भारतीय मूल की युवा शतरंज खिलाड़ी बोधन सिवानंदन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। महज 11 साल की उम्र में बोधन ने 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का महिला खिताब अपने नाम कर लिया। खिताब के लिए उन्हें रैपिड प्लेऑफ खेलना पड़ा, जहां उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
इसी प्रतियोगिता के ओपन वर्ग में भारतीय मूल के 17 वर्षीय श्रीयस रॉयल ने भी इतिहास रच दिया। श्रीयस ने अपराजित रहते हुए ब्रिटिश चैंपियनशिप का ओपन खिताब जीता और इस उपलब्धि के साथ वह ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 1989 में बने माइकल एडम्स के उम्र संबंधी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। श्रीयस ने नौ राउंड में 7.5 अंक हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट में एक भी बाजी नहीं हारी।
यह उपलब्धि भारतीय मूल के दोनों युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद खास है। एक तरफ बोधन ने केवल 11 साल की उम्र में ब्रिटिश महिला चैंपियन का खिताब हासिल किया, वहीं श्रीयस ने 17 साल की उम्र में ओपन चैंपियन बनकर ब्रिटिश शतरंज के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।
2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का आयोजन 1 से 9 अगस्त 2026 के बीच यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, कोवेंट्री में हुआ। प्रतियोगिता में ब्रिटेन के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ कई युवा प्रतिभाओं ने हिस्सा लिया। आयोजन के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार इस साल की चैंपियनशिप में अलग-अलग आयु वर्ग और मुख्य प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में खिलाड़ी शामिल हुए।
बोधन के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने बेहद कम उम्र में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शतरंज खेलना शुरू किया था। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय उन्हें घर में एक शतरंज बोर्ड मिला और धीरे-धीरे इस खेल में उनकी रुचि बढ़ती चली गई। कुछ ही वर्षों में वह इंग्लैंड की शीर्ष महिला खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।
अप्रैल 2026 में बोधन इंग्लैंड की नंबर-1 रेटेड महिला शतरंज खिलाड़ी भी बनी थीं। तब उनकी FIDE रेटिंग 2366 थी और उन्होंने चार बार की ब्रिटिश महिला चैंपियन लैन याओ को पीछे छोड़ दिया था। वह उस समय दुनिया की शीर्ष 100 महिला खिलाड़ियों में भी शामिल हुई थीं।
बोधन की खासियत यह है कि कम उम्र होने के बावजूद वह अनुभवी और ज्यादा रेटिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ भी आत्मविश्वास से खेलती हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने फ्रांस के डोल ट्रॉफी में 2600 से अधिक रेटिंग वाले ग्रैंडमास्टर मार्क’आंद्रिया मौरिजी को हराकर एक बड़ा उम्र संबंधी रिकॉर्ड बनाया था। इस जीत के साथ वह 2600+ रेटिंग वाले ग्रैंडमास्टर को हराने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बनीं और उन्होंने जुडिट पोल्गर का लंबे समय से कायम रिकॉर्ड पीछे छोड़ा।
इसके कुछ ही दिनों बाद बोधन ने 11 साल की उम्र में अपना पहला International Master यानी IM norm भी हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने महिला खिलाड़ियों के बीच IM norm हासिल करने के उम्र संबंधी रिकॉर्ड को भी तोड़ा।
अब ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का महिला खिताब उनकी उपलब्धियों की लंबी सूची में एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।
ब्रिटिश चैंपियनशिप में बोधन ने ओपन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। महिला चैंपियन का निर्धारण इसी प्रतियोगिता में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली महिला खिलाड़ी के आधार पर किया गया। बोधन ने पूरे टूर्नामेंट में मजबूत खिलाड़ियों का सामना किया और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया।
महिला वर्ग में खिताब के लिए बोधन और त्रिशा कन्यामराला बराबरी की स्थिति में पहुंचीं। इसके बाद विजेता तय करने के लिए रैपिड टाई-ब्रेक खेला गया। रैपिड मुकाबलों में कम समय के कारण खिलाड़ियों पर दबाव ज्यादा होता है और छोटी सी गलती भी परिणाम बदल सकती है। बोधन ने इस दबाव को संभालते हुए प्लेऑफ में बेहतर प्रदर्शन किया और ब्रिटिश महिला चैंपियन बन गईं।
इस जीत का एक खास पहलू यह भी है कि बोधन ने जिन खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले खेले, उनमें कई अनुभवी और उच्च रेटिंग वाले खिलाड़ी शामिल थे। ऑनलाइन शतरंज समुदाय में भी उनके प्रदर्शन की काफी चर्चा हुई।
बोधन की इस सफलता को समझने के लिए उनके शुरुआती सफर पर नजर डालना जरूरी है। उन्होंने बहुत कम उम्र में शतरंज शुरू किया और कुछ ही समय में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। 2022 में उन्होंने विश्व युवा शतरंज प्रतियोगिता में भी सफलता हासिल की थी। इसके बाद लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उनकी रेटिंग तेजी से बढ़ती गई।
उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक समय में युवा खिलाड़ी कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकते हैं। हालांकि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती। नियमित अभ्यास, टूर्नामेंट अनुभव, कोचिंग, मानसिक मजबूती और परिवार का समर्थन भी किसी युवा खिलाड़ी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बोधन के परिवार का संबंध भारत के तमिलनाडु से बताया जाता है। उनके माता-पिता 2007 में भारत से इंग्लैंड चले गए थे। बोधन का जन्म और पालन-पोषण ब्रिटेन में हुआ, लेकिन भारतीय मूल के होने के कारण भारत में भी उनके प्रदर्शन को काफी रुचि के साथ देखा जाता है।
बोधन के साथ-साथ श्रीयस रॉयल की कहानी भी भारतीय मूल के युवाओं की अंतरराष्ट्रीय सफलता का शानदार उदाहरण है। श्रीयस ने केवल 17 साल की उम्र में ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का ओपन खिताब जीत लिया।
श्रीयस ने प्रतियोगिता में 9 में से 7.5 अंक हासिल किए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में एक भी हार नहीं झेली। उनके प्रदर्शन में कई मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत शामिल रही। खास तौर पर सातवें राउंड में उन्होंने शीर्ष वरीयता प्राप्त ल्यूक मैकशेन के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की। अंतिम राउंड में उन्होंने 2022 के चैंपियन हैरी ग्रीव को भी हराया।
श्रीयस की जीत ने ब्रिटिश शतरंज का एक पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इससे पहले माइकल एडम्स ने 1989 में कम उम्र में ब्रिटिश चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया था। 17 वर्षीय श्रीयस ने अब उससे भी कम उम्र में यह खिताब जीतकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
श्रीयस का शतरंज करियर भी काफी तेजी से आगे बढ़ा है। वह महज 15 साल की उम्र में इंग्लैंड के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे। अब ब्रिटिश चैंपियनशिप जीतने के बाद उनके करियर में एक और बड़ा खिताब जुड़ गया है।
उनका परिवार भारत से ब्रिटेन गया था। रिपोर्टों के मुताबिक श्रीयस के परिवार का ब्रिटेन में रहने का मामला 2018 में उस समय काफी चर्चा में आया था, जब उनके पिता के वीजा से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए उच्च स्तर पर हस्तक्षेप किया गया था। श्रीयस की असाधारण शतरंज प्रतिभा को देखते हुए उनके परिवार को ब्रिटेन में रहने की अनुमति दिलाने में विशेष प्रयास किए गए थे।
बोधन और श्रीयस की सफलता ऐसे समय में सामने आई है जब ब्रिटेन में युवा शतरंज प्रतिभाओं की एक नई पीढ़ी तेजी से उभर रही है। 2026 ब्रिटिश चैंपियनशिप में कई युवा खिलाड़ियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स के साथ कम उम्र के खिलाड़ी भी शीर्ष स्थानों की दौड़ में दिखाई दिए।
इस प्रतियोगिता का एक और यादगार पहलू अनुभवी ग्रैंडमास्टर माइकल एडम्स का प्रदर्शन रहा। 54 वर्षीय एडम्स को टूर्नामेंट में 1988 के बाद पहली बार हार का सामना करना पड़ा। उनकी 87 गेम की अजेय लय समाप्त हुई। यह दिखाता है कि ब्रिटिश शतरंज में युवा खिलाड़ियों की चुनौती कितनी मजबूत हो चुकी है।
बोधन की सफलता का महत्व केवल एक राष्ट्रीय खिताब जीतने तक सीमित नहीं है। वह महिला और पुरुष खिलाड़ियों के साथ मिश्रित ओपन प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेती हैं। इसका अर्थ है कि उन्हें लगातार मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिल रहा है। ऐसे मुकाबले उनके खेल को और मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
शतरंज में कम उम्र में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। खिलाड़ी को घंटों तक बोर्ड पर रणनीति समझनी होती है, विरोधी की चाल का अनुमान लगाना होता है और लंबे समय तक मानसिक एकाग्रता बनाए रखनी होती है। तेज रफ्तार वाले रैपिड टाई-ब्रेक में यही मानसिक मजबूती और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बोधन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक उनकी उम्र के मुकाबले असाधारण प्रतियोगी अनुभव है। उन्होंने पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्रैंडमास्टर्स के खिलाफ मुकाबले खेले हैं और कई महत्वपूर्ण जीत हासिल की हैं। यही अनुभव उन्हें बड़े टूर्नामेंटों में दबाव संभालने में मदद करता है।
हालांकि विशेषज्ञों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि इतनी कम उम्र के खिलाड़ियों पर अत्यधिक दबाव न डाला जाए। किसी युवा प्रतिभा को लगातार रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद से देखना उसके विकास पर अतिरिक्त मानसिक दबाव डाल सकता है। इसलिए खेल विशेषज्ञ आम तौर पर संतुलित प्रशिक्षण, शिक्षा और व्यक्तिगत विकास को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
बोधन की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने शतरंज को अपेक्षाकृत देर से शुरू करने के बावजूद बहुत तेजी से शीर्ष स्तर हासिल किया। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान शतरंज से शुरुआत की और कुछ वर्षों के अंदर इंग्लैंड की शीर्ष महिला खिलाड़ी बनने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाए।
दूसरी ओर श्रीयस की कहानी दिखाती है कि लगातार उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने वाला युवा खिलाड़ी किस तरह राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक पहुंच सकता है। 15 साल में ग्रैंडमास्टर और 17 साल में ब्रिटिश चैंपियन बनना उनके तेजी से बढ़ते करियर का प्रमाण है।
भारतीय मूल के इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता भारत के लिए भी गर्व का विषय है। दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीय मूल के युवा शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और कला के क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। शतरंज में बोधन और श्रीयस का प्रदर्शन इसी वैश्विक प्रतिभा का उदाहरण है।
बोधन के लिए अब अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़े खिताब हासिल करना हो सकता है। उन्होंने पहले ही IM और WGM norms की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। जुलाई 2026 तक वह अपने पहले IM norm के साथ महिला ग्रैंडमास्टर बनने की राह पर भी आगे बढ़ रही थीं।
श्रीयस के लिए ब्रिटिश चैंपियन बनने के बाद अगली चुनौती विश्व स्तर पर लगातार मजबूत प्रदर्शन करना होगी। उनकी उम्र अभी केवल 17 साल है और उनके पास शीर्ष स्तर के शतरंज में लंबा करियर बनाने का पर्याप्त समय है।
कुल मिलाकर, 11 साल की बोधन सिवानंदन और 17 साल के श्रीयस रॉयल ने 2026 ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की शानदार मौजूदगी दर्ज कराई है। बोधन ने रैपिड प्लेऑफ जीतकर महिला ब्रिटिश चैंपियन का खिताब हासिल किया, जबकि श्रीयस ने 7.5/9 अंक के साथ ओपन खिताब जीतकर सबसे कम उम्र के ब्रिटिश चैंपियन का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। दोनों की सफलता यह संकेत देती है कि ब्रिटेन के शतरंज में युवा प्रतिभाओं का भविष्य बेहद मजबूत नजर आ रहा है।
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