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मानसून में भीगे जूते पहनना पड़ सकता है भारी, पैरों में फंगल इंफेक्शन से बचने के 12 तरीके

मानसून का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ नमी, बारिश और पानी से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। बाहर निकलते समय सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली चीजों में जूते भी शामिल हैं। बारिश में भीगने के बाद अगर जूतों को बिना सुखाए दोबारा पहन लिया जाए, तो पैरों के आसपास लंबे समय तक नमी बनी रह सकती है। यही गर्म और नम वातावरण कुछ तरह के फंगल इंफेक्शन के लिए अनुकूल होता है।

पैरों में होने वाला आम फंगल इंफेक्शन एथलीट्स फुट यानी टीनिया पेडिस कहलाता है। इसमें खासकर उंगलियों के बीच खुजली, जलन, त्वचा का छिलना, सफेद या नरम पड़ना और कभी-कभी दरारें दिखाई दे सकती हैं। संक्रमण बढ़ने पर यह पैरों के तलवों या नाखूनों तक भी फैल सकता है। NHS और अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार पैरों को साफ और सूखा रखना तथा गीले या पसीने वाले मोजों-जूतों से बचना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश में एक बार जूता भीग जाने से हर व्यक्ति को फंगल इंफेक्शन हो जाएगा। समस्या तब ज्यादा बढ़ सकती है जब पैर लंबे समय तक गीले या पसीने से नम रहें और जूतों के अंदर हवा का आवागमन कम हो। इसलिए मानसून में केवल जूते पहनने से ज्यादा जरूरी है कि जूते, मोजे और पैरों की सफाई और सुखाने पर ध्यान दिया जाए।

बारिश में गीले जूते पहनने से समस्या क्यों बढ़ सकती है?

फंगस को बढ़ने के लिए गर्म और नम वातावरण अनुकूल होता है। बारिश के मौसम में जूते पानी से भीग जाते हैं और उनके अंदर नमी लंबे समय तक रह सकती है। यदि उसी जूते को दोबारा पहन लिया जाए, तो पैर भी नम रह सकते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार गर्म और पसीने वाले जूतों के अंदर बनने वाला नम वातावरण फंगल संक्रमण के लिए अनुकूल हो सकता है। इसी वजह से पैरों को सूखा रखना और जूतों को पहनने से पहले पूरी तरह सूखने देना महत्वपूर्ण है।

विशेष रूप से बंद जूते, स्पोर्ट्स शूज, लंबे समय तक पहने जाने वाले जूते और ऐसे फुटवियर जिनमें हवा कम पहुंचती है, उनमें नमी जमा रह सकती है। अगर रोजाना एक ही जोड़ी जूते पहने जाते हैं और उन्हें पर्याप्त समय तक सूखने का मौका नहीं मिलता, तो समस्या बढ़ सकती है।

पैरों में फंगल इंफेक्शन के शुरुआती संकेत क्या हैं?

फंगल इंफेक्शन की शुरुआत कई बार मामूली खुजली से होती है और लोग इसे सामान्य एलर्जी या पसीने की समस्या समझ लेते हैं। लेकिन कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

उंगलियों के बीच लगातार खुजली, जलन या चुभन इसका सामान्य संकेत हो सकता है। त्वचा सूखी और परतदार हो सकती है या उंगलियों के बीच की त्वचा सफेद, नरम और गीली दिखाई दे सकती है। कुछ मामलों में त्वचा छिलने लगती है और छोटी-छोटी दरारें बन सकती हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार एथलीट्स फुट में तलवों और उंगलियों के बीच खुजली, जलन, स्केलिंग, त्वचा छिलना, छाले और दर्दनाक दरारें जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कभी-कभी पैरों से असामान्य गंध भी आ सकती है। हालांकि केवल बदबू होने का मतलब फंगल इंफेक्शन होना नहीं है, क्योंकि पसीने और बैक्टीरिया की वजह से भी पैरों से गंध आ सकती है।

उंगलियों के बीच सफेद त्वचा दिखे तो नजरअंदाज न करें

मानसून में कई लोगों को पैरों की उंगलियों के बीच त्वचा सफेद या नरम दिखाई देती है। इसका एक कारण लंबे समय तक नमी में रहना हो सकता है। लेकिन अगर इसके साथ खुजली, जलन, छिलना या दरारें भी हैं, तो फंगल इंफेक्शन की संभावना हो सकती है।

त्वचा को जोर से रगड़कर साफ करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। नमी को हटाने के लिए पैरों को धोने के बाद साफ तौलिये से धीरे-धीरे सुखाना बेहतर है, खासकर उंगलियों के बीच। NHS भी पैरों को धोने के बाद उंगलियों के बीच अच्छी तरह सुखाने की सलाह देता है।

बारिश में भीगे जूतों को तुरंत कैसे संभालें?

बारिश में जूते भीग जाएं तो सबसे पहले उन्हें उतारकर मोजे निकाल दें। गीले मोजे दोबारा पहनकर जूते में पैर डालना समस्या बढ़ा सकता है।

जूते को ऐसी जगह रखें जहां हवा का अच्छा आवागमन हो। जूते के अंदर मौजूद इनसोल अगर अलग हो सकता है तो उसे निकालकर अलग सुखाएं। जूतों को पूरी तरह सूखने के बाद ही दोबारा पहनें।

जूते सुखाने के लिए बहुत तेज गर्मी का इस्तेमाल करने से बचें, खासकर ऐसे फुटवियर में जिनकी सामग्री गर्मी से खराब हो सकती है। जूते के निर्माता द्वारा दिए गए देखभाल निर्देशों का पालन करना बेहतर है।

सबसे आसान तरीका है कि कम से कम दो जोड़ी रोजमर्रा के जूते रखें और उन्हें बारी-बारी से इस्तेमाल करें। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी जूतों को बदल-बदलकर पहनने की सलाह देती है ताकि उन्हें सूखने का पर्याप्त समय मिल सके।

गीले मोजे भी उतने ही नुकसानदायक हो सकते हैं

कई लोग बारिश में जूते तो बदल लेते हैं, लेकिन गीले मोजे पहनकर ही रहते हैं। यह भी पैरों में नमी बनाए रखता है।

अगर मोजे बारिश में भीग गए हैं या पसीने से पूरी तरह नम हो गए हैं, तो उन्हें बदल देना चाहिए। रोजाना साफ मोजे पहनना भी जरूरी है। AAD के अनुसार नमी सोखने या जल्दी सूखने वाले कपड़े के मोजे उपयोगी हो सकते हैं और मोजे गीले होने पर उन्हें बदल देना चाहिए।

मानसून में ऑफिस, कॉलेज या स्कूल जाने वालों के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई घंटे बंद जूतों में रहने से पैर लगातार नम रह सकते हैं।

जूतों को साफ रखने का सही तरीका

बारिश के पानी के साथ मिट्टी, धूल और दूसरी गंदगी जूतों में जमा हो सकती है। जूते की सामग्री के अनुसार उसे साफ करना चाहिए।

कपड़े वाले जूतों को निर्माता के निर्देश के अनुसार धोया जा सकता है। लेकिन धोने के बाद सबसे जरूरी है कि उन्हें पूरी तरह सुखाया जाए। सिर्फ ऊपर से सूखा दिखाई देने पर जूते पहन लेना पर्याप्त नहीं है। अंदर की परत और इनसोल में भी नमी रह सकती है।

लेदर या अन्य विशेष सामग्री के जूतों को साफ करने के लिए उनके निर्माता के निर्देशों का पालन करें। हर जूते को एक ही तरीके से धोना सही नहीं होता।

अगर जूते लगातार नम रहते हैं और उनमें बदबू आने लगी है, तो उन्हें साफ करने और पूरी तरह सुखाने पर ध्यान दें। लंबे समय तक खराब या संक्रमित फुटवियर के इस्तेमाल से दोबारा समस्या हो सकती है।

पैरों की सफाई में ये गलती न करें

मानसून में पैरों को साफ रखना जरूरी है, लेकिन अत्यधिक रगड़ना या कठोर केमिकल लगाना सही तरीका नहीं है।

पैरों को रोज धोकर साफ पानी से अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद तौलिये से खासकर उंगलियों के बीच की जगह को सुखाएं। त्वचा को बहुत जोर से रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से सुखाना बेहतर है।

अगर पैर पहले से संक्रमित हैं तो अलग तौलिये का इस्तेमाल करना अच्छा अभ्यास है और तौलिये को नियमित रूप से धोना चाहिए। NHS भी एथलीट्स फुट की स्थिति में पैरों के लिए अलग तौलिया रखने और उसे नियमित रूप से धोने की सलाह देता है।

सार्वजनिक जगहों पर नंगे पैर चलने से बचें

फंगल संक्रमण सिर्फ गीले जूतों की वजह से नहीं होता। यह संक्रमित व्यक्ति या दूषित सतह के संपर्क से भी फैल सकता है।

स्विमिंग पूल, जिम, सार्वजनिक शावर, चेंजिंग रूम और ऐसी जगहों पर जहां कई लोग नंगे पैर चलते हैं, संक्रमण फैलने की संभावना हो सकती है। AAD ऐसे स्थानों पर फ्लिप-फ्लॉप या शॉवर शूज पहनने की सलाह देता है।

इसलिए मानसून में यदि जूते बाहर उतारने पड़ें तो सार्वजनिक गीली जमीन पर नंगे पैर चलने से बचना चाहिए।

किसी दूसरे के जूते या तौलिया इस्तेमाल न करें

फंगल इंफेक्शन संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक भी पहुंच सकता है। इसलिए जूते, मोजे और तौलिये जैसी व्यक्तिगत चीजें साझा करने से बचना चाहिए।

यदि घर में किसी व्यक्ति को एथलीट्स फुट है, तो उसके तौलिये और फुटवियर को अलग रखना बेहतर है। फंगस से संक्रमित त्वचा या वस्तुओं के संपर्क से संक्रमण फैल सकता है।

जूतों में हवा का आना क्यों जरूरी है?

बंद और गर्म जूतों में पसीना जमा होने से पैर लंबे समय तक नम रह सकते हैं। ऐसे फुटवियर जिनमें हवा का आवागमन बेहतर हो, पैर को सूखा रखने में मदद कर सकते हैं।

AAD के अनुसार बहुत ज्यादा गर्म और पसीने वाले जूतों से बचना चाहिए। गर्म मौसम में सांस लेने योग्य फुटवियर का इस्तेमाल पैरों को सूखा रखने में मदद कर सकता है।

हालांकि ऑफिस या काम की वजह से हर किसी के लिए खुले फुटवियर पहनना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में साफ और सूखे मोजे पहनना तथा जूतों को बारी-बारी से इस्तेमाल करना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

नाखूनों पर भी नजर रखें

पैरों का फंगल इंफेक्शन कभी-कभी नाखूनों तक फैल सकता है। नाखून मोटे होना, रंग बदलना, टूटना या नाखून का त्वचा से अलग होने लगना फंगल नेल इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं।

NHS के अनुसार पैरों को लगातार गर्म और नम रखने से फंगल नेल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है और एथलीट्स फुट का इलाज समय पर करने से उसके नाखूनों तक फैलने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।

इसलिए अगर पैरों में लंबे समय से फंगल समस्या बनी हुई है और साथ में नाखूनों में बदलाव दिखाई देने लगे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

घर पर कौन-सी 12 सावधानियां रखें?

मानसून में पैरों और जूतों को फंगल संक्रमण से बचाने के लिए रोजमर्रा की इन आदतों को अपनाया जा सकता है—

1. बारिश में भीगे जूते तुरंत उतारें।
2. गीले मोजे दोबारा न पहनें।
3. जूतों को पूरी तरह सूखने के बाद ही पहनें।
4. जूतों की इनसोल अलग निकालकर सुखाएं, अगर वह हटाने योग्य हो।
5. रोज साफ मोजे पहनें।
6. मोजे गीले या बहुत पसीने वाले हो जाएं तो उन्हें बदलें।
7. पैरों को रोज धोकर उंगलियों के बीच अच्छी तरह सुखाएं।
8. एक ही जूते की जोड़ी लगातार कई दिन न पहनें; संभव हो तो जूते बदल-बदलकर पहनें।
9. सार्वजनिक शावर, जिम और पूल में फ्लिप-फ्लॉप या शॉवर फुटवियर पहनें।
10. किसी दूसरे के जूते, मोजे या तौलिये इस्तेमाल न करें।
11. पैरों में खुजली या संक्रमण होने पर त्वचा को बार-बार न खुजलाएं।
12. लगातार बने रहने वाले या बढ़ते संक्रमण में डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।

फंगल इंफेक्शन होने पर क्या करें?

अगर पैरों में खुजली, जलन, छिलना या उंगलियों के बीच त्वचा में बदलाव दिखाई देता है, तो पहले पैरों को साफ और सूखा रखना जरूरी है। हल्के मामलों में फार्मेसी से मिलने वाली एंटीफंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सभी दवाएं हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। इसलिए पैकेट पर दिए निर्देश पढ़ना या फार्मासिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहकर संक्रमण को लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। अगर समस्या ठीक नहीं हो रही या बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

विशेष रूप से यदि पैर या टांग बहुत लाल, गर्म और दर्दनाक हो, संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्से तक फैल रहा हो, बहुत दर्द हो, या व्यक्ति को डायबिटीज अथवा कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी स्थिति हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

हर खुजली फंगल इंफेक्शन नहीं होती। पैरों में एलर्जी, डर्मेटाइटिस, बैक्टीरियल संक्रमण और दूसरी त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं है।

यदि फार्मेसी से मिलने वाले उपचार के बावजूद समस्या ठीक नहीं हो रही, बार-बार वापस आ रही है या तेजी से बढ़ रही है, तो डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। अगर त्वचा में गहरी दरार, खून, पस, बहुत ज्यादा दर्द या गर्माहट दिखाई दे, तो जांच जरूरी है।

मानसून में पैरों की देखभाल का सबसे आसान नियम है—पैर साफ रखें, पूरी तरह सुखाएं और गीले जूतों-मोजों को लंबे समय तक पहनकर न रखें। बारिश के मौसम में जूतों का भीगना सामान्य है, लेकिन उन्हें बिना सुखाए लगातार पहनना जरूरी नहीं है। थोड़ी सावधानी अपनाकर पैरों को आरामदायक और स्वस्थ रखा जा सकता है।

कुल मिलाकर, गीले जूते अपने आप फंगल इंफेक्शन की गारंटी नहीं हैं, लेकिन लगातार नमी और पसीना फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकते हैं। इसलिए मानसून में जूतों को बारी-बारी से पहनना, उन्हें पूरी तरह सुखाना, गीले मोजे बदलना और पैरों की उंगलियों के बीच की त्वचा को सूखा रखना सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में शामिल है।

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