधित देशों की एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हर मामले में निर्धारित अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक आपूर्ति करने वाले देशों में शामिल है। हजारों भारतीय नाविक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा, पारदर्शिता और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना परिवारों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।

परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। उनका आरोप है कि मौत की परिस्थितियों, पोस्टमॉर्टम और अंगों के अभाव को लेकर अभी भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसी वजह से उन्होंने विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि भारतीय विदेश मंत्रालय, संबंधित दूतावास और वेनेजुएला के अधिकारी इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। यदि आधिकारिक जांच आगे बढ़ती है, तो मौत के वास्तविक कारण और मेडिकल प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा, अधिकारों और पारदर्शी जांच व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में जारी होने वाले आधिकारिक बयानों और जांच रिपोर्ट पर देशभर की नजर बनी रहेगी।


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