भारत में करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट से जुड़ी UPI यानी Unified Payments Interface व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव फिलहाल टल सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा बड़े merchant UPI transactions पर लागू होने वाला 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) अब फेस्टिव सीजन के बाद तक टालने पर विचार किया जा रहा है। संभावित नई तारीख जनवरी 2027 बताई जा रही है।
इस संभावित बदलाव की सबसे बड़ी वजह फेस्टिव सीजन माना जा रहा है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश में खरीदारी, ऑनलाइन शॉपिंग, यात्रा, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे कारोबार में डिजिटल पेमेंट काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में UPI के payment ecosystem में नया शुल्क लागू करने से merchants और payment companies को अपने systems और accounting processes में बदलाव करने के लिए कम समय मिल सकता है।
हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। Reuters और Indian Express की रिपोर्टों के अनुसार सरकार और संबंधित stakeholders 15 अक्टूबर की rollout date को जनवरी 2027 तक आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। अंतिम निर्णय National Payments Corporation of India यानी NPCI की ओर से आना बाकी है।
इसका मतलब फिलहाल आम ग्राहक के लिए UPI से पैसे भेजने या दुकान पर भुगतान करने पर कोई नया 0.4% शुल्क अपने बैंक खाते से कटने की बात नहीं है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला था?
सितंबर 2026 में UPI के लिए नया MDR framework घोषित किया गया था। इसके तहत चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M transactions, जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक है, पर 0.4% MDR लागू होना था।
उदाहरण के लिए अगर कोई eligible merchant UPI के जरिए ₹10,000 का payment स्वीकार करता है तो 0.4% के हिसाब से MDR ₹40 बनता है।
₹20,000 के transaction पर यह राशि ₹80 और ₹50,000 पर ₹200 होती।
₹75,000 या उससे ज्यादा के eligible transaction पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई थी। यानी 0.4% calculation ₹300 से ऊपर जाने पर भी charge ₹300 से अधिक नहीं होना था।
लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि MDR ग्राहक से लिया जाने वाला सामान्य UPI transaction charge नहीं है। यह merchant-side payment processing fee है।
अब जनवरी 2027 तक टलने की बात क्यों?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार सरकार इस नए MDR framework की implementation date को फेस्टिव सीजन के कारण आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।
Indian Express ने सूत्रों के हवाले से बताया कि rollout को 1 जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है। Reuters ने भी रिपोर्ट किया कि सरकार 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए 0.4% fee framework को postpone करने पर विचार कर रही है।
फेस्टिव सीजन में UPI का इस्तेमाल काफी बढ़ जाता है। Diwali, Dussehra, shopping sales, travel और online commerce के दौरान लाखों merchants payment systems पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे समय में नया MDR लागू होने से merchants, banks, payment aggregators और UPI apps को नए settlement और accounting systems के अनुसार adjustments करने पड़ सकते हैं।
संभावित delay से payment ecosystem को ज्यादा समय मिलेगा।
लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि 1 जनवरी 2027 की तारीख निश्चित हो चुकी है।
क्या आम लोगों के लिए UPI अभी भी फ्री रहेगा?
हां, मौजूदा framework के अनुसार आम UPI user से transaction fee लेने की बात नहीं है।
वित्त मंत्रालय ने सितंबर में स्पष्ट किया था कि Person-to-Person यानी P2P transactions पूरी तरह free रहेंगे, चाहे transaction amount कितना भी हो।
इसके अलावा ₹2,000 तक के merchant transactions भी इस नए 0.4% MDR के दायरे में नहीं आते।
सरकार के अनुसार लगभग 96% P2M transactions नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
इसलिए अगर आप किसी दोस्त को ₹10,000 UPI से भेजते हैं, तो इस नए MDR के कारण आपसे 0.4% charge नहीं लिया जाना था।
इसी तरह ₹500 की दुकान की खरीदारी या ₹1,500 का payment करने पर भी proposed 0.4% MDR लागू नहीं होता।
UPI पर चार्ज कौन देगा?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
MDR का भुगतान merchant-side पर होता है।
यानी अगर कोई eligible बड़ा merchant ₹10,000 का UPI payment स्वीकार करता है, तो proposed framework के अनुसार 0.4% MDR ecosystem में distribute होना था।
ग्राहक के बैंक खाते से ₹10,040 काटने का नियम नहीं था।
वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा था कि banks को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि merchant नए MDR को customer पर अलग से charge के रूप में pass न करें।
इसलिए अगर कोई दुकान कहती है कि “UPI से payment करने पर 0.4% extra देना पड़ेगा”, तो इस proposed framework को समझना जरूरी है।
₹2,000 से ज्यादा payment पर क्या होगा?
अगर proposed MDR framework जनवरी 2027 में लागू होता है, तो eligible P2M transactions का calculation इस तरह समझ सकते हैं।
मान लीजिए किसी ग्राहक ने किसी बड़े eligible merchant को:
₹2,500 का payment किया।
0.4% = ₹10 MDR।
₹5,000 का payment किया।
0.4% = ₹20 MDR।
₹10,000 का payment किया।
0.4% = ₹40 MDR।
₹50,000 का payment किया।
0.4% = ₹200 MDR।
₹75,000 का payment किया।
0.4% = ₹300 MDR।
और ₹1 लाख के transaction पर 0.4% mathematically ₹400 होता, लेकिन proposed cap के कारण MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।
ध्यान रहे, ये calculations merchant-side MDR के हैं, customer से सीधे वसूले जाने वाले UPI transaction fee के नहीं।
छोटे दुकानदारों को राहत क्यों?
नए framework में छोटे merchants को भी राहत दी गई है।
सरकार के अनुसार छोटे merchants के लिए zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। खासकर ऐसे छोटे merchants जो महीने में UPI QR के जरिए सीमित राशि प्राप्त करते हैं, उन्हें proposed MDR से छूट दी गई है।
रिपोर्टों में ₹1 लाख तक के monthly UPI receipts वाले छोटे merchants के लिए exemption का उल्लेख है।
इसका उद्देश्य यह है कि छोटे किराना दुकानदार, छोटे service providers और छोटे कारोबारियों पर digital payment स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत न आए।
भारत में UPI की सफलता का एक बड़ा कारण यही रहा है कि छोटी दुकान से लेकर बड़ी e-commerce company तक QR code payment आसानी से स्वीकार किया जा सकता है।
अगर छोटे कारोबारियों पर हर छोटे transaction का charge लगने लगे तो digital payment adoption पर असर पड़ सकता है।
96% merchant transactions पर असर क्यों नहीं?
वित्त मंत्रालय ने सितंबर में बताया था कि लगभग 96% Person-to-Merchant UPI transactions नए MDR framework से unaffected रहेंगे।
इसका एक कारण ₹2,000 की threshold है।
भारत में UPI का बहुत बड़ा हिस्सा छोटे-value payments का है। चाय, किराना, सब्जी, भोजन, local transport और रोजमर्रा की छोटी खरीदारी में अक्सर ₹2,000 से कम के transactions होते हैं।
इसलिए नया framework लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में छोटे payments zero-MDR category में रहेंगे।
इसके अलावा P2P payments अलग से पूरी तरह free रहने हैं।
क्या दोस्त को ₹10,000 भेजने पर 0.4% लगेगा?
नहीं।
अगर आप अपने दोस्त, भाई, बहन, माता-पिता या किसी दूसरे व्यक्ति को ₹10,000 UPI से भेजते हैं, तो proposed MDR framework के तहत 0.4% charge नहीं लगना था।
क्योंकि यह Person-to-Person transaction है।
सरकार ने साफ किया है कि P2P transactions amount की परवाह किए बिना free रहेंगे।
इसलिए “15 अक्टूबर से UPI पर हर payment पर 0.4% charge लगेगा” कहना गलत होगा।
सही बात यह है कि प्रस्तावित MDR केवल specified merchant transactions पर लागू होना था।
क्या ₹2,000 से कम payment हमेशा free रहेगा?
नए framework के संदर्भ में सामान्य eligible merchant payment ₹2,000 तक zero-MDR category में है।
इसका मतलब है कि ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का सामान्य eligible merchant UPI payment MDR के दायरे में नहीं आता।
लेकिन अलग payment instruments और विशेष categories के अपने rules हो सकते हैं। इसलिए हर UPI transaction को एक ही category मानना सही नहीं होगा।
₹5 का flat charge भी प्रस्तावित था
नए framework में कुछ specific sectors के लिए अलग flat MDR structure भी रखा गया था।
रिपोर्टों के अनुसार railway ticketing, fuel, telecom, insurance, utility bills, कुछ government payments और अन्य specified categories में ₹5 तक का flat MDR निर्धारित किया गया था, बजाय सामान्य 0.4% rate के।
इसका उद्देश्य उन sectors में payment processing cost को एक सीमित राशि तक रखना था।
लेकिन यहां भी merchant-side और customer-side charges में फर्क समझना जरूरी है।
यह MDR framework payment ecosystem के participants के बीच charge distribution से जुड़ा था।
MDR आखिर होता क्या है?
MDR का पूरा नाम Merchant Discount Rate है।
जब ग्राहक किसी merchant को digital payment करता है, तो payment processing ecosystem में banks, payment providers और अन्य participants की भूमिका होती है।
MDR उस payment को process करने की लागत/commission structure से जुड़ा शुल्क है।
Debit और credit card transactions में लंबे समय से merchant-side MDR व्यवस्था मौजूद है।
UPI ने लंबे समय तक zero-MDR model के कारण तेजी से adoption हासिल किया।
अब proposed 0.4% framework इसी digital payment ecosystem को लंबे समय तक sustainable बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सरकार UPI पर MDR क्यों ला रही है?
UPI transactions की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी है।
लेकिन इतने बड़े payment network को operate करने के लिए banks, payment apps, technology infrastructure, fraud monitoring, cybersecurity और customer support पर लगातार खर्च होता है।
सरकार के अनुसार proposed MDR का उद्देश्य UPI ecosystem की long-term sustainability, technological advancement और resilience को support करना है।
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR कोई government tax नहीं है।
यह payment ecosystem के participants के बीच distributed fee है।
क्या UPI के लिए subsidy भी जारी रहेगी?
UPI के zero-MDR model को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए सरकार ने banks और payment providers को incentives और financial support की व्यवस्था भी की है।
अब proposed MDR framework के साथ ecosystem की revenue structure को बदलने की कोशिश की जा रही है।
इस बदलाव को लेकर payment companies और merchants के बीच अलग-अलग राय हैं।
Payment companies का तर्क है कि UPI infrastructure को maintain करने के लिए sustainable revenue model जरूरी है।
वहीं merchants चाहते हैं कि digital payments की लागत इतनी न बढ़े कि वे customers को cash या दूसरे payment methods की ओर भेजने लगें।
Festive season में delay से किसे फायदा?
अगर MDR implementation वास्तव में जनवरी 2027 तक टलता है, तो इसका सबसे तत्काल फायदा festive-season merchants और payment ecosystem को होगा।
अक्टूबर-दिसंबर भारत में shopping और consumption का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।
इस दौरान:
- ऑनलाइन shopping बढ़ती है।
- Retail sales बढ़ती हैं।
- Restaurants में payments बढ़ते हैं।
- Travel bookings बढ़ती हैं।
- Hotel और hospitality payments बढ़ते हैं।
- Jewellery और electronics की खरीदारी बढ़ती है।
- छोटे दुकानदारों के QR payments बढ़ते हैं।
ऐसे समय में नया payment charge structure लागू करने के बजाय existing system को जारी रखने से merchants को operational uncertainty से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।
यही कारण है कि संभावित postponement को festive season से जोड़कर देखा जा रहा है।
Payment companies के लिए इसका क्या मतलब?
UPI apps और payment companies के लिए MDR का introduction revenue model में बड़ा बदलाव हो सकता है।
लेकिन अगर implementation जनवरी तक टलती है तो payment companies को नए framework के लिए systems तैयार करने, settlement arrangements और merchant communication को finalise करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
ताजा रिपोर्टों में payment aggregators और sponsor banks के बीच MDR revenue share को लेकर negotiations का भी उल्लेख है।
यानी सिर्फ तारीख बदलने का मामला नहीं है, बल्कि UPI ecosystem में revenue किस तरह बांटा जाएगा, यह भी महत्वपूर्ण विषय है।
PhonePe और Google Pay पर क्या असर होगा?
UPI ecosystem में PhonePe और Google Pay जैसे बड़े payment apps की बड़ी हिस्सेदारी है।
इसलिए MDR framework में बदलाव इन कंपनियों और दूसरे payment providers के business models को प्रभावित कर सकता है।
Reuters के अनुसार postponement की खबर सामने आने के बाद कुछ listed payment-related companies के shares में गिरावट देखी गई, क्योंकि investors नए MDR से संभावित revenue opportunity को लेकर उम्मीद कर रहे थे।
हालांकि share price में movement को केवल UPI MDR के एक कारण से जोड़ना सावधानी मांगता है।
Stock market में कई factors एक साथ काम करते हैं।
RBI Governor ने क्या कहा?
नए UPI MDR को लेकर concerns के बीच RBI Governor Sanjay Malhotra ने संकेत दिया था कि proposed fee से UPI transaction volumes पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
सरकार का भी कहना है कि अधिकांश transactions नए MDR से बाहर रहेंगे।
इसका मतलब policy makers का अनुमान है कि 0.4% MDR मुख्य रूप से बड़े merchant payments को प्रभावित करेगा, जबकि छोटे और person-to-person payments largely unchanged रहेंगे।
क्या दुकानदार customer से extra पैसा ले सकता है?
Proposed framework के अनुसार banks को merchants द्वारा MDR को customer पर pass करने से रोकने की सलाह दी गई है।
इसलिए अगर ₹5,000 का सामान है तो सिर्फ UPI से भुगतान करने के कारण ग्राहक से ₹5,020 या ₹5,040 मांगना इस framework की भावना के अनुरूप नहीं होगा।
ग्राहकों को ऐसे मामलों में payment receipt और दुकान की मांग का record रखना चाहिए।
अगर कोई merchant अलग से UPI fee मांगता है, तो payment app या संबंधित bank की complaint mechanism के जरिए जानकारी दी जा सकती है।
क्या 15 अक्टूबर को UPI बंद या महंगा हो जाएगा?
नहीं।
यह एक बड़ा भ्रम है।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित बदलाव UPI system को बंद करने या सभी users से transaction fee लेने से संबंधित नहीं था।
यह चुनिंदा merchant payments पर MDR framework से जुड़ा था।
और अब उस framework की implementation date भी संभावित रूप से जनवरी 2027 तक आगे बढ़ सकती है।
इसलिए “15 अक्टूबर से UPI बंद हो जाएगा” या “हर UPI payment पर 0.4% लगेगा” जैसी सोशल मीडिया पोस्ट से बचना चाहिए।
अगर जनवरी 2027 में लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
अगर सरकार/NPCI अंतिम रूप से implementation को जनवरी 2027 तक टालकर फिर framework लागू करते हैं, तो मुख्य नियम broadly वही रहने की संभावना है जो सितंबर में घोषित किए गए थे।
यानी:
₹2,000 तक के eligible merchant payments: MDR नहीं।
₹2,000 से ऊपर के specified merchant payments: 0.4% MDR।
₹75,000 या ज्यादा: अधिकतम ₹300 MDR।
P2P transactions: free।
Eligible small merchants: zero-MDR protection।
Customer: proposed MDR सीधे customer से नहीं लिया जाना है।
लेकिन final implementation date और किसी भी संशोधन की पुष्टि official notification के बाद ही होगी।
UPI का भविष्य क्या होगा?
UPI भारत के digital payment ecosystem का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुका है।
August 2026 में UPI ने करीब 24 billion transactions process किए थे, जिनकी value लगभग $311 billion बताई गई।
इतने बड़े payment network के लिए cybersecurity, fraud prevention, uptime, infrastructure और customer support की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
इसलिए future में UPI के लिए sustainable financial model बनाना policy makers के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
एक तरफ सरकार चाहती है कि छोटे व्यापारी और सामान्य ग्राहक digital payments से जुड़े रहें।
दूसरी तरफ payment ecosystem को लंबे समय तक financially sustainable भी बनाना है।
MDR framework इसी balance को बनाने की कोशिश है।
आम UPI यूजर को अभी क्या करना चाहिए?
अगर आप सामान्य UPI user हैं तो फिलहाल किसी बदलाव के कारण panic करने की जरूरत नहीं है।
अपने UPI app का इस्तेमाल सामान्य तरीके से कर सकते हैं।
ध्यान रखें:
- UPI PIN किसी के साथ share न करें।
- QR scan करते समय recipient का नाम verify करें।
- पैसे receive करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
- Unknown payment request accept न करें।
- Cashback या reward के नाम पर suspicious links पर क्लिक न करें।
- किसी अनजान व्यक्ति को screen-sharing या remote-access न दें।
- UPI से बड़ी रकम भेजने से पहले account और recipient details दोबारा check करें।
- Fraud होने पर तुरंत bank और cybercrime authorities को report करें।
UPI free होने का मतलब यह नहीं कि fraud का risk खत्म हो गया।
Digital payment में सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय user awareness है।
क्या फेस्टिव सीजन में UPI पूरी तरह फ्री रहेगा?
ताजा रिपोर्टों के आधार पर संभावना है कि 15 अक्टूबर की नई MDR व्यवस्था festive season के दौरान लागू नहीं होगी, अगर postponement को अंतिम मंजूरी मिल जाती है।
लेकिन यहां “फ्री” का अर्थ स्पष्ट होना चाहिए।
UPI users के लिए वैसे भी proposed framework में direct transaction fee नहीं थी। Delay का मुख्य असर merchant-side MDR की implementation पर होगा।
इसलिए headline में “फेस्टिव सीजन में UPI पेमेंट फ्री” लिखने से यह गलत impression नहीं बनना चाहिए कि सरकार ने किसी existing customer fee को वापस लिया है।
सही बात यह है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला proposed merchant MDR अगर टलता है, तो festive season में उसकी नई merchant-side लागत लागू नहीं होगी।
अंतिम फैसला कब आएगा?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार implementation को जनवरी 2027 तक टालने का विचार चल रहा है, लेकिन final decision अभी pending है।
Reuters ने भी बताया है कि अंतिम फैसला NPCI की ओर से होना बाकी है।
इसलिए जब तक official notification नहीं आता, 1 जनवरी 2027 को confirmed implementation date मानना जल्दबाजी होगी।
यदि तारीख बदली जाती है, तो NPCI, Department of Financial Services या संबंधित सरकारी संस्थाओं की आधिकारिक सूचना सबसे विश्वसनीय आधार होगी।
UPI पर 0.4% MDR लागू होने की 15 अक्टूबर 2026 की प्रस्तावित तारीख फिलहाल टल सकती है। ताजा रिपोर्टों में इसे festive season के बाद 1 जनवरी 2027 तक आगे बढ़ाने पर विचार की बात कही गई है।



