गर्मियों का मौसम जहां एक ओर छुट्टियों, आम और ठंडे पेय का आनंद लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह शरीर के लिए कई तरह की चुनौतियां भी खड़ी करता है। तेज धूप, बढ़ता तापमान और लगातार पसीना निकलना शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकता है। खासकर ऐसे लोग जो पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह मौसम ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म और कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम प्रभावित होता है। ज्यादा तापमान के कारण शरीर को ठंडा रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मौसम में अपनी दिनचर्या और खान-पान में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।
सबसे पहला और महत्वपूर्ण बदलाव दवाइयों से जुड़ा होता है। कई बार गर्मियों में दवाइयों का असर बदल सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की दवाइयां लेते हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ दवाइयां शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयों में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए।
गर्मियों में सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होती है। लगातार पसीना निकलने के कारण शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे कमजोरी, चक्कर और थकान महसूस हो सकती है। इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। आमतौर पर एक व्यक्ति को दिन में 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए, लेकिन अगर आप ज्यादा पसीना बहाते हैं या बाहर काम करते हैं, तो यह मात्रा और बढ़ सकती है।
वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए गर्मियों में समय का चयन बहुत जरूरी होता है। दिन के समय जब धूप तेज होती है, तब एक्सरसाइज करने से शरीर जल्दी थक सकता है और हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की एक्सरसाइज करना बेहतर होता है। इसके साथ ही हल्के और ढीले कपड़े पहनना भी जरूरी है, ताकि शरीर को ठंडा रखने में मदद मिल सके।
गर्मियों में खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन सबसे अच्छा होता है। ताजे फल और सब्जियां जैसे तरबूज, खीरा और खरबूजा शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पानी की कमी भी पूरी करते हैं। इसके अलावा, पोटेशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे केला भी शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं।
इस मौसम में तला-भुना, ज्यादा मसालेदार और मीठा भोजन कम करना चाहिए। ये चीजें शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं और पाचन तंत्र पर भी दबाव डालती हैं। साथ ही चाय और कॉफी का सेवन भी सीमित करना चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद कैफीन शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकता है।
गर्मियों में कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे बार-बार चक्कर आना, सिर दर्द, उल्टी, अत्यधिक प्यास लगना, मांसपेशियों में दर्द या अचानक कमजोरी महसूस होना। ये सभी हीट एक्सॉशन या डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत ठंडी जगह पर आराम करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी होता है। अगर स्थिति गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खासतौर पर बुजुर्गों और बच्चों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। उनकी शरीर की सहनशक्ति कम होती है, जिससे उन्हें जल्दी डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक हो सकता है। इसलिए उन्हें धूप में कम से कम बाहर निकलने देना चाहिए और घर में ठंडा वातावरण बनाए रखना चाहिए।
इसके अलावा, जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े फायदे दे सकते हैं। जैसे बाहर निकलते समय टोपी या छाता इस्तेमाल करना, सनस्क्रीन लगाना, हल्के रंग के कपड़े पहनना और पर्याप्त नींद लेना। ये सभी चीजें शरीर को गर्मी से बचाने में मदद करती हैं।
गर्मियों में शरीर का ध्यान रखना सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि बीमारियों से बचाव के लिए भी जरूरी है। अगर हम समय रहते अपनी आदतों में बदलाव कर लें, तो इस मौसम को बिना किसी परेशानी के आसानी से एंजॉय कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, गर्मियों में सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित डाइट, सही समय पर वर्कआउट, पर्याप्त पानी और सावधानी बेहद जरूरी है। ये छोटे-छोटे कदम न केवल आपको फिट रखेंगे, बल्कि आपको कई गंभीर बीमारियों से भी बचाएंगे।
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