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मेडिकल साइंस में पहली बार दो रोबोट्स ने की सफल सर्जरी, बिना इंसानी मदद निकाला गॉलब्लेडर

मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार दो अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम की मदद से बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय हस्तक्षेप के सफल सर्जरी करने का दावा किया है। इस प्रयोग में सूअरों (Pigs) के शरीर से गॉलब्लेडर (Gallbladder) को पूरी तरह रोबोट्स की सहायता से निकाला गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने केवल निगरानी की, जबकि सर्जरी के सभी प्रमुख चरण रोबोटिक सिस्टम ने स्वयं पूरे किए।

विशेषज्ञ इस उपलब्धि को भविष्य की मेडिकल तकनीक के लिए एक बड़ा कदम मान रहे हैं। हालांकि यह प्रयोग अभी केवल पशुओं पर किया गया है और इंसानों पर इस तकनीक के नियमित उपयोग से पहले कई चरणों की जांच, परीक्षण और नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।

अब तक दुनिया में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग कई अस्पतालों में किया जाता रहा है, लेकिन इन सभी मामलों में रोबोट को सर्जन नियंत्रित करते थे। डॉक्टर एक विशेष कंसोल पर बैठकर रोबोटिक उपकरणों को संचालित करते हैं और रोबोट केवल उनके निर्देशों के अनुसार काम करता है। इस नए प्रयोग की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सर्जरी के दौरान रोबोट ने स्वयं निर्णय लेकर कई जटिल प्रक्रियाएं पूरी कीं।

शोधकर्ताओं के अनुसार इस प्रणाली में दो रोबोटिक यूनिट्स ने एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम किया। एक रोबोट ऑपरेशन क्षेत्र को स्थिर रखने और आवश्यक उपकरणों को नियंत्रित करने का काम कर रहा था, जबकि दूसरा रोबोट गॉलब्लेडर को सुरक्षित तरीके से अलग करने और बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी कर रहा था।

गॉलब्लेडर शरीर का एक छोटा अंग होता है, जो लीवर के नीचे स्थित रहता है और पित्त (Bile) को संग्रहित करने का काम करता है। जब इसमें पथरी, संक्रमण या अन्य गंभीर समस्या हो जाती है, तब कई मामलों में इसे ऑपरेशन के जरिए निकालना पड़ता है। इस प्रक्रिया को कोलेसिस्टेक्टॉमी (Cholecystectomy) कहा जाता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की सर्जरी में कई जटिल चरण होते हैं। रक्त वाहिकाओं और पित्त नलिकाओं की सही पहचान करना, आसपास के अंगों को सुरक्षित रखना और अत्यधिक सटीकता बनाए रखना आवश्यक होता है। यही कारण है कि इस ऑपरेशन को पूरी तरह स्वचालित तरीके से सफलतापूर्वक पूरा करना एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।

इस रोबोटिक प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), कंप्यूटर विज़न, सेंसर तकनीक और मशीन लर्निंग का उपयोग किया गया। ऑपरेशन के दौरान कैमरे लगातार शरीर के अंदर की तस्वीरें लेते रहे और AI सिस्टम उन्हें तुरंत विश्लेषित करता रहा। इसके आधार पर रोबोट ने अपने अगले कदम तय किए।

शोधकर्ताओं ने बताया कि सिस्टम को पहले हजारों सर्जिकल वीडियो, मेडिकल इमेज और विभिन्न शारीरिक संरचनाओं के डेटा से प्रशिक्षित किया गया था। इससे रोबोट विभिन्न परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में सक्षम हो पाया।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि इस प्रयोग का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में डॉक्टरों की जरूरत समाप्त हो जाएगी। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार AI और रोबोट डॉक्टरों की जगह लेने के बजाय उनकी सहायता करने वाले उपकरण बन सकते हैं। अंतिम निर्णय, रोगी का मूल्यांकन और आपातकालीन स्थिति में हस्तक्षेप अभी भी प्रशिक्षित सर्जनों की जिम्मेदारी रहेगा।

रोबोटिक सर्जरी के कई लाभ पहले से ही सामने आ चुके हैं। इनमें छोटे चीरे, कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम जोखिम, कम दर्द और मरीज का तेजी से स्वस्थ होना शामिल है। लेकिन अब तक इन सभी सर्जरी में मानव सर्जन की सक्रिय भूमिका अनिवार्य थी।

यदि भविष्य में स्वायत्त रोबोटिक सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने में भी इसका उपयोग हो सकता है। हालांकि इसके लिए मजबूत इंटरनेट, सुरक्षित नियंत्रण प्रणाली और उच्च स्तर की निगरानी व्यवस्था आवश्यक होगी।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई चिकित्सा तकनीक को इंसानों पर लागू करने से पहले कई चरणों के क्लिनिकल परीक्षण किए जाते हैं। पहले पशुओं पर परीक्षण, फिर सीमित मानव परीक्षण और उसके बाद बड़े पैमाने पर अध्ययन किए जाते हैं। इन सभी चरणों में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

इस प्रयोग ने मेडिकल समुदाय में AI आधारित सर्जरी को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। कुछ विशेषज्ञ इसे स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होने से पहले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन जरूरी होगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का उपयोग केवल सर्जरी तक सीमित नहीं है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन की रिपोर्ट का विश्लेषण करने, कैंसर की शुरुआती पहचान करने, दवाओं के विकास और अस्पताल प्रबंधन में भी तेजी से बढ़ रहा है।

भारत सहित दुनिया के कई देशों में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग पहले से किया जा रहा है। यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी, कैंसर सर्जरी और हृदय रोगों से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में रोबोटिक तकनीक ने बेहतर सटीकता प्रदान की है। लेकिन इन सभी मामलों में प्रशिक्षित सर्जन ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं।

नई तकनीक के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीजों का विश्वास भी होगा। किसी भी व्यक्ति के लिए यह स्वीकार करना आसान नहीं होगा कि उसकी सर्जरी पूरी तरह मशीन द्वारा की जाए। इसलिए भविष्य में यदि ऐसी तकनीक अपनाई भी जाती है, तो डॉक्टरों की निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सर्जिकल सिस्टम के लिए स्पष्ट कानूनी और नैतिक दिशा-निर्देश भी जरूरी होंगे। यदि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण समस्या आती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—इस पर भी भविष्य में नियम बनाने होंगे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जो जटिल सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता और सुरक्षा प्रदान कर सके। इससे भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकता है।

फिलहाल यह उपलब्धि शोध स्तर पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सफलता मानी जा रही है। इंसानों पर इस तकनीक के नियमित उपयोग में अभी समय लगेगा, क्योंकि सुरक्षा और प्रभावशीलता की विस्तृत जांच बाकी है।

कुल मिलाकर दो स्वायत्त रोबोट्स द्वारा बिना प्रत्यक्ष मानवीय सहायता के सूअरों के शरीर से गॉलब्लेडर निकालने का सफल प्रयोग मेडिकल साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक विकसित होती है, तो सर्जरी की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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