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Newborn Birthmark: क्या आपके बच्चे का बर्थमार्क हेमेंजियोमा है? जानिए कारण, लक्षण और इलाज

जब किसी घर में नवजात शिशु का जन्म होता है तो परिवार का पूरा ध्यान उसकी सेहत और देखभाल पर रहता है। इसी दौरान कई माता-पिता बच्चे की त्वचा पर लाल, गुलाबी या नीले रंग का कोई निशान देखते हैं। अक्सर लोग इसे सामान्य बर्थमार्क समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हर निशान सामान्य नहीं होता। कुछ मामलों में यह हेमेंजियोमा (Hemangioma) हो सकता है, जो रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की असामान्य वृद्धि के कारण बनने वाला एक सौम्य (Benign) ट्यूमर होता है।

हेमेंजियोमा कैंसर नहीं होता और अधिकांश मामलों में समय के साथ अपने आप छोटा होने लगता है। फिर भी यदि यह आंख, नाक, मुंह, कान, गर्दन या श्वास मार्ग के पास हो, तेजी से बढ़ रहा हो या खून बहने लगे, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी होता है।

हेमेंजियोमा जन्म के समय दिखाई दे सकता है या जन्म के कुछ सप्ताह बाद विकसित हो सकता है। शुरुआत में यह एक छोटा लाल धब्बा जैसा दिखता है, लेकिन पहले कुछ महीनों में इसका आकार तेजी से बढ़ सकता है। लगभग 6 से 12 महीने के बाद इसकी वृद्धि धीमी पड़ जाती है और आने वाले वर्षों में यह धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश शिशुओं में हेमेंजियोमा का कारण स्पष्ट नहीं होता। माना जाता है कि भ्रूण के विकास के दौरान रक्त वाहिकाओं के बनने की प्रक्रिया में बदलाव इसकी वजह हो सकता है। यह किसी संक्रमण, खान-पान या माता-पिता की किसी गलती के कारण नहीं होता।

कुछ बच्चों में हेमेंजियोमा होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। समय से पहले जन्मे (Premature) शिशु, जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे, लड़कियां और जुड़वां बच्चों में यह अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।

हेमेंजियोमा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला सतही (Superficial Hemangioma), जो त्वचा की ऊपरी सतह पर चमकीले लाल रंग का दिखाई देता है। दूसरा गहरा (Deep Hemangioma), जो त्वचा के अंदर विकसित होता है और नीले या बैंगनी रंग की सूजन जैसा दिखाई दे सकता है। कुछ बच्चों में मिश्रित प्रकार भी देखने को मिलता है।

अधिकांश मामलों में हेमेंजियोमा दर्द नहीं करता। लेकिन यदि यह किसी संवेदनशील हिस्से पर हो या बार-बार रगड़ लगे तो उसमें घाव, संक्रमण या रक्तस्राव हो सकता है।

यदि हेमेंजियोमा आंख के पास है तो यह देखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। मुंह या गले के आसपास होने पर दूध पीने या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मामलों में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

डॉक्टर आमतौर पर शारीरिक जांच से ही हेमेंजियोमा की पहचान कर लेते हैं। यदि इसकी गहराई या फैलाव का पता लगाना जरूरी हो, तो अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या अन्य जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।

हर हेमेंजियोमा का इलाज जरूरी नहीं होता। यदि यह छोटा है, तेजी से नहीं बढ़ रहा और किसी महत्वपूर्ण अंग को प्रभावित नहीं कर रहा, तो डॉक्टर केवल नियमित निगरानी की सलाह देते हैं। समय के साथ अधिकांश हेमेंजियोमा अपने आप सिकुड़ जाते हैं।

यदि इलाज की जरूरत हो तो डॉक्टर बच्चे की उम्र, आकार और स्थान के अनुसार उपचार तय करते हैं। आजकल Propranolol जैसी दवाएं कई मामलों में प्रभावी मानी जाती हैं। कुछ स्थितियों में टॉपिकल दवाएं, लेजर थेरेपी या बहुत कम मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। किसी भी दवा का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

माता-पिता को हेमेंजियोमा पर घरेलू नुस्खे, क्रीम या तेल लगाने से बचना चाहिए। इससे त्वचा को नुकसान या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

यदि बच्चे के बर्थमार्क का रंग तेजी से बदल रहा हो, उसमें खून निकल रहा हो, घाव बन गया हो, सूजन बढ़ रही हो या बच्चा असहज महसूस कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बाल रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चे की त्वचा की नियमित जांच करें और हर महीने उसकी तस्वीर लेकर तुलना करें। इससे आकार में होने वाले बदलाव का पता लगाने में आसानी होती है।

हेमेंजियोमा को लेकर माता-पिता में डर होना स्वाभाविक है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अधिकांश मामलों में यह गंभीर बीमारी नहीं होती। सही समय पर जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जीते हैं।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर जानकारी सही नहीं होती। इसलिए किसी भी त्वचा संबंधी बदलाव को देखकर स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

यदि नवजात शिशु की त्वचा पर कोई असामान्य बर्थमार्क दिखाई दे, तो उसे केवल सामान्य निशान मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर पहचान, नियमित निगरानी और विशेषज्ञ की सलाह से किसी भी संभावित जटिलता से बचा जा सकता है। बच्चे की सेहत से जुड़ी छोटी-सी सावधानी भविष्य में बड़े लाभ का कारण बन सकती है।


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