भारत में कोरियन पॉप कल्चर का प्रभाव अब सिर्फ वेब सीरीज, के-ड्रामा या के-पॉप म्यूजिक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय विज्ञापन जगत और रियलिटी शोज़ तक मजबूती से पहुंच चुका है। पिछले पांच वर्षों में कोरियन कंटेंट की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है, और इसका सीधा असर ब्रांड रणनीतियों पर भी देखने को मिल रहा है। बड़ी कंपनियां अब अपने विज्ञापनों में कोरियन सितारों को शामिल कर रही हैं ताकि युवा दर्शकों से बेहतर जुड़ाव बनाया जा सके।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में कोरियन पॉप स्ट्रीमिंग में पिछले पांच सालों में 362 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। यही नहीं, कोरियन शोज़ के हिंदी डब और सबटाइटल वर्जन को भी करोड़ों व्यूज मिल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप फैन क्लब्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि ब्रांड्स अब इस ट्रेंड को मार्केटिंग के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
हाल के महीनों में कई बड़े भारतीय ब्रांड्स ने अपने कैंपेन में कोरियन एक्टर्स और सिंगर्स को शामिल किया है। उदाहरण के तौर पर, पर्सनल केयर और FMCG कंपनियों ने एशिया-पैसिफिक कैंपेन के तहत कोरियन चेहरों को प्रमोट किया। इन विज्ञापनों को यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर करोड़ों व्यूज मिले। ब्रांड एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरियन सितारों की लोकप्रियता खासकर टियर-1 और टियर-2 शहरों के युवाओं में अधिक है, जिससे ब्रांड रिकॉल मजबूत होता है।
भारतीय रियलिटी शोज़ में भी कोरियन प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। कई रियलिटी शोज़ में के-पॉप थीम पर स्पेशल एपिसोड बनाए गए। बिग-बॉस जैसे शो में कोरियन स्टाइल फैशन और डांस मूव्स ट्रेंड करते दिखे। कुछ मामलों में कोरियन कलाकारों की वर्चुअल अपीयरेंस भी कराई गई, जिससे शो की TRP में उछाल आया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कोरियन शोज़ को 266 मिलियन से अधिक व्यूज मिलने के आंकड़े सामने आए हैं। खास बात यह है कि इन शोज़ के सीजन रिलीज होने के पहले 90 दिनों में ही भारी व्यूअरशिप दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि भारतीय दर्शक अब ग्लोबल कंटेंट को तेजी से स्वीकार कर रहे हैं।
मार्केटिंग रणनीतिकारों का मानना है कि कोरियन पॉप कल्चर की सफलता के पीछे उसकी साफ-सुथरी इमेज, हाई-प्रोडक्शन वैल्यू और फैशन-फॉरवर्ड अप्रोच है। भारतीय युवा वर्ग खुद को इस ट्रेंड से जोड़कर देखता है। सोशल मीडिया पर के-ड्रामा के डायलॉग, फैशन स्टाइल और ब्यूटी ट्रेंड्स वायरल होते रहते हैं।
विज्ञापन कंपनियां इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए मल्टी-लैंग्वेज कैंपेन तैयार कर रही हैं। कई विज्ञापनों में कोरियन सितारों के साथ भारतीय कलाकारों को भी जोड़ा गया, ताकि लोकल कनेक्ट बना रहे। इस तरह ग्लोबल अपील और लोकल टच का मिश्रण तैयार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय बाजार में 84 प्रतिशत से अधिक युवा दर्शक कोरियन कंटेंट को पॉजिटिव तरीके से देखते हैं। भारत एशिया में कोरियन कंटेंट की खपत के मामले में शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है। यही वजह है कि ब्रांड्स अपने विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल कैंपेन में लगा रहे हैं।
फैशन और ब्यूटी इंडस्ट्री में भी कोरियन ट्रेंड का प्रभाव बढ़ा है। के-ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ग्लास स्किन ट्रेंड और मिनिमल मेकअप स्टाइल अब भारतीय युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने कोरियन ब्रांड्स के लिए अलग कैटेगरी तक लॉन्च कर दी है।
विज्ञापन एजेंसियों का कहना है कि कोरियन सितारों की इमेज ‘रिलेटेबल’ और ‘फ्रेश’ मानी जाती है। यह पारंपरिक बॉलीवुड स्टारडम से अलग है। युवा दर्शक अब इंटरनेशनल इन्फ्लुएंसर्स और पॉप आइकन को ज्यादा फॉलो कर रहे हैं। इस ट्रेंड को देखते हुए भारतीय ब्रांड्स ने अपने कैंपेन में क्रॉस-बॉर्डर कोलैबोरेशन को प्राथमिकता दी है।
आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह बदलाव भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है। ग्लोबल पार्टनरशिप से नए निवेश और नए बाजार के दरवाजे खुल सकते हैं। साथ ही, भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना बढ़ती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लोकल पहचान को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विज्ञापन में विदेशी चेहरों का उपयोग संतुलित तरीके से होना चाहिए ताकि भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ भी बना रहे।
कुल मिलाकर, भारतीय विज्ञापन जगत में कोरियन सितारों की बढ़ती मौजूदगी एक बड़े सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है। यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि बदलती उपभोक्ता मानसिकता का प्रतिबिंब है। आने वाले वर्षों में यह प्रभाव और मजबूत हो सकता है, खासकर तब जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पहुंच और बढ़ेगी।
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