अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा घोटाले को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस बीच अभिनेता Mukesh Khanna ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर आने वाले चढ़ावे में कथित गड़बड़ी करते हैं, वे केवल चोर या डाकू नहीं बल्कि उनसे भी बड़े अपराधी हैं, क्योंकि वे श्रद्धालुओं के विश्वास और भगवान दोनों को ठग रहे हैं।
राम मंदिर से जुड़े इस कथित घोटाले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद हुई है। मामला फिलहाल जांच के अधीन है और एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
मुकेश खन्ना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मंदिरों में श्रद्धालु जो नकद या गहनों का चढ़ावा चढ़ाते हैं, वह हमेशा भगवान तक नहीं पहुंचता और बीच में ही कथित रूप से उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं होती रहेंगी तो लोगों का धार्मिक संस्थाओं पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने आगे लिखा कि पहले वे कहते थे कि देश में चोर, डाकू और बेईमान भरे पड़े हैं, लेकिन अब जो लोग भगवान के नाम पर आने वाले चढ़ावे का कथित दुरुपयोग करते हैं, वे इन सबसे भी ऊपर हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है।
अपने संदेश में मुकेश खन्ना ने श्रद्धालुओं से अपील भी की कि वे मंदिरों में नकद और गहनों का चढ़ावा देने के बजाय जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे वैकल्पिक तरीकों पर विचार करें। यह उनकी व्यक्तिगत राय है, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से साझा किया।
दूसरी ओर, पुलिस जांच में कथित रूप से सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आठों आरोपी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने से पहले आरोप सिद्ध नहीं माने जाते।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितता कितने समय से चल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही हो सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच को प्राथमिकता दी है। विशेष जांच दल गठित किया गया और प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। सरकार का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
धार्मिक संस्थानों में आने वाला दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए ऐसे मामलों में पारदर्शिता, नियमित ऑडिट और जवाबदेही की आवश्यकता पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड और स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था से ऐसी घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर मुकेश खन्ना की टिप्पणी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही दिया जाता है। इसलिए फिलहाल इस मामले में दर्ज आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
धार्मिक स्थलों पर आने वाले दान का उपयोग आमतौर पर मंदिर प्रबंधन, धार्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवा और अन्य व्यवस्थाओं के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो उनका निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांचा जाना आवश्यक होता है।
राम मंदिर से जुड़े इस कथित चढ़ावा घोटाले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, अदालत की कार्यवाही और आधिकारिक बयान इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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