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WPL Auction 2027: मोलिन्यू ₹1.10 करोड़ में यूपी, किरण दिल्ली में

महिला प्रीमियर लीग यानी WPL 2027 के मिनी ऑक्शन में खिलाड़ियों की खरीद को लेकर फ्रेंचाइजी के बीच मुकाबला तेज हो गया है। केरल के कोच्चि में आयोजित नीलामी में ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर सोफी मोलिन्यू सबसे चर्चित नामों में शामिल रहीं। यूपी वॉरियर्स ने उन्हें ₹1.10 करोड़ में अपने साथ जोड़ा। वहीं, भारतीय बल्लेबाज किरण नवगिरे को दिल्ली कैपिटल्स ने ₹75 लाख में खरीदा। इन दोनों खिलाड़ियों के लिए टीमों के बीच बोली लगाने की प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

नीलामी का यह दौर इसलिए अहम है, क्योंकि टीमें आगामी सीजन से पहले अपने स्क्वॉड में बची हुई जगहों को भरने और कमजोर कड़ियों को मजबूत करने में जुटी हैं। WPL 2027 के लिए पांचों फ्रेंचाइजी को कुल 27 खिलाड़ियों की जगह भरनी है। ऑक्शन के लिए शुरुआती सूची में 146 खिलाड़ियों के नाम शामिल थे, जिनमें 119 भारतीय और 27 विदेशी खिलाड़ी थे। भारतीय खिलाड़ियों के लिए 20 और विदेशी खिलाड़ियों के लिए सात स्लॉट उपलब्ध रखे गए थे।

सोफी मोलिन्यू और किरण नवगिरे के अलावा शुरुआती दौर में गुजरात जायंट्स ने जी. कमालिनी और आयरलैंड की ऑलराउंडर ओरला प्रेंडरगास्ट को टीम में शामिल किया। यूपी वॉरियर्स ने ग्रेस हैरिस और स्नेह राणा जैसे खिलाड़ियों पर भी भरोसा जताया। नीलामी के दौरान कुछ खिलाड़ियों को खरीदार नहीं मिले, जिससे यह साफ हुआ कि फ्रेंचाइजी अपने बजट और टीम की जरूरतों के हिसाब से ही बोली लगा रही हैं।

सोफी मोलिन्यू को ₹1.10 करोड़ में यूपी वॉरियर्स ने खरीदा

ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर सोफी मोलिन्यू नीलामी की सबसे चर्चित खरीद में से एक रहीं। उनका बेस प्राइस ₹50 लाख था, लेकिन यूपी वॉरियर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच बोली बढ़ने के बाद यूपी ने उन्हें ₹1.10 करोड़ में खरीद लिया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण बोली तेजी से बढ़ी और अंत में यूपी वॉरियर्स ने बाजी मार ली।

मोलिन्यू बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज और उपयोगी बल्लेबाज हैं। वह टीम को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी विकल्प देती हैं। टी20 क्रिकेट में ऐसी ऑलराउंडर खिलाड़ियों की अहमियत बढ़ जाती है, क्योंकि वे प्लेइंग इलेवन में संतुलन बनाने में मदद करती हैं। टीम को जरूरत पड़ने पर वे मध्य ओवरों में गेंदबाजी कर सकती हैं और बल्लेबाजी में भी योगदान दे सकती हैं।

मोलिन्यू पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की खिताब जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। चोट के कारण वह WPL 2026 सीजन में नहीं खेल पाई थीं। ऑक्शन से पहले उनकी फिटनेस और वापसी पर नजर थी, लेकिन फ्रेंचाइजी ने उन पर भरोसा जताया।

यूपी वॉरियर्स के लिए मोलिन्यू की खरीद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। टीम को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो अलग-अलग परिस्थितियों में योगदान दे सकें। यदि मोलिन्यू पूरे सीजन में फिट रहती हैं और अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करती हैं, तो वह टीम के संतुलन को मजबूत कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी खिलाड़ी का प्रदर्शन पिच, विपक्षी टीम, फिटनेस और मैच की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

किरण नवगिरे को दिल्ली कैपिटल्स ने ₹75 लाख में खरीदा

भारतीय बल्लेबाज किरण नवगिरे भी नीलामी में महत्वपूर्ण नाम रहीं। उनका बेस प्राइस ₹40 लाख था। मुंबई इंडियंस ने उनके लिए बोली शुरू की, जिसके बाद दिल्ली कैपिटल्स भी मुकाबले में शामिल हो गई। दोनों टीमों के बीच बोली आगे बढ़ी और अंत में दिल्ली ने ₹75 लाख की कीमत पर उन्हें अपने साथ जोड़ लिया।

किरण नवगिरे अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। टी20 प्रारूप में तेजी से रन बनाना टीम के लिए बेहद उपयोगी होता है, खासकर तब जब बल्लेबाजी के आखिरी ओवरों में रन गति बढ़ानी हो या टीम को बड़े लक्ष्य का पीछा करना हो। उनकी बल्लेबाजी शैली दिल्ली कैपिटल्स को एक अतिरिक्त विकल्प दे सकती है।

किरण इससे पहले यूपी वॉरियर्स के लिए खेल चुकी हैं। नई टीम में शामिल होने के बाद उनके सामने दिल्ली की रणनीति और बल्लेबाजी क्रम के अनुसार खुद को ढालने की चुनौती होगी। टीम प्रबंधन यह तय करेगा कि उन्हें किस स्थान पर बल्लेबाजी के लिए उतारा जाए और किन मैचों में उनकी भूमिका सबसे अधिक उपयोगी हो सकती है।

दिल्ली कैपिटल्स ने इस खरीद के जरिए भारतीय बल्लेबाजी में एक और विकल्प जोड़ा है। नीलामी में किसी खिलाड़ी को खरीदना पहला कदम होता है; उसके बाद टीम के साथ तालमेल, अभ्यास, फिटनेस और मैच में प्रदर्शन महत्वपूर्ण होते हैं। किरण के लिए यह मौका अपने खेल को अगले स्तर पर ले जाने का अवसर भी हो सकता है।

यूपी वॉरियर्स ने ग्रेस हैरिस और स्नेह राणा को भी चुना

यूपी वॉरियर्स ने नीलामी में केवल सोफी मोलिन्यू पर ही ध्यान नहीं दिया। टीम ने ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर ग्रेस हैरिस को ₹30 लाख और भारतीय ऑलराउंडर स्नेह राणा को भी ₹30 लाख में खरीदा। विकेटकीपर-बल्लेबाज सुषमा वर्मा को भी यूपी वॉरियर्स ने उनके ₹30 लाख के बेस प्राइस पर अपने साथ जोड़ा।

ग्रेस हैरिस टी20 क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी और उपयोगी ऑलराउंड क्षमता के लिए जानी जाती हैं। उनकी मौजूदगी टीम को मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने का विकल्प देती है। जरूरत पड़ने पर वह गेंदबाजी भी कर सकती हैं। यूपी वॉरियर्स के लिए उनका अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि टीम को ऐसे खिलाड़ियों की आवश्यकता रहती है जो कम समय में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हों।

स्नेह राणा भारतीय क्रिकेट की अनुभवी ऑलराउंडर हैं। वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी कर सकती हैं। ऐसी खिलाड़ी टीम को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प देती हैं और जरूरत पड़ने पर रन बनाने में मदद करती हैं। उनका चयन यूपी वॉरियर्स के लिए टीम में अनुभव और संतुलन बढ़ाने वाला कदम हो सकता है।

सुषमा वर्मा की खरीद से टीम को विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी के विकल्प में भी गहराई मिल सकती है। विकेटकीपर की भूमिका केवल कैच पकड़ने और स्टंपिंग तक सीमित नहीं होती। विकेट के पीछे से गेंदबाजों को सलाह देना, फील्डिंग की स्थिति पर नजर रखना और मैच की गति को समझना भी महत्वपूर्ण होता है।

यूपी वॉरियर्स के पास नीलामी से पहले सबसे बड़ा बचा हुआ बजट था। इसलिए टीम के पास कई खिलाड़ियों के लिए बोली लगाने की गुंजाइश थी। हालांकि, बड़े बजट का मतलब यह नहीं कि हर खिलाड़ी पर अधिक खर्च किया जाए। फ्रेंचाइजी को यह भी देखना होता है कि किस स्थान के लिए खिलाड़ी की जरूरत है और बाकी स्लॉट भरने के लिए कितना पैसा बचाना है।

गुजरात जायंट्स ने जी. कमालिनी और ओरला प्रेंडरगास्ट को चुना

गुजरात जायंट्स ने भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज जी. कमालिनी को ₹40 लाख में खरीदा। उनका बेस प्राइस भी ₹40 लाख था। इसके अलावा आयरलैंड की ऑलराउंडर ओरला प्रेंडरगास्ट को ₹30 लाख के बेस प्राइस पर टीम में शामिल किया गया। इन खरीदों से गुजरात को भारतीय और विदेशी दोनों तरह के विकल्प मिले।

जी. कमालिनी युवा भारतीय क्रिकेटरों में शामिल हैं और विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी भी करती हैं। किसी टीम के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज का होना खास महत्व रखता है, क्योंकि इससे टीम संयोजन में लचीलापन आता है। जरूरत के हिसाब से ऐसी खिलाड़ी को बल्लेबाजी क्रम में अलग-अलग स्थानों पर मौका दिया जा सकता है।

गुजरात जायंट्स को नीलामी से पहले सीमित बजट और कुछ ही खाली स्लॉट भरने थे। टीम को हर खरीद पर सावधानी से फैसला लेना था। कमालिनी को उनके बेस प्राइस पर खरीदने से फ्रेंचाइजी को एक विकल्प मिला, जबकि बजट पर भी अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ा।

ओरला प्रेंडरगास्ट आयरलैंड की ऑलराउंडर हैं। विदेशी ऑलराउंडर टीम में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों को मजबूती दे सकती हैं। हालांकि, उनकी वास्तविक भूमिका टीम की जरूरत, प्लेइंग इलेवन और उपलब्ध अन्य विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भर करेगी।

WPL में विदेशी खिलाड़ियों के लिए सीमित स्थान होते हैं। इसलिए टीमों को यह ध्यान रखना पड़ता है कि वे किस विभाग में विदेशी खिलाड़ी का इस्तेमाल करना चाहती हैं और भारतीय खिलाड़ियों के साथ संतुलन कैसे बनाएंगी। गुजरात की खरीदारी को इसी रणनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है।

नीलामी में हर बड़े नाम को नहीं मिला खरीदार

WPL ऑक्शन में केवल महंगे सौदे ही चर्चा का विषय नहीं रहे। कुछ खिलाड़ियों को उनके बेस प्राइस पर भी खरीदार नहीं मिले। शुरुआती रिपोर्टों में इंग्लैंड की बल्लेबाज सोफिया डंकले और भारतीय बल्लेबाज तेजल हसबनिस के अनसोल्ड रहने की जानकारी दी गई। राघवी बिष्ट को भी शुरुआती दौर में कोई टीम नहीं मिली।

किसी खिलाड़ी का अनसोल्ड रहना उसके पूरे करियर या क्षमता का अंतिम मूल्यांकन नहीं होता। मिनी ऑक्शन में टीमों की जरूरतें सीमित होती हैं और उपलब्ध स्लॉट के मुकाबले खिलाड़ियों की संख्या काफी अधिक रहती है। ऐसे में फ्रेंचाइजी को हर खिलाड़ी के लिए बोली लगाने का अवसर नहीं मिलता।

कई बार टीम किसी खास भूमिका के लिए खिलाड़ी खोज रही होती है। उदाहरण के लिए, उसे तेज गेंदबाज, स्पिनर, विकेटकीपर या मध्यक्रम के बल्लेबाज की जरूरत हो सकती है। अगर किसी खिलाड़ी की भूमिका पहले से मौजूद खिलाड़ियों से मिलती-जुलती है, तो टीम उसे खरीदने में रुचि नहीं दिखा सकती।

इसके अलावा बजट भी एक बड़ा कारण होता है। किसी टीम के पास पैसा कम बचा हो, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर खिलाड़ियों का चयन करना पड़ता है। एक ही भूमिका के कई विकल्प होने पर फ्रेंचाइजी उन खिलाड़ियों को प्राथमिकता दे सकती है जिन्हें वह अपनी रणनीति के लिए अधिक उपयुक्त मानती है।

अनसोल्ड खिलाड़ियों के लिए नीलामी के बाद की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं होतीं। टूर्नामेंट के दौरान चोट या अन्य कारणों से किसी खिलाड़ी की जगह खाली होने पर टीमों को रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, किसी खिलाड़ी को बाद में मौका मिलेगा या नहीं, यह टीम की जरूरत और नियमों पर निर्भर करता है।

WPL 2027 मिनी ऑक्शन में कितनी टीमें हिस्सा ले रही हैं?

WPL में पांच फ्रेंचाइजी हिस्सा लेती हैं—मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, यूपी वॉरियर्स, गुजरात जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स। सभी टीमें आगामी सीजन के लिए अपनी टीम को मजबूत करने के उद्देश्य से नीलामी में भाग ले रही हैं।

WPL 2027 मिनी ऑक्शन से पहले पांचों टीमों के पास अलग-अलग बजट और खाली स्लॉट थे। यूपी वॉरियर्स के पास ₹3.75 करोड़, गुजरात जायंट्स के पास ₹1.25 करोड़, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास ₹1.15 करोड़, दिल्ली कैपिटल्स के पास ₹1.10 करोड़ और मुंबई इंडियंस के पास ₹90 लाख बचे हुए थे।

टीम नीलामी से पहले बचा बजट खाली स्लॉट
यूपी वॉरियर्स ₹3.75 करोड़ 8
गुजरात जायंट्स ₹1.25 करोड़ 3
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ₹1.15 करोड़ 5
दिल्ली कैपिटल्स ₹1.10 करोड़ 5
मुंबई इंडियंस ₹90 लाख 6

ये आंकड़े नीलामी शुरू होने से पहले के हैं। खिलाड़ियों को खरीदने के बाद टीमों के बचे हुए बजट और खाली स्लॉट में बदलाव होता रहता है। इसलिए इन्हें नीलामी के अंतिम आंकड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए।

मुंबई इंडियंस के पास सबसे कम बचा बजट था और विदेशी खिलाड़ियों के लिए कोई खाली स्लॉट नहीं था। इसके बावजूद टीम ने किरण नवगिरे के लिए बोली लगाई, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स ने अधिक कीमत देकर उन्हें खरीद लिया। यह उदाहरण दिखाता है कि नीलामी में केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं, बल्कि टीम के बजट और उपलब्ध स्थान भी निर्णय को प्रभावित करते हैं।

यूपी वॉरियर्स के पास सबसे ज्यादा पैसा होने के कारण उसे कई खिलाड़ियों के लिए विकल्प तलाशने का अवसर मिला। लेकिन टीम को आठ स्लॉट भरने थे, इसलिए उसे बजट को अलग-अलग भूमिकाओं में बांटकर खर्च करना जरूरी था। बड़े नामों पर अधिक बोली लगाने के साथ-साथ टीम को कम कीमत पर उपयोगी खिलाड़ी जोड़ने की रणनीति भी अपनानी पड़ती है।

WPL 2027 का सीजन कब शुरू होगा?

WPL 2027 का पांचवां सीजन 14 जनवरी से 7 फरवरी 2027 तक आयोजित होने वाला है। मिनी ऑक्शन में टीमों को अपनी बची हुई जगहें भरने और आगामी प्रतियोगिता के लिए स्क्वॉड तैयार करने का अवसर मिल रहा है।

ऑक्शन के बाद टीमों की रणनीति का अगला चरण अभ्यास, खिलाड़ियों की फिटनेस और प्लेइंग इलेवन का चयन होगा। किसी भी फ्रेंचाइजी के लिए मजबूत स्क्वॉड बनाना जरूरी है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन ही तय करेगा कि टीम खिताब की दौड़ में कितनी आगे जाती है।

टी20 क्रिकेट में मैच का परिणाम कई छोटे-छोटे पहलुओं पर निर्भर करता है। शुरुआती ओवरों में विकेट बचाना, मध्य ओवरों में रन गति बनाए रखना, अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाना और गेंदबाजी के दौरान विपक्षी टीम पर दबाव डालना बेहद जरूरी होता है। ऑलराउंडर खिलाड़ी इन अलग-अलग परिस्थितियों में टीम को विकल्प देते हैं।

यही वजह है कि सोफी मोलिन्यू जैसी ऑलराउंडर पर ₹1.10 करोड़ की बोली और किरण नवगिरे जैसी आक्रामक भारतीय बल्लेबाज को ₹75 लाख में खरीदना चर्चा में है। दोनों खिलाड़ियों से उनकी नई फ्रेंचाइजी को उम्मीदें होंगी, लेकिन असली परीक्षा टूर्नामेंट के दौरान होगी।

नीलामी के बाद किन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर?

WPL 2027 में कई खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी। सोफी मोलिन्यू को यूपी वॉरियर्स ने बड़ी बोली लगाकर खरीदा है। ऐसे में उनके प्रदर्शन, फिटनेस और टीम के साथ तालमेल पर विशेष ध्यान रहेगा। किरण नवगिरे के लिए दिल्ली कैपिटल्स में नई शुरुआत होगी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

ग्रेस हैरिस, स्नेह राणा और सुषमा वर्मा जैसे खिलाड़ियों के चयन से यूपी वॉरियर्स को अलग-अलग विभागों में विकल्प मिले हैं। गुजरात जायंट्स ने जी. कमालिनी और ओरला प्रेंडरगास्ट को जोड़कर अपनी टीम में नए विकल्प शामिल किए हैं। अब यह देखना होगा कि इन खिलाड़ियों को किस तरह की भूमिका मिलती है और वे अपनी फ्रेंचाइजी की जरूरतों पर कितना खरा उतरते हैं।

 

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