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Mr. Ashish

मोबाइल में ये 3 सेटिंग्स ऑन करें, साइबर ठगी से बचें

मोबाइल आज सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रहा, बल्कि बैंकिंग, सोशल मीडिया, ईमेल और निजी दस्तावेजों तक की चाबी बन चुका है। ऐसे में मोबाइल की सुरक्षा से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी बड़ी धोखाधड़ी का कारण बन सकती है। साइबर अपराधी खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं। वे कॉल या मैसेज के जरिए खुद को बैंक अधिकारी, रिश्तेदार या सरकारी कर्मचारी बताकर ओटीपी और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर आप अपने मोबाइल में सिर्फ तीन जरूरी सेटिंग्स ऑन कर लें, तो ऐसी कई ठगी से बचा जा सकता है।

सबसे पहली और अहम सेटिंग है पास-की या बायोमेट्रिक लॉगिन का इस्तेमाल। आज लगभग हर स्मार्टफोन में फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या पास-की का विकल्प मौजूद है। अधिकतर लोग आसान पासवर्ड या पिन डालकर काम चला लेते हैं, लेकिन यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पास-की तकनीक आपके डिवाइस को एन्क्रिप्टेड पहचान देती है, जिससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपकी अनुमति के बिना फोन अनलॉक नहीं कर सकता। यदि आपका मोबाइल चोरी हो जाए या खो जाए, तब भी आपकी बैंकिंग ऐप, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बायोमेट्रिक लॉगिन सामान्य पासवर्ड की तुलना में कई गुना सुरक्षित है, क्योंकि इसे हैक करना बेहद मुश्किल होता है।

दूसरी महत्वपूर्ण सेटिंग है अनजान और स्पैम कॉल्स को साइलेंट या ब्लॉक करना। साइबर अपराधी बार-बार कॉल करके लोगों को भ्रमित करते हैं। कई बार वे खुद को पुलिस, कूरियर कंपनी या बैंक कर्मचारी बताकर डर पैदा करते हैं। ऐसे में यदि आपके फोन में ‘Silence Unknown Callers’ या ‘Block Unknown Numbers’ फीचर ऑन है, तो सिर्फ सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स की ही रिंग बजेगी। बाकी कॉल्स अपने आप साइलेंट हो जाएंगी या सीधे ब्लॉक हो जाएंगी। व्हाट्सएप में भी ‘Silence Unknown Callers’ विकल्प मौजूद है, जिसे ऑन करने से अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स का शोर कम हो जाता है। इससे मानसिक तनाव भी घटता है और धोखाधड़ी का खतरा भी कम होता है।

तीसरी जरूरी सेटिंग है ‘डिवाइस ट्रैकिंग’ या ‘फाइंड माई डिवाइस’ फीचर। एंड्रॉयड में यह गूगल के जरिए और आईफोन में ‘Find My iPhone’ के जरिए काम करता है। इस फीचर को ऑन करने से आप अपने खोए या चोरी हुए फोन को ट्रैक कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर फोन को रिमोटली लॉक या डेटा डिलीट भी किया जा सकता है। इससे आपकी निजी जानकारी गलत हाथों में जाने से बच जाती है। साथ ही, यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत रिपोर्ट कर सकते हैं।

इन तीन सेटिंग्स के अलावा कुछ और सावधानियां भी जरूरी हैं। मोबाइल में हमेशा लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल रखें, क्योंकि अपडेट में सुरक्षा संबंधी सुधार शामिल होते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। बैंक या सरकारी एजेंसी कभी भी फोन पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।

आज डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में मोबाइल सुरक्षा और भी अहम हो जाती है। साइबर ठग नई-नई तरकीबें अपनाते हैं, लेकिन यदि आप तकनीक को समझकर इस्तेमाल करें, तो खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। मोबाइल की सुरक्षा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। परिवार के बुजुर्गों को भी इन सेटिंग्स के बारे में जरूर बताएं। बच्चों को भी सिखाएं कि अनजान कॉल या मैसेज पर प्रतिक्रिया न दें। यदि कभी ठगी का शिकार होने का संदेह हो, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें।

मोबाइल की ये तीन सेटिंग्स ऑन करके आप न सिर्फ खुद को, बल्कि अपने परिवार को भी सुरक्षित रख सकते हैं। डिजिटल दुनिया में सतर्कता और समझदारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

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