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Mr. Ashish

सोना हर ऊंचाई पर 10 माह टिका रहा | क्या 1.30 लाख के पार जाएगा गोल्ड?

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। पिछले दस महीनों से सोना रिकॉर्ड स्तर के आसपास बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी पीली धातु पर कायम है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के कारण सोने की मांग में लगातार मजबूती बनी हुई है।

बीते कुछ वर्षों में सोने ने 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 75 हजार रुपये और फिर एक लाख रुपये से ऊपर तक का सफर तय किया। निवेश विश्लेषकों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना मजबूत बना रहा। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने की कीमतों पर दबाव आता है, लेकिन हाल के दौर में यह ट्रेंड उल्टा देखने को मिला है।

भारत में सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखता है। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है। हालांकि कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद मांग में बड़ी गिरावट नहीं आई है। ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहक अब छोटे वजन के आभूषण खरीद रहे हैं, लेकिन खरीदारी पूरी तरह रुकी नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद में वृद्धि ने कीमतों को सहारा दिया है। कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। इससे वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है तो सोना 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे आने की संभावना कम है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाजार में तरलता और स्थिरता बनी हुई है। खुदरा निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशक भी सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।

घरेलू बाजार में रुपये की कमजोरी भी कीमतों को प्रभावित करती है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो आयातित सोना महंगा हो जाता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होता है और ब्याज दरों में कटौती होती है तो सोने में थोड़ी गिरावट संभव है। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोना अभी भी एक मजबूत एसेट क्लास बना हुआ है। निवेश सलाहकारों का सुझाव है कि पोर्टफोलियो का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा सोने में रखना संतुलित रणनीति हो सकती है।

सर्राफा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं ने भी निवेश को आसान बनाया है। इससे पारंपरिक खरीदारी के साथ-साथ ऑनलाइन निवेश का ट्रेंड बढ़ा है।

समग्र रूप से देखा जाए तो सोने का लगातार ऊंचाई पर बने रहना यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। निवेशकों के लिए यह सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और केंद्रीय बैंक की नीतियां तय करेंगी कि सोना नई ऊंचाई छुएगा या स्थिर रहेगा।

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