दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के शेयरों में 29 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान करीब 13% तक टूट गए। इस गिरावट से Alphabet के बाजार मूल्य में लगभग 500 अरब डॉलर यानी करीब ₹48 लाख करोड़ की कमी आई। कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर तेजी से बढ़ता खर्च, कमजोर पड़ती सर्च विज्ञापन वृद्धि और कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव है।
Alphabet ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में 25% की सालाना राजस्व वृद्धि दर्ज की, लेकिन कंपनी का मुनाफा करीब 25% घट गया। इसके अलावा, कंपनी का फ्री कैश फ्लो 9.1 अरब डॉलर नेगेटिव रहा। कंपनी ने डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। निवेशकों को अब यह चिंता सता रही है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद AI से पर्याप्त कमाई कब शुरू होगी।
यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Alphabet को लंबे समय से टेक्नोलॉजी और डिजिटल विज्ञापन कारोबार की मजबूत कंपनियों में गिना जाता रहा है। गूगल सर्च, YouTube, Android, Google Cloud और Gemini जैसे उत्पादों के बावजूद बाजार ने इस बार कंपनी के खर्च और भविष्य की कमाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
Alphabet के शेयर में कितनी बड़ी गिरावट आई?
Alphabet के शेयर 29 अक्टूबर को अमेरिकी बाजार में कारोबार के दौरान करीब 13% तक गिर गए। कुछ रिपोर्टों में इंट्राडे गिरावट 13.4% से 13.7% तक बताई गई है। Associated Press के मुताबिक, गुरुवार को शेयर करीब 12.6% नीचे रहे। यह कंपनी के सार्वजनिक रूप से कारोबार शुरू करने के बाद दो दशकों से अधिक समय में सबसे खराब कारोबारी दिनों में से एक था।
शेयर की कीमत में इतनी बड़ी गिरावट का असर कंपनी के कुल बाजार मूल्य यानी मार्केट कैप पर भी पड़ा। अलग-अलग बाजार रिपोर्टों में गिरावट के समय और गणना के आधार पर करीब 475 अरब से 511 अरब डॉलर तक के मार्केट वैल्यू नुकसान का अनुमान दिया गया। कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा लगभग 482 अरब डॉलर बताया गया है।
भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹45 लाख करोड़ से ₹49 लाख करोड़ के बीच बैठती है, जो इस्तेमाल की गई डॉलर-रुपया विनिमय दर पर निर्भर करती है। इसलिए ₹48 लाख करोड़ को एक अनुमानित रूपांतरण समझना चाहिए।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि मार्केट कैप में कमी का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के बैंक खाते से इतनी रकम निकल गई। शेयर की कीमत गिरने पर बाजार में कंपनी के सभी शेयरों का कुल मूल्य घट जाता है। यह निवेशकों के मूल्यांकन में बदलाव दिखाता है, न कि कंपनी के खाते से सीधे नकदी की निकासी।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह AI पर बढ़ता खर्च
Alphabet की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी चिंताओं में से एक AI पर किया जा रहा भारी निवेश है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI मॉडल, डेटा सेंटर, चिप्स, सर्वर, बिजली और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से पैसा खर्च कर रही हैं।
गूगल भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। कंपनी Gemini जैसे AI मॉडल, AI-संचालित सर्च, क्लाउड सेवाओं और बड़े कंप्यूटिंग सिस्टम को विकसित करने के लिए लगातार निवेश कर रही है।
AI सेवाओं को चलाने के लिए सामान्य वेबसाइट या ऐप की तुलना में बहुत अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है। बड़े AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और करोड़ों उपयोगकर्ताओं के सवालों का जवाब देने के लिए शक्तिशाली चिप्स, सर्वर, डेटा सेंटर और बिजली की बड़ी मात्रा चाहिए।
Alphabet ने सितंबर तिमाही में लगभग 51.4 अरब डॉलर का कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च दर्ज किया। यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले दोगुने से भी अधिक था। कंपनी ने 2026 के लिए पूंजीगत खर्च का अनुमान 195 अरब से 205 अरब डॉलर के दायरे में बनाए रखा है।
निवेशकों की चिंता यह है कि इतना बड़ा खर्च करने के बाद कंपनी को कितनी जल्दी और कितना मुनाफा मिलेगा। AI कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। Microsoft, Amazon, Meta और कई दूसरी कंपनियां भी अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।
यदि AI से मिलने वाली कमाई खर्च की रफ्तार के बराबर नहीं बढ़ती, तो कंपनी के मुनाफे और कैश फ्लो पर दबाव बना रह सकता है।
कंपनी का मुनाफा 25% घटा, जबकि राजस्व बढ़ा
Alphabet के तिमाही नतीजों में एक बड़ा अंतर देखने को मिला। कंपनी का राजस्व बढ़ा, लेकिन शुद्ध मुनाफे में गिरावट आई।
जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 127.58 अरब डॉलर रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह करीब 102.35 अरब डॉलर था। इस तरह कंपनी के राजस्व में लगभग 25% की सालाना वृद्धि हुई।
इसके बावजूद शुद्ध मुनाफा घटकर करीब 26.17 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने लगभग 34.98 अरब डॉलर का मुनाफा दर्ज किया था। यानी सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 25% की गिरावट आई।
कंपनी के नतीजों में इक्विटी निवेश से जुड़ा लगभग 8.7 अरब डॉलर का नुकसान भी दर्ज किया गया, जिसने रिपोर्टेड प्रॉफिट पर असर डाला। इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च और दूसरी लागतें भी निवेशकों की चिंता का कारण बनीं।
राजस्व बढ़ने के बावजूद मुनाफा कम होना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। निवेशक यह देखना चाहते हैं कि कंपनी की बिक्री बढ़ने के साथ उसका खर्च किस रफ्तार से बढ़ रहा है और भविष्य में उसका वास्तविक मुनाफा कितना हो सकता है।
फ्री कैश फ्लो 9.1 अरब डॉलर नेगेटिव क्यों हुआ?
Alphabet के नतीजों में एक और अहम आंकड़ा फ्री कैश फ्लो का रहा। सितंबर तिमाही में कंपनी का फ्री कैश फ्लो लगभग 9.1 अरब डॉलर नेगेटिव रहा। इसका मतलब है कि कंपनी के परिचालन से उपलब्ध नकदी और पूंजीगत निवेश के बाद बची रकम पर दबाव रहा।
फ्री कैश फ्लो किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति समझने का महत्वपूर्ण संकेतक है। सामान्य रूप से इसे परिचालन से मिलने वाली नकदी में से पूंजीगत खर्च घटाकर निकाला जाता है। यदि कोई कंपनी लगातार बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और मशीनरी में निवेश करती है, तो उसका फ्री कैश फ्लो अस्थायी रूप से कम या नेगेटिव हो सकता है।
Alphabet के मामले में डेटा सेंटर, सर्वर और AI कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने पर भारी खर्च हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले जून तिमाही में भी कंपनी का फ्री कैश फ्लो लगभग 5.9 अरब डॉलर नेगेटिव रहा था। इस तरह लगातार दूसरी तिमाही में नकदी प्रवाह पर दबाव देखने को मिला।
निवेशक यह जानना चाहते हैं कि यह खर्च भविष्य में कितनी कमाई पैदा करेगा। यदि AI सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ती है और ग्राहक इन सेवाओं के लिए पर्याप्त भुगतान करते हैं, तो आज किया गया निवेश आगे चलकर कंपनी के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन यदि कमाई उम्मीद से धीमी रहती है, तो बड़े निवेश का बोझ लंबे समय तक बना रह सकता है।
गूगल सर्च विज्ञापन की रफ्तार धीमी पड़ना भी बड़ी चिंता
Alphabet की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापन कारोबार से आता है। गूगल सर्च पर लोग रोजाना जानकारी, उत्पाद, सेवाएं और खरीदारी से जुड़े सवाल खोजते हैं। इन सर्च नतीजों के साथ दिखने वाले विज्ञापन कंपनी की कमाई का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
लेकिन अब AI आधारित सर्च का इस्तेमाल बढ़ रहा है। Google खुद भी अपने सर्च इंजन में AI Mode और AI Overview जैसी सुविधाएं जोड़ रहा है। इनसे उपयोगकर्ताओं को सीधे जवाब मिल सकते हैं और उन्हें पहले की तरह कई वेबसाइटों पर क्लिक करने की जरूरत कम पड़ सकती है।
यहीं निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल है: यदि उपयोगकर्ता सर्च पेज पर ही AI से जवाब प्राप्त कर लेते हैं, तो विज्ञापन दिखाने और उनसे कमाई करने का तरीका कैसे बदलेगा?
Alphabet के सितंबर तिमाही के आंकड़ों में सर्च और अन्य विज्ञापन से जुड़ा राजस्व लगभग 63.35 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर करीब 12% बढ़ा। हालांकि, इसकी वृद्धि की रफ्तार पिछली तिमाही के मुकाबले धीमी हुई और यह विश्लेषकों की उम्मीदों से कमजोर रही।
कंपनी के अधिकारियों ने निवेशकों के साथ बातचीत में संकेत दिया कि AI Mode में होने वाली कुछ सर्च गतिविधियों से फिलहाल पारंपरिक सर्च की तुलना में कम विज्ञापन कमाई हो सकती है। कंपनी का कहना है कि वह AI आधारित सर्च अनुभव में विज्ञापन के नए तरीके विकसित करने पर काम कर रही है।
यह बदलाव गूगल के लिए एक बड़ी चुनौती है। कंपनी को एक ओर AI के जरिए सर्च को आधुनिक बनाना है, वहीं दूसरी ओर अपने पुराने और बेहद लाभदायक विज्ञापन कारोबार की कमाई को भी सुरक्षित रखना है।
AI से मुकाबला करने के लिए Google क्या कर रहा है?
AI की दौड़ में Google कई मोर्चों पर निवेश कर रहा है। कंपनी का Gemini मॉडल इस रणनीति का अहम हिस्सा है। Gemini के जरिए गूगल टेक्स्ट, तस्वीर, वीडियो और अन्य प्रकार की जानकारी को समझने तथा उपयोगकर्ताओं के सवालों के जवाब देने की क्षमता बढ़ा रहा है।
इसके अलावा, कंपनी अपने सर्च इंजन, Android, Chrome, Gmail, Google Workspace और Cloud सेवाओं में AI सुविधाएं जोड़ रही है। इसका उद्देश्य यह है कि उपयोगकर्ता गूगल के अलग-अलग उत्पादों में AI का इस्तेमाल कर सकें।
Google Cloud भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनियां अपने डेटा, एप्लिकेशन और AI मॉडल चलाने के लिए क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं। यदि गूगल इस क्षेत्र में अधिक ग्राहक हासिल करता है, तो AI पर किए गए निवेश से कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।
लेकिन यह काम आसान नहीं है। Microsoft अपने Azure और Copilot उत्पादों के जरिए AI बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा कर रहा है। Amazon Web Services भी क्लाउड कंप्यूटिंग और AI सेवाओं में बड़ा निवेश कर रही है। OpenAI, Anthropic और अन्य कंपनियां भी AI मॉडल और व्यावसायिक सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही हैं।
इसलिए Google को केवल बेहतर AI मॉडल बनाने से काम नहीं चलेगा। उसे यह भी साबित करना होगा कि ग्राहक इन सेवाओं के लिए भुगतान करने को तैयार हैं और इनसे कंपनी की कुल कमाई में स्थायी बढ़ोतरी हो सकती है।
Google Cloud का कारोबार तेजी से बढ़ा
Alphabet के नतीजों में एक सकारात्मक पक्ष Google Cloud का प्रदर्शन रहा। कंपनी की क्लाउड सेवाओं की मांग बढ़ रही है और AI से जुड़ी सेवाओं ने इस कारोबार को गति दी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर तिमाही में Google Cloud का राजस्व पिछले साल की समान अवधि की तुलना में दोगुने से अधिक बढ़ा। इस कारोबार में कंपनियों की ओर से क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, AI मॉडल और कंप्यूटिंग सेवाओं की मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
यह Google के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि क्लाउड कारोबार से मिलने वाली कमाई AI पर किए गए निवेश को वापस हासिल करने में मदद कर सकती है। कंपनियों को AI एप्लिकेशन बनाने, डेटा प्रोसेस करने और मॉडल चलाने के लिए बड़े कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत होती है।
हालांकि, क्लाउड कारोबार में तेज वृद्धि के बावजूद निवेशक पूरे समूह के खर्च और मुनाफे को देख रहे हैं। यदि कंपनी की क्लाउड कमाई बढ़ती है, लेकिन उसके डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत उससे भी तेजी से बढ़ती है, तो निवेशकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता।
इसलिए बाजार की नजर अब केवल राजस्व वृद्धि पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि Google Cloud और AI कारोबार कितना वास्तविक मुनाफा पैदा कर रहे हैं।
डेटा सेंटर और AI चिप्स पर अरबों डॉलर क्यों खर्च हो रहे हैं?
AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए बहुत अधिक कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए विशेष प्रकार के प्रोसेसर, सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, नेटवर्क और डेटा सेंटर बनाए जाते हैं।
डेटा सेंटर ऐसी बड़ी सुविधाएं होती हैं जहां हजारों सर्वर रखे जाते हैं। ये सर्वर इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI मॉडल को चलाने में मदद करते हैं। इनके संचालन के लिए बिजली और कूलिंग की भी बड़ी व्यवस्था चाहिए।
Google को अपने AI मॉडल और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ऐसी सुविधाओं में लगातार निवेश करना पड़ रहा है। कंपनी के पूंजीगत खर्च में तेजी से वृद्धि इसी विस्तार का संकेत है।
लेकिन डेटा सेंटर बनाना महंगा और समय लेने वाला काम है। जमीन, भवन, बिजली कनेक्शन, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्क और कंप्यूटिंग उपकरणों पर बड़ी रकम खर्च होती है। इसके अलावा, तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए कंपनियों को लगातार नए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में निवेश करना पड़ सकता है।
इसका मतलब है कि आज किए गए निवेश का पूरा फायदा तुरंत नहीं मिलता। कंपनी को कई वर्षों तक इन सुविधाओं का इस्तेमाल करके कमाई करनी होती है। इसी कारण निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि Alphabet का मौजूदा खर्च भविष्य में कितना लाभ देगा।
क्या AI गूगल के पुराने कारोबार के लिए खतरा बन रहा है?
AI गूगल के लिए अवसर भी है और चुनौती भी। एक तरफ कंपनी AI के जरिए नए उत्पाद, क्लाउड सेवाएं और सर्च अनुभव विकसित कर सकती है। दूसरी तरफ, AI चैटबॉट और जवाब देने वाले सर्च टूल उपयोगकर्ताओं के ऑनलाइन व्यवहार को बदल सकते हैं।
पहले उपयोगकर्ता किसी सवाल का जवाब पाने के लिए Google पर खोज करते थे, फिर अलग-अलग वेबसाइटों पर क्लिक करते थे। इस प्रक्रिया में विज्ञापन दिखाने के कई अवसर मिलते थे। अब AI टूल एक ही जगह पर विस्तृत जवाब देने लगे हैं।
यदि लोग सीधे AI चैटबॉट से जानकारी लेने लगते हैं, तो पारंपरिक सर्च पर निर्भरता और विज्ञापन के तरीके बदल सकते हैं। Google इस बदलाव को अपने उत्पादों में शामिल करके खुद को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखना चाहता है।
लेकिन कंपनी के सामने संतुलन की चुनौती है। AI आधारित जवाब उपयोगकर्ता के लिए उपयोगी होने चाहिए, साथ ही विज्ञापन और व्यावसायिक कमाई का मॉडल भी टिकाऊ रहना चाहिए।
इसका असर केवल गूगल तक सीमित नहीं है। पूरी डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री को यह समझना होगा कि AI के दौर में वेबसाइट ट्रैफिक, सर्च विज्ञापन और ऑनलाइन खरीदारी का व्यवहार किस तरह बदल सकता है।
क्या Alphabet के शेयर में गिरावट से बाकी टेक कंपनियां भी प्रभावित हुईं?
Alphabet के शेयरों में भारी गिरावट का असर अमेरिकी टेक शेयर बाजार पर भी पड़ा। 29 अक्टूबर को Nasdaq में करीब 1.4% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि S&P 500 और Dow Jones भी नीचे रहे।
निवेशकों की चिंता केवल Google तक सीमित नहीं है। Microsoft, Amazon, Meta और दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत बड़ी रकम खर्च कर रही हैं। यदि किसी एक बड़ी कंपनी के नतीजों में भारी खर्च और कमजोर कैश फ्लो दिखाई देता है, तो निवेशक दूसरी कंपनियों के खर्च और संभावित रिटर्न को भी अधिक ध्यान से देखने लगते हैं।
इससे टेक सेक्टर के मूल्यांकन पर दबाव आ सकता है। बाजार में निवेशक यह जांचने लगते हैं कि कंपनियां AI के नाम पर कितनी पूंजी लगा रही हैं और उससे कितनी कमाई हो रही है।
हालांकि, सभी कंपनियों की स्थिति एक जैसी नहीं होती। किसी कंपनी के पास मजबूत क्लाउड कारोबार हो सकता है, किसी की विज्ञापन कमाई अधिक हो सकती है और किसी की AI सेवाओं से सीधे राजस्व प्राप्त करने की क्षमता अलग हो सकती है। इसलिए Alphabet के शेयर में गिरावट को हर टेक कंपनी के शेयर के लिए समान संकेत नहीं माना जा सकता।
क्या Google के शेयर फिर से संभल सकते हैं?
शेयर बाजार में किसी बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों का ध्यान इस बात पर जाता है कि कंपनी की कीमत दोबारा कब और कैसे सुधर सकती है। Alphabet के मामले में यह काफी हद तक आने वाले तिमाही नतीजों और AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगा।
यदि Google Cloud की वृद्धि जारी रहती है, AI सेवाओं से कमाई बढ़ती है और विज्ञापन कारोबार स्थिर रहता है, तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है। कंपनी के लिए यह भी जरूरी होगा कि वह अपने पूंजीगत खर्च और नकदी प्रवाह पर बेहतर नियंत्रण दिखाए।
इसके उलट, यदि AI पर खर्च लगातार बढ़ता है और सर्च विज्ञापन की कमाई कमजोर होती रहती है, तो शेयर पर दबाव बना रह सकता है।
शेयर की कीमत पर ब्याज दरें, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर का मूल्यांकन, प्रतिस्पर्धा और निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा जैसे कारक भी असर डालते हैं। इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि शेयर कितने दिनों में वापस पुराने स्तर पर पहुंच जाएगा।
निवेशकों को कंपनी के तिमाही नतीजों, प्रबंधन के खर्च संबंधी अनुमानों, क्लाउड कारोबार और विज्ञापन राजस्व पर नजर रखनी चाहिए। केवल गिरावट देखकर शेयर खरीदना या बेच देना उचित रणनीति नहीं है।
भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत में भी कई निवेशक अमेरिकी शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड के जरिए Alphabet जैसी कंपनियों में निवेश करते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए यह गिरावट महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी शेयर की कीमत में बदलाव का असर उनके निवेश के मूल्य पर पड़ सकता है।
यदि किसी भारतीय निवेशक ने Alphabet के शेयर में सीधे निवेश किया है, तो शेयर की कीमत में गिरावट से उसके निवेश का बाजार मूल्य कम हो सकता है। इसके अलावा, डॉलर और रुपये की विनिमय दर में बदलाव भी भारतीय रुपये में निवेश के मूल्य को प्रभावित कर सकता है।
जो लोग अंतरराष्ट्रीय फंड के जरिए अमेरिकी टेक कंपनियों में निवेश करते हैं, उन्हें अपने फंड के पोर्टफोलियो में Alphabet की हिस्सेदारी देखनी चाहिए। हर फंड में इस कंपनी का वजन समान नहीं होता।
लंबी अवधि के निवेशकों को एक दिन की गिरावट के बजाय कंपनी के कारोबार, प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति, मुनाफे और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना चाहिए। निवेश से पहले अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। यह खबर किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं हैGoogle Gemini ने 3 कंपनियों के सिस्टम हैक किए: AI Cybersecurity Test में सामने आया मामला
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