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पैर में मोच आने पर क्या करें? RICE थेरेपी, डॉक्टर के पास कब जाएं और किन गलतियों से बचें

पैर में मोच आना एक आम समस्या है, लेकिन कई बार छोटी सी दिखने वाली यह चोट गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। खेलते समय, सीढ़ियां उतरते समय, सड़क पर चलते हुए या अचानक पैर मुड़ जाने से मोच आ सकती है। अधिकांश लोग इसे मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि सही समय पर सही इलाज न मिलने पर दर्द और सूजन लंबे समय तक बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार पैर की मोच तब आती है जब जोड़ के आसपास मौजूद लिगामेंट सामान्य सीमा से अधिक खिंच जाते हैं या उनमें हल्का फटाव आ जाता है। यह समस्या सबसे ज्यादा टखने (Ankle) में देखने को मिलती है।

मोच आने के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान की गई सही देखभाल रिकवरी को तेज कर सकती है और जटिलताओं को कम कर सकती है।

मोच आने के तुरंत बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक RICE Therapy है। दुनिया भर में डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट इस प्राथमिक उपचार की सलाह देते हैं।

RICE शब्द चार महत्वपूर्ण चरणों को दर्शाता है।

R – Rest (आराम)

मोच आने के बाद सबसे पहले प्रभावित पैर को आराम देना जरूरी है। लगातार चलना या उस पर वजन डालना चोट को और बढ़ा सकता है।

कई लोग दर्द के बावजूद सामान्य गतिविधियां जारी रखते हैं, जिससे लिगामेंट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शुरुआती 24 से 48 घंटे तक आराम करना लाभदायक माना जाता है।

I – Ice (बर्फ की सिकाई)

बर्फ की सिकाई सूजन और दर्द कम करने में मदद कर सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं। इसे कपड़े में लपेटकर 15 से 20 मिनट तक प्रभावित स्थान पर रखें। यह प्रक्रिया हर 2 से 3 घंटे में दोहराई जा सकती है।

बर्फ की सिकाई रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सूजन कम करने में मदद करती है।

C – Compression (दबाव)

इलास्टिक बैंडेज या कंप्रेशन रैप का उपयोग सूजन नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

ध्यान रखें कि बैंडेज बहुत ज्यादा टाइट न हो। यदि पैर सुन्न होने लगे या त्वचा का रंग बदलने लगे तो बैंडेज ढीला कर देना चाहिए।

E – Elevation (ऊंचाई पर रखना)

प्रभावित पैर को हृदय के स्तर से थोड़ा ऊपर रखना सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

सोते समय या आराम करते समय पैर के नीचे तकिया रखकर उसे ऊंचा रखा जा सकता है।

RICE थेरेपी शुरुआती 24 से 48 घंटों में सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है। हालांकि गंभीर चोट के मामलों में केवल घरेलू उपचार पर्याप्त नहीं हो सकता।

मोच आने के बाद कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे दर्द, सूजन, चलने में कठिनाई और प्रभावित हिस्से में कोमलता।

लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ये 7 संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

1. अत्यधिक सूजन

यदि सूजन तेजी से बढ़ रही है और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।

2. पैर पर वजन न डाल पाना

यदि आप खड़े नहीं हो पा रहे हैं या कुछ कदम भी नहीं चल पा रहे हैं तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

3. हड्डी टूटने जैसा दर्द

तेज और असहनीय दर्द फ्रैक्चर या गंभीर लिगामेंट चोट का संकेत हो सकता है।

4. पैर का आकार बदल जाना

यदि टखना या पैर असामान्य दिखाई दे रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

5. सुन्नपन महसूस होना

नसों पर प्रभाव पड़ने की स्थिति में सुन्नपन या झुनझुनी महसूस हो सकती है।

6. त्वचा का रंग बदलना

नीला, बैंगनी या अत्यधिक लाल रंग गंभीर चोट का संकेत हो सकता है।

7. कई दिनों बाद भी सुधार न होना

यदि 5 से 7 दिनों के बाद भी दर्द और सूजन में सुधार नहीं हो रहा है तो मेडिकल जांच कराना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्स-रे या अन्य जांचों के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि केवल मोच है या कोई फ्रैक्चर भी मौजूद है।

मोच आने के बाद लोग कई ऐसी गलतियां कर देते हैं जो रिकवरी को धीमा कर सकती हैं।

ये 5 गलतियां बिल्कुल न करें

1. तुरंत गर्म सिकाई करना

शुरुआती 48 घंटों में गर्म पानी या गर्म सिकाई सूजन बढ़ा सकती है।

2. दर्द के बावजूद दौड़ना या चलना

कई लोग सोचते हैं कि चलते रहने से चोट जल्दी ठीक होगी, जबकि ऐसा करने से नुकसान बढ़ सकता है।

3. बार-बार मालिश करना

शुरुआती चरण में जोरदार मालिश सूजन और आंतरिक रक्तस्राव को बढ़ा सकती है।

4. बर्फ सीधे त्वचा पर लगाना

इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। हमेशा कपड़े का उपयोग करें।

5. डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना

कुछ दवाएं सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। इसलिए चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

मोच की गंभीरता आमतौर पर तीन ग्रेड में बांटी जाती है।

ग्रेड-1 मोच में हल्का खिंचाव होता है और व्यक्ति सामान्य रूप से चल सकता है।

ग्रेड-2 में लिगामेंट का आंशिक फटाव हो सकता है और दर्द अधिक होता है।

ग्रेड-3 सबसे गंभीर स्थिति होती है जिसमें लिगामेंट पूरी तरह फट सकता है।

खिलाड़ियों में मोच की समस्या अधिक देखी जाती है। फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल और दौड़ जैसे खेलों में टखने पर अधिक दबाव पड़ता है।

फिजियोथेरेपी भी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चोट ठीक होने के बाद संतुलन और ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम दोबारा चोट लगने के जोखिम को कम कर सकते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उचित जूते पहनना, व्यायाम से पहले वार्मअप करना और असमतल सतहों पर सावधानी बरतना मोच से बचाव में मदद कर सकता है।

आजकल कई लोग ऑनलाइन सलाह के आधार पर उपचार शुरू कर देते हैं, लेकिन हर चोट की प्रकृति अलग होती है। इसलिए गंभीर लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

पैर की मोच आम समस्या जरूर है, लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही समय पर RICE थेरेपी अपनाने, गलतियों से बचने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करने से रिकवरी तेज और सुरक्षित हो सकती है।

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