आजकल फिटनेस के लिए सिर्फ जिम में भारी वजन उठाना या घंटों कार्डियो करना ही विकल्प नहीं है। कई लोग ऐसी एक्सरसाइज चुन रहे हैं, जिनसे शरीर की ताकत, लचीलापन, संतुलन और पोश्चर बेहतर किया जा सके। पिलाटेस भी ऐसा ही एक एक्सरसाइज सिस्टम है, जो पिछले कई वर्षों में दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ है।
बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन जगत की कई हस्तियां अपनी फिटनेस रूटीन में पिलाटेस को शामिल करती हैं। इसकी खासियत है कि इसमें शरीर को नियंत्रित तरीके से मूव किया जाता है। एक्सरसाइज के दौरान सांस लेने की तकनीक, शरीर की सही स्थिति और मांसपेशियों के तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पिलाटेस का विकास 20वीं सदी की शुरुआत में हुआ था। इसके संस्थापक जोसेफ पिलाटेस ने शरीर की ताकत, लचीलेपन और नियंत्रण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस एक्सरसाइज पद्धति को विकसित किया। आज इसका इस्तेमाल सामान्य फिटनेस के साथ-साथ कुछ परिस्थितियों में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में भी किया जाता है।
हालांकि, पिलाटेस हर बीमारी का इलाज नहीं है और न ही हर व्यक्ति के लिए सभी एक्सरसाइज एक जैसी सुरक्षित होती हैं। चोट, कमर या गर्दन की समस्या, हाल में हुई सर्जरी, गर्भावस्था या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में एक्सरसाइज का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।
क्या है पिलाटेस एक्सरसाइज?
पिलाटेस एक तरह की नियंत्रित शारीरिक एक्सरसाइज है, जिसमें शरीर की मुख्य मांसपेशियों को मजबूत करने, लचीलेपन को बढ़ाने, संतुलन सुधारने और शरीर की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण विकसित करने पर ध्यान दिया जाता है।
इस एक्सरसाइज में पेट, पीठ, कूल्हों और पेल्विक एरिया की मांसपेशियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन मांसपेशियों को सामूहिक रूप से शरीर के कोर यानी मध्य हिस्से की स्थिरता से जोड़ा जाता है।
पिलाटेस में सामान्य तौर पर तेजी से और बार-बार मूवमेंट करने के बजाय धीरे-धीरे, सही तकनीक और नियंत्रित सांस के साथ एक्सरसाइज की जाती है। इसका उद्देश्य सिर्फ ज्यादा रिपीटेशन करना नहीं, बल्कि हर मूवमेंट को सही तरीके से करना होता है।
इसे मैट पर बिना किसी बड़ी मशीन के भी किया जा सकता है। वहीं, कुछ एक्सरसाइज के लिए रिफॉर्मर नाम की विशेष मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें स्प्रिंग और चलने वाला प्लेटफॉर्म प्रतिरोध तथा सहारा देने का काम करते हैं।
पिलाटेस को योग के समान समझना भी पूरी तरह सही नहीं है। दोनों में सांस, शरीर की जागरूकता और लचीलेपन पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन पिलाटेस में नियंत्रित मूवमेंट, कोर मसल्स और शरीर की स्थिरता पर विशेष जोर रहता है।
लगभग 100 साल पुरानी है इसकी शुरुआत
पिलाटेस का इतिहास 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों से जुड़ा है। इसके संस्थापक जोसेफ ह्यूबर्टस पिलाटेस का जन्म 1883 में जर्मनी में हुआ था। उन्होंने शरीर की कंडीशनिंग और व्यायाम से जुड़ी एक पद्धति विकसित की, जिसे शुरुआत में कंट्रोलॉजी (Contrology) कहा जाता था।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने इंग्लैंड में नजरबंदी के समय अपने व्यायाम संबंधी विचारों को आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने अपने तरीकों को विकसित किया और 1926 में अमेरिका जाकर न्यूयॉर्क में स्टूडियो शुरू किया।
उनकी पत्नी क्लारा पिलाटेस ने भी इस पद्धति को विकसित करने और सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। न्यूयॉर्क में डांसर्स और दूसरे लोगों के बीच यह तरीका लोकप्रिय होने लगा। समय के साथ इसका इस्तेमाल फिटनेस, शरीर की कंडीशनिंग और कुछ पुनर्वास कार्यक्रमों में किया जाने लगा।
इस तरह पिलाटेस को लगभग एक सदी पुरानी एक्सरसाइज पद्धति कहा जा सकता है। हालांकि, आज इस्तेमाल किए जाने वाले सभी आधुनिक पिलाटेस कार्यक्रम बिल्कुल उसी रूप में नहीं हैं, जैसे इसके शुरुआती संस्करण थे। समय के साथ इसमें कई बदलाव और नए तरीके जोड़े गए हैं।
पिलाटेस करने के 6 प्रमुख हेल्थ बेनिफिट्स
पिलाटेस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे व्यक्ति की क्षमता के अनुसार आसान या कठिन बनाया जा सकता है। सही तकनीक और नियमित अभ्यास के साथ इससे कई शारीरिक क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
1. कोर मसल्स मजबूत करने में मदद
पिलाटेस में पेट, पीठ और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने पर ध्यान दिया जाता है। इन मांसपेशियों की ताकत शरीर को स्थिर रखने, उठने-बैठने और रोजमर्रा के काम करने में मदद करती है।
हालांकि, इसका फायदा व्यक्ति की एक्सरसाइज, तकनीक और नियमितता पर निर्भर करता है। केवल कुछ दिन अभ्यास करने से बड़ी मांसपेशीय ताकत विकसित होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
2. शरीर का पोश्चर बेहतर हो सकता है
लंबे समय तक बैठकर काम करने, मोबाइल देखने या गलत तरीके से बैठने के कारण कई लोगों की शारीरिक मुद्रा प्रभावित होती है। पिलाटेस में शरीर की स्थिति, रीढ़ की स्वाभाविक बनावट और मांसपेशियों के तालमेल पर ध्यान दिया जाता है।
नियमित अभ्यास से व्यक्ति को अपने शरीर की स्थिति के प्रति बेहतर जागरूकता मिल सकती है। इससे सही तरीके से बैठने, खड़े होने और मूवमेंट करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यदि पोश्चर की समस्या किसी हड्डी, नस या दूसरी मेडिकल स्थिति से जुड़ी है, तो केवल पिलाटेस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
3. लचीलापन बढ़ाने में मदद
कुछ पिलाटेस एक्सरसाइज मांसपेशियों और जोड़ों की नियंत्रित गति को बढ़ावा देती हैं। इससे शरीर का लचीलापन और मूवमेंट की क्षमता बेहतर हो सकती है।
इसके लिए जरूरी है कि एक्सरसाइज व्यक्ति की क्षमता के अनुसार की जाए। जबरदस्ती शरीर को खींचना या दर्द होने के बावजूद मूवमेंट जारी रखना नुकसानदायक हो सकता है।
4. संतुलन और शरीर पर नियंत्रण
पिलाटेस में कई एक्सरसाइज ऐसी होती हैं, जिनमें शरीर को एक स्थिर स्थिति में रखते हुए हाथ-पैरों को नियंत्रित तरीके से हिलाया जाता है। इससे संतुलन और शरीर की गतिविधियों के बीच तालमेल का अभ्यास होता है।
उम्र बढ़ने के साथ संतुलन बनाए रखना रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बुजुर्ग लोग भी उपयुक्त बदलावों और प्रशिक्षक की निगरानी में पिलाटेस कर सकते हैं। हालांकि, गिरने का जोखिम अधिक होने पर पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
5. कुछ लोगों में कमर दर्द से राहत में सहायक
पिलाटेस का इस्तेमाल कुछ लोगों में लंबे समय से चल रहे सामान्य कमर दर्द के प्रबंधन के लिए किया जाता है। इसके जरिए कोर मसल्स की ताकत, शरीर की गतिविधियों और लचीलेपन पर काम किया जा सकता है।
कुछ शोधों में कमर दर्द के लिए पिलाटेस से लाभ के संकेत मिले हैं, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण सभी परिस्थितियों में एक जैसे मजबूत नहीं हैं। इसलिए इसे हर तरह के कमर दर्द का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
अगर कमर दर्द चोट, नस दबने, बुखार, कमजोरी या किसी गंभीर समस्या के साथ हो, तो पहले मेडिकल जांच जरूरी है। दर्द की स्थिति में एक्सरसाइज का प्रकार फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह से तय करना बेहतर है।
6. मानसिक एकाग्रता और तनाव प्रबंधन में मदद
पिलाटेस में सांस और शरीर की गतिविधियों के बीच तालमेल पर ध्यान देना पड़ता है। इससे कुछ लोगों को मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और एक्सरसाइज के दौरान तनाव से ध्यान हटाने में मदद मिल सकती है।
नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती है। फिर भी पिलाटेस को चिंता, अवसाद या किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का अकेला इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
क्या पिलाटेस से वजन कम हो सकता है?
पिलाटेस शरीर की ताकत, संतुलन और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य वजन कम करना नहीं है।
वजन घटाने के लिए शरीर को दिनभर में जितनी ऊर्जा मिलती है और जितनी खर्च होती है, दोनों के बीच संतुलन महत्वपूर्ण होता है। खानपान, रोजमर्रा की गतिविधि, नींद और दूसरे व्यायाम भी वजन प्रबंधन में भूमिका निभाते हैं।
यदि कोई व्यक्ति वजन कम करना चाहता है, तो पिलाटेस को नियमित चलने, अन्य उपयुक्त शारीरिक गतिविधियों और संतुलित आहार के साथ जोड़ा जा सकता है। केवल पिलाटेस करने से तेजी से वजन घटने की गारंटी नहीं है।
कुछ लोगों को पिलाटेस से शरीर की मुद्रा और मांसपेशियों के नियंत्रण में सुधार महसूस हो सकता है। लेकिन शरीर का आकार बदलने और वजन घटाने के परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
पिलाटेस कितनी देर और कितने दिन करना चाहिए?
शुरुआत करने वालों के लिए सप्ताह में दो या तीन दिन, लगभग 10 से 20 मिनट के आसान अभ्यास से शुरुआत करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। यह कोई अनिवार्य मेडिकल नियम नहीं है। सही समय और अभ्यास की तीव्रता व्यक्ति की उम्र, फिटनेस, स्वास्थ्य और अनुभव के अनुसार तय होनी चाहिए।
शुरुआत में बहुत कठिन एक्सरसाइज या लंबे सेशन करने की जरूरत नहीं है। पहले सांस के साथ तालमेल, शरीर की स्थिति और आसान मूवमेंट सीखना अधिक महत्वपूर्ण है।
जैसे-जैसे शरीर अभ्यास का आदी होता जाए, प्रशिक्षक की मदद से समय और कठिनाई बढ़ाई जा सकती है। यदि अभ्यास के दौरान दर्द, चक्कर, असामान्य सांस फूलना या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत रुकना चाहिए।
यदि आप लंबे समय से शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो नया व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
पिलाटेस करने का सही तरीका क्या है?
पिलाटेस में तकनीक को गति से अधिक महत्व दिया जाता है। शुरुआती लोगों को आसान एक्सरसाइज से शुरुआत करनी चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।
मैट पर पेल्विक टिल्ट का आसान अभ्यास
यह एक शुरुआती मूवमेंट है, लेकिन कमर या गर्दन की समस्या वाले लोगों को इसे भी अपनी स्थिति के अनुसार करना चाहिए।
- सबसे पहले साफ और समतल एक्सरसाइज मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
- घुटनों को मोड़ें और पैरों को फर्श पर रखें। दोनों पैर आरामदायक दूरी पर हों।
- गर्दन और कंधों को ढीला रखें। सांस सामान्य रखें।
- सांस छोड़ते समय पेट की मांसपेशियों को हल्के से सक्रिय करें और पेल्विस को थोड़ा पीछे की ओर झुकाएं।
- कमर को बहुत जोर से दबाने या शरीर को उठाने की कोशिश न करें।
- कुछ सेकंड बाद सामान्य स्थिति में लौटें और आराम से सांस लें।
- शुरुआत में पांच से आठ बार आरामदायक गति से अभ्यास किया जा सकता है, यदि इससे दर्द या परेशानी न हो।
यह सिर्फ शुरुआती अभ्यास का उदाहरण है, संपूर्ण पिलाटेस रूटीन नहीं। यदि किसी मूवमेंट से दर्द बढ़ता है, तो उसे रोक दें। किसी चोट या मेडिकल समस्या में प्रशिक्षक या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत मार्गदर्शन लें।
पिलाटेस करते समय सांस कैसे लें?
पिलाटेस में सांस का नियंत्रण महत्वपूर्ण माना जाता है। कई एक्सरसाइज में मूवमेंट के साथ सांस लेने और छोड़ने का तरीका सिखाया जाता है।
शुरुआती लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सांस रोककर एक्सरसाइज न करें। आराम से सांस लें और छोड़ें। जबरदस्ती सांस खींचने या बहुत तेज सांस लेने की जरूरत नहीं है।
सही सांस लेने से एक्सरसाइज के दौरान शरीर के मूवमेंट पर ध्यान बनाए रखने में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षक आपकी एक्सरसाइज के अनुसार सांस लेने का तरीका बता सकता है।
अगर किसी एक्सरसाइज में सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द आए या असामान्य चक्कर महसूस हों, तो तुरंत रुकें और जरूरत के अनुसार मेडिकल सहायता लें।
पिलाटेस के कितने प्रकार होते हैं?
पिलाटेस के कई रूप हैं। इनमें सबसे सामान्य मैट पिलाटेस और रिफॉर्मर पिलाटेस हैं।
मैट पिलाटेस में व्यक्ति जमीन पर बिछी मैट पर अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करके एक्सरसाइज करता है। इसमें आमतौर पर बड़ी मशीन की जरूरत नहीं होती। कुछ अभ्यासों में छोटे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिफॉर्मर पिलाटेस में विशेष मशीन का उपयोग होता है। इसमें स्प्रिंग, स्ट्रैप और चलने वाला प्लेटफॉर्म होता है, जिससे एक्सरसाइज के दौरान प्रतिरोध या सहारा दिया जा सकता है। इसे प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर की निगरानी में करना बेहतर है।
कुछ प्रशिक्षक दीवार के सहारे किए जाने वाले पिलाटेस अभ्यास भी सिखाते हैं। लेकिन किसी भी प्रकार का पिलाटेस अपने आप में सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होता। सही विकल्प व्यक्ति की फिटनेस और स्वास्थ्य के अनुसार चुना जाना चाहिए।
किन लोगों को पिलाटेस करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
पिलाटेस सामान्य तौर पर कम प्रभाव वाला व्यायाम माना जाता है, लेकिन कुछ लोगों को इसे शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
हाल में सर्जरी कराने वाले लोग: सर्जरी के बाद शरीर को ठीक होने के लिए समय चाहिए। कौन-सी एक्सरसाइज कब शुरू की जा सकती है, यह सर्जरी के प्रकार और रिकवरी पर निर्भर करता है।
गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था में पहले से पिलाटेस करने वाली कुछ महिलाएं संशोधित अभ्यास जारी रख सकती हैं, लेकिन यह उनकी मेडिकल स्थिति पर निर्भर करता है। नया कार्यक्रम शुरू करने से पहले डॉक्टर और गर्भावस्था में प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर से सलाह लें।
गंभीर कमर या गर्दन की समस्या वाले लोग: यदि रीढ़ की बीमारी, डिस्क से जुड़ी समस्या, नसों के लक्षण या लगातार दर्द है, तो हर एक्सरसाइज उपयुक्त नहीं होगी।
हृदय रोग या दूसरी पुरानी बीमारी वाले लोग: हृदय रोग, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर या दूसरी महत्वपूर्ण मेडिकल स्थिति में व्यायाम की तीव्रता और प्रकार डॉक्टर से पूछकर तय करें।
हाल में चोट लगने वाले लोग: मांसपेशियों, जोड़ों या हड्डियों की चोट में गलत मूवमेंट से समस्या बढ़ सकती है। जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में ही अभ्यास करें।
लंबे समय से निष्क्रिय रहने वाले लोग: यदि आपने लंबे समय से व्यायाम नहीं किया है, तो आसान स्तर से शुरुआत करें। स्वास्थ्य संबंधी जोखिम होने पर पहले जांच और सलाह लें।
इन स्थितियों का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को पिलाटेस पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। कई बार एक्सरसाइज को संशोधित करके किया जा सकता है। लेकिन यह निर्णय स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार होना चाहिए।
पिलाटेस करते समय इन गलतियों से बचें
पिलाटेस में सही तकनीक महत्वपूर्ण है। इसलिए कुछ सामान्य गलतियों से बचना चाहिए।
पहली गलती है शरीर को जबरदस्ती खींचना। लचीलापन बढ़ाने के लिए दर्द सहना जरूरी नहीं है। किसी मूवमेंट से तेज दर्द हो तो रुक जाएं।
दूसरी गलती है सांस रोकना। एक्सरसाइज के दौरान सांस सामान्य और नियंत्रित रखें।
तीसरी गलती है शुरुआत में ही कठिन अभ्यास करना। सोशल मीडिया पर दिखने वाले कठिन मूवमेंट शुरुआती लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते।
चौथी गलती है बिना मार्गदर्शन के चोट के बावजूद अभ्यास जारी रखना। यदि दर्द बढ़ता है या शरीर की गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।
पांचवीं गलती है यह मान लेना कि पिलाटेस हर बीमारी ठीक कर देगा। यह एक एक्सरसाइज पद्धति है, किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं।
एनर्जी ड्रिंक के नुकसान: फैटी लिवर का जोखिम और 10 हेल्दी ड्रिंक्स
http://पिलाटेस में नियंत्रित मूवमेंट, सांस और शरीर की स्थिरता पर ध्यान दिया जाता है।
