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धनतेरस पर सोना-चांदी सस्ता: 24 कैरेट गोल्ड ₹1.41 लाख पर, चांदी भी गिरी

धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट की खबर सामने आई है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को घरेलू बाजार में सोने और चांदी के भाव नीचे आए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के उपलब्ध भाव के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव करीब ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। चांदी की कीमत भी कम हुई और एक किलो चांदी का भाव करीब ₹1.81 लाख के आसपास पहुंच गया।

इस गिरावट से त्योहार पर गहने, सिक्के और चांदी के बर्तन खरीदने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, सोने-चांदी के अलग-अलग बाजारों और समय पर जारी भाव में अंतर हो सकता है। IBJA के एक अपडेट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹2,677 घटकर ₹1,41,452 प्रति 10 ग्राम बताया गया, जबकि एक अन्य अपडेट में 999 शुद्धता वाले सोने का भाव ₹3,106 घटकर ₹1,41,023 दर्ज किया गया। इसी तरह चांदी की गिरावट के आंकड़े भी अलग-अलग समय और बाजार के हिसाब से बदलते रहे।

इस खबर की एक खास बात यह भी है कि साल की शुरुआत से अब तक सोने और चांदी की चाल एक जैसी नहीं रही। सोने का भाव 2026 में कुल मिलाकर पिछले साल के अंत के मुकाबले ऊपर बताया गया है, जबकि चांदी में करीब ₹48 हजार से ₹49 हजार प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। इसलिए “इस साल ₹48 हजार सस्ता” होने की बात मुख्य रूप से चांदी के संदर्भ में समझनी चाहिए, सोने के लिए नहीं।

धनतेरस पर सोने का नया भाव कितना रहा?

IBJA के अनुसार, 6 नवंबर को 24 कैरेट यानी 999 शुद्धता वाले सोने के भाव में गिरावट आई। एक अपडेट में इसका भाव ₹1,41,452 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जो पिछले भाव ₹1,44,129 से ₹2,677 कम था। वहीं दूसरे बाजार अपडेट में 999 शुद्धता वाला सोना ₹1,41,023 प्रति 10 ग्राम बताया गया। इन दोनों आंकड़ों में अंतर अलग-अलग अपडेट और भाव जारी होने के समय की वजह से है।

सोने की शुद्धता के हिसाब से कीमत भी बदलती है। 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्ध माना जाता है, जबकि आभूषण बनाने के लिए आमतौर पर 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है। IBJA के एक अपडेट के मुताबिक, 22 कैरेट सोना ₹1,29,507 प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹1,06,089 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

Navjivan

सोने की शुद्धता प्रति 10 ग्राम भाव
24 कैरेट ₹1,41,452
22 कैरेट ₹1,29,507
18 कैरेट ₹1,06,089

ये IBJA के रिपोर्ट किए गए भाव हैं। स्थानीय ज्वेलरी दुकान पर ग्राहक को मिलने वाला अंतिम भाव इससे अलग हो सकता है, क्योंकि उसमें GST, मेकिंग चार्ज और अन्य लागू शुल्क जुड़ सकते हैं।

चांदी की कीमत में कितनी गिरावट आई?

धनतेरस के दिन चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। IBJA के एक बाजार अपडेट के अनुसार, चांदी का भाव ₹4,432 प्रति किलो कम होकर करीब ₹1.82 लाख के स्तर पर आया। वहीं 6 नवंबर के एक अन्य अपडेट में चांदी ₹5,437 गिरकर ₹1,81,863 प्रति किलो बताई गई। अलग-अलग समय पर जारी भाव में अंतर होने के कारण दोनों आंकड़ों को एक ही दर नहीं मानना चाहिए।

चांदी का इस्तेमाल केवल गहने बनाने में ही नहीं होता। इससे सिक्के, बर्तन, सजावटी सामान और कई औद्योगिक उत्पाद भी बनाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कुछ तकनीकी उपकरणों में भी चांदी का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसकी मांग पर घरेलू खरीदारी के साथ-साथ उद्योगों की जरूरत और अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है।

धनतेरस और दिवाली के दौरान चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, बर्तन और उपहार खरीदने की परंपरा है। ऐसे में कीमत में गिरावट से उन लोगों को फायदा हो सकता है जो त्योहार के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं।

इस साल चांदी करीब ₹48 हजार से ₹49 हजार तक सस्ती

इस खबर का एक महत्वपूर्ण पहलू चांदी की सालाना कीमत में आया बदलाव है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था। 6 नवंबर 2026 को यह लगभग ₹1.81 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। इस हिसाब से साल की शुरुआत के मुकाबले चांदी करीब ₹48 हजार से ₹49 हजार प्रति किलो तक सस्ती हुई है।

यह गिरावट उन लोगों के लिए खास है, जिन्होंने साल की शुरुआत में चांदी खरीदी थी। हालांकि, किसी निवेशक का वास्तविक फायदा या नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि उसने किस तारीख को, किस भाव पर और किस रूप में चांदी खरीदी थी। सिक्के, बर्तन और गहने खरीदने पर मेकिंग चार्ज और दूसरे खर्च भी जुड़ सकते हैं।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि साल के दौरान चांदी की कीमत हमेशा एक दिशा में नहीं चली। जनवरी में इसका भाव काफी ऊंचे स्तर तक पहुंचा था। इसके बाद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला और कीमतों में बड़ी गिरावट आई। इसलिए केवल आज की कीमत देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि आगे भी चांदी लगातार सस्ती होती रहेगी।

सोने के दाम इस साल घटे या बढ़े?

चांदी के उलट सोने की कीमत में साल की शुरुआत से कुल मिलाकर बढ़त दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख था, जबकि 6 नवंबर 2026 को यह लगभग ₹1.41 लाख के स्तर पर रहा। इस हिसाब से सोना साल की शुरुआत के मुकाबले करीब ₹8 हजार महंगा है।

इसलिए सोने और चांदी के बारे में दोनों को एक साथ सस्ता बताना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। धनतेरस के दिन दोनों धातुओं में एक दिन की गिरावट आई, लेकिन साल की शुरुआत से अब तक उनका प्रदर्शन अलग रहा है।

सोने को आमतौर पर निवेश और सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखा जाता है। वहीं चांदी की कीमत पर निवेश की मांग के साथ औद्योगिक इस्तेमाल का भी असर पड़ता है। इसी वजह से कई बार दोनों धातुओं की कीमतों में अलग-अलग दिशा में बदलाव देखने को मिलता है।

रिकॉर्ड स्तर से कितना नीचे आया सोना और चांदी?

2026 में सोने और चांदी दोनों ने ऊंचे स्तर देखे थे। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, MCX पर सोने का रिकॉर्ड स्तर करीब ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी का रिकॉर्ड स्तर लगभग ₹4.20 लाख प्रति किलो बताया गया। 6 नवंबर को उपलब्ध वायदा बाजार के भाव इन स्तरों से काफी नीचे थे।

इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह समझना जरूरी है कि रिकॉर्ड हाई और आज के भाव अलग-अलग ट्रेडिंग सत्रों के हो सकते हैं। साथ ही MCX का वायदा भाव और IBJA का बुलियन भाव एक जैसे नहीं होते। इसलिए रिकॉर्ड स्तर से गिरावट का हिसाब निकालते समय एक ही बाजार और एक ही प्रकार के भाव की तुलना करनी चाहिए।

सोने और चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी उठापटक से निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि कीमती धातुओं में भी जोखिम होता है। सोना हमेशा बढ़ेगा या चांदी हमेशा सुरक्षित निवेश साबित होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

सोना-चांदी सस्ता होने के पीछे क्या वजह रही?

धनतेरस के दिन कीमतों में गिरावट के पीछे बाजार में मुनाफावसूली को एक वजह बताया गया। जब किसी धातु का भाव कुछ समय में तेजी से बढ़ जाता है, तो कई निवेशक मुनाफा निकालने के लिए अपनी होल्डिंग बेचते हैं। इससे बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है और कीमत नीचे आ सकती है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल, डॉलर की मजबूती या कमजोरी, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और रुपये की विनिमय दर भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती है। भारत में सोने और चांदी का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय भाव में बदलाव का असर भारतीय बाजार तक पहुंचता है।

रुपया मजबूत होने पर आयात की लागत कम हो सकती है, जबकि रुपये में कमजोरी से घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने या आपूर्ति प्रभावित होने पर भी कीमतें बदल सकती हैं।

इस दिन की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। बाजार में कई कारक एक साथ काम करते हैं और उनकी वजह से सोने-चांदी के भाव में तेजी या गिरावट आती है।

MCX पर सोने और चांदी का कारोबार भी कमजोर रहा

भारत में सोने और चांदी के भाव जानने के लिए IBJA के अलावा मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX के वायदा भाव भी देखे जाते हैं। MCX पर सोने और चांदी के भविष्य के सौदों का कारोबार होता है। यहां कीमतें बाजार खुलने के दौरान लगातार बदलती रहती हैं।

6 नवंबर के एक बाजार अपडेट के मुताबिक, MCX पर सोने का 4 दिसंबर 2026 वाला वायदा अनुबंध करीब 1.30% गिरकर ₹1,42,218 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं दिसंबर का चांदी वायदा अनुबंध लगभग 1.05% गिरकर ₹1,85,181 प्रति किलो पर था।

राष्ट्र प्रेस

एक दूसरे अपडेट में MCX गोल्ड फ्यूचर ₹1,41,667 प्रति 10 ग्राम और दिसंबर सिल्वर फ्यूचर ₹1,84,050 प्रति किलो तक आने की जानकारी दी गई। यह अंतर कारोबार के अलग-अलग समय पर भाव बदलने के कारण हो सकता है।

यहां खरीदारों को ध्यान रखना चाहिए कि MCX का वायदा भाव सीधे ज्वेलरी दुकान का बिक्री भाव नहीं होता। वायदा बाजार में भविष्य की तारीख के लिए सौदे किए जाते हैं, जबकि ज्वेलरी दुकानों पर सोने की शुद्धता, स्थानीय बाजार, टैक्स और मेकिंग चार्ज के अनुसार कीमत तय होती है।

अलग-अलग शहरों में सोने का भाव अलग क्यों होता है?

कई बार ग्राहक देखते हैं कि दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर, पटना और दूसरे शहरों में सोने के भाव एक जैसे नहीं हैं। इसका कारण स्थानीय टैक्स और कारोबार की परिस्थितियां हो सकती हैं। ज्वेलर्स अपने यहां लागू लागत, परिवहन, स्थानीय मांग और दूसरे खर्चों को ध्यान में रखकर कीमत बताते हैं।

इसके अलावा ज्वेलरी की कीमत सोने की शुद्धता पर भी निर्भर करती है। 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है, लेकिन यह सामान्य आभूषण बनाने के लिए बहुत नरम माना जाता है। इसलिए गहने बनाने में अक्सर 22 कैरेट या 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है।

एक ही कैरेट के सोने के गहनों की कीमत भी अलग हो सकती है, क्योंकि डिजाइन और मेकिंग चार्ज अलग-अलग होते हैं। मशीन से बने साधारण गहनों और बारीक हाथ की कारीगरी वाले गहनों की लागत एक जैसी नहीं होती।

इसलिए धनतेरस पर खरीदारी करने से पहले केवल अखबार या इंटरनेट पर दिख रहे भाव को अंतिम कीमत नहीं मानना चाहिए। अपने शहर के दो-तीन भरोसेमंद ज्वेलर्स से रेट पूछना और बिल में सभी शुल्क देखना बेहतर रहता है।

धनतेरस पर सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस पर सोना खरीदना कई परिवारों में शुभ माना जाता है। लोग इस दिन सोने के सिक्के, गहने और छोटी वस्तुएं खरीदते हैं। लेकिन खरीदारी के समय भाव के साथ-साथ शुद्धता और बिल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • हॉलमार्क जरूर देखें: सोने के आभूषण पर BIS हॉलमार्क और HUID नंबर की जांच करें। इससे उसकी शुद्धता की पहचान में मदद मिलती है।

  • कैरेट की जानकारी लें: खरीदने से पहले पता करें कि गहना 22 कैरेट है या 18 कैरेट। केवल रंग देखकर शुद्धता का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।

  • मेकिंग चार्ज पूछें: एक ही वजन के दो गहनों की कीमत अलग हो सकती है, क्योंकि उनकी बनावट और मेकिंग चार्ज अलग होते हैं।

  • पक्का बिल लें: बिल में सोने का वजन, कैरेट, प्रति ग्राम दर, मेकिंग चार्ज और टैक्स की जानकारी होनी चाहिए।

  • बायबैक नियम समझें: भविष्य में गहना बेचने या बदलने पर ज्वेलर कितनी कटौती करेगा, यह पहले ही पूछ लें।

सोने के सिक्के खरीदने वालों को भी शुद्धता, वजन और प्रमाणपत्र की जानकारी लेनी चाहिए। पैकेट बंद सिक्का खरीदते समय उसकी सील और बिल संभालकर रखना उपयोगी होता है।

चांदी के सिक्के और बर्तन खरीदने वालों के लिए जरूरी सलाह

धनतेरस पर चांदी के सिक्के, पूजा के बर्तन और सजावटी वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता और वजन की पुष्टि करनी चाहिए।

चांदी के उत्पादों पर 999 या 925 जैसे शुद्धता के अंक लिखे हो सकते हैं। 999 का अर्थ लगभग 99.9% शुद्ध चांदी होता है, जबकि 925 का मतलब 92.5% चांदी और बाकी दूसरी धातुओं का मिश्रण होता है। आभूषणों में मजबूती के लिए मिश्रधातु का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिक्के और बर्तन खरीदते समय यह भी देखना चाहिए कि कीमत केवल चांदी के वजन के आधार पर है या उसमें डिजाइन और कारीगरी का शुल्क भी शामिल है। कई सजावटी वस्तुओं में मेकिंग चार्ज काफी अलग हो सकता है।

अगर चांदी निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं, तो खरीद और बिक्री के बीच का अंतर भी समझें। दुकानदार से पूछें कि भविष्य में उसी उत्पाद को वापस बेचने पर किस आधार पर कीमत मिलेगी। केवल कम भाव देखकर खरीदारी करना पर्याप्त नहीं है।

क्या धनतेरस पर सोना खरीदना सही रहेगा?

इस सवाल का जवाब हर खरीदार के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। अगर कोई व्यक्ति परंपरा के अनुसार गहना या सिक्का खरीदना चाहता है, तो उसे अपने बजट और जरूरत के हिसाब से खरीदारी करनी चाहिए। लेकिन अगर उद्देश्य निवेश है, तो केवल त्योहार के दिन भाव गिरने के कारण जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए।

सोने और चांदी दोनों की कीमतें कम समय में तेजी से बदल सकती हैं। एक दिन की गिरावट के बाद अगले कारोबारी सत्र में भाव फिर बढ़ भी सकते हैं। इसी तरह गिरावट आगे भी जारी रह सकती है। इसलिए बाजार की अगली चाल का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।

लंबी अवधि के निवेश के लिए खरीदारी करने वाले लोगों को यह देखना चाहिए कि उनके कुल निवेश में कीमती धातुओं का कितना हिस्सा होना चाहिए। अपनी पूरी बचत एक ही धातु में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति, जरूरत और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार लेना चाहिए।

आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों पर किन बातों का असर होगा?

आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, रुपये की कीमत, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर सोने-चांदी के भाव निर्भर कर सकते हैं। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक अक्सर सोने की ओर रुख करते हैं, जबकि ब्याज दरों और डॉलर में बदलाव से कीमती धातुओं पर दबाव भी बन सकता है।

चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग का अतिरिक्त असर होता है। सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उद्योगों में इसकी खपत बढ़ने या घटने से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सोने और चांदी की कीमतों में एक जैसी तेजी या गिरावट जरूरी नहीं है।

धनतेरस पर आई गिरावट से खरीदारी करने वालों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे कीमतों के लंबे समय तक नीचे रहने का संकेत नहीं मानना चाहिए। खरीदारों को अपने शहर का ताजा भाव, शुद्धता और कुल बिल देखकर ही फैसला लेना चाहिए।

सोना ₹2,530 सस्ता होकर ₹1.38 लाख पर आया, चांदी ₹1.80 लाख प्रति किलो

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