अर्जेंटीना के विश्व कप विजेता कप्तान Lionel Messi ने हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपने बचपन, करियर और निजी जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की। मेसी ने स्वीकार किया कि बचपन में अंग्रेजी न सीख पाने का उन्हें आज भी मलाल है। उन्होंने यह भी बताया कि करियर के शुरुआती दौर में उन्हें स्पेन की ओर से खेलने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने अपने दिल की सुनी और अर्जेंटीना का साथ नहीं छोड़ा।
38 वर्षीय मेसी ने कहा कि बचपन में उनके पास पढ़ाई और भाषा सीखने का समय था, लेकिन फुटबॉल के जुनून में उन्होंने अंग्रेजी पर ध्यान नहीं दिया। अब जब वे दुनिया भर के खिलाड़ियों और कोचों से मिलते हैं, तो कभी-कभी उन्हें खुलकर बातचीत न कर पाने का अफसोस होता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मैदान पर फुटबॉल ही उनकी असली भाषा रही है।
मेसी का बचपन अर्जेंटीना के शहर रोसारियो में बीता। कम उम्र में ही उनके अंदर फुटबॉल का असाधारण कौशल दिखने लगा था। 13 साल की उम्र में वे स्पेन चले गए, जहां उन्होंने बार्सिलोना की मशहूर अकादमी ‘ला मासिया’ में प्रशिक्षण लिया। उसी दौर में उन्हें स्पेनिश नागरिकता मिलने के बाद स्पेन की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का प्रस्ताव भी मिला था।
हालांकि मेसी ने साफ किया कि उनके दिल में हमेशा अर्जेंटीना के लिए खेलने की इच्छा थी। उन्होंने कहा कि अपने देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। कई बार आलोचनाओं और दबाव के बावजूद उन्होंने अर्जेंटीना का साथ नहीं छोड़ा। 2022 में विश्व कप जीतने के बाद यह निर्णय और भी ऐतिहासिक साबित हुआ।
करियर के शुरुआती वर्षों में मेसी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्पेन में शुरुआती समय आसान नहीं था। नई संस्कृति, नई भाषा और परिवार से दूर रहना उनके लिए कठिन था। लेकिन बार्सिलोना क्लब ने उन्हें समर्थन दिया और धीरे-धीरे वे विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए।
मेसी ने अपने निजी जीवन पर भी बात की। उन्होंने बताया कि परिवार उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है। पत्नी एंटोनेला और बच्चों के साथ बिताया समय उन्हें मानसिक संतुलन देता है। उन्होंने कहा कि करियर की व्यस्तता के बावजूद वे परिवार को प्राथमिकता देने की कोशिश करते हैं।
फुटबॉल विश्लेषकों का मानना है कि मेसी का यह खुलासा दर्शाता है कि विश्व स्तर के खिलाड़ी भी व्यक्तिगत कमियों और पछतावों से अछूते नहीं होते। भाषा जैसी साधारण लगने वाली चीज भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्पेन से खेलने के प्रस्ताव की चर्चा ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। यदि मेसी ने उस समय स्पेन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता, तो शायद फुटबॉल इतिहास अलग होता। लेकिन अर्जेंटीना के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें देश का हीरो बना दिया।
मेसी ने यह भी कहा कि सफलता के बावजूद वे सीखना बंद नहीं करते। उनका मानना है कि जीवन में हर अनुभव इंसान को बेहतर बनाता है। फुटबॉल ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और विनम्रता सिखाई है।
आज मेसी केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि वैश्विक ब्रांड बन चुके हैं। मैदान के बाहर भी वे कई सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े हैं। लेकिन अपने इंटरव्यू में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनके लिए सबसे अहम चीज अब भी खेल और परिवार है।
कुल मिलाकर, मेसी का यह खुलासा उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को सामने लाता है। विश्व कप जीतने और अनगिनत रिकॉर्ड बनाने के बावजूद वे अपनी गलतियों और अधूरेपन को स्वीकार करते हैं। यही विनम्रता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
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