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19 साल में 300 करोड़ iPhone: Apple को कैसे मिला iPhone नाम, Cisco से विवाद की पूरी कहानी

दुनिया के सबसे चर्चित स्मार्टफोन ब्रांडों में शामिल iPhone एक बार फिर सुर्खियों में है। Apple 9 सितंबर 2026 को अपने बड़े सालाना लॉन्च इवेंट में नई iPhone सीरीज पेश करने जा रहा है। इस बार का इवेंट कई मायनों में खास है, क्योंकि यह नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च है। सबसे ज्यादा चर्चा iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और लंबे समय से इंतजार किए जा रहे Apple के पहले फोल्डेबल iPhone की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस इवेंट का नाम “Surprise and Shine” रखा गया है।

लेकिन नई iPhone सीरीज की चर्चा के बीच Apple के इस स्मार्टफोन की लगभग दो दशक लंबी कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। जिस iPhone को आज दुनिया Apple के साथ जोड़कर देखती है, उसके नाम पर कभी Apple और Cisco के बीच कानूनी विवाद तक हो गया था। यानी “iPhone” नाम शुरुआत से Apple का अकेला ट्रेडमार्क नहीं था। इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि जिस कंपनी के पास iPhone नाम का अधिकार पहले था, वह कोई स्मार्टफोन कंपनी नहीं बल्कि नेटवर्किंग और टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी Cisco थी।

Apple ने 2007 में पहला iPhone पेश किया था। Steve Jobs ने 9 जनवरी 2007 को Macworld में iPhone का ऐलान किया और इसे फोन, iPod और इंटरनेट कम्युनिकेशन को एक डिवाइस में जोड़ने वाले नए उत्पाद के रूप में पेश किया। उस समय किसी को शायद अंदाजा नहीं था कि यह डिवाइस आने वाले वर्षों में Apple की सबसे बड़ी पहचान बन जाएगा। पहला iPhone 29 जून 2007 को अमेरिका में बिक्री के लिए आया।

आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। Apple ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि कंपनी ने iPhone लॉन्च होने के बाद से 3 अरब यानी 300 करोड़ iPhone शिप कर दिए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया में अभी 300 करोड़ लोग iPhone इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कंपनी के इतिहास में शिप किए गए कुल iPhone का आंकड़ा है। कई पुराने फोन अब इस्तेमाल में नहीं हैं, कुछ बदल दिए गए, कुछ सेकेंडरी मार्केट में चले गए और कुछ खराब या रिटायर हो चुके हैं। फिर भी 3 अरब यूनिट का आंकड़ा बताता है कि iPhone का कारोबार कितना बड़ा हो चुका है।

इस उपलब्धि तक पहुंचने की रफ्तार भी बेहद खास रही। Apple को पहला 1 अरब iPhone शिप करने में करीब 9 साल लगे। यह milestone 2016 में आया था। इसके बाद अगले 1 अरब तक पहुंचने में लगभग 5 साल लगे और तीसरे अरब तक पहुंचने में करीब 4 साल ही लगे। यानी जैसे-जैसे दुनिया में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ा, iPhone की बिक्री की रफ्तार भी काफी तेज हुई।

लेकिन इस कहानी का सबसे रोचक हिस्सा केवल बिक्री नहीं है। सवाल यह है कि आखिर “iPhone” नाम Apple को मिला कैसे?

जब Steve Jobs ने 2007 में Apple के फोन को iPhone नाम से लॉन्च किया, उस समय इस नाम को लेकर Cisco के साथ विवाद खड़ा हो गया। Cisco के पास पहले से iPhone ट्रेडमार्क था। Cisco ने यह ट्रेडमार्क Infogear नाम की कंपनी के अधिग्रहण के जरिए हासिल किया था। Cisco के मुताबिक Infogear के ट्रेडमार्क आवेदन की शुरुआत 1996 में हुई थी और Cisco ने 2000 में Infogear का अधिग्रहण किया था। बाद में Cisco की Linksys यूनिट ने iPhone नाम से इंटरनेट आधारित फोन भी बाजार में उतारे थे।

यानी Apple ने जब अपना मोबाइल फोन “iPhone” नाम से पेश किया, तब नाम को लेकर Cisco के साथ पहले से एक इतिहास मौजूद था। Apple और Cisco के बीच इस नाम को लेकर बातचीत पहले से चल रही थी, लेकिन Steve Jobs के जनवरी 2007 के ऐलान के समय तक दोनों कंपनियों के बीच अंतिम समझौता नहीं हुआ था। इसके तुरंत बाद Cisco ने Apple पर ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दायर कर दिया।

Cisco का तर्क था कि iPhone नाम उसके पास पहले से ट्रेडमार्क के रूप में मौजूद था और Apple को इसका इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं था। Cisco ने अदालत में Apple के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। उस समय यह विवाद टेक्नोलॉजी जगत में काफी बड़ा मुद्दा बन गया था, क्योंकि Apple अपने नए फोन को दुनिया के सामने पेश कर चुका था और अब उसी नाम को लेकर कानूनी अड़चन सामने आ गई थी।

दिलचस्प बात यह थी कि दोनों कंपनियों के उत्पाद एक जैसे नहीं थे। Cisco का iPhone एक VoIP यानी Voice over Internet Protocol फोन था, जबकि Apple का iPhone एक मोबाइल स्मार्टफोन था। Cisco की Linksys यूनिट के फोन इंटरनेट के जरिए कॉल करने और कुछ ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ने के लिए बनाए गए थे। Apple का डिवाइस cellular network, iPod और इंटरनेट ब्राउजिंग जैसी सुविधाओं को एक साथ लेकर आया था।

कानूनी लड़ाई लंबी चलने से पहले ही दोनों कंपनियों ने बातचीत का रास्ता चुना। जनवरी 2007 में मुकदमा शुरू होने के बाद फरवरी में Apple और Cisco के बीच समझौता हो गया। 21 फरवरी 2007 को दोनों कंपनियों ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि वे iPhone ट्रेडमार्क विवाद को समाप्त कर रहे हैं। समझौते के तहत दोनों कंपनियों को दुनिया भर में अपने उत्पादों के लिए “iPhone” ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने की अनुमति मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ट्रेडमार्क अधिकारों को स्वीकार किया और लंबित कानूनी मामलों को खत्म करने पर सहमति जताई।

इस समझौते की आर्थिक शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई थीं। यानी यह साफ तौर पर सार्वजनिक नहीं हुआ कि Apple ने Cisco को कितनी रकम दी या समझौते में किस तरह की अन्य व्यावसायिक शर्तें शामिल थीं। दोनों कंपनियों ने यह भी कहा था कि वे सुरक्षा और कंज्यूमर तथा एंटरप्राइज कम्युनिकेशन के क्षेत्र में interoperability यानी आपसी तकनीकी तालमेल की संभावनाएं तलाशेंगी।

इस तरह Apple को “iPhone” नाम इस्तेमाल करने का रास्ता मिल गया और जून 2007 में पहला iPhone बाजार में पहुंच गया। इसके बाद इस नाम की पहचान धीरे-धीरे Cisco के VoIP फोन से हटकर Apple के स्मार्टफोन के साथ जुड़ती चली गई।

पहले iPhone में आज के मुकाबले सुविधाएं बेहद सीमित थीं। इसमें App Store नहीं था, क्योंकि App Store बाद में आया। लेकिन इसका touchscreen interface, Safari browser, iPod functionality और फोन को एक नए तरीके से इस्तेमाल करने का अनुभव उस समय बेहद अलग था। Steve Jobs ने इसे पारंपरिक मोबाइल फोन से आगे की चीज के रूप में पेश किया था।

Apple ने शुरुआत से ही केवल हार्डवेयर बेचने पर ध्यान नहीं दिया। कंपनी ने iPhone को अपने पूरे ecosystem का केंद्र बनाया। iOS, App Store, iCloud, Apple Music, Apple Pay, AirPods, Apple Watch और Mac जैसे उत्पाद और सेवाएं धीरे-धीरे iPhone के आसपास एक बड़ा ecosystem तैयार करते गए। यही वजह है कि iPhone की सफलता को केवल स्मार्टफोन की बिक्री के रूप में देखना पूरी कहानी नहीं बताता।

समय के साथ iPhone में कई बड़े बदलाव हुए। पहली पीढ़ी के मॉडल से लेकर आज के Pro और Pro Max मॉडल तक कैमरा, प्रोसेसर, डिस्प्ले, नेटवर्क कनेक्टिविटी, बैटरी, सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव हुए। Apple ने अपने चिप डिजाइन पर भी ज्यादा नियंत्रण हासिल किया और A-series chips को iPhone की प्रमुख ताकत बनाया।

iPhone की सफलता का एक बड़ा कारण Apple की product strategy भी रही। कंपनी ने हर साल फोन को पूरी तरह से बदलने की बजाय धीरे-धीरे महत्वपूर्ण सुधार किए। कैमरा बेहतर हुआ, processor तेज हुआ, display तकनीक बदली, 5G आया, Face ID आया, USB-C आया और Pro models में ज्यादा advanced camera systems दिए गए।

इस बीच Apple ने iPhone के अलग-अलग price segments भी बनाए। बेस मॉडल के साथ Pro और Pro Max जैसे premium विकल्प आए। इससे कंपनी को अलग-अलग तरह के ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिली। महंगे मॉडल Apple के लिए ज्यादा revenue और margin पैदा करने वाले उत्पाद बने, जबकि पुराने मॉडल कम कीमत पर नए ग्राहकों तक पहुंचने का माध्यम बने।

iPhone का 3 अरब यूनिट का milestone इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Apple ने पिछले वर्षों में अपनी बिक्री रणनीति को काफी हद तक premium market पर केंद्रित रखा है। इसके बावजूद कंपनी ने दुनिया के अलग-अलग बाजारों में मजबूत ग्राहक आधार बनाया है। भारत भी अब Apple की रणनीति में महत्वपूर्ण बाजार बन चुका है। कंपनी की supply chain और manufacturing footprint में भारत की भूमिका पिछले वर्षों में बढ़ी है।

अब 2026 में iPhone की कहानी एक नए मोड़ पर पहुंच रही है। 9 सितंबर को Apple Park में होने वाले “Surprise and Shine” इवेंट में कंपनी से iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पेश किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा Apple के पहले foldable iPhone की भी चर्चा है। रिपोर्ट्स में इसे अस्थायी रूप से iPhone Ultra नाम से जोड़ा जा रहा है, हालांकि Apple ने आधिकारिक तौर पर इसका नाम या सभी specifications घोषित नहीं किए हैं।

फोल्डेबल iPhone Apple के लिए खास महत्व रख सकता है, क्योंकि Samsung, Huawei और दूसरे निर्माता कई वर्षों से foldable smartphone बाजार में मौजूद हैं। Apple इस segment में अपेक्षाकृत देर से प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य केवल foldable फोन लॉन्च करना नहीं बल्कि उसे ज्यादा refined और मजबूत अनुभव के साथ पेश करना है।

इस डिवाइस की कीमत भी सामान्य iPhone से काफी ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में इसकी शुरुआती कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा बताई गई है। हालांकि आधिकारिक कीमत का खुलासा Apple के लॉन्च इवेंट में ही होगा। इसलिए लॉन्च से पहले सामने आ रही कीमत और specifications को संभावित जानकारी के रूप में ही देखना चाहिए।

इस बार का लॉन्च Apple के लिए नेतृत्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। Tim Cook ने अगस्त 2026 में Apple CEO के पद से विदाई ली और John Ternus ने CEO की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे में सितंबर 2026 का यह इवेंट Ternus के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा product showcase है। अब बाजार यह देखना चाहता है कि नई लीडरशिप iPhone को किस दिशा में लेकर जाती है, खासकर Artificial Intelligence के दौर में।

AI अब स्मार्टफोन इंडस्ट्री का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बन चुका है। Google, Samsung और अन्य कंपनियां अपने फोन में AI features तेजी से जोड़ रही हैं। Apple के सामने चुनौती यह है कि वह iPhone की लोकप्रियता को AI के नए दौर में कैसे बनाए रखे। Siri और Apple Intelligence में बड़े सुधारों की उम्मीद की जा रही है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक Apple अपने AI-powered Siri को भी ज्यादा सक्षम बनाने पर काम कर रहा है।

यही कारण है कि 300 करोड़ iPhone का आंकड़ा केवल एक बिक्री उपलब्धि नहीं है। यह Apple के पास मौजूद विशाल user base को भी दिखाता है। अगर कंपनी इस करोड़ों-अरबों डिवाइस वाले ecosystem को AI, services और नए hardware के साथ सफलतापूर्वक जोड़ती है, तो iPhone आने वाले वर्षों में भी Apple की सबसे महत्वपूर्ण product category बना रह सकता है।

यहां एक और बात समझना जरूरी है कि “300 करोड़ iPhone बिके” और “300 करोड़ लोग iPhone इस्तेमाल कर रहे हैं” दोनों अलग बातें हैं। Apple का 3 अरब का आंकड़ा cumulative shipments का milestone है। इसमें लगभग दो दशकों के दौरान बेचे या शिप किए गए सभी iPhone शामिल हैं। पुराने फोन अब उपयोग में न होने के बावजूद वे कुल बिक्री के आंकड़े का हिस्सा बने रहते हैं।

19 साल के सफर को देखें तो iPhone ने केवल Apple को नहीं बदला, बल्कि पूरी मोबाइल इंडस्ट्री को बदल दिया। touchscreen smartphone से लेकर app economy, mobile photography, mobile payments, wireless accessories और अब AI तक, iPhone ने कई बदलावों को mainstream बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस नाम को लेकर Apple को शुरुआत में कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ा था, वही “iPhone” आज दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले technology product names में शामिल है। Cisco और Apple के बीच 2007 का विवाद कुछ ही हफ्तों में समझौते में बदल गया, लेकिन उसके बाद Apple ने इस नाम को अपनी सबसे बड़ी global product identity बना दिया।

अब 9 सितंबर 2026 का लॉन्च इवेंट इस कहानी का अगला अध्याय लिखने वाला है। अगर Apple वास्तव में foldable iPhone के साथ iPhone 18 Pro और Pro Max पेश करता है, तो कंपनी के लिए यह सिर्फ नई डिवाइस लॉन्च करने का मौका नहीं होगा, बल्कि यह साबित करने का भी अवसर होगा कि लगभग दो दशक पुराना iPhone brand अब भी smartphone industry को नई दिशा दे सकता है।

2007 में एक touchscreen phone के रूप में शुरू हुई कहानी 2025 तक 300 करोड़ cumulative shipments के आंकड़े तक पहुंच गई। अब 2026 में Apple के सामने अगली चुनौती है—AI, foldable technology और बदलती consumer expectations के बीच iPhone की अगली बड़ी छलांग क्या होगी? इसका जवाब Apple के 9 सितंबर के इवेंट में मिलने की उम्मीद है।

Apple New Siri AI: ChatGPT जैसे काम करेगी नई Siri, स्क्रीन भी समझेगी; इन iPhones में मिलेगा फीचर

http://Apple iPhone history और 300 करोड़ iPhone बिक्री

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